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		<title>सोशल इम्पैक्ट &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>सोशल इम्पैक्ट &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[छोटे शहर के एक आइडिया से एक संभावित स्टार्टअप तक: वाराणसी के छात्र ने भारत की डॉक्यूमेंट लिटरेसी की चुनौती को अपनाया]]></title>
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				<pubDate>Mon, 21 Sep 2026 12:11:55 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Abhinav Jaiswal]]></category>
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		<category><![CDATA[Startup]]></category>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर कोई व्यक्ति, जिसे कानूनी, वित्तीय या सरकारी दस्तावेज़ पढ़ने में मुश्किल होती है, उस पर हस्ताक्षर करने से पहले ही समझ सके कि उसमें क्या लिखा है? इसी सवाल ने युवा इनोवेटर अभिनव जायसवाल को एक ऐसी टेक्नोलॉजी-आधारित तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसका मकसद कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img width="1000" height="604" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/21120953/20260902_163218-copy-1000x604.jpg" alt="" class="wp-image-10653" /><figcaption class="wp-element-caption">अभिनव: “सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो में मैंने सीखा कि आपको प्रोटोटाइप को किसी कहानी से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।”</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर कोई व्यक्ति, जिसे कानूनी, वित्तीय या सरकारी दस्तावेज़ पढ़ने में मुश्किल होती है, उस पर हस्ताक्षर करने से पहले ही समझ सके कि उसमें क्या लिखा है?</p>



<p>इसी सवाल ने युवा इनोवेटर अभिनव जायसवाल को एक ऐसी टेक्नोलॉजी-आधारित तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसका मकसद कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना आसान बनाना था।</p>



<p>अभिनव, जो बलिया के छोटे से शहर में पले-बढ़े और अब वाराणसी में रहते हैं, के लिए एक रोज़मर्रा की समस्या से प्रेरित होकर शुरू हुआ यह विचार धीरे-धीरे कुछ बड़ा रूप ले रहा है।</p>



<p>उनके इस विचार ने उन्हें युवाओं के लिए सैमसंग के प्रमुख इनोवेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में जगह दिलाई है। यहाँ उन्हें मेंटरशिप और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे वे सोच पा रहे हैं कि शुरुआती स्तर के विचार को असल दुनिया के समाधान — और समय के साथ, एक बड़े पैमाने पर चलने वाले वेंचर — में कैसे बदला जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत की एक रोज़मर्रा की समस्या का समाधान</h2>



<p><br>अभिनव बचपन से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और STEM में रुचि रखते थे। लेकिन जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी के बारे में उनकी समझ बढ़ी, वैसे-वैसे अपने आस-पास की समस्याओं को हल करने के लिए इसके इस्तेमाल में उनकी दिलचस्पी भी बढ़ती गई।</p>



<p>ऐसी ही एक समस्या थी दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता (डॉक्यूमेंट लिटरेसी)।</p>



<p>कानूनी समझौते, वित्तीय दस्तावेज़ और सरकारी कागज़ात को समझना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे हैं। जटिल भाषा के कारण लोगों को किसी चीज़ पर हस्ताक्षर करने या सहमति देने से पहले जानकारी समझने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।</p>



<p>अभिनव ने सोचना शुरू किया कि क्या टेक्नोलॉजी ज़रूरी जानकारी को समझने में आसान बनाकर इस अंतर को कम करने में मदद कर सकती है।</p>



<p>यही सवाल ‘टीम ItzFOD’ की शुरुआत का कारण बना।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विचार को टेक्नोलॉजी से आगे ले जाना</h2>



<p><br>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ की टॉप 20 टीमों में चुने जाने से अभिनव को अपने विचार को शुरुआती टेक्नोलॉजी कॉन्सेप्ट से आगे ले जाने का मौका मिला।</p>



<p>SFT बूटकैंप में मेंटर्स और विशेषज्ञों के साथ बातचीत ने उन्हें कुछ अलग तरह के सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया: आखिर वे किसके लिए समस्या का समाधान कर रहे थे? लोग इस समाधान का इस्तेमाल कैसे करेंगे? असल दुनिया में यह कैसे काम का साबित होगा? और एक प्रोटोटाइप समस्या और उसके संभावित असर के बीच के संबंध को कैसे स्पष्ट रूप से दिखा सकता है?</p>



<p>अभिनव ने कहा, “मेरे विचार को प्रोटोटाइप पर मार्गदर्शन और मेंटरशिप की ज़रूरत थी।”</p>



<p>उनकी सबसे बड़ी सीखों में से एक यह थी कि प्रोटोटाइप को सिर्फ़ यह नहीं दिखाना चाहिए कि टेक्नोलॉजी क्या कर सकती है। उसे उस समस्या की कहानी भी बतानी चाहिए जिसे वह हल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने सीखा कि आपको कहानी को प्रोटोटाइप से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।”</p>



<p>जिनकी शुरुआती दिलचस्पी AI और मशीन लर्निंग में थी, उनके लिए यह एक बड़ा बदलाव था — सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के बारे में सोचने से हटकर उन लोगों के बारे में सोचना जो आखिरकार इसका इस्तेमाल करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">प्रोटोटाइप से संभावित वेंचर तक</h2>



<p><br>मेंटॉरिंग ने अभिनव को इस मौके के दायरे पर फिर से सोचने के लिए भी प्रेरित किया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “मेरा आइडिया बहुत बड़ा है। मुझे एहसास हुआ कि मैं कई समस्याओं को हल कर रहा हूँगा।”</p>



<p>उन्हें समझ आने लगा कि डॉक्यूमेंट लिटरेसी का मतलब सिर्फ़ मुश्किल शब्दों का अनुवाद करना या उन्हें आसान बनाना नहीं है। इसका मतलब जानकारी तक पहुँच और लोगों को यह बेहतर ढंग से समझने में मदद करना भी है कि उनसे किस बात के लिए सहमति मांगी जा रही है।</p>



<p>उनका प्रोटोटाइप लगातार बेहतर हो रहा है, लेकिन अभिनव का कहना है कि जिस तरह से वह इस आइडिया के बारे में सोचते हैं और इसे दूसरों तक पहुँचाते हैं, उसमें काफ़ी बदलाव आया है।</p>



<p>उन्होंने कहा, “हो सकता है कि प्रोटोटाइप में ज़्यादा बदलाव न आया हो, लेकिन मेरी पिचिंग बेहतर हुई है। मैंने मेंटॉर के सुझावों से बहुत कुछ सीखा है।”</p>



<p>यह बदलाव उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप की एक बुनियादी बात समझने में भी मदद कर रहा है: कोई आइडिया शायद ही कभी शुरू में ही एक तैयार प्रोडक्ट के तौर पर सामने आता है।</p>



<p>बड़े पैमाने पर काम करने लायक समाधान बनने से पहले, उस पर सवाल उठाए जाते हैं, उसे टेस्ट किया जाता है, समझाया जाता है, बेहतर बनाया जाता है और कभी-कभी नए सिरे से सोचा जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">छोटे शहर, बड़े आइडिया</h2>



<p><br>अभिनव का सफ़र ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ से उभर रही एक बड़ी कहानी को भी दिखाता है।</p>



<p>इस साल टॉप 20 टीमों में से आधी से ज़्यादा टीमें भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं, और फ़ाइनलिस्ट 12 राज्यों के 18 शहरों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके कई आइडिया उन समस्याओं पर आधारित हैं जिनका सामना उन्होंने अपने समुदायों में किया है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के ज़रिए, ये युवा इनोवेटर अपने आइडिया को और बेहतर बनाने के लिए मेंटॉरशिप, टेक्नोलॉजी की जानकारी और एक राष्ट्रीय मंच का लाभ उठा रहे हैं।</p>



<p>टॉप 20 फ़ाइनलिस्ट को सैमसंग और IIT दिल्ली के ‘फ़ाउंडेशन फ़ॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र’ (FITT) के एक्सपर्ट मेंटॉरिंग दे रहे हैं, ताकि वे अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बना सकें और प्रोग्राम के अगले चरण के लिए तैयारी कर सकें।</p>



<p>छोटे शहरों और कस्बों के युवा इनोवेटर्स के लिए, यह अनुभव एक अहम दूरी को पाटने में मदद कर सकता है — समस्या की पहचान करने और यह समझने के बीच की दूरी कि कैसे कोई आइडिया आखिरकार एक काम का समाधान या वेंचर बन सकता है।</p>



<p>अभिनव के लिए, इस अनुभव ने इनोवेशन को देखने के उनके नज़रिए को पहले ही बदल दिया है। उन्होंने कहा, “मुझे एक बात समझ आई — कोशिश करना ही सबसे ज़रूरी है। कोई भी आइडिया छोटा नहीं होता।”</p>



<p>बलिया में बड़े होने से लेकर वाराणसी में अपने आइडिया को विकसित करने और उसे एक राष्ट्रीय इनोवेशन प्लेटफ़ॉर्म तक ले जाने तक, अभिनव का सफ़र अभी शुरुआती दौर में ही है।</p>



<p>लेकिन असल बात भी यही है।</p>



<p>संभावित स्टार्टअप हमेशा स्थापित ये इनोवेशन हब या पूरी तरह तैयार बिज़नेस प्लान के साथ शुरू हो सकते हैं। कभी-कभी इनकी शुरुआत किसी छोटे शहर के युवा से होती है, जो ऐसी समस्या को देखता है जिसके साथ बाकी लोग जीने के आदी हो चुके हैं — और वह उसे हल करने की कोशिश करने का फ़ैसला करता है।</p>



<p>अभिनव और टीम ItzFOD के लिए, ‘Samsung Solve for Tomorrow’ उस शुरुआती कोशिश को और बेहतर बनाने में मदद कर रहा है: समस्या को और साफ़ तौर पर समझना, एक बेहतर होता प्रोटोटाइप और एक ऐसा आइडिया जिसमें आगे और बढ़ने की क्षमता हो।</p>
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																				</item>
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				<title><![CDATA[WATCH: टॉप 40 से टॉप 20 तक — टीम मॉर्फ़िज़्म का अगला पड़ाव]]></title>
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				<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 15:48:47 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Journey]]></category>
		<category><![CDATA[Morphism]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[रायपुर की युवा टीम ‘मॉर्फ़िज़्म’ का सफ़र जारी है; यह टीम अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल हो गई है। नेशनल टॉप 40 में जगह बनाने के बाद, अनन्या अग्रवाल और आदित्यसाई बालकृष्णगनंदम ने अपने टेक्नोलॉजी-बेस्ड आइडिया के साथ एक और कदम आगे बढ़ाया है। उनका यह आइडिया ऑटिज़्म […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>रायपुर की युवा टीम ‘मॉर्फ़िज़्म’ का सफ़र जारी है; यह टीम अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल हो गई है।</p>



<p>नेशनल टॉप 40 में जगह बनाने के बाद, अनन्या अग्रवाल और आदित्यसाई बालकृष्णगनंदम ने अपने टेक्नोलॉजी-बेस्ड आइडिया के साथ एक और कदम आगे बढ़ाया है। उनका यह आइडिया ऑटिज़्म और एलेक्सिथिमिया से जूझ रहे लोगों की भावनाओं को समझने के लिए एक ज़्यादा समावेशी तरीका खोजने पर केंद्रित है।</p>



<p>इस वीडियो में, ये युवा इनोवेटर्स टॉप 20 में जगह बनाने पर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं, अब तक के सफ़र के बारे में बता रहे हैं और अपने आइडिया को अगले चरण में ले जाने को लेकर अपनी उम्मीदें साझा कर रहे हैं।</p>



<p>टीम मॉर्फ़िज़्म को टॉप 20 में पहुँचने की अपनी उपलब्धि और ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो’ के साथ अपने सफ़र के बारे में बात करते हुए देखें।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/14154748/SFT-top-20-Team-morphism.mp4"></video></figure>
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				<title><![CDATA[36 युवा भारतीय इनोवेटर्स ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के साथ अपने आइडियाज़ को राष्ट्रीय मंच पर ले जा रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/36-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%88</link>
				<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:41:29 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के टॉप 20 फाइनलिस्ट की घोषणा की। यह प्रोग्राम टेक्नोलॉजी और एजुकेशन को मिलाकर युवाओं को क्रिएटिव सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स के साथ भविष्य के लीडर बनने में मदद करता है। एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ दुनिया भर के युवाओं […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/10151832/SFT-1-1000x560.jpg" alt="" class="wp-image-32855" /></figure></div>


<p>सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के टॉप 20 फाइनलिस्ट की घोषणा की। यह प्रोग्राम टेक्नोलॉजी और एजुकेशन को मिलाकर युवाओं को क्रिएटिव सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स के साथ भविष्य के लीडर बनने में मदद करता है।</p>



<p>एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले युवा अपने आस-पास की समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से उनके क्रिएटिव समाधान निकालते हैं।</p>



<p>अपने पांचवें एडिशन में, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ पूरे भारत से ऐसे युवा इनोवेटर्स को एक साथ ला रहा है जो अपने आस-पास की समस्याओं को टेक्नोलॉजी-बेस्ड समाधानों में बदल रहे हैं। टॉप 20 में शामिल आधे से ज़्यादा प्रतिभागी टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं और फाइनलिस्ट 12 राज्यों के 18 शहरों का प्रतिनिधित्व करते हैं – जो यह दिखाता है कि युवाओं के नेतृत्व वाला इनोवेशन भारत के पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट, एसपी चुन ने कहा, “इस साल के टॉप 20 की खास बात सिर्फ़ उनके द्वारा बनाई जा रही टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि वे समस्याएं भी हैं जिन्हें उन्होंने सुलझाने के लिए चुना है। पूरे भारत से युवा इनोवेटर अपने समुदायों की चुनौतियों – जैसे एक्सेसिबिलिटी और हेल्थकेयर से लेकर खेती, प्रदूषण और खेल – पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और सोच रहे हैं कि टेक्नोलॉजी कैसे बदलाव ला सकती है। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ उन्हें स्थानीय ज़रूरत पर आधारित किसी आइडिया को ऐसे समाधान में बदलने का मौका, मेंटरशिप और संसाधन देता है जिसमें बड़े पैमाने पर असर डालने की क्षमता हो।”</p>



<p>इस साल के फाइनलिस्ट के बीच एक खास ट्रेंड टेक्नोलॉजी को ज़्यादा उपयोगी और सुलभ बनाने पर फोकस करना है। चार थीम – ‘AI लिविंग फॉर इंडिया’, ‘एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी’, ‘हेल्थ एंड एजुकेशन’ और ‘स्पोर्ट एंड टेक’ – के तहत युवा इनोवेटर AI, कंप्यूटर विज़न, सेंसर, वॉयस टेक्नोलॉजी और कम कीमत वाले वियरेबल्स का इस्तेमाल कम साक्षरता और दिव्यांगों के लिए एक्सेस जैसी चुनौतियों से लेकर खेती के कचरे, प्रदूषण, न्यूरोलॉजिकल हेल्थ और पैरा-स्पोर्ट्स तक की समस्याओं को हल करने के लिए कर रहे हैं।</p>



<p>ऐसे लोगों के लिए कई समाधान डिज़ाइन किए जा रहे हैं जिनकी टेक्नोलॉजी तक पहुंच पारंपरिक रूप से सीमित रही है। इनमें शामिल हैं: कम साक्षरता वाले लोगों के लिए जटिल डॉक्यूमेंट्स को समझाने वाला एक ऑफ़लाइन AI एप्लीकेशन, रियल-टाइम इंडियन साइन लैंग्वेज ट्रांसलेशन, दृष्टिबाधित छात्रों के लिए वॉयस-फर्स्ट लर्निंग साथी, ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों में सेंसरी मेल्टडाउन का पहले से पता लगाने वाली टेक्नोलॉजी, और दृष्टिबाधित तैराकों को ज़्यादा आज़ादी से ट्रेनिंग करने में मदद करने वाली असिस्टिव टेक्नोलॉजी। दूसरे फाइनलिस्ट ऐसे आइडियाज़ के ज़रिए पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनका मकसद खेती से बचे कचरे को साफ़ ऊर्जा और काम के कार्बन मटीरियल में बदलना, टेक्सटाइल वेस्ट और कंस्ट्रक्शन साइट पर होने वाले प्रदूषण को कम करना और इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करना है।</p>



<p>टॉप 20 में शामिल लोगों की भौगोलिक स्थिति इनोवेशन के बढ़ते दायरे को दिखाती है। फाइनलिस्ट ओडिशा के सुंदरगढ़; आंध्र प्रदेश के चित्तूर और विशाखापत्तनम; उत्तर प्रदेश के रायबरेली और वाराणसी; पंजाब के अमृतसर और एसएएस नगर; हरियाणा के सोनीपत और छत्तीसगढ़ के रायपुर के साथ-साथ बेंगलुरु, चेन्नई, कोयंबटूर, नई दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई से आए हैं।</p>



<p>टॉप 20 टीमें सेमी-फ़ाइनल राउंड से चुनी गईं, जिसमें 40 टीमों ने FITT-IIT दिल्ली के साथ मिलकर एक प्रैक्टिकल प्रोटोटाइपिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इनोवेशन बूटकैंप के ज़रिए, टीमों ने मेंटर्स के साथ मिलकर अपने समाधानों को बेहतर बनाया, जिन लोगों के लिए वे डिज़ाइन बना रही थीं उन्हें बेहतर ढंग से समझा और इनोवेशन प्रोसेस का प्रैक्टिकल अनुभव हासिल किया।</p>



<p>बूटकैंप के हिस्से के तौर पर, टीमों ने सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली (SDD), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – नोएडा (SRI-N), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – दिल्ली (SRI-D), सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – बेंगलुरु (SRI-B) और गुरुग्राम में सैमसंग के हेड ऑफिस का दौरा भी किया, जिससे उन्हें डिज़ाइन, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के प्रति सैमसंग के नज़रिए को समझने का मौका मिला।</p>



<p>इस सफ़र का समापन एक नेशनल पिच इवेंट के साथ हुआ, जहाँ सैमसंग R&D और सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के मेंटर्स समेत 20 एक्सपर्ट्स ने टीमों का मूल्यांकन किया और चार थीम में से हर एक से पाँच फाइनलिस्ट चुने।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टॉप 20 से मिलिए<br><br>भारत के लिए AI लिविंग</h2>



<p><strong>4 Percentage – कोयंबटूर, तमिलनाडु:</strong> MicroLearning AI, एक वॉइस-फर्स्ट मल्टीलिंगुअल (कई भाषाओं वाला) प्लेटफ़ॉर्म जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं की मुश्किल जानकारी को भारतीय भाषाओं में आसान बोलचाल वाले छोटे-छोटे लेसन (माइक्रो-लेसन) में बदलता है।</p>



<p>itzFOD – वाराणसी, उत्तर प्रदेश: VaakSetu, एक ऑफ़लाइन मोबाइल ऐप जो AI का इस्तेमाल करके लोन के कागज़ात, ज़मीन के दस्तावेज़, FIR और हॉस्पिटल के फ़ॉर्म जैसे डॉक्यूमेंट्स को पढ़ता है और उन्हें आसान बोलचाल की भाषा में समझाता है।</p>



<p>JARVISS – चेन्नई, तमिलनाडु: SafePath AI, एक स्मार्टफ़ोन और IoT-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर खतरों का पता लगाता है, उनकी गंभीरता को समझता है और सुरक्षित रास्ते का सुझाव देता है।</p>



<p>QuantHunt – रायबरेली, उत्तर प्रदेश: एक AI-बेस्ड साइबरसिक्योरिटी सॉल्यूशन जिसे एन्क्रिप्शन की कमियों का पता लगाने और ऑर्गनाइज़ेशन को उभरते हुए क्वांटम-कंप्यूटिंग खतरों के लिए अपने डिजिटल सिस्टम तैयार करने में मदद करने के लिए बनाया गया है।</p>



<p>SignBridge AI – कोलकाता, पश्चिम बंगाल: एक AI-पावर्ड प्लेटफ़ॉर्म जो भारतीय साइन लैंग्वेज को रियल-टाइम में टेक्स्ट और स्पीच में बदलता है, जिससे स्कूलों, अस्पतालों, वर्कप्लेस और सार्वजनिक जगहों पर बातचीत बेहतर होती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी </h2>



<p><strong>AeroShield – नई दिल्ली:</strong> कंस्ट्रक्शन के मलबे को रोकने वाली कम लागत वाली जाली (नेट), जिसे मौजूदा मचान (scaffolding) के साथ जोड़कर हवा में मौजूद प्रदूषकों को पकड़ने और खत्म करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p><strong>AgriVolt – अमृतसर, पंजाब:</strong> AgriVolt Carbon AI, जिसका मकसद खेती से बचे कचरे का इस्तेमाल करके बिजली बनाना और बायोचार व अन्य कार्बन-युक्त मटीरियल हासिल करना है, साथ ही उत्सर्जन (emissions) को कम करना है।</p>



<p><strong>IndieJeanous – मुंबई, महाराष्ट्र:</strong> एक सर्कुलर डेनिम पहल जो बेकार डेनिम और कपड़ों के टुकड़ों को लाइफ़स्टाइल प्रोडक्ट्स में बदलती है और साथ ही महिला कारीगरों के लिए रोज़गार के मौके बनाती है।</p>



<p>InnoBotix – नई दिल्ली: Sentinel, एक सोलर-पावर्ड AI एज डिवाइस जो कैमरों, रडार और सिस्मिक डेटा का इस्तेमाल करके इंसानी बस्तियों के पास आने वाले जंगली जानवरों का पता लगाता है और पहले से चेतावनी देता है।</p>



<p>KINVA BIO – सोनीपत, हरियाणा: एक AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म जो बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) से प्रोटीन-युक्त माइकोप्रोटीन के प्रोडक्शन को बेहतर बनाने की कोशिश करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हेल्थ और एजुकेशन</h2>



<p><br><strong>404NotFound – बेंगलुरु, कर्नाटक:</strong> StepSense, एक सेंसर और एज-AI सिस्टम जो जूते-चप्पल को चाल-ढाल पर नज़र रखने वाले प्लेटफ़ॉर्म में बदल देता है, ताकि गिरने के जोखिम, न्यूरोपैथी, थकान और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याओं के संकेतों का पता लगाया जा सके।</p>



<p><strong>Equinox – नई दिल्ली:</strong> SARA AI, एक वॉइस-फर्स्ट स्टडी साथी जो दृष्टिबाधित छात्रों को स्क्रीन या कीबोर्ड पर निर्भर हुए बिना टेक्स्टबुक, स्पष्टीकरण, क्विज़ और पर्सनलाइज़्ड लर्निंग सपोर्ट का इस्तेमाल करने में मदद करता है। </p>



<p><strong>morphism – रायपुर, छत्तीसगढ़: </strong>एक AI सिस्टम जिसे ऑटिस्टिक लोगों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए बनाया गया है। यह चेहरे के बारीक हाव-भाव और व्यवहार से जुड़े अन्य संकेतों का विश्लेषण करता है।</p>



<p><strong>NeuroTrace – SAS नगर, पंजाब:</strong> स्ट्रोक के बाद निगरानी के लिए स्मार्टफोन-आधारित AI समाधान। यह आवाज़, चेहरे की हलचल और प्रतिक्रिया के समय में बदलाव का विश्लेषण करके संभावित न्यूरोलॉजिकल गिरावट की पहचान करता है।</p>



<p><strong>VB SenseGuard – नई दिल्ली:</strong> Sense Guard, एक कम लागत वाला AI पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल) है। इसे ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर वाले बच्चों में सेंसरी मेल्टडाउन (संवेदी अति-उत्तेजना) से जुड़े शारीरिक पैटर्न की पहचान करने और देखभाल करने वालों को समय पर अलर्ट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">स्पोर्ट और टेक</h2>



<p><strong>Code Blooded – सुंदरगढ़, ओडिशा</strong>: ParaSync, एक AI-संचालित प्लेटफ़ॉर्म जो पैरा-एथलीटों के स्मार्टफोन वीडियो का विश्लेषण करता है। यह खेल की तकनीक का आकलन करता है, प्रगति को ट्रैक करता है और कम सुविधा वाले क्षेत्रों की प्रतिभाओं को स्काउट्स से जोड़ने में मदद करता है।</p>



<p>पैरा-एथलीट स्विमिंग सॉल्यूशन – विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश: एक पहनने योग्य नेविगेशन सिस्टम जो पता लगाता है कि कब दृष्टिबाधित तैराक अपनी तय दिशा से भटक रहे हैं और उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए हैप्टिक संकेत (स्पर्श-आधारित संकेत) देता है।</p>



<p><strong>Rogue – चेन्नई, तमिलनाडु:</strong> NeuroStride, एक AI-संचालित पहनने योग्य डिवाइस जो पार्किंसंस के कारण होने वाली अनैच्छिक कंपकंपी (tremors) और जानबूझकर की गई मांसपेशियों की हलचल के बीच अंतर करने और लक्षित इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन प्रदान करने का प्रयास करता है।</p>



<p><strong>Somatrace – हैदराबाद, तेलंगाना:</strong> एक पहनने योग्य IoT ट्रेनिंग टूल जो ट्रेनिंग के दौरान रीढ़ की हड्डी के कोण और भार को मापता है। यह सटीक खेल (precision-sport) वाले एथलीटों और कोचों को चोट के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।</p>



<p><strong>Untethered – चित्तूर, आंध्र प्रदेश: </strong>स्मार्ट स्विमिंग गॉगल्स जो अल्ट्रासोनिक सेंसिंग और हैप्टिक फीडबैक का उपयोग करके दृष्टिबाधित तैराकों को पूल की दीवार के पास पहुंचने पर चेतावनी देते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">समाधानों को अगले चरण तक ले जाना</h2>



<p>टॉप 20 फाइनलिस्ट को अब सैमसंग के विशेषज्ञों और FITT-IIT दिल्ली से लगातार मेंटरशिप मिलेगी, क्योंकि वे 14 और 15 अक्टूबर को होने वाले ग्रैंड फिनाले की तैयारी कर रहे हैं।</p>



<p>ग्रैंड फिनाले में अंतिम पिच प्रेजेंटेशन होंगे, जिसके बाद सभी टॉप 20 टीमों के लिए एक इन्वेस्टर मीट होगी। यह बातचीत युवा इनोवेटर्स को स्टार्टअप और निवेश इकोसिस्टम से जुड़ने और अपने समाधानों को और विकसित करने के अगले चरणों को समझने का अवसर देगी।</p>



<p>इस प्रतियोगिता का समापन विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार समारोह के साथ होगा। टॉप 20 टीमों को प्रोटोटाइप बनाने के लिए कुल मिलाकर 20 लाख रुपये की ग्रांट मिलेगी, जिसमें हर टीम को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। टॉप 20 में शामिल सभी 36 प्रतिभागियों को सैमसंग का लेटेस्ट गैलेक्सी Z फ्लिप स्मार्टफोन भी मिलेगा। चार विजेता टीमों को – हर थीम से एक – सैमसंग की ओर से FITT-IIT दिल्ली के ज़रिए कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगी। यह इनक्यूबेशन सपोर्ट विजेता टीमों को अपने सॉल्यूशन को और बेहतर बनाने और उन्हें परखने में मदद करेगा, साथ ही उन्हें मार्केट के लिए तैयार वेंचर में बदलने की संभावनाओं को भी तलाशेगा।</p>



<p>इस प्रोग्राम में ग्रैंड फिनाले के दौरान खास पुरस्कारों के ज़रिए प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा, जिसमें 50,000 रुपये का ‘डिजिटल इम्पैक्ट अवॉर्ड’ और 1-1 लाख रुपये के दो ‘कम्युनिटी चॉइस अवॉर्ड’ शामिल हैं।</p>



<p>अपने ग्लोबल CSR विज़न “टुगेदर फॉर टुमॉरो! इनेबलिंग पीपल” (आने वाले कल के लिए साथ मिलकर! लोगों को सक्षम बनाना) से प्रेरित होकर, सैमसंग इंडिया स्मार्ट एजुकेशन और युवाओं को स्किल सिखाने पर ध्यान देते हुए युवा भारतीयों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके ज़रिए वह बेहतर भविष्य बनाने के लिए ज़रूरी ज्ञान, स्किल और संसाधनों तक समान पहुँच उपलब्ध कराता है।</p>



<p>टॉप 20 फाइनलिस्ट की पूरी लिस्ट<a href="https://www.samsung.com/in/solvefortomorrow/?srsltid=AfmBOoqweJwhgD_8sR55mebhte2iei59hQhjujf8nXvSLYQEVwujeMHO"> यहाँ </a>देखें।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[अपने क्लासमेट्स को संघर्ष करते देख, दिल्ली के इस 15 साल के बच्चे ने ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के लिए एक AI वियरेबल बनाया]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d</link>
				<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 19:45:09 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/09190705/fea.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 40]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4yy2qtz</guid>
									<description><![CDATA[लगभग एक साल पहले, विदित भयाना की क्लास में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम वाले दो बच्चों को अचानक बहुत ज़्यादा परेशानी या बेचैनी (आउटबर्स्ट) महसूस हुई। क्लास के बाकी बच्चों को समझ नहीं आया कि क्या करें। विदित इस बारे में लगातार सोचते रहे। क्या होता अगर टीचर को पता चल जाता कि बच्चा बहुत ज़्यादा परेशान […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/04130648/20260824_161734-1000x577.jpg" alt="" class="wp-image-32713" /><figcaption class="wp-element-caption">विदित का सॉल्यूशन इस तरह से बनाया गया है कि यह किसी संभावित ‘मेल्टडाउन’ (अचानक भावनात्मक या व्यवहार संबंधी संकट) से 25 मिनट पहले ही देखभाल करने वाले के स्मार्टफ़ोन पर अलर्ट भेज देता है, जिससे टीचर, माता-पिता या देखभाल करने वाले को स्थिति को संभालने का समय मिल जाता है।</figcaption></figure>



<p>लगभग एक साल पहले, विदित भयाना की क्लास में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम वाले दो बच्चों को अचानक बहुत ज़्यादा परेशानी या बेचैनी (आउटबर्स्ट) महसूस हुई। क्लास के बाकी बच्चों को समझ नहीं आया कि क्या करें।</p>



<p>विदित इस बारे में लगातार सोचते रहे।</p>



<p>क्या होता अगर टीचर को पता चल जाता कि बच्चा बहुत ज़्यादा परेशान हो रहा है? क्या होता अगर स्थिति को संभालने, उसे शांत करने और बच्चे को क्लास का हिस्सा बनाए रखने के लिए काफ़ी समय मिल जाता?</p>



<p>इन्हीं सवालों ने विदित को ‘VB Senacquard’ बनाने के लिए प्रेरित किया। यह कम कीमत वाला, AI-पावर्ड पहनने योग्य डिवाइस (वियरेबल) है, जिसे ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) वाले बच्चों में सेंसरी मेल्टडाउन (अत्यधिक संवेदी तनाव या बेचैनी) होने से पहले ही उसका पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>विदित अब सैमसंग के प्रमुख CSR प्रोग्राम ‘Samsung Solve for Tomorrow’ के टॉप 40 युवा इनोवेटर्स में शामिल हैं। यह प्रोग्राम युवाओं को अपने आस-पास की समस्याओं को ऐसे समाधानों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिनसे समाज पर सार्थक प्रभाव पड़ सके।</p>



<figure class="wp-block-image"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/04130651/20260824_162609-1000x562.jpg" alt="" class="wp-image-32715" /><figcaption class="wp-element-caption">विदित का सफ़र ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) की एक आम सोच को दिखाता है: जब कोई चीज़ काम न करे, तो उसे बस मान न लें—बल्कि उसे नए सिरे से डिज़ाइन करें।</figcaption></figure>



<h2 class="wp-block-heading">वीबी सेनाकवार्ड चेतावनी संकेतों को पहचानने के लिए व्यक्तिगत एआई का उपयोग करते हैं।</h2>



<p>ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के लिए, संवेदी अतिभार असहनीय हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप कभी-कभी भावनात्मक विस्फोट हो सकता है। इन घटनाओं को अक्सर शुरू होने के बाद ही पहचाना जाता है।</p>



<p>विदित का प्रोटोटाइप इसे बदलने का लक्ष्य रखता है।</p>



<p>पिछले एक साल में विकसित, यह पहनने योग्य उपकरण हृदय गति, त्वचा चालकता, त्वचा का तापमान और गतिविधि को ट्रैक करने के लिए बायो सेंसर का उपयोग करता है। एक व्यक्तिगत मशीन-लर्निंग मॉडल प्रत्येक बच्चे के व्यक्तिगत आधारभूत स्तर को सीखता है और उन शारीरिक परिवर्तनों की तलाश करता है जो संभावित भावनात्मक विस्फोट का संकेत दे सकते हैं।</p>



<p>यह प्रणाली संभावित भावनात्मक विस्फोट से 25 मिनट पहले देखभालकर्ता के स्मार्टफोन पर अलर्ट भेजने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे शिक्षक, माता-पिता या देखभालकर्ता को हस्तक्षेप करने का समय मिल सके।</p>



<figure class="wp-block-image"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/04130654/20260824_163256.jpg" alt="" class="wp-image-32716" /><figcaption class="wp-element-caption">विदित की सहानुभूति उनके इनोवेशन का आधार बनी।</figcaption></figure>



<p>किसी बच्चे को शांत जगह पर ले जाया जा सकता है, उसे शांत करने के जाने-पहचाने तरीकों से मदद दी जा सकती है, या परेशानी बढ़ने से पहले ही उसे ज़रूरी ध्यान दिया जा सकता है।</p>



<p>विदित का मकसद बच्चे को बदलना नहीं है ताकि वह क्लासरूम में फिट हो सके।</p>



<p>मकसद यह है कि उनके आस-पास के लोग कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, इसे बदला जाए।</p>



<p>विदित ने कहा, “इससे बच्चे को घुलने-मिलने में मदद मिलती है, और साथ ही सीखने में भी।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">अपने अनुभव से उन्हें यह समझ आया कि किसी के द्वारा समझा जाना कितनी बड़ी बात होती है</h2>



<p>विदित दिल्ली में बड़े हुए और उन्हें ADHD (अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) होने का पता चला। उनके अनुभव ने उन्हें सिखाया कि जब कोई व्यक्ति दुनिया को अलग नज़रिए से देखता है, तो मददगार देखभाल करने वाले कितने ज़रूरी हो सकते हैं।</p>



<p>इसी समझ ने उनके क्लासमेट्स के अनुभव को देखने के उनके नज़रिए को आकार दिया।</p>



<p>उनके गुस्से या परेशानी वाले व्यवहार को सिर्फ़ गड़बड़ी के तौर पर देखने के बजाय, उन्होंने सोचा कि ऐसा होने से पहले क्या किया जा सकता है।</p>



<p>यही सहानुभूति उनके इनोवेशन का आधार बनी।</p>



<p>अब, विदित चाहते हैं कि VB Senacquard आगे चलकर ₹10 के सिक्के के आकार का एक छोटा सा पहनने योग्य डिवाइस बन जाए—इतना छोटा कि बच्चे की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से इस्तेमाल हो सके और किसी को पता भी न चले। अगले चरण में, अनुमान की सटीकता को और बेहतर बनाने के लिए इसमें इन-ईयर EEG बायोमार्कर शामिल किए जा सकते हैं।</p>



<p>विदित के लिए, टेक्नोलॉजी से ज़्यादा ज़रूरी है इंसानी नतीजा।</p>



<p>वह चाहते हैं कि बच्चा क्लास में बना रहे, सीखता रहे और अपने साथियों के साथ बिना अलग-थलग महसूस किए हिस्सा ले सके।</p>



<p>उनका सफ़र Gen Z की एक आम सोच को दिखाता है: जब कोई चीज़ काम न करे, तो उसे बस स्वीकार न करें—उसे नए सिरे से डिज़ाइन करें।</p>



<p>विदित ने एक ऐसे पल से शुरुआत की जिसे शायद दूसरे लोग भूल गए होते।</p>



<p>उन्होंने यह पूछने का फ़ैसला किया कि ऐसा क्यों हुआ। फिर उन्होंने एक बेहतर जवाब खोजने में एक साल बिताया।</p>



<p>15 साल की उम्र में, उनका मकसद सिर्फ़ एक डिवाइस बनाना नहीं है। वह ऐसे क्लासरूम बनाने में मदद करना चाहते हैं जहाँ बच्चों को अपनी अलग पहचान या खासियत को छिपाने या दबाने की ज़रूरत न पड़े।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[जब केरल में बाढ़ आई थी, तब वह नौ साल का था। अब 17 साल की उम्र में, वह अगली बाढ़ को रोकने के लिए AI टेक्नोलॉजी बना रहा है।]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%b9</link>
				<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 19:12:55 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 40]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/3SQ2YM8</guid>
									<description><![CDATA[कुछ यादें समय के साथ धुंधली हो जाती हैं। लेकिन 17 साल के नोवेन शिबू के लिए, 2018 में केरल में आई भयानक बाढ़ के दौरान बढ़ते पानी की याद कभी नहीं मिट पाई। तब वह सिर्फ़ नौ साल के थे, लेकिन त्रिशूर में उनके घर के पास स्थित शहर चालाकुडी के आस-पास बाढ़ के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/01125722/Thrissur-1.jpg" alt="" class="wp-image-32678" /><figcaption class="wp-element-caption">जाने-पहचाने इलाके को बाढ़ के पानी में डूबते हुए देखने वाले नौ साल के बच्चे से लेकर AI-बेस्ड डैम-मैनेजमेंट प्रोटोटाइप बनाने वाले 17 साल के युवा तक, नोवेन का सफ़र यह याद दिलाता है कि इनोवेशन की शुरुआत हमेशा किसी हाई-टेक लैब से ही नहीं होती।</figcaption></figure>



<p>कुछ यादें समय के साथ धुंधली हो जाती हैं। लेकिन 17 साल के नोवेन शिबू के लिए, 2018 में केरल में आई भयानक बाढ़ के दौरान बढ़ते पानी की याद कभी नहीं मिट पाई।</p>



<p>तब वह सिर्फ़ नौ साल के थे, लेकिन त्रिशूर में उनके घर के पास स्थित शहर चालाकुडी के आस-पास बाढ़ के दृश्य उनके ज़हन में बस गए। सालों बाद, उन यादों को एक अनोखा रूप मिला है – किसी किताब या क्लासरूम प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं, बल्कि देश के सबसे जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम में से एक को स्मार्ट बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए एक वर्किंग प्रोटोटाइप के तौर पर।</p>



<p>नोवेन के आइडिया, ‘अकॉस्टीनोड सिस्टम्स’ (AcoustiNode Systems) ने उन्हें ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के टॉप 40 उम्मीदवारों में जगह दिलाई है। यह एक CSR प्रोग्राम है जो तेज़ी से उन युवा इनोवेटर्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिनके आइडिया भारत के पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से कहीं दूर से सामने आते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2026/09/01125726/Thrissur-2.jpg" alt="" class="wp-image-32680" /><figcaption class="wp-element-caption">“मैं कई बार नाकाम रहा हूँ, लेकिन मैंने फिर से शुरुआत करने का सोचा क्योंकि मुश्किल में फँसे लोगों की मदद करने का ख्याल मुझे प्रेरित करता रहा।”</figcaption></figure>



<p>इस टीनएजर के लिए सफ़र एक आसान से सवाल से शुरू हुआ: क्या टेक्नोलॉजी उस तबाही को रोकने में मदद कर सकती है जिसे उसने बचपन में देखा था?</p>



<p>उसने कहा, “मैं अखबार में बाढ़ और बांधों के बारे में बहुत सी खबरें पढ़ता था। मैंने सोचा कि मैं एक ऐसा समाधान बना सकता हूं जो बड़े पैमाने पर बांध प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं को हल कर सके।”</p>



<p>इसका जवाब एक प्रस्तावित AI-पावर्ड एज नेटवर्क है जो मुश्किल हालात में भी बांधों के प्रबंधन में मदद करने के लिए मज़बूत VHF रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करता है। यह सिस्टम दो अहम फैसलों में मदद करने के लिए अपस्ट्रीम पानी के बहाव और ज्वार के उल्टे बहाव का विश्लेषण करता है: कब बड़ी बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए पहले से पानी छोड़ने की ज़रूरत है, और कब कीमती पानी बचाने के लिए गैर-ज़रूरी पानी छोड़ने से बचा जा सकता है।</p>



<p>नोवेन का मानना ​​है कि इसका संभावित असर सिर्फ़ बांध तक ही सीमित नहीं है। पानी छोड़ने के बेहतर फैसलों से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और इकोसिस्टम की सुरक्षा में मदद मिल सकती है, सिंचाई की सुरक्षा बेहतर हो सकती है, पनबिजली उत्पादन को अधिकतम किया जा सकता है और बाढ़ व खराब जलाशय प्रबंधन से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है।</p>



<p>लेकिन इस टेक्नोलॉजी के पीछे एक ऐसा युवा है जो खुद को बस एक जिज्ञासु व्यक्ति बताता है।</p>



<p>नोवेन ने कहा, “बचपन से ही मुझे सवाल पूछना पसंद था, और मेरे पिता को उनके जवाब देना पसंद था।” “मैंने उनके सहयोग से यह आदत विकसित की, जहां मैं सवाल पूछ सकता था और उनसे समाधान पा सकता था।”</p>



<p>वही जिज्ञासा आखिरकार उसे रोबोटिक्स और एडवांस्ड AI सिस्टम की ओर ले गई। कागज़ पर किसी विचार तक सीमित रहने के बजाय, नोवेन कुछ ठोस बनाना चाहता था।</p>



<p>उसने कहा, “मैं ऐसे असली मॉडल बनाना चाहता हूं जो काम करने लायक और कुशल हों।”</p>



<p>हालांकि, एक काम करने वाले प्रोटोटाइप तक का सफ़र आसान नहीं था। कई मॉडल फेल हुए, बार-बार प्रयोग किए गए और ऐसे पल भी आए जब दोबारा शुरू करने के बजाय हार मान लेना आसान लगता था।</p>



<p>वह याद करते हुए कहते हैं, “मैं अपने मॉडलों पर कई बार फेल हुआ हूं और ऐसे दिन भी आए जब मेरा इस पर दोबारा काम करने का मन नहीं करता था।” “लेकिन अगले ही दिन मेरा फिर से शुरू करने का मन करता था।”</p>



<p>जो चीज़ उसे वापस ले आई, वह उन लोगों के बारे में सोचना था जिन्हें एक दिन उसके बनाए सिस्टम से फायदा हो सकता था।</p>



<p>उसने कहा, “मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने की सोच ने मुझे प्रेरित रखा।”</p>



<p>नोवेन की कहानी एक बड़े बदलाव को भी दिखाती है जिसे ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ मुमकिन बना रहा है। इनोवेशन को अक्सर बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं, बेहतरीन संस्थानों और स्थापित टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम से जोड़ा जाता है। लेकिन भारत की कुछ सबसे मुश्किल समस्याओं को हल करने वाले आइडिया बहुत छोटे शहरों और समुदायों से भी आ सकते हैं, जो गहरे तौर पर स्थानीय अनुभवों से बने होते हैं।</p>



<p>बाढ़ के पानी को जानी-पहचानी जगह को डुबोते हुए देखने वाले नौ साल के बच्चे से लेकर AI-इनेबल्ड डैम-मैनेजमेंट प्रोटोटाइप बनाने वाले 17 साल के युवा तक, नोवेन का सफ़र यह याद दिलाता है कि इनोवेशन हमेशा किसी हाई-टेक लैब से ही शुरू नहीं होता। कभी-कभी, यह एक सवाल, एक याद और कोशिश करते रहने के पक्के इरादे से शुरू होता है।</p>



<p>और शायद ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ जैसे प्लेटफ़ॉर्म का सबसे बड़ा वादा यही है: ऐसे सवालों को ढूँढना जहाँ भी वे पूछे जा रहे हों—और उन्हें पूछने वाले युवाओं को यह मौका देना कि वे अपनी बात पूरे भारत को सुना सकें।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[वह लड़की जो हर कंस्ट्रक्शन साइट पर साफ़ हवा को एक अधिकार बनाना चाहती है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6</link>
				<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:05:33 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Aarna Gupta]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[जब आरना गुप्ता साउथ दिल्ली में बड़ी हो रही थीं, तो प्रदूषण एक ऐसी चीज़ थी जिसे वह देख सकती थीं, सुन सकती थीं और कभी-कभी उससे बचने की कोशिश भी करती थीं। लेकिन जब उनके दादाजी के फेफड़ों में निशान पड़ गए तो यह उनके लिए कहीं ज़्यादा पर्सनल हो गया। COVID-19 महामारी के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img width="1024" height="588" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/31124729/Delhi-1024x588.jpg" alt="" class="wp-image-10534" /><figcaption class="wp-element-caption">आर्ना गुप्ता ने कंस्ट्रक्शन साइट्स को अपना खेल का मैदान बना लिया है, ताकि कंस्ट्रक्शन से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके</figcaption></figure></div>


<p>जब आरना गुप्ता साउथ दिल्ली में बड़ी हो रही थीं, तो प्रदूषण एक ऐसी चीज़ थी जिसे वह देख सकती थीं, सुन सकती थीं और कभी-कभी उससे बचने की कोशिश भी करती थीं। लेकिन जब उनके दादाजी के फेफड़ों में निशान पड़ गए तो यह उनके लिए कहीं ज़्यादा पर्सनल हो गया।</p>



<p>COVID-19 महामारी के दौरान, जब उनके परिवार को बार-बार हॉस्पिटल जाना पड़ा, तो आरना ने पर्यावरण में असमानता को अलग तरह से देखना शुरू किया। उन्हें एहसास हुआ कि प्रदूषित हवा का बोझ सभी पर बराबर नहीं पड़ता—और लाखों लोगों के लिए, नुकसानदायक हवा के संपर्क में आना ऐसी चीज़ नहीं है जिससे वे आसानी से बच सकें।</p>



<p>यह एहसास आखिरकार उन्हें अपने आस-पड़ोस से आगे ले गया।</p>



<p>आरना ने कंस्ट्रक्शन साइट्स को देखने और उनके आस-पास रहने वाले मज़दूरों और बच्चों से बात करने में समय बिताना शुरू किया। जो चीज़ उनके साथ बनी रही, वह थी रोज़ाना का संपर्क: मज़दूर लंबे समय तक धूल और मलबे से घिरे रहते थे, अक्सर बिना मास्क या सही सुरक्षा के, जबकि कंस्ट्रक्शन साइट्स के आस-पास रहने वाले बच्चे उसी हवा में सांस ले रहे थे।</p>



<p>उन्होंने एक और नतीजा भी देखा जो कंस्ट्रक्शन प्रदूषण के बारे में बातचीत में बहुत कम आता है: हेल्थ प्रॉब्लम की वजह से बच्चों का स्कूल छोड़ना।</p>



<p>आरना कहती हैं, “मेरे लिए, यह समझना ज़रूरी हो गया कि पर्यावरण में असमानता उन लोगों पर कैसे असर डालती है जो हर दिन बाहर रहते हैं।”</p>



<p>सिर्फ़ 17 साल की उम्र में, इसी सवाल ने उन्हें एरोशील्ड तक पहुँचाया, जो एक प्रोटोटाइप है जिसे कंस्ट्रक्शन साइट की सबसे जानी-पहचानी खासियतों में से एक—स्कैफोल्ड नेट—को हवा में मौजूद पॉल्यूटेंट्स से बचाने के लिए एक एक्टिव लेयर में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>इस आइडिया ने आरना को सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के टॉप 40 में भी पहुँचाया है, जो सैमसंग का फ्लैगशिप CSR प्रोग्राम है। यह प्रोग्राम युवा इनोवेटर्स को मेंटरशिप, रिसोर्स और इनोवेशन इकोसिस्टम तक पहुँच के ज़रिए असल दुनिया की समस्याओं का सॉल्यूशन बनाने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म देता है। आरना के लिए, यह प्रोग्राम एरोशील्ड को एक आइडिया से आगे ले जाने और इसे बड़े पैमाने पर काम करने लायक बनाने की दिशा में काम करने का एक मौका है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1024" height="576" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/31124718/Delhi-Image-Two-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-10532" /><figcaption class="wp-element-caption">आरना का बड़ा लक्ष्य यह देखना है कि कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की सुरक्षा एक बड़े रेगुलेटरी बदलाव का हिस्सा बने</figcaption></figure>



<h2 class="wp-block-heading">एक स्कैफोल्ड नेट जो मलबा रोकने से कहीं ज़्यादा काम करता है</h2>



<p>कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी से शहरी एमिशन में लगभग 30% हिस्सा आता है और इससे बड़ी मात्रा में हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर पैदा होते हैं। धूल को कंट्रोल करने के पारंपरिक तरीके टेम्पररी, ज़्यादा रिसोर्स वाले और एक्टिव कंस्ट्रक्शन साइट्स की मुश्किल स्थितियों में बनाए रखने में मुश्किल हो सकते हैं।</p>



<p>एरोशील्ड एक अलग तरीका अपनाता है।</p>



<p>सिर्फ़ कचरा रोकने के बजाय, प्रस्तावित कम लागत वाला नेट पॉल्यूटेंट्स को पकड़ने और उन्हें कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ग्राफ्ट कोपॉलीमराइज़ेशन से सिंथेसाइज़ किया गया स्टार्च-बेस्ड सुपरएब्जॉर्बेंट पॉलीमर (SAP) कैपिलरी एब्जॉर्प्शन और इलेक्ट्रोस्टैटिक फोर्स के ज़रिए हवा में मौजूद पार्टिकल्स को फंसाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>पकड़े गए पॉल्यूटेंट्स को फिर ऑक्सीजन की कमी के साथ इंजीनियर किए गए फोटोकैटलिटिक मटीरियल का इस्तेमाल करके डिग्रेडेशन के लिए टारगेट किया जाता है। सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर, ये मटीरियल रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) बनाते हैं, जो फंसे हुए पॉल्यूटेंट्स को तोड़ने का रास्ता बनाते हैं और कुछ ग्रीनहाउस गैसों के डिग्रेडेशन में योगदान दे सकते हैं।</p>



<p>इसका नतीजा एक ऐसा कंस्ट्रक्शन नेट बनना है जो सिर्फ़ एक कंस्ट्रक्शन साइट और आस-पास के माहौल के बीच खड़ा न हो – बल्कि उससे गुज़रने वाले पॉल्यूटेंट्स को कम करने के लिए एक्टिव रूप से काम करे।</p>



<p>ज़रूरी बात यह है कि आर्ना का कहना है कि मकसद एक और मुश्किल सिस्टम बनाना नहीं है जिसे कंस्ट्रक्शन साइट्स को अपनाने में मुश्किल हो।</p>



<p>एरोशील्ड को मौजूदा कंस्ट्रक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर के आस-पास डिज़ाइन किया जा रहा है, जिसमें रोलर-लाइन मैन्युफैक्चरिंग को सॉल्यूशन को स्केलेबल बनाने के लिए सोचा गया है, साथ ही पानी का इस्तेमाल कम करने और प्रोडक्शन कॉस्ट कम रखने के लिए भी।</p>



<p>प्रोटोटाइप अब तैयार है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एक टीनेजर प्रोटोटाइप से आगे सोच रहा है</h2>



<p>लेकिन, आरना के लिए टेक्नोलॉजी उसके मकसद का सिर्फ़ एक हिस्सा है।</p>



<p>उसका बड़ा मकसद यह देखना है कि कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की सुरक्षा एक बड़े रेगुलेटरी बदलाव का हिस्सा बने।</p>



<p>वह चाहती है कि कंस्ट्रक्शन से जुड़े एयर पॉल्यूशन से बेसिक सुरक्षा ऐसी चीज़ बने जिसकी वर्कर्स उम्मीद कर सकें—न कि ऐसी चीज़ जिसके लिए उन्हें कहना पड़े।</p>



<p>वह कहती है, “अगर कोई मज़दूर सुरक्षित महसूस करता है, तो प्रोडक्टिविटी बेहतर होती है।”</p>



<p>इसी सोच ने एरोशील्ड के बारे में उसकी सोच को बनाया है। मकसद सिर्फ़ इनोवेशन के लिए इनोवेशन नहीं है, बल्कि कमर्शियल वायबिलिटी है: एक ऐसा सॉल्यूशन जो सस्ता हो, बड़े पैमाने पर बनाया जा सके और कंस्ट्रक्शन के पहले से काम करने के तरीके में इंटीग्रेट हो सके।</p>



<p>उसके सफ़र को उसके सबसे करीबी लोगों ने भी बनाया है।</p>



<p>जब आरना ने पाया कि पॉल्यूशन की वजह से वह ज़्यादा समय बाहर नहीं बिता पा रही है, तो उसके माता-पिता ने उसे अपनी जिज्ञासा को साइंस की ओर मोड़ने के लिए हिम्मत दी। उसकी माँ, जो स्पेशल ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए एक एजुकेशन सेंटर चलाती थी, ने भी उसे यह जल्दी समझ दिया कि लोग एक ही माहौल को कितने अलग-अलग तरह से महसूस करते हैं—और उन लोगों के लिए सॉल्यूशन डिज़ाइन करना कितना ज़रूरी है जो सबसे ज़्यादा कमज़ोर हैं।</p>



<p>पर्सनल एक्सपीरियंस, साइंटिफिक क्यूरियोसिटी और सोशल ऑब्ज़र्वेशन का यह कॉम्बिनेशन उनके काम की नींव बन गया है।</p>



<p>एरोशील्ड की शुरुआत पॉल्यूशन के बारे में एक सवाल से हुई थी।</p>



<p>यह एक बहुत बड़ा सवाल बन गया है कि इससे कौन सुरक्षित रहता है।<br></p>



<h2 class="wp-block-heading">एक लड़की के ऑब्ज़र्वेशन से लेकर इंडिया के लिए एक बड़े विज़न तक</h2>



<p>आर्ना का सफ़र दिखाता है कि भारत के युवा इनोवेटर पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को किस तरह अलग नज़रिए से देख रहे हैं: वे सिर्फ़ यह नहीं सोच रहे कि टेक्नोलॉजी को और बेहतर कैसे बनाया जाए, बल्कि यह भी सोच रहे हैं कि उसे कैसे उपयोगी, आसानी से उपलब्ध और सिस्टम में बदलाव लाने लायक बनाया जाए।</p>



<p>आर्ना के लिए, इसका जवाब लैब और कंस्ट्रक्शन साइट के बीच कहीं छिपा है।</p>



<p>जिस कपड़े के बारे में उसने सबसे पहले सोचा था, वह अब एक ऐसी टेक्नोलॉजी बन गई है जो सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करके प्रदूषण फैलाने वाले कणों को तेज़ी से खत्म कर सकती है। जिस समस्या को उसने सबसे पहले अपने दादाजी की बीमारी के ज़रिए देखा था, वह अब उन मज़दूरों और बच्चों की चिंता में बदल गई है जो रोज़ाना प्रदूषित हवा के संपर्क में आते हैं। और उसने जो प्रोटोटाइप बनाया है, वह बस एक शुरुआत है; उसे उम्मीद है कि आगे चलकर यह कमर्शियली सफल प्रोडक्ट बनेगा और कंस्ट्रक्शन साइट पर सुरक्षा के मानकों में बदलाव लाएगा।</p>



<p>17 साल की उम्र में, आर्ना यह दावा नहीं कर रही है कि सिर्फ़ एक आविष्कार से भारत में हवा के प्रदूषण की समस्या हल हो जाएगी।</p>



<p>उसका मकसद ज़्यादा साफ़ और केंद्रित है।</p>



<p>वह यह पक्का करना चाहती है कि जो लोग भारत के शहर बनाते हैं, उन्हें शहर बनाने के लिए अपनी सेहत की कुर्बानी न देनी पड़े।</p>



<p>क्योंकि कभी-कभी, पर्यावरण की किसी बड़ी समस्या का समाधान किसी बोर्डरूम या रिसर्च इंस्टीट्यूट में नहीं, बल्कि किसी ऐसे युवा से शुरू होता है जो ऐसी चीज़ पर ध्यान देता है जिसे बाकी सबने अपनी ज़िंदगी का हिस्सा मान लिया है—और वह उसे सामान्य मानने से इनकार कर देता है।</p>



<p><strong>Samsung Solve for Tomorrow के बारे में</strong></p>



<p>Samsung Solve for Tomorrow, सैमसंग का युवाओं पर केंद्रित इनोवेशन प्रोग्राम है। यह प्रोग्राम युवाओं को मेंटरशिप, रिसोर्स और इनोवेशन इकोसिस्टम तक पहुँच देकर असल दुनिया की चुनौतियों के समाधान खोजने में मदद करता है। भारत में अपने पाँचवें एडिशन में, यह प्रोग्राम चार थीम—AI Living for India, Health & Education, Environmental Sustainability, और Sport & Tech—पर काम करने वाले युवा इनोवेटर्स की मदद कर रहा है, ताकि वे अपने आइडिया को ऐसे समाधानों में बदल सकें जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।</p>



<p><strong>Aeroshield के बारे में</strong></p>



<p>Aeroshield पर्यावरण की स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) से जुड़ा एक इनोवेशन है, जिसे दिल्ली की 17 साल की इनोवेटर आर्ना गुप्ता ने विकसित किया है। यह प्रोटोटाइप कंस्ट्रक्शन स्कैफ़ोल्ड (निर्माण कार्य के लिए बने ढाँचे) के लिए कम लागत वाली मलबे और प्रदूषण को रोकने वाली जाली के तौर पर डिज़ाइन किया गया है। इसमें प्रदूषण फैलाने वाले कणों को रोकने और सूरज की रोशनी से चलने वाले फोटोकैटलिटिक डिग्रेडेशन (प्रकाश-प्रेरित अपघटन) दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इस समाधान को बड़े पैमाने पर लागू करने लायक, पानी की बचत करने वाला और मौजूदा कंस्ट्रक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुकूल बनाने के मकसद से तैयार किया गया है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Samsung ने तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में 3,000 छात्रों के लिए प्रैक्टिकल STEM लर्निंग की सुविधा शुरू की और STEM लैब बनाईं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/samsung-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d</link>
				<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:56:53 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[CSR]]></category>
		<category><![CDATA[DigiArivu]]></category>
		<category><![CDATA[Kanchipuram]]></category>
		<category><![CDATA[Ranipet]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4y5GPIx</guid>
									<description><![CDATA[Samsung इंडिया तमिलनाडु में STEM लर्निंग की पहुँच बढ़ा रहा है। अपने ‘डिजीअरिवु’ (DigiArivu) प्रोग्राम के ज़रिए कंपनी कांचीपुरम और रानीपेट के 10 सरकारी स्कूलों के 3,000 छात्रों तक पहुँच रही है। यह पहल राज्य में मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और कम्युनिटी डेवलपमेंट के प्रति Samsung की बढ़ती प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। N ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="380" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/27145555/image-41.png" alt="" class="wp-image-10526" /></figure>



<p>Samsung इंडिया तमिलनाडु में STEM लर्निंग की पहुँच बढ़ा रहा है। अपने ‘डिजीअरिवु’ (DigiArivu) प्रोग्राम के ज़रिए कंपनी कांचीपुरम और रानीपेट के 10 सरकारी स्कूलों के 3,000 छात्रों तक पहुँच रही है। यह पहल राज्य में मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और कम्युनिटी डेवलपमेंट के प्रति Samsung की बढ़ती प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है।</p>



<p>N ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क इंडिया (UNGCNI) के सहयोग से लागू किया गया ‘डिजीअरिवु’ प्रोग्राम 10 खास STEM लैब्स, प्रैक्टिकल एजुकेशनल इक्विपमेंट, ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ (BaLA), बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचर डेवलपमेंट के ज़रिए STEM लर्निंग को मज़बूत कर रहा है। यह CSR प्रोग्राम छात्रों को प्रैक्टिकल लर्निंग अनुभवों और क्लासरूम में सीखे गए कॉन्सेप्ट्स को लागू करके STEM विषयों की अपनी समझ को बेहतर बनाने में मदद करता है।</p>



<p>Samsung चेन्नई प्लांट के प्रेसिडेंट, SH Yoon ने कहा, “शिक्षा तब सबसे सार्थक होती है जब वह जिज्ञासा जगाती है और छात्रों को करके सीखने के लिए प्रेरित करती है। DigiArivu के ज़रिए, Samsung तमिलनाडु के स्कूलों के साथ मिलकर सीखने का ऐसा माहौल बना रहा है जहाँ टेक्नोलॉजी, प्रैक्टिकल STEM शिक्षा और शिक्षकों का विकास मिलकर युवा शिक्षार्थियों में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।”</p>



<p>UN ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क इंडिया (UNGCNI) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रत्नेश झा ने कहा, “UN Global Compact Network India ऐसी साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो टिकाऊ और समावेशी विकास में योगदान दें और बड़े पैमाने पर सार्थक प्रभाव डालें। DigiArivu के ज़रिए Samsung के साथ हमारा सहयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मज़बूत करने और युवा शिक्षार्थियों के लिए अवसर बढ़ाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकारी स्कूलों में STEM शिक्षा और डिजिटल लर्निंग लाकर, यह पहल छात्रों को तेज़ी से टेक्नोलॉजी-आधारित होती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी ज्ञान और कौशल से लैस करने में मदद कर रही है।”</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="301" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/27145605/image-42.png" alt="" class="wp-image-10527" /></figure></div>


<h2 class="wp-block-heading">STEM लर्निंग को असल ज़िंदगी से जोड़ना</h2>



<p>इस प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा तमिलनाडु के कांचीपुरम और रानीपेट ज़िलों के सरकारी स्कूलों में 10 STEM लैब बनाना है। इससे छात्रों को क्लासरूम में सिखाए गए वैज्ञानिक कॉन्सेप्ट्स पर एक्सपेरिमेंट करने का मौका मिलता है। प्रैक्टिकल एक्टिविटीज़ और एक्सपेरिमेंट के ज़रिए, छात्र STEM विषयों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और उनमें जिज्ञासा, समस्या सुलझाने की क्षमता और सीखी हुई चीज़ों को लागू करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।</p>



<p>इस प्रोग्राम में ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ (BaLA) को भी शामिल किया गया है, ताकि स्कूल के पूरे माहौल को क्लासरूम का ही एक हिस्सा बनाया जा सके। स्कूल की दीवारों और आम जगहों पर इंटरैक्टिव चीज़ें और म्यूरल (दीवार पर बनी कलाकृतियां) बनाए गए हैं, जो विज्ञान, गणित, सस्टेनेबिलिटी, खेल और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसी प्रेरणादायक हस्तियों से प्रेरित हैं।</p>



<p>कांचीपुरम के मदुरामंगलम सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के हेडमास्टर वी. आनंदकुमार ने कहा, “जब से DigiArivu शुरू हुआ है, हमने देखा है कि छात्र क्लासरूम में ज़्यादा जिज्ञासु और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। STEM लैब और इंटरैक्टिव लर्निंग स्पेस ने उन्हें सवाल पूछने, ज़्यादा सक्रिय रूप से भाग लेने और सीखे गए पाठों को प्रैक्टिकल अनुभवों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।”</p>



<p>छात्रों पर इसका असर हर दिन दिखाई देता है।</p>



<p>कांचीपुरम के मदुरामंगलम सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा एस. लथिका ने कहा, “अब हम STEM लैब में खुद एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं, और हमारे स्कूल के आस-पास बनी ‘लर्निंग वॉल्स’ हमें क्लास में पढ़ी गई बातें याद रखने में मदद करती हैं। इससे सीखना और मज़ेदार हो जाता है और हमें और नई चीज़ें खोजने की प्रेरणा मिलती है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">कांचीपुरम और रानीपेट के सरकारी स्कूलों तक पहुँच</h2>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="729" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/27145630/image-44.png" alt="" class="wp-image-10529" /></figure></div>


<p><br>इस पहल में कांचीपुरम ज़िले के मदुरामंगलम, मोलाचुर, एदयारपक्कम, दमल और तिरुप्पुतकुझी और रानीपेट ज़िले के पनाप्पक्कम, अरकोट, थिमिरी, कलावई और वालाजापेट के सरकारी स्कूल शामिल हैं।</p>



<p>Samsung तमिलनाडु में अपने शिक्षा कार्यक्रमों को और मज़बूत करेगा, क्योंकि ‘DigiArivu’ का दायरा अब दूसरे ज़िलों तक भी बढ़ाया जा रहा है। यह प्रोग्राम गतिविधि-आधारित अनुभव से सीखने (activity-based experiential learning) को बढ़ावा देगा और साथ ही STEM शिक्षा तक पहुँच को भी आसान बनाएगा।</p>



<p>‘DigiArivu’ तमिलनाडु के प्रति Samsung की व्यापक प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है और यह Samsung इनोवेशन कैंपस, Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो और Samsung DOST जैसे कार्यक्रमों को और बेहतर बनाता है। ये सभी कार्यक्रम मिलकर शिक्षा, कौशल विकास और इनोवेशन के अवसर बढ़ा रहे हैं। साथ ही, ये पूरे राज्य में समुदायों के साथ Samsung के लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को भी मज़बूत कर रहे हैं, जिसमें श्रीपेरंबदूर स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के आस-पास के समुदाय भी शामिल हैं।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[वाराणसी, प्रयागराज और रायबरेली के युवा इनोवेटर्स ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के टॉप 40 में शामिल हुए]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af</link>
				<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 12:22:36 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Prayagraj]]></category>
		<category><![CDATA[Raebareli]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Varanasi]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4iqu32H</guid>
									<description><![CDATA[वाराणसी और प्रयागराज से लेकर रायबरेली तक, उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स यह दिखा रहे हैं कि भारत के कुछ सबसे बेहतरीन आइडिया कहीं से भी आ सकते हैं। राज्य के चार युवा इनोवेटर्स ने ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के पांचवें एडिशन में नेशनल टॉप 40 में जगह बनाई है। उनके […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" width="1024" height="576" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/24121919/UPM-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-10485" /><figcaption class="wp-element-caption">[बाएं से दाएं] वाराणसी से अभिनव जयसवाल, रायबरेली से अकुल अत्रे और प्रयागराज से मोहम्मद सरफराज और राय बरेली से सक्षम श्रेयांस</figcaption></figure>



<p>वाराणसी और प्रयागराज से लेकर रायबरेली तक, उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स यह दिखा रहे हैं कि भारत के कुछ सबसे बेहतरीन आइडिया कहीं से भी आ सकते हैं।</p>



<p>राज्य के चार युवा इनोवेटर्स ने ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के पांचवें एडिशन में नेशनल टॉप 40 में जगह बनाई है। उनके आइडिया डॉक्यूमेंट लिटरेसी (दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता) और हाउसिंग डिज़ाइन से लेकर साइबर सिक्योरिटी के नए खतरों और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी जैसी चुनौतियों से जुड़े हैं।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ 14 से 22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग का खास CSR इनोवेशन प्रोग्राम है। FITT-IIT दिल्ली के साथ मिलकर चलाया जा रहा यह प्रोग्राम पूरे भारत के युवा इनोवेटर्स को असल दुनिया की चुनौतियों की पहचान करने और ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन, मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी और हैंड्स-ऑन प्रोटोटाइपिंग के ज़रिए संभावित समाधान विकसित करने में मदद करता है।</p>



<p>स्थानीय समस्याओं से संभावित समाधान तक<br>वाराणसी में, 18 साल के अभिनव जायसवाल एक ऐसे समाधान पर काम कर रहे हैं जिससे उन लोगों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना आसान हो जाए, जिन्हें मुश्किल लिखित जानकारी समझने में परेशानी होती है।</p>



<p>प्रयागराज में, 19 साल के मोहम्मद सरफराज AI-आधारित हाउसिंग डिज़ाइन समाधान विकसित कर रहे हैं। यह समाधान घनी आबादी वाले भारतीय इलाकों में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, जैसे स्ट्रक्चरल प्लानिंग और वेंटिलेशन पर केंद्रित है।</p>



<p>और रायबरेली में, 21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस एन्क्रिप्टेड डेटा से जुड़े साइबर सिक्योरिटी के नए खतरों और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी को मज़बूत करने के तरीकों पर काम कर रहे हैं।</p>



<p>अलग-अलग शहर। अलग-अलग चुनौतियां। लेकिन सभी आइडिया की शुरुआत एक ही जगह से होती है: अपने आस-पास देखी गई समस्याएं।</p>



<p>उनकी कामयाबी इस साल के प्रोग्राम में दिख रहे बड़े बदलाव को दिखाती है। नेशनल टॉप 40 टीमों में से आधी से ज़्यादा टीमें टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं। यह दिखाता है कि कैसे पूरे भारत के युवा अपने समुदायों में आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के लिए, वाराणसी, प्रयागराज और रायबरेली के युवा इनोवेटर्स का नेशनल टॉप 40 में शामिल होना क्षेत्रीय गर्व की बात है — और यह इस बात का संकेत भी है कि भारत का इनोवेशन मैप अपने पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>वाराणसी के अभिनव जायसवाल के लिए, चुनौती डॉक्यूमेंट लिटरेसी (दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता) है। अनपढ़ और कम पढ़े-लिखे भारतीयों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना अक्सर मुश्किल हो सकता है, खासकर उन पर साइन करने से पहले। उनका समाधान यह बताता है कि कैसे टेक्नोलॉजी ऐसी जानकारी को समझने में आसान बना सकती है और लोगों को बेहतर जानकारी के साथ फ़ैसले लेने में मदद कर सकती है।</p>



<p>मोहम्मद सरफ़राज़ का फ़ोकस हाउसिंग डिज़ाइन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को हल करने के लिए AI का इस्तेमाल करने पर है।</p>



<p>इस बीच, अकुल अत्रे और सक्षम श्रेयांस साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी से जुड़े अपने सॉल्यूशन पर काम कर रहे हैं।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के ज़रिए, इन युवा इनोवेटर्स को चुनौतियों को गहराई से समझने, अपने आइडिया को टेस्ट करने और उन्हें संभावित सॉल्यूशन में बदलने के लिए प्लेटफ़ॉर्म, मेंटरशिप और टेक्नोलॉजी सपोर्ट मिल रहा है।</p>



<p>टॉप 40 टीमें अब 10 दिन के इनोवेशन बूटकैंप में हिस्सा लेंगी, जहाँ उन्हें FITT-IIT दिल्ली में स्टार्टअप फ़ाउंडर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से गहन मेंटरशिप मिलेगी। बूटकैंप के हिस्से के तौर पर, टीमों को सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – दिल्ली, सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – नोएडा, सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – बैंगलोर, सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली और गुरुग्राम में सैमसंग के रीजनल हेडक्वार्टर जाने का मौका भी मिलेगा।</p>



<p>इसके बाद टीमें टॉप 20 में जगह बनाने के लिए मुकाबला करेंगी, जिन्हें ग्रैंड फ़िनाले से पहले अपने सॉल्यूशन को मज़बूत और बेहतर बनाने के लिए और सपोर्ट मिलेगा।</p>



<p>प्रोग्राम के आखिर में, चार विजेता टीमों को कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट और FITT-IIT दिल्ली से इनक्यूबेशन सपोर्ट मिलेगा, जिससे उन्हें अपने सॉल्यूशन को और विकसित करने और बाज़ार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।</p>



<p>भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ देश भर में इनोवेटर्स की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। युवाओं को जहाँ भी वे हैं, वहाँ मेंटरशिप, डिज़ाइन थिंकिंग, टेक्नोलॉजी और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट देकर, यह प्रोग्राम होनहार आइडिया को समुदायों से निकालकर बड़े पैमाने पर असर डालने वाले सॉल्यूशन की ओर ले जाने में मदद कर रहा है।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स के लिए, नेशनल टॉप 40 तक का सफ़र एक ज़बरदस्त संदेश देता है: राष्ट्रीय चुनौती को हल करने की क्षमता वाला कोई आइडिया वाराणसी, प्रयागराज या रायबरेली से भी शुरू हो सकता है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow ने भारत के टॉप 40 युवा इनोवेटर्स के नामों की घोषणा की]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/samsung-solve-for-tomorrow-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9f%e0%a5%89%e0%a4%aa-40-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a5%8b</link>
				<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:29:49 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Competition]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Top 40]]></category>
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									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने आज अपने फ्लैगशिप यूथ इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो की टॉप 40 सेमी-फाइनलिस्ट टीमों की घोषणा की। यह प्रोग्राम युवाओं को अपने आस-पास की चुनौतियों को पहचानने और मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी, प्रोटोटाइपिंग और हैंड्स-ऑन लर्निंग के ज़रिए अपने आइडिया को सॉल्यूशन में बदलने के लिए एक प्लेटफॉर्म देता है। अब 2026 में […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="564" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/14152006/1000x564.jpg" alt="" class="wp-image-10429" /></figure></div>


<p>सैमसंग इंडिया ने आज अपने फ्लैगशिप यूथ इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो की टॉप 40 सेमी-फाइनलिस्ट टीमों की घोषणा की। यह प्रोग्राम युवाओं को अपने आस-पास की चुनौतियों को पहचानने और मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी, प्रोटोटाइपिंग और हैंड्स-ऑन लर्निंग के ज़रिए अपने आइडिया को सॉल्यूशन में बदलने के लिए एक प्लेटफॉर्म देता है।</p>



<p>अब 2026 में भारत में अपने पांचवें एडिशन में, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 14 से 22 साल के युवाओं के लिए खुला है और इसे देश की अगली पीढ़ी में प्रॉब्लम-सॉल्विंग और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>टॉप 40 में 15 राज्य और 26 शहर शामिल हैं, जिनमें से आधी से ज़्यादा टीमें टियर 2 और टियर 3 इंडिया से हैं। वाराणसी, कोयंबटूर, गुंटूर, अमृतसर, सुंदरगढ़ और राजकोट के युवा इनोवेटर्स ने बड़े टेक्नोलॉजी और एजुकेशन हब की टीमों के साथ नेशनल सेमी-फाइनल में जगह बनाई है।</p>



<p>शॉर्टलिस्ट में सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 की चार थीम – AI लिविंग फॉर इंडिया, हेल्थ एंड एजुकेशन, एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी, और स्पोर्ट एंड टेक – पर 10-10 टीमें शामिल हैं।</p>



<p>“इस साल के टॉप 40 में जो बात सबसे अलग है, वह यह है कि युवा अपने आस-पास की दुनिया को कितनी बारीकी से देख रहे हैं। वे अपने समुदायों, क्लासरूम, खेतों, बिज़नेस और खेल के मैदानों में समस्याओं की पहचान कर रहे हैं, और पूछ रहे हैं कि टेक्नोलॉजी कैसे बदलाव ला सकती है। यह बात कि इनमें से आधी से ज़्यादा टीमें टियर 2 और टियर 3 इंडिया से आती हैं, खास तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली है क्योंकि इससे पता चलता है कि इनोवेशन की अगली पीढ़ी कहीं से भी उभर सकती है। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के ज़रिए हमारा रोल इन युवा इनोवेटर्स को मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी और मौका देना है ताकि वे अपने सपने को असर में बदल सकें। जैसे ही सैमसंग भारत में 30 साल पूरे कर रहा है, हम उन आइडिया और टैलेंट में इन्वेस्ट करना जारी रखना चाहते हैं जो देश के अगले 30 सालों को आकार देंगे।” सेमी-फ़ाइनलिस्ट AI टूल्स से लेकर फ़ाइनेंशियल और ज़रूरी जानकारी को ज़्यादा आसान बनाने वाले आइडिया पर काम कर रहे हैं, खेती के बचे हुए हिस्सों के लिए सॉल्यूशन, दिव्यांग लोगों के लिए मददगार टेक्नोलॉजी, सस्ते हेल्थकेयर और एजुकेशन टूल्स, और खेल को ज़्यादा सबको साथ लेकर चलने वाली टेक्नोलॉजी तक,” सैमसंग साउथवेस्ट एशिया के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट, एस पी चन ने कहा।</p>



<p>टॉप 40 में आंध्र प्रदेश के गुंटूर का AIRMED भी है, जो यह पता लगा रहा है कि AI भारत को एक ग्लोबल हेल्थकेयर डेस्टिनेशन बनाने में कैसे मदद कर सकता है। AIRMED विदेश के मरीज़ों को भारतीय अस्पतालों से जोड़ना चाहता है।</p>



<p>ओडिशा के सुंदरगढ़ का Code Blooded छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पैरा-एथलीटों के बीच स्पोर्टिंग टैलेंट की पहचान करने के लिए खास AI का इस्तेमाल करता है।</p>



<p>केरल के त्रिशूर का AcoustiNode Systems बेहतर हाइड्रोलॉजिकल इंटेलिजेंस के ज़रिए डैम मैनेजमेंट पर काम करता है, जिसका मकसद खराब जानकारी वाले रिज़र्वॉयर रिलीज़ को कम करना और बाढ़, सिंचाई और बिजली-मैनेजमेंट के फ़ैसलों को बेहतर बनाना है।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के रायबरेली का QuantHunt उभरते साइबर सिक्योरिटी खतरों से निपटता है, जहाँ आज चुराया गया एन्क्रिप्टेड डेटा कंप्यूटिंग क्षमताओं के बढ़ने के साथ डिक्रिप्ट हो सकता है।</p>



<p>दूसरी टीमें ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही हैं जिससे कम देखने वाले तैराकों को ज़्यादा इंडिपेंडेंटली ट्रेनिंग मिल सके, एक AI साथी जिसका मकसद कम देखने वाले स्टूडेंट्स के लिए एजुकेशन तक पहुंच को बेहतर बनाना है, एक ऐसा सॉल्यूशन जो मौजूदा क्लासरूम प्रोजेक्टर को इंटरैक्टिव लर्निंग प्लेटफॉर्म में बदल सके, और बायोमास को क्लीन एनर्जी और काम के कार्बन रिसोर्स में बदलने के लिए डिज़ाइन की गई टेक्नोलॉजी।</p>



<p>“एक दिलचस्प आइडिया से एक काम के सॉल्यूशन तक का बदलाव अक्सर इनोवेशन के सफ़र का सबसे मुश्किल हिस्सा होता है। इस ग्रुप के बारे में अच्छी बात यह है कि टॉप 40 टीमों में से 25 ने पहले ही प्रोटोटाइप बनाना शुरू कर दिया है। अगला फेज़ उन्हें अपने अंदाज़ों को टेस्ट करने, यूज़र्स से सीखने, अपनी टेक्नोलॉजी को मज़बूत करने और इस बारे में और गहराई से सोचने की चुनौती देगा कि उनके सॉल्यूशन बड़े पैमाने पर कैसे काम कर सकते हैं। बनाकर सीखने का यह प्रोसेस मज़बूत इनोवेटर्स बनाने के लिए ज़रूरी है,” IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. निखिल अग्रवाल ने कहा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडिया से प्रोटोटाइप तक</h2>



<p>टॉप 40 अब सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के एक इंटेंसिव फेज़ में जाएंगे, जिसे उनके आइडिया को डेवलप करने और मज़बूत करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>सितंबर में शुरू होने वाला एक इनोवेशन बूटकैंप, पार्टिसिपेंट्स को सैमसंग के इनोवेशन इकोसिस्टम के बारे में बताएगा, जिसमें बेंगलुरु, दिल्ली और नोएडा में सैमसंग R&D सेंटर्स के साथ-साथ इसके साउथवेस्ट एशिया हेडक्वार्टर का दौरा भी शामिल है।</p>



<p>इसके बाद टीमें FITT, IIT दिल्ली के साथ इंटेंसिव ट्रेनिंग और मेंटरिंग करेंगी, जहाँ उन्हें प्रोटोटाइपिंग, प्रॉब्लम-सॉल्विंग और रियल-वर्ल्ड एप्लीकेशन के लिए अपने आइडिया डेवलप करने पर गाइडेंस मिलेगी। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के पिछले एडिशन के एल्युम्नाई भी मेंटरिंग जर्नी में हिस्सा लेंगे, जिससे पार्टिसिपेंट्स उन युवा इनोवेटर्स से सीख सकेंगे जो पहले इस प्रोग्राम से गुजर चुके हैं।</p>



<p>सेमी-फ़ाइनल स्टेज एक नेशनल पिच इवेंट में खत्म होगा, जहाँ टीमें सैमसंग जूरी के सामने अपने सॉल्यूशन प्रेज़ेंट करेंगी। बीस फ़ाइनलिस्ट टीमें कॉम्पिटिशन के आखिरी स्टेज में आगे बढ़ेंगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अवार्ड्स और सपोर्ट</h2>



<p>टॉप 40 टीमों को प्रोटोटाइप बनाने के लिए कुल ₹8 लाख मिलेंगे, और हर टीम मेंबर को सैमसंग लैपटॉप मिलेगा।</p>



<p>टॉप 20 टीमों को प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने के लिए कुल ₹20 लाख मिलेंगे, साथ ही हर टीम मेंबर को लेटेस्ट सैमसंग गैलेक्सी Z फ्लिप स्मार्टफोन भी मिलेगा।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के आखिर में, टॉप 4 जीतने वाली टीमों को IIT दिल्ली में इनक्यूबेशन के लिए सैमसंग से कुल ₹2 करोड़ की ग्रांट मिलेगी, जिससे उन्हें अपने सॉल्यूशन को और बेहतर बनाने और बड़े स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी।</p>



<p>इस प्रोग्राम में ग्रैंड फिनाले के दौरान खास अवॉर्ड्स के ज़रिए भी पार्टिसिपेंट्स को सम्मानित किया जाएगा, जिसमें ₹50,000 का ‘डिजिटल इम्पैक्ट अवॉर्ड’ और ₹1-1 लाख के 2 ‘कम्युनिटी चॉइस अवॉर्ड्स’ शामिल हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पूरे भारत में इनोवेशन को आगे बढ़ाने के पांच साल</h2>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ को 2022 में भारत में लॉन्च किया गया था ताकि युवाओं को एक ऐसा प्लैटफ़ॉर्म मिल सके जहाँ वे अपने लिए ज़रूरी समस्याओं की पहचान कर सकें और मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी और प्रैक्टिकल लर्निंग के ज़रिए आइडियाज़ को सॉल्यूशन में बदल सकें।</p>



<p>2022 से इस प्रोग्राम के ज़रिए युवाओं के कई स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं। पिछले चार सालों में, सैमसंग ने युवाओं के इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए IIT दिल्ली में इनक्यूबेशन ग्रांट के तौर पर ₹2 करोड़ और कैश प्राइज़ व टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के तौर पर ₹3 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया है, जिससे उभरते हुए इनोवेटर्स को अपने आइडियाज़ को सॉल्यूशन में बदलने के लिए ज़रूरी संसाधन और सपोर्ट मिला है।</p>



<p>अब अपने पांचवें एडिशन में, इस प्रोग्राम ने भारत के बड़े शहरों से आगे बढ़कर अपनी पहुँच बढ़ाई है। इस साल टॉप 100 के सेलेक्शन से पहले, सैमसंग ने 135 शहरों में 184 ‘डिजाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स’ आयोजित कीं, जिससे इनोवेशन और प्रॉब्लम-सॉल्विंग को सीधे देश भर के युवाओं तक पहुँचाया गया।</p>



<p>चूँकि सैमसंग भारत में अपने 30 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, इसलिए ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ युवाओं को सपोर्ट करने और भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कंपनी की लंबे समय की प्रतिबद्धता को दिखाता है।</p>



<p>ग्लोबली, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ को 2010 में यूनाइटेड स्टेट्स में लॉन्च किया गया था और तब से यह 68 देशों तक फैल चुका है, जिसमें दुनिया भर के 30 लाख से ज़्यादा युवा शामिल हुए हैं। यह प्रोग्राम सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के ग्लोबल CSR विज़न, “टुगेदर फॉर टुमॉरो! इनेबलिंग पीपल” (Together for Tomorrow! Enabling People) का हिस्सा है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
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				<title><![CDATA[सैमसंग ने भारत में AI टैलेंट पाइपलाइन बनाने में मदद के लिए ‘सैमसंग इनोवेशन कैंपस’ का 2026 एडिशन लॉन्च किया]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-ai-%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:46:41 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[ESSCI]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Innovation Campus]]></category>
		<category><![CDATA[TSSC]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4gfWSgM</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने अपने खास CSR प्रोग्राम, ‘सैमसंग इनोवेशन कैंपस’ (SIC) के 2026 एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्रोग्राम युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी स्किल्स सिखाने के लिए बनाया गया है। 2026 एडिशन को ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया’ (ESSCI) और ‘टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल’ […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" width="1024" height="842" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/06174259/Main-1-1-1024x842.jpg" alt="" class="wp-image-10324" /></figure>



<p>सैमसंग इंडिया ने अपने खास CSR प्रोग्राम, ‘सैमसंग इनोवेशन कैंपस’ (SIC) के 2026 एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्रोग्राम युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी स्किल्स सिखाने के लिए बनाया गया है।</p>



<p>2026 एडिशन को ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया’ (ESSCI) और ‘टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल’ (TSSC) के साथ मिलकर लागू किया जाएगा। इन साझेदारियों के ज़रिए, सैमसंग का लक्ष्य 10 राज्यों में 20,000 युवाओं को AI की ट्रेनिंग देना है, ताकि इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी AI शिक्षा तक पहुँच बढ़ाई जा सके और भारत के भविष्य के AI टैलेंट पाइपलाइन को मज़बूत किया जा सके।</p>



<p>AI दुनिया के काम करने के तरीके को बदल रहा है — हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर शिक्षा और रोज़मर्रा की सेवाओं तक। जैसे-जैसे भारत अपने AI लक्ष्यों को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, एक कुशल वर्कफोर्स तैयार करना ज़रूरी होगा ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग AI की ताकत का इस्तेमाल कर सकें और इनोवेशन को बढ़ावा दे सकें।</p>



<p>भारत में अपने चौथे साल में, SIC 18-25 साल के युवाओं को प्रैक्टिकल AI ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग, मेंटरशिप और असल दुनिया के एप्लीकेशन का अनुभव देगा। इससे वे दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में से एक में करियर के लिए तैयार हो सकेंगे।</p>



<p>सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के प्रेसिडेंट और CEO, JB पार्क ने कहा, “AI हमारे समय के सबसे बड़े मौकों में से एक है, और भारत अपने युवा टैलेंट की ताकत से इस बदलाव का नेतृत्व करने की खास स्थिति में है। इस मौके का फ़ायदा उठाने के लिए सही स्किल्स विकसित करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और हर इच्छुक सीखने वाले के लिए AI शिक्षा को ज़्यादा सुलभ बनाने में लगातार निवेश की ज़रूरत होगी, चाहे वे कहीं से भी आए हों। सैमसंग में, हमारा मानना ​​है कि टेक्नोलॉजी तब सबसे ज़्यादा असर डालती है जब वह लोगों को सशक्त बनाती है। SIC के ज़रिए, हम AI टैलेंट की अगली पीढ़ी में निवेश कर रहे हैं, और युवा भारतीयों को वह ज्ञान, आत्मविश्वास और प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने में मदद कर रहे हैं जो भारत की इनोवेशन यात्रा में योगदान देने के लिए ज़रूरी है। भारत में अपने 30 साल पूरे करने के मौके पर, हम देश के ग्लोबल AI लीडर बनने के विज़न का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम ऐसे टैलेंट को निखार रहे हैं जो देश के भविष्य को आकार देगा।”</p>



<p>चूँकि सैमसंग भारत में अपने 30 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, SIC का नया एडिशन टेक्नोलॉजी टैलेंट को विकसित करने और AI और इनोवेशन के ग्लोबल हब के रूप में भारत के उभरने में मदद करने के लिए कंपनी की लंबे समय की प्रतिबद्धता को दिखाता है। टेक्निकल लर्निंग के अलावा, यह प्रोग्राम प्रॉब्लम-सॉल्विंग, क्रिटिकल थिंकिंग और सहयोग की भावना को विकसित करने के लिए बनाया गया है, जिससे प्रतिभागी प्रैक्टिकल AI समाधान बना सकें और साथ ही अपने करियर के लिए तैयार हो सकें। 2022 में भारत में शुरू हुए SIC ने देश भर में 26,500 से ज़्यादा युवाओं को नई टेक्नोलॉजी में ट्रेनिंग दी है। 2025 में इस प्रोग्राम में महिलाओं की भागीदारी 48% रही, जिससे अलग-अलग बैकग्राउंड से आने वाले और सीखने के इच्छुक लोगों के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की शिक्षा ज़्यादा आसान हो गई।</p>



<p>SIC, भारत के इनोवेशन और स्किलिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करने के सैमसंग के बड़े कमिटमेंट का हिस्सा है। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (जो युवा इनोवेटर्स और एंटरप्रेन्योर्स को आगे बढ़ाता है) और ‘सैमसंग DOST’ (जो सेल्स और टेक्निकल सर्विस रोल के लिए इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट तैयार करता है) जैसे प्रोग्राम के साथ-साथ, सैमसंग ऐसे स्किल्स, क्षमताएं और इनोवेशन वाली सोच विकसित करने में निवेश करना जारी रखे हुए है जो भारत के AI-आधारित भविष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।</p>
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