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		<title>कॉरपोरेट &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>कॉरपोरेट &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[अगला बड़ा आइडिया भारत में कहीं से भी आ सकता है: स्टार्टअप फाउंडर्स]]></title>
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				<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 16:07:30 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
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		<category><![CDATA[Startups]]></category>
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									<description><![CDATA[अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/09160349/collage-of-mentors-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10846" /><figcaption class="wp-element-caption">[बाएं से दाएं] रॉबिन सिंह, संस्थापक, क्लूइक्स; समृद्धि भारद्वाज, संस्थापक, पीसी; दिशांत मिश्रा, संस्थापक, जल संसाधन और अंकित गर्ग, संस्थापक, ईमू मसाला</figcaption></figure>



<p>अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से अपने अनुभव और उन लोगों की समझ का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनकी वे मदद करना चाहते हैं। इनमें अंकित गर्ग, रॉबिन सिंह, समृद्धि भारद्वाज और दिशांत मिश्रा शामिल हैं। उनका मानना ​​है कि टेक्नोलॉजी और जानकारी तक बेहतर पहुँच से भारत के छोटे शहरों और समुदायों से नए आइडिया सामने आ रहे हैं।</p>



<p>IIT दिल्ली-इन्क्यूबेटेड ‘वॉटर रिसोर्सेज़’ के फाउंडर दिशांत मिश्रा ने कहा, “वे सच में ऐसी समस्या को हल करना चाहते हैं जिससे कहीं न कहीं किसी को परेशानी हो रही हो। भले ही मार्केट छोटा दिखे, ये युवा इनोवेटर कोशिश कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं और उन समस्याओं को हल कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मार्केट बनाना दूसरा कदम होगा, और वे दूसरे कदम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शायद यही वह नया बदलाव है जो मैंने इस साल के ग्रुप में देखा है।”</p>



<p>वॉटर-क्वालिटी इंटेलिजेंस स्टार्टअप ‘Cluix’ के फाउंडर रॉबिन सिंह ने देखा है कि कैसे कोई आइडिया प्रोग्राम के बाद भी आगे बढ़ सकता है। बिहार के ग्रामीण इलाके की एक टीम, जिसे उन्होंने मेंटर किया था, ने पानी में आर्सेनिक की समस्या को दूर करने के लिए एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया, चैलेंज जीता और अपने प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ भी किया।</p>



<p>सिंह ने कहा, “वे बिहार के ग्रामीण इलाके से आए थे और असल में वे देख सकते थे कि इस क्षेत्र में कोई समाधान उपलब्ध नहीं था। बहुत कम उम्र में, जब वे सिर्फ़ स्टूडेंट थे, उन्होंने एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया। उस फिल्ट्रेशन सिस्टम ने चैलेंज जीता, और अब वे प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं।”</p>



<p>इस साल, सिंह ‘SignBridge AI’ को मेंटर कर रहे हैं, जो एक ऐसी टीम है जो दिव्यांग लोगों को ज़्यादा आज़ादी से बातचीत करने में मदद करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इससे समाज में समावेशिता बढ़ती है, और हमें ऐसे समाधानों की ज़रूरत है।”</p>



<p>महिलाओं की सेहत के क्षेत्र में काम करने वाली फाउंडर समृद्धि भारद्वाज ने कहा कि टेक्नोलॉजी तक पहुँच ने भूगोल और अवसर के बीच के रिश्ते को बदल दिया है। “पूरे भारत में, टियर 2 और टियर 3 शहरों के छात्रों के पास भी अब ऐसी टेक्नोलॉजी और अनुभव (एक्सपोज़र) है जो उनके कई साथियों और सीनियर के पास नहीं था। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि जगह या लोकेशन अब कोई रुकावट है। भारत के किसी भी हिस्से से कोई भी नया और अनोखा समाधान (इनोवेटिव सॉल्यूशन) आ सकता है।”</p>



<p>क्लीन-लेबल फ़ूड ब्रांड ‘ईमू मसाले’ (EemuMasale) के फ़ाउंडर अंकित गर्ग के लिए, स्थानीय समस्याओं का महत्व उन समुदायों से कहीं आगे तक हो सकता है जहाँ वे सबसे पहले सामने आती हैं। उन्होंने कहा, “पराली जलाना कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है जिसे हल करने के लिए वे काम कर रहे हैं। उन्होंने शायद एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है जो प्रोटीन के वैकल्पिक विकल्प देकर भारत में पोषण की समस्या को भी हल कर सकता है।”</p>



<p>सिंह के अनुसार, इस साल के ग्रुप में आधे आइडिया टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए थे। उन्होंने कहा, “टियर 2 शहरों में लोगों को जो आइडिया मिल रहे हैं, वे कभी-कभी टियर 1 शहरों में दिखने वाले आइडिया से भी बेहतर होते हैं। लोगों का अनुभव और जानकारी (एक्सपोज़र) बढ़ी है, और ऐसे आइडिया को लागू करने का तरीका भी बेहतर हुआ है।”</p>



<p>फ़ाउंडर मेंटरशिप को युवा इनोवेटर्स की मदद करने के एक तरीके के तौर पर देखते हैं, ताकि वे किसी समस्या की पहचान करने से लेकर समाधान विकसित करने और उसे टेस्ट करने तक का सफ़र तय कर सकें। ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) फ़ाइनलिस्ट को स्टार्टअप फ़ाउंडर, एकेडेमिया और इंडस्ट्री के लोगों के साथ लाता है, और उन्हें अपने आइडिया को विकसित करने के लिए मार्गदर्शन और अवसर देता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ युवाओं के लिए सैमसंग का ग्लोबल इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम है। 2026 का एडिशन भारत में इसके पांचवें साल का प्रतीक है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सोनीपत से फ़ूड के भविष्य तक: दो युवा इनोवेटर्स ने फ़सल के कचरे को सस्टेनेबल प्रोटीन में बदला]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a5%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a4</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 18:32:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए? यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092356/12-KINVA-BIO_Haryana.jpg" alt="" class="wp-image-10756" /><figcaption class="wp-element-caption">किनवा बायो (Kinva Bio) खेती से बचे हुए बायोमास को प्रोटीन में बदलने के लिए फर्मेंटेशन का इस्तेमाल करती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन के मुकाबले बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ती है।</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए?</p>



<p>यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के बचे हुए हिस्से को टिकाऊ प्रोटीन में बदला जा सकता है।</p>



<p>हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM-K) के छात्र, नीतीश और गुलशन ‘किन्वा बायो’ (Kinva Bio) के फाउंडर हैं। यह टीम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) के टॉप 20 में शामिल है। उनका आइडिया दुनिया के फूड सिस्टम के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करता है: बढ़ती आबादी के लिए ज़्यादा पौष्टिक भोजन कैसे पैदा किया जाए, बिना ज़मीन और पानी पर ज़्यादा दबाव डाले।</p>



<p>उनका समाधान खेती से निकलने वाले उन बाय-प्रोडक्ट्स (उप-उत्पादों) से शुरू होता है जिन्हें अक्सर कचरा मान लिया जाता है, जैसे गन्ने की खोई (bagasse)। किन्वा बायो फर्मेंटेशन (किण्वन) का इस्तेमाल करती है, जिसमें एक फंगल स्ट्रेन इस बायोमास को प्रोटीन में बदल देता है। इसके बाद, AI-पावर्ड डिजिटल ट्विन टीम को प्रोटीन उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करता है, जिससे वे प्रोसेस को बेहतर बना सकते हैं और बड़े पैमाने पर इसकी क्षमता को समझ सकते हैं।</p>



<p>टीम के अनुसार, इस तरीके से पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन की तुलना में 98–99% कम पानी का इस्तेमाल हो सकता है, कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो सकता है और बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ सकती है।</p>



<p>हालांकि, इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए यह सफ़र सिर्फ़ एक वैज्ञानिक समाधान विकसित करने से कहीं ज़्यादा था। यह इस बारे में था कि कैसे लैब के किसी आइडिया को ऐसी चीज़ में बदला जाए जो असल दुनिया में बदलाव ला सके।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से रचनात्मक समाधान विकसित करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इसका एंड-यूज़र कौन है?</h2>



<p><br>जब नीतीश और गुलशन ने किन्वा बायो पर काम करना शुरू किया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से अपने इनोवेशन के पीछे के विज्ञान पर था।</p>



<p>टीम ने कहा, “हम अपने आइडिया को वैज्ञानिक नज़रिए से पेश कर रहे थे, बिना किसी कहानी या संदर्भ के।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ बूटकैंप में उनके अनुभव ने इस नज़रिए को बदल दिया। मेंटर्स, एक्सपर्ट्स और दूसरे इनोवेटर्स के साथ बातचीत ने उन्हें लैब से परे के सवालों से रूबरू कराया: इसका एंड-यूज़र कौन है? हम किस समस्या का समाधान कर रहे हैं? हम इसके असर के बारे में कैसे बताएँगे? और इस आइडिया को एक कामयाब स्टार्टअप में बदलने के लिए क्या करना होगा?</p>



<p>उन्होंने कहा, “बूटकैंप से सबसे बड़ी सीख यह मिली कि हम किन लोगों से जुड़े और हमें बिज़नेस के माहौल को समझने का मौका मिला।”</p>



<p>टीम ने अपनी पिच (आइडिया पेश करने का तरीका) को अलग तरह से तैयार करना शुरू किया। सिर्फ़ यह बताने के बजाय कि उनकी टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, उन्होंने यह बताना सीखा कि यह क्यों ज़रूरी है — ग्राहकों, निवेशकों और समाज के लिए।</p>



<p>नीतीश और गुलशन के लिए, कहानी सुनाना (स्टोरीटेलिंग) सिर्फ़ एक प्रेजेंटेशन स्किल से कहीं ज़्यादा बन गया। इसने ‘किनवा बायो’ (Kinva Bio) को देखने के उनके नज़रिए को ही बदल दिया — एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट से बदलकर एक ऐसे संभावित बिज़नेस में, जो असल दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता रखता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सोनीपत से ग्लोबल फ़ूड इनोवेशन के मंच तक</h2>



<p><br>टीम के काम ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचना शुरू कर दिया था।</p>



<p>इस पहचान ने युवा इनोवेटर्स को यह दिखाया कि उनका आइडिया क्लासरूम और लैब से बाहर कितनी दूर तक जा सकता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के सफ़र ने उन्हें आगे के सवालों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया: इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा? इसे बड़े पैमाने पर कैसे फैलाया जा सकता है? यूज़र बेस बनाने के लिए क्या करना होगा? और बायोटेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन कैसे कमर्शियली कामयाब सॉल्यूशन बन सकता है?</p>



<p>जैसे-जैसे ‘किनवा बायो’, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के ग्रैंड फ़िनाले की ओर बढ़ रही है, नीतीश और गुलशन अपने साथ एक ऐसा आइडिया लेकर चल रहे हैं जिसकी शुरुआत एक आसान लेकिन अहम सवाल से हुई थी: क्या हम धरती पर कम बोझ डालकर ज़्यादा खाना पैदा कर सकते हैं?</p>



<p>सोनीपत के इन युवा इनोवेटर्स के लिए, इसका जवाब AI, बायोटेक्नोलॉजी और खेती से निकलने वाले कचरे को एक साथ लाने में हो सकता है — और जो चीज़ कभी बेकार कचरा मानी जाती थी, उसे भविष्य के खाने के लिए एक ज़रूरी चीज़ (बिल्डिंग ब्लॉक) में बदलने में।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: टॉप 40 से टॉप 20 तक — टीम मॉर्फ़िज़्म ने बढ़ाया अगला कदम]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:23 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[रायपुर की युवा टीम ‘मॉर्फ़िज़्म’ का सफ़र जारी है; यह टीम अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल हो गई है। नेशनल टॉप 40 में जगह बनाने के बाद, अनन्या अग्रवाल और आदित्यसाईं भक्तषणमुगनंदन ने अपने टेक्नोलॉजी-बेस्ड आइडिया के साथ एक और कदम आगे बढ़ाया है। उनका यह आइडिया एलेक्सिथिमिया […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>रायपुर की युवा टीम ‘मॉर्फ़िज़्म’ का सफ़र जारी है; यह टीम अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल हो गई है।</p>



<p>नेशनल टॉप 40 में जगह बनाने के बाद, अनन्या अग्रवाल और आदित्यसाईं भक्तषणमुगनंदन ने अपने टेक्नोलॉजी-बेस्ड आइडिया के साथ एक और कदम आगे बढ़ाया है। उनका यह आइडिया एलेक्सिथिमिया (alexithymia) से जूझ रहे ऑटिस्टिक लोगों की भावनाओं को समझने के लिए एक ज़्यादा समावेशी तरीका खोजने पर केंद्रित है।</p>



<p>इस वीडियो में, ये युवा इनोवेटर्स बता रहे हैं कि टॉप 20 में जगह बनाने पर उन्हें कैसा लग रहा है, अब तक का सफ़र उनके लिए कैसा रहा है, और अपने आइडिया को अगले चरण में ले जाते हुए वे किन चीज़ों को लेकर उत्साहित हैं।</p>



<p>टीम मॉर्फ़िज़्म को अपने टॉप 20 के पड़ाव और ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमारो’ के साथ अपने सफ़र के बारे में बात करते हुए देखें।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170943/SFT-top-20-Team-morphism-1.mp4"></video></figure>
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					<item>
				<title><![CDATA[Watch: सोमाट्रेस की कहानी – सुरक्षित और स्मार्ट ट्रेनिंग के आइडिया से टॉप 20 तक का सफ़र]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:20 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है। 21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है।</p>



<p>21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल करके रीढ़ की हड्डी की हलचल को रियल-टाइम में ट्रैक करता है। शुरुआत में इसे राइफल शूटरों के लिए विकसित किया जा रहा है, लेकिन इस सॉल्यूशन का मकसद एथलीटों और कोचों को मूवमेंट पैटर्न समझने और ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने के संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद करना है।</p>



<p>होमानशिका से सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वह इस आइडिया को आगे कैसे ले जाना चाहती हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170905/SFT-top-20-Team-Somatrace-LR.mp4"></video></figure>
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				<title><![CDATA[Watch: ‘Samsung Solve for Tomorrow’ की टॉप 20 टीमों में शामिल होने पर Kinva Bio का क्या कहना है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-samsung-solve-for-tomorrow-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%89%e0%a4%aa-20-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%bf</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:18 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल है।</p>



<p>गुलशन कुमार और नीतीश कुमार के लिए, टॉप 20 में जगह बनाना सीखने और नई चीज़ें खोजने का सफ़र रहा है। मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग में मिली मदद से, टीम ने अपने आइडिया को और मज़बूत किया है और यह समझा है कि खेती से जुड़ी किसी स्थानीय समस्या को कैसे एक प्रैक्टिकल इनोवेशन में बदला जा सकता है।</p>



<p>देखें कि Kinva Bio टॉप 20 में शामिल होने को लेकर क्या सोचती है—और वे आगे क्या बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170851/SFT-top-20-Team-Kinva-Bio-LR.mp4"></video></figure>
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							</item>
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				<title><![CDATA[Watch: क्वांटम युग के लिए साइबर सुरक्षा को नए सिरे से सोचने वाली टीम ‘क्वांटहंट’]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:15 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है। 21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन की कमियों का पता लगाने और संगठनों को क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े नए खतरों के लिए अपने डिजिटल सिस्टम को तैयार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>अकुल और सक्षम को सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है—और वे अपने इनोवेशन के ज़रिए डिजिटल सुरक्षा को कैसे मज़बूत करने की उम्मीद करते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170900/SFT-Top-20-Team-QuantHunt-LR.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: ‘4 Percentage’ – हेल्थकेयर और सरकारी जानकारी को ज़्यादा सुलभ बनाने की पहल]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-4-percentage-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 09:33:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल जानकारी को भारतीय भाषाओं में आसान बोलचाल वाले छोटे-छोटे लेसन (माइक्रो-लेसन) में बदल देता है।</p>



<p>देखें कि टीम टॉप 20 में जगह बनाने को लेकर क्या सोचती है और वे कैसे ज़रूरी जानकारी को समझने और उस तक पहुँचने में आसान बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170811/4-Percentage-.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: रोज़मर्रा की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करने वाली टीम JARVISS]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 08:17:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है। संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों का पता लगाता है, उनकी गंभीरता को समझता है और सुरक्षित रास्ते का सुझाव देता है।</p>



<p>इस टीम को सुनिए कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यात्रा को सुरक्षित बनाने की क्या उम्मीद रखते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170825/JARVISS.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: इक्विनॉक्स, वॉइस-फ़र्स्ट AI के ज़रिए सीखने को ज़्यादा आसान बनाने पर]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-%e0%a4%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 08:16:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[नई दिल्ली की इक्विनॉक्स टीम से मिलिए, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है। आदित्य राय और स्पर्श रुहेला SARA AI बना रहे हैं। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट स्टडी साथी है, जिसे दृष्टिबाधित छात्रों की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी मदद से वे बिना स्क्रीन या […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>नई दिल्ली की इक्विनॉक्स टीम से मिलिए, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>आदित्य राय और स्पर्श रुहेला SARA AI बना रहे हैं। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट स्टडी साथी है, जिसे दृष्टिबाधित छात्रों की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी मदद से वे बिना स्क्रीन या कीबोर्ड का इस्तेमाल किए टेक्स्टबुक, स्पष्टीकरण, क्विज़ और पर्सनलाइज़्ड लर्निंग सपोर्ट का फ़ायदा उठा सकते हैं।</p>



<p>देखें कि टीम टॉप 20 में शामिल होने के बारे में क्या सोचती है और वे टेक्नोलॉजी के ज़रिए सीखने को ज़्यादा आसान बनाने की उम्मीद कैसे करते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170844/SFT-Top-20-Team-Equinox-LR.mp4"></video></figure>
]]></content:encoded>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[ओडिशा के सुंदरगढ़ से नेशनल स्टेज तक: कैसे दो छात्र AI का इस्तेमाल करके भारत के होनहार पैरा-एथलीटों को खोज रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%93%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8</link>
				<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 17:04:31 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
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		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते। ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092420/20-Code-Blooded_Odisha.jpg" alt="" class="wp-image-10764" /><figcaption class="wp-element-caption">ParaSync के AI-पावर्ड प्लेटफ़ॉर्म का मकसद अपलोड किए गए वीडियो के ज़रिए खिलाड़ियों की तकनीक और शारीरिक गतिविधियों का विश्लेषण करके, होनहार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</figcaption></figure></div>


<p>‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते।</p>



<p>ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही दोस्त रहे हरिका और रितेश ने एक ट्रिप के दौरान पैरा-एथलीटों की चुनौतियों पर चर्चा शुरू की। उन्हें जो बात सबसे ज़्यादा खटकी, वह थी टैलेंटेड एथलीटों के लिए टैलेंट खोजने वाले आसान इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में।</p>



<p>उनका आइडिया, ‘पैरासिंक’ (ParaSync), अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ में टॉप 20 इनोवेशन में शामिल है। AI-पावर्ड यह प्लेटफ़ॉर्म पैरा-एथलीटों को खोजने और उन्हें सपोर्ट करने के लिए बनाया गया है। इसके ज़रिए वे अपने स्पोर्ट्स परफ़ॉर्मेंस का 10-20 मिनट का वीडियो स्मार्टफोन से रिकॉर्ड या अपलोड कर सकते हैं। इसका कंप्यूटर विज़न सिस्टम स्पोर्ट्स टेक्निक और फ़िज़िकल मैकेनिक्स का एनालिसिस करता है, जबकि प्लेटफ़ॉर्म का मकसद होनहार एथलीटों को नेशनल लेवल के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</p>



<p>एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले युवा अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से क्रिएटिव समाधान विकसित करते हैं।</p>



<p>इस समाधान में खास तौर पर तैयार किए गए वार्म-अप रूटीन, ऑटोमेटेड प्रोग्रेस ट्रैकिंग और सुरक्षित रिकॉर्ड भी शामिल हैं, जो मेडिकल स्क्रीनिंग और एथलीट डेवलपमेंट में मदद कर सकते हैं।</p>



<p>हरिका और रितेश के लिए, चुनौती सिर्फ़ स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने से कहीं ज़्यादा है। वे बताते हैं कि पैरा-एथलीट कोई एक जैसा ग्रुप नहीं है; अलग-अलग एथलीटों को उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग तरह के बदलाव, कोचिंग और सपोर्ट की ज़रूरत होती है।</p>



<p>वटाला हरिका ने कहा, “हम उस समस्या को हल करना चाहते थे जो हम देख रहे थे, और हमें पता था कि हम इसके लिए AI का इस्तेमाल करना चाहते हैं।” “पैरा-एथलीटों और उनकी भर्ती के लिए कुछ भी नहीं है। पैरा-एथलीट एक खास (नीश) मार्केट हैं, लेकिन वे कोई एक ग्रुप नहीं हैं। लोगों को आने वाली चुनौतियों के आधार पर उनके लिए अलग-अलग मॉडल बनाने की ज़रूरत है।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के अनुभव ने टीम को टेक्नोलॉजी से आगे बढ़कर सोचने में मदद की। जब उन्होंने प्रोग्राम में हिस्सा लिया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से समस्या को हल करने पर था। बूटकैंप ने उन्हें इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया कि क्या समाधान बड़े पैमाने पर काम कर सकता है, इसे कौन इस्तेमाल करेगा, और यह कैसे एक टिकाऊ मॉडल बन सकता है।</p>



<p>रितेश राउत्रे ने कहा, “हम सिर्फ़ समस्या को हल करने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन बूटकैंप ने हमें एहसास दिलाया कि इसे बहुत बड़े पैमाने पर समस्या का समाधान करना चाहिए।” “हमने रेवेन्यू मॉडल को समझा और मार्केट के आकार के बारे में बेहतर समझ हासिल की। ​​हम टेक्नीकल बैकग्राउंड वाले लोग हैं, इसलिए मार्केट के नज़रिए से आइडिया को देखना सीखने से हमें यह समझने में मदद मिली कि हम ParaSync को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।”</p>



<p>स्टूडेंट्स के लिए, मेंटरशिप भी इस सफ़र का एक अहम हिस्सा बन गई। हारिका का कहना है कि मेंटर्स ने उन्हें अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने के लिए प्रेरित किया और सबसे ज़रूरी बात, उन्हें अपने आइडिया पर काम जारी रखने का आत्मविश्वास दिया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “मेंटर्स ने मुझे मेरे आइडिया पर भरोसा दिलाया। उन्होंने मुझे अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने में मदद की। मेंटरशिप से हमें समस्या को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।” “समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि आप समस्या को कितनी अच्छी तरह समझते हैं।”</p>



<p>एक टीम के तौर पर उनका सफ़र भी स्वाभाविक रूप से शुरू हुआ। एक ही कॉलेज में पढ़ने और दोस्त होने के नाते, वे एक ट्रिप के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे, तभी ParaSync का आइडिया आकार लेने लगा।</p>



<p>ओडिशा के दो युवा इंजीनियरों के बीच बातचीत के तौर पर शुरू हुई यह पहल अब तक अनजान पैरा-एथलीटों और आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी मौकों के बीच टेक्नोलॉजी-आधारित रास्ता बनाने की कोशिश में बदल गई है।</p>



<p>हारिका के लिए, यह सफ़र उनके व्यक्तिगत विकास को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा सोशल सेक्टर में काम करना चाहती थी। लेकिन फिर मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, और अब मैं समस्याओं को हल करने के लिए इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रही हूँ।”</p>



<p>जैसे-जैसे Code Blooded, Samsung Solve for Tomorrow की टॉप 20 टीमों में से एक के तौर पर आगे बढ़ रही है, हारिका और रितेश को उम्मीद है कि ParaSync यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि एथलीट कहाँ से आता है, इससे यह तय न हो कि उसके टैलेंट पर ध्यान दिया जाएगा या नहीं।</p>
]]></content:encoded>
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