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		<title>Artificial Intelligence &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>Artificial Intelligence &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[सैमसंग इनोवेशन कैंपस के ज़रिए डिंडिगुल की छात्रा ने AI में अपनी जगह बनाई]]></title>
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				<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 17:42:28 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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									<description><![CDATA[जब सुबिक्षा A ने डिंडिगुल के सेंट एंटनी कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंसेज फ़ॉर विमेन में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई शुरू की, तो वह टेक्नोलॉजी की ओर आकर्षित हुईं। उन्होंने पायथन, वेब डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और डेटाबेस की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्हें चिंता थी कि क्या वह इतनी तेज़ी से बदल रहे इस क्षेत्र […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/14174057/IMG-20261001-WA0061-1791978266093-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10878" /></figure>



<p>जब सुबिक्षा A ने डिंडिगुल के सेंट एंटनी कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंसेज फ़ॉर विमेन में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई शुरू की, तो वह टेक्नोलॉजी की ओर आकर्षित हुईं। उन्होंने पायथन, वेब डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और डेटाबेस की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्हें चिंता थी कि क्या वह इतनी तेज़ी से बदल रहे इस क्षेत्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगी।</p>



<p>वह थ्योरी से आगे बढ़कर यह समझना चाहती थीं कि नई टेक्नोलॉजी असल समस्याओं को कैसे हल कर सकती है। वह अनजान चुनौतियों का सामना करने के लिए ज़्यादा आत्मविश्वास भी हासिल करना चाहती थीं।</p>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) ने उन्हें क्लासरूम की सीख को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रैक्टिकल इस्तेमाल से जोड़ने में मदद की। व्यवस्थित लेसन और असाइनमेंट ने उन्हें एक्सपेरिमेंट करने, गलतियों से सीखने और ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ टेक्निकल समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित किया।</p>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस, सैमसंग का एक ग्लोबल एजुकेशन प्रोग्राम है जो व्यवस्थित लर्निंग और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के ज़रिए युवाओं को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी स्किल्स सिखाता है। 2026 में, इसका मकसद पूरे भारत में 20,000 युवाओं को AI में ट्रेनिंग देना है, जिससे देश के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।</p>



<p>सुबिक्षा कहती हैं, “सैमसंग इनोवेशन कैंपस का मेरे पर्सनल और प्रोफेशनल विकास पर बहुत असर पड़ा है। इसने मुझे सिर्फ़ टेक्निकल कॉन्सेप्ट ही नहीं सिखाए, बल्कि सीखने और समस्याओं को सुलझाने के मेरे नज़रिए को भी बदल दिया।”</p>



<p>कॉलेज की ज़िम्मेदारियों के साथ इस प्रोग्राम को मैनेज करने से उनमें अनुशासन, निरंतरता और टाइम-मैनेजमेंट स्किल्स विकसित हुईं—ऐसी आदतें जो उनके अनुसार नौकरी की दुनिया में कदम रखने पर काम आएंगी।</p>



<p>सुबिक्षा AI के बारे में सीखना जारी रखना चाहती हैं और ऐसे समाधानों में योगदान देना चाहती हैं जिनसे सकारात्मक बदलाव आए। इस अनुभव ने मुश्किलों को देखने का उनका नज़रिया बदल दिया है: अब कोई मुश्किल कॉन्सेप्ट उनके लिए खुद पर शक करने की वजह नहीं बनता, बल्कि कोशिश करने, सवाल पूछने और बेहतर बनने का मौका बन जाता है।</p>



<p>उनका अनुभव युवा महिलाओं के लिए प्रैक्टिकल टेक्नोलॉजी एजुकेशन की अहमियत को दिखाता है, क्योंकि अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ में AI स्किल्स तेज़ी से ज़रूरी होती जा रही हैं। खुद काम करके सीखने (hands-on learning) से स्टूडेंट्स को उन क्षेत्रों में भी अपने लिए जगह बनाने का भरोसा मिल सकता है, जो पहले उन्हें अपनी पहुँच से बाहर लगते थे।</p>



<p>“टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली हर लड़की से मैं यही कहूँगी: अपनी काबिलियत को कभी कम न समझें। शुरुआत करने से पहले आपके पास हर सवाल का जवाब होना ज़रूरी नहीं है।”</p>



<p>सुबिक्षा का आत्मविश्वास उनकी स्किल्स के साथ-साथ बढ़ा है। AI में उनका सफ़र अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन अब वह खुद को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखती हैं जो भविष्य को आकार देने वाली टेक्नोलॉजी में योगदान दे सकता है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[दिल्ली के 17 साल के दो छात्र क्लासरूम को ज़्यादा समावेशी बनाने के लिए एक AI साथी बना रहे हैं]]></title>
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				<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 10:06:40 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="585" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/12100352/20260902_124535-1000x585.jpg" alt="" class="wp-image-10852" /><figcaption class="wp-element-caption">‘टीम इक्विनॉक्स’ SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</figcaption></figure>



<p>जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल में कैसे आगे बढ़ सकते हैं और अपनी पढ़ाई में ज़्यादा आज़ादी से कैसे हिस्सा ले सकते हैं?</p>



<p>दिल्ली के 17 साल के दो छात्रों, आदित्य और स्पर्श के लिए, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर काम करना ज़रूरी है।</p>



<p>उन्होंने मिलकर ‘टीम इक्विनॉक्स’ बनाई है और SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका विचार एक साधारण मकसद पर आधारित है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी छात्रों के सीखने के तरीके को बदल रही है, उन अवसरों तक पहुँच इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति स्क्रीन देख सकता है या नहीं।</p>



<p>SARA AI को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि छात्र वॉइस कमांड के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया से जुड़ सकें, स्पीच को टेक्स्ट में बदल सकें, अपनी सीखने की प्रगति को ट्रैक कर सकें और टेस्ट व असेसमेंट में हिस्सा ले सकें। यह लंबे समय तक कोई गतिविधि न होने पर यूज़र्स से संपर्क भी कर सकता है, जिससे सीखने का अनुभव ज़्यादा इंटरैक्टिव बनता है।</p>



<p>इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए, चुनौती सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी बनाना नहीं है। यह इस बात को समझने के बारे में है कि AI कैसे छात्रों को ज़्यादा आज़ादी और आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के लिए नहीं, बल्कि सीखने वाले के लिए बनाना</h2>



<p>विचार अक्सर किसी समस्या से शुरू होते हैं, लेकिन उन्हें उपयोगी बनाने के लिए उन लोगों की बात सुनना ज़रूरी है जो उस समस्या का सामना करते हैं। टीम इक्विनॉक्स ने दिल्ली में 40 से ज़्यादा छात्रों के साथ SARA AI का परीक्षण किया है और दृष्टिबाधित सीखने वालों की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझने के लिए स्कूलों और ट्रस्टों के साथ बातचीत की है।</p>



<p>इन बातचीत से टीम को यह समझने में मदद मिली है कि यह समाधान वास्तविक सीखने के माहौल में कैसे काम कर सकता है, जहाँ सुलभता, इस्तेमाल में आसानी और विश्वसनीयता उतनी ही मायने रखती है जितनी कि खुद टेक्नोलॉजी।</p>



<p>इस अनुभव ने युवा इनोवेटर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी उजागर किया है: एक अच्छा प्रोटोटाइप सिर्फ़ शुरुआत है। किसी समाधान के असरदार होने के लिए, उसे रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करना होगा और उन लोगों के लिए काम करना होगा जिनके लिए उसे बनाया गया है। ‘टीम इक्विनॉक्स’ उन टॉप 20 टीमों में शामिल है जिन्हें ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (SFT) के लिए चुना गया है। यह एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म है जो युवाओं को अपने समुदाय की चुनौतियों को हल करने के लिए साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।<br>इस प्रोग्राम के ज़रिए, टीम को SARA AI को उसके शुरुआती प्रोटोटाइप से आगे ले जाने और यह पता लगाने के लिए गाइडेंस मिल रही है कि इसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक प्रैक्टिकल और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला सॉल्यूशन कैसे बनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">काम करने वाले प्रोटोटाइप से असल दुनिया के सॉल्यूशन तक</h2>



<p>SFT बूटकैंप ने आदित्य और स्पर्श को अपने आइडिया को टेक्नोलॉजी से परे नज़रिए से देखने का मौका दिया। डिज़ाइन थिंकिंग, मार्केटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर हुए सेशन ने उन्हें न सिर्फ़ यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि SARA AI कैसे काम करता है, बल्कि यह भी कि छात्र इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इसकी विश्वसनीयता को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है और इसे एजुकेशनल सेटिंग में लाने के लिए क्या करना होगा।<br><br>मेंटरशिप ने टीम को अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने में मदद की, जबकि सैमसंग और FITT, IIT दिल्ली के साथ वन-ऑन-वन ​​सेशन और सैमसंग के R&D इकोसिस्टम में AI एक्सपर्ट्स से मिले इनपुट ने उन्हें टेक्निकल चुनौतियों से निपटने और मार्केट में उतारने की संभावित स्ट्रेटेजी पर काम करने में मदद की।<br><br>एक आइडिया से असल दुनिया के संभावित सॉल्यूशन तक का सफ़र तय करने वाले 17 साल के इन दो युवाओं के लिए, इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी बनाने के दायरे को और बड़ा कर दिया है। इसने यूज़ेबिलिटी, इम्प्लीमेंटेशन और अपनाए जाने जैसे सवालों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया है।</p>



<p>टीम अब यह पता लगा रही है कि SARA AI को स्कूलों, गैर-सरकारी संगठनों और दृष्टिबाधित छात्रों की मदद करने वाले अन्य संस्थानों द्वारा कैसे अपनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडिया के लिए एक बड़ा क्लासरूम</h2>



<p>टीम इक्विनॉक्स को उम्मीद है कि वे दिल्ली के स्कूलों में SARA AI का विस्तार कर पाएंगे, जिससे लगभग 6,000 छात्रों तक पहुँचने की संभावना है, बशर्ते आगे और डेवलपमेंट और इसे अपनाया जाए।</p>



<p>यह महत्वाकांक्षा बड़ी है, लेकिन आइडिया की शुरुआत रोज़मर्रा की एक ज़रूरत से होती है: उन छात्रों के लिए सीखने को आसान बनाना जिन्हें तब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जब एजुकेशनल अनुभव मुख्य रूप से विज़ुअल इंटरफ़ेस के आधार पर डिज़ाइन किए जाते हैं।</p>



<p>आदित्य और स्पर्श के लिए, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ का सफ़र उस महत्वाकांक्षा को किसी प्रैक्टिकल चीज़ में बदलने के लिए ज़रूरी बातों को समझने का एक मौका है। उनका अनुभव इनोवेशन के बारे में एक बड़ी सीख देता है: काम के समाधान सिर्फ़ तकनीकी संभावनाओं से ही नहीं बनते, बल्कि सुनने, सीखने और लगातार सुधार करते रहने की इच्छा से भी बनते हैं।</p>



<p>जैसे-जैसे AI शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है, ‘टीम इक्विनॉक्स’ एक ऐसे भविष्य के लिए काम कर रही है जिसमें दृष्टिबाधित छात्र भी इन टूल्स का इस्तेमाल ज़्यादा समावेशी तरीके से कर सकें।</p>



<p>दिल्ली के ये दो छात्र, जिनकी उम्र 17 साल है, अभी भी अपने आइडिया पर काम कर रहे हैं। लेकिन SARA AI के ज़रिए वे एक ऐसा सवाल उठा रहे हैं जो उनके क्लासरूम से कहीं ज़्यादा मायने रखता है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी सीखने-सिखाने के तरीके को आगे बढ़ा रही है, हम यह कैसे पक्का कर सकते हैं कि हर किसी को इसके साथ आगे बढ़ने का मौका मिले?</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[अगला बड़ा आइडिया भारत में कहीं से भी आ सकता है: स्टार्टअप फाउंडर्स]]></title>
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				<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 16:07:30 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
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									<description><![CDATA[अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/09160349/collage-of-mentors-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10846" /><figcaption class="wp-element-caption">[बाएं से दाएं] रॉबिन सिंह, संस्थापक, क्लूइक्स; समृद्धि भारद्वाज, संस्थापक, पीसी; दिशांत मिश्रा, संस्थापक, जल संसाधन और अंकित गर्ग, संस्थापक, ईमू मसाला</figcaption></figure>



<p>अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से अपने अनुभव और उन लोगों की समझ का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनकी वे मदद करना चाहते हैं। इनमें अंकित गर्ग, रॉबिन सिंह, समृद्धि भारद्वाज और दिशांत मिश्रा शामिल हैं। उनका मानना ​​है कि टेक्नोलॉजी और जानकारी तक बेहतर पहुँच से भारत के छोटे शहरों और समुदायों से नए आइडिया सामने आ रहे हैं।</p>



<p>IIT दिल्ली-इन्क्यूबेटेड ‘वॉटर रिसोर्सेज़’ के फाउंडर दिशांत मिश्रा ने कहा, “वे सच में ऐसी समस्या को हल करना चाहते हैं जिससे कहीं न कहीं किसी को परेशानी हो रही हो। भले ही मार्केट छोटा दिखे, ये युवा इनोवेटर कोशिश कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं और उन समस्याओं को हल कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मार्केट बनाना दूसरा कदम होगा, और वे दूसरे कदम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शायद यही वह नया बदलाव है जो मैंने इस साल के ग्रुप में देखा है।”</p>



<p>वॉटर-क्वालिटी इंटेलिजेंस स्टार्टअप ‘Cluix’ के फाउंडर रॉबिन सिंह ने देखा है कि कैसे कोई आइडिया प्रोग्राम के बाद भी आगे बढ़ सकता है। बिहार के ग्रामीण इलाके की एक टीम, जिसे उन्होंने मेंटर किया था, ने पानी में आर्सेनिक की समस्या को दूर करने के लिए एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया, चैलेंज जीता और अपने प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ भी किया।</p>



<p>सिंह ने कहा, “वे बिहार के ग्रामीण इलाके से आए थे और असल में वे देख सकते थे कि इस क्षेत्र में कोई समाधान उपलब्ध नहीं था। बहुत कम उम्र में, जब वे सिर्फ़ स्टूडेंट थे, उन्होंने एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया। उस फिल्ट्रेशन सिस्टम ने चैलेंज जीता, और अब वे प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं।”</p>



<p>इस साल, सिंह ‘SignBridge AI’ को मेंटर कर रहे हैं, जो एक ऐसी टीम है जो दिव्यांग लोगों को ज़्यादा आज़ादी से बातचीत करने में मदद करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इससे समाज में समावेशिता बढ़ती है, और हमें ऐसे समाधानों की ज़रूरत है।”</p>



<p>महिलाओं की सेहत के क्षेत्र में काम करने वाली फाउंडर समृद्धि भारद्वाज ने कहा कि टेक्नोलॉजी तक पहुँच ने भूगोल और अवसर के बीच के रिश्ते को बदल दिया है। “पूरे भारत में, टियर 2 और टियर 3 शहरों के छात्रों के पास भी अब ऐसी टेक्नोलॉजी और अनुभव (एक्सपोज़र) है जो उनके कई साथियों और सीनियर के पास नहीं था। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि जगह या लोकेशन अब कोई रुकावट है। भारत के किसी भी हिस्से से कोई भी नया और अनोखा समाधान (इनोवेटिव सॉल्यूशन) आ सकता है।”</p>



<p>क्लीन-लेबल फ़ूड ब्रांड ‘ईमू मसाले’ (EemuMasale) के फ़ाउंडर अंकित गर्ग के लिए, स्थानीय समस्याओं का महत्व उन समुदायों से कहीं आगे तक हो सकता है जहाँ वे सबसे पहले सामने आती हैं। उन्होंने कहा, “पराली जलाना कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है जिसे हल करने के लिए वे काम कर रहे हैं। उन्होंने शायद एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है जो प्रोटीन के वैकल्पिक विकल्प देकर भारत में पोषण की समस्या को भी हल कर सकता है।”</p>



<p>सिंह के अनुसार, इस साल के ग्रुप में आधे आइडिया टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए थे। उन्होंने कहा, “टियर 2 शहरों में लोगों को जो आइडिया मिल रहे हैं, वे कभी-कभी टियर 1 शहरों में दिखने वाले आइडिया से भी बेहतर होते हैं। लोगों का अनुभव और जानकारी (एक्सपोज़र) बढ़ी है, और ऐसे आइडिया को लागू करने का तरीका भी बेहतर हुआ है।”</p>



<p>फ़ाउंडर मेंटरशिप को युवा इनोवेटर्स की मदद करने के एक तरीके के तौर पर देखते हैं, ताकि वे किसी समस्या की पहचान करने से लेकर समाधान विकसित करने और उसे टेस्ट करने तक का सफ़र तय कर सकें। ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) फ़ाइनलिस्ट को स्टार्टअप फ़ाउंडर, एकेडेमिया और इंडस्ट्री के लोगों के साथ लाता है, और उन्हें अपने आइडिया को विकसित करने के लिए मार्गदर्शन और अवसर देता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ युवाओं के लिए सैमसंग का ग्लोबल इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम है। 2026 का एडिशन भारत में इसके पांचवें साल का प्रतीक है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सोनीपत से फ़ूड के भविष्य तक: दो युवा इनोवेटर्स ने फ़सल के कचरे को सस्टेनेबल प्रोटीन में बदला]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 18:32:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए? यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092356/12-KINVA-BIO_Haryana.jpg" alt="" class="wp-image-10756" /><figcaption class="wp-element-caption">किनवा बायो (Kinva Bio) खेती से बचे हुए बायोमास को प्रोटीन में बदलने के लिए फर्मेंटेशन का इस्तेमाल करती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन के मुकाबले बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ती है।</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए?</p>



<p>यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के बचे हुए हिस्से को टिकाऊ प्रोटीन में बदला जा सकता है।</p>



<p>हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM-K) के छात्र, नीतीश और गुलशन ‘किन्वा बायो’ (Kinva Bio) के फाउंडर हैं। यह टीम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) के टॉप 20 में शामिल है। उनका आइडिया दुनिया के फूड सिस्टम के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करता है: बढ़ती आबादी के लिए ज़्यादा पौष्टिक भोजन कैसे पैदा किया जाए, बिना ज़मीन और पानी पर ज़्यादा दबाव डाले।</p>



<p>उनका समाधान खेती से निकलने वाले उन बाय-प्रोडक्ट्स (उप-उत्पादों) से शुरू होता है जिन्हें अक्सर कचरा मान लिया जाता है, जैसे गन्ने की खोई (bagasse)। किन्वा बायो फर्मेंटेशन (किण्वन) का इस्तेमाल करती है, जिसमें एक फंगल स्ट्रेन इस बायोमास को प्रोटीन में बदल देता है। इसके बाद, AI-पावर्ड डिजिटल ट्विन टीम को प्रोटीन उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करता है, जिससे वे प्रोसेस को बेहतर बना सकते हैं और बड़े पैमाने पर इसकी क्षमता को समझ सकते हैं।</p>



<p>टीम के अनुसार, इस तरीके से पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन की तुलना में 98–99% कम पानी का इस्तेमाल हो सकता है, कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो सकता है और बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ सकती है।</p>



<p>हालांकि, इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए यह सफ़र सिर्फ़ एक वैज्ञानिक समाधान विकसित करने से कहीं ज़्यादा था। यह इस बारे में था कि कैसे लैब के किसी आइडिया को ऐसी चीज़ में बदला जाए जो असल दुनिया में बदलाव ला सके।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से रचनात्मक समाधान विकसित करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इसका एंड-यूज़र कौन है?</h2>



<p><br>जब नीतीश और गुलशन ने किन्वा बायो पर काम करना शुरू किया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से अपने इनोवेशन के पीछे के विज्ञान पर था।</p>



<p>टीम ने कहा, “हम अपने आइडिया को वैज्ञानिक नज़रिए से पेश कर रहे थे, बिना किसी कहानी या संदर्भ के।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ बूटकैंप में उनके अनुभव ने इस नज़रिए को बदल दिया। मेंटर्स, एक्सपर्ट्स और दूसरे इनोवेटर्स के साथ बातचीत ने उन्हें लैब से परे के सवालों से रूबरू कराया: इसका एंड-यूज़र कौन है? हम किस समस्या का समाधान कर रहे हैं? हम इसके असर के बारे में कैसे बताएँगे? और इस आइडिया को एक कामयाब स्टार्टअप में बदलने के लिए क्या करना होगा?</p>



<p>उन्होंने कहा, “बूटकैंप से सबसे बड़ी सीख यह मिली कि हम किन लोगों से जुड़े और हमें बिज़नेस के माहौल को समझने का मौका मिला।”</p>



<p>टीम ने अपनी पिच (आइडिया पेश करने का तरीका) को अलग तरह से तैयार करना शुरू किया। सिर्फ़ यह बताने के बजाय कि उनकी टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, उन्होंने यह बताना सीखा कि यह क्यों ज़रूरी है — ग्राहकों, निवेशकों और समाज के लिए।</p>



<p>नीतीश और गुलशन के लिए, कहानी सुनाना (स्टोरीटेलिंग) सिर्फ़ एक प्रेजेंटेशन स्किल से कहीं ज़्यादा बन गया। इसने ‘किनवा बायो’ (Kinva Bio) को देखने के उनके नज़रिए को ही बदल दिया — एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट से बदलकर एक ऐसे संभावित बिज़नेस में, जो असल दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता रखता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सोनीपत से ग्लोबल फ़ूड इनोवेशन के मंच तक</h2>



<p><br>टीम के काम ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचना शुरू कर दिया था।</p>



<p>इस पहचान ने युवा इनोवेटर्स को यह दिखाया कि उनका आइडिया क्लासरूम और लैब से बाहर कितनी दूर तक जा सकता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के सफ़र ने उन्हें आगे के सवालों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया: इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा? इसे बड़े पैमाने पर कैसे फैलाया जा सकता है? यूज़र बेस बनाने के लिए क्या करना होगा? और बायोटेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन कैसे कमर्शियली कामयाब सॉल्यूशन बन सकता है?</p>



<p>जैसे-जैसे ‘किनवा बायो’, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के ग्रैंड फ़िनाले की ओर बढ़ रही है, नीतीश और गुलशन अपने साथ एक ऐसा आइडिया लेकर चल रहे हैं जिसकी शुरुआत एक आसान लेकिन अहम सवाल से हुई थी: क्या हम धरती पर कम बोझ डालकर ज़्यादा खाना पैदा कर सकते हैं?</p>



<p>सोनीपत के इन युवा इनोवेटर्स के लिए, इसका जवाब AI, बायोटेक्नोलॉजी और खेती से निकलने वाले कचरे को एक साथ लाने में हो सकता है — और जो चीज़ कभी बेकार कचरा मानी जाती थी, उसे भविष्य के खाने के लिए एक ज़रूरी चीज़ (बिल्डिंग ब्लॉक) में बदलने में।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[ओडिशा के सुंदरगढ़ से नेशनल स्टेज तक: कैसे दो छात्र AI का इस्तेमाल करके भारत के होनहार पैरा-एथलीटों को खोज रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%93%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8</link>
				<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 17:04:31 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते। ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092420/20-Code-Blooded_Odisha.jpg" alt="" class="wp-image-10764" /><figcaption class="wp-element-caption">ParaSync के AI-पावर्ड प्लेटफ़ॉर्म का मकसद अपलोड किए गए वीडियो के ज़रिए खिलाड़ियों की तकनीक और शारीरिक गतिविधियों का विश्लेषण करके, होनहार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</figcaption></figure></div>


<p>‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते।</p>



<p>ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही दोस्त रहे हरिका और रितेश ने एक ट्रिप के दौरान पैरा-एथलीटों की चुनौतियों पर चर्चा शुरू की। उन्हें जो बात सबसे ज़्यादा खटकी, वह थी टैलेंटेड एथलीटों के लिए टैलेंट खोजने वाले आसान इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में।</p>



<p>उनका आइडिया, ‘पैरासिंक’ (ParaSync), अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ में टॉप 20 इनोवेशन में शामिल है। AI-पावर्ड यह प्लेटफ़ॉर्म पैरा-एथलीटों को खोजने और उन्हें सपोर्ट करने के लिए बनाया गया है। इसके ज़रिए वे अपने स्पोर्ट्स परफ़ॉर्मेंस का 10-20 मिनट का वीडियो स्मार्टफोन से रिकॉर्ड या अपलोड कर सकते हैं। इसका कंप्यूटर विज़न सिस्टम स्पोर्ट्स टेक्निक और फ़िज़िकल मैकेनिक्स का एनालिसिस करता है, जबकि प्लेटफ़ॉर्म का मकसद होनहार एथलीटों को नेशनल लेवल के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</p>



<p>एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले युवा अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से क्रिएटिव समाधान विकसित करते हैं।</p>



<p>इस समाधान में खास तौर पर तैयार किए गए वार्म-अप रूटीन, ऑटोमेटेड प्रोग्रेस ट्रैकिंग और सुरक्षित रिकॉर्ड भी शामिल हैं, जो मेडिकल स्क्रीनिंग और एथलीट डेवलपमेंट में मदद कर सकते हैं।</p>



<p>हरिका और रितेश के लिए, चुनौती सिर्फ़ स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने से कहीं ज़्यादा है। वे बताते हैं कि पैरा-एथलीट कोई एक जैसा ग्रुप नहीं है; अलग-अलग एथलीटों को उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग तरह के बदलाव, कोचिंग और सपोर्ट की ज़रूरत होती है।</p>



<p>वटाला हरिका ने कहा, “हम उस समस्या को हल करना चाहते थे जो हम देख रहे थे, और हमें पता था कि हम इसके लिए AI का इस्तेमाल करना चाहते हैं।” “पैरा-एथलीटों और उनकी भर्ती के लिए कुछ भी नहीं है। पैरा-एथलीट एक खास (नीश) मार्केट हैं, लेकिन वे कोई एक ग्रुप नहीं हैं। लोगों को आने वाली चुनौतियों के आधार पर उनके लिए अलग-अलग मॉडल बनाने की ज़रूरत है।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के अनुभव ने टीम को टेक्नोलॉजी से आगे बढ़कर सोचने में मदद की। जब उन्होंने प्रोग्राम में हिस्सा लिया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से समस्या को हल करने पर था। बूटकैंप ने उन्हें इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया कि क्या समाधान बड़े पैमाने पर काम कर सकता है, इसे कौन इस्तेमाल करेगा, और यह कैसे एक टिकाऊ मॉडल बन सकता है।</p>



<p>रितेश राउत्रे ने कहा, “हम सिर्फ़ समस्या को हल करने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन बूटकैंप ने हमें एहसास दिलाया कि इसे बहुत बड़े पैमाने पर समस्या का समाधान करना चाहिए।” “हमने रेवेन्यू मॉडल को समझा और मार्केट के आकार के बारे में बेहतर समझ हासिल की। ​​हम टेक्नीकल बैकग्राउंड वाले लोग हैं, इसलिए मार्केट के नज़रिए से आइडिया को देखना सीखने से हमें यह समझने में मदद मिली कि हम ParaSync को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।”</p>



<p>स्टूडेंट्स के लिए, मेंटरशिप भी इस सफ़र का एक अहम हिस्सा बन गई। हारिका का कहना है कि मेंटर्स ने उन्हें अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने के लिए प्रेरित किया और सबसे ज़रूरी बात, उन्हें अपने आइडिया पर काम जारी रखने का आत्मविश्वास दिया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “मेंटर्स ने मुझे मेरे आइडिया पर भरोसा दिलाया। उन्होंने मुझे अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने में मदद की। मेंटरशिप से हमें समस्या को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।” “समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि आप समस्या को कितनी अच्छी तरह समझते हैं।”</p>



<p>एक टीम के तौर पर उनका सफ़र भी स्वाभाविक रूप से शुरू हुआ। एक ही कॉलेज में पढ़ने और दोस्त होने के नाते, वे एक ट्रिप के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे, तभी ParaSync का आइडिया आकार लेने लगा।</p>



<p>ओडिशा के दो युवा इंजीनियरों के बीच बातचीत के तौर पर शुरू हुई यह पहल अब तक अनजान पैरा-एथलीटों और आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी मौकों के बीच टेक्नोलॉजी-आधारित रास्ता बनाने की कोशिश में बदल गई है।</p>



<p>हारिका के लिए, यह सफ़र उनके व्यक्तिगत विकास को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा सोशल सेक्टर में काम करना चाहती थी। लेकिन फिर मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, और अब मैं समस्याओं को हल करने के लिए इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रही हूँ।”</p>



<p>जैसे-जैसे Code Blooded, Samsung Solve for Tomorrow की टॉप 20 टीमों में से एक के तौर पर आगे बढ़ रही है, हारिका और रितेश को उम्मीद है कि ParaSync यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि एथलीट कहाँ से आता है, इससे यह तय न हो कि उसके टैलेंट पर ध्यान दिया जाएगा या नहीं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[जब स्ट्रोक के मरीज़ घर लौटते हैं, तो चेतावनी वाले संकेतों पर कौन नज़र रखता है? पंजाब के ये तीन छात्र इसका AI-आधारित समाधान तैयार कर रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 16:44:39 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[प्रबिंदर सिंह, अनीश ग्रोवर और दीपेश कक्कड़ के लिए, जिस समस्या को वे हल करना चाहते थे, वह कोई काल्पनिक या अमूर्त समस्या नहीं थी। पंजाब के SAS नगर के रहने वाले इन तीनों युवा छात्रों ने अपने परिवारों में स्ट्रोक का असर देखा था। इसी निजी अनुभव ने उन्हें एक सवाल सोचने पर मजबूर […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092337/5-NeuroTrace_Punjab.jpg" alt="" class="wp-image-10749" /><figcaption class="wp-element-caption">टीम न्यूरोट्रेस एक AI-पावर्ड स्मार्टफ़ोन सॉल्यूशन बना रही है, जिसे परिवारों को घर पर स्ट्रोक से बचे लोगों की निगरानी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</figcaption></figure></div>


<p>प्रबिंदर सिंह, अनीश ग्रोवर और दीपेश कक्कड़ के लिए, जिस समस्या को वे हल करना चाहते थे, वह कोई काल्पनिक या अमूर्त समस्या नहीं थी। पंजाब के SAS नगर के रहने वाले इन तीनों युवा छात्रों ने अपने परिवारों में स्ट्रोक का असर देखा था। इसी निजी अनुभव ने उन्हें एक सवाल सोचने पर मजबूर किया: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्ट्रोक के मरीज़ों का क्या होता है?</p>



<p>ये तीनों दोस्त एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और अभी इंजीनियरिंग के तीसरे और चौथे साल में हैं। वे ‘NeuroTrace’ नाम का एक AI-पावर्ड स्मार्टफोन सॉल्यूशन बना रहे हैं, जो परिवारों को घर पर ही स्ट्रोक से ठीक हुए मरीज़ों की निगरानी (मॉनिटरिंग) करने में मदद करेगा। उनका यह इनोवेशन ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल है।</p>



<p>वे जिस समस्या पर काम कर रहे हैं, वह अस्पताल की देखभाल और रोज़ाना की निगरानी के बीच का अंतर है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, परिवार ही अक्सर मुख्य देखभाल करने वाले बन जाते हैं, लेकिन न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका-तंत्र से जुड़े) बदलावों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब तक जब तक कि वे किसी गंभीर इमरजेंसी का रूप न ले लें।</p>



<p>NeuroTrace एक ऐसा तरीका पेश करता है जो आसानी से इस्तेमाल हो सकता है और जिसके लिए किसी पहनने योग्य डिवाइस (वियरेबल) की ज़रूरत नहीं होती। यह प्लेटफ़ॉर्म स्मार्टफोन के कैमरे और माइक्रोफ़ोन के ज़रिए रोज़ाना 45 सेकंड का चेक-इन करता है और तीन सिग्नल कैप्चर करता है: आवाज़ का पैटर्न, चेहरे की हरकत और प्रतिक्रिया का समय (रिएक्शन टाइम)। शुरुआती 35 दिनों में, सिस्टम हर मरीज़ के न्यूरोलॉजिकल बेसलाइन (सामान्य स्थिति) को समझता है। इसके बाद, यह उस बेसलाइन से लगातार होने वाले बदलावों पर नज़र रखता है।</p>



<p>गलत अलर्ट (फॉल्स अलार्म) को कम करने के लिए, NeuroTrace मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल करता है। इसमें अलर्ट तभी मिलता है जब दो सिग्नल एक साथ बेसलाइन से अलग व्यवहार दिखाते हैं। परिवार के देखभाल करने वाले WhatsApp के ज़रिए आसान हिंदी भाषा में अलर्ट पा सकते हैं। इस तरह, बिना किसी खास उपकरण या पहनने योग्य डिवाइस के, निगरानी का एक आसान तरीका तैयार हो जाता है।</p>



<p>इन तीनों दोस्तों के लिए, टेक्नोलॉजी चुनौती का सिर्फ़ एक हिस्सा थी। ‘Samsung Solve for Tomorrow’ बूटकैंप में मिले अनुभव ने उन्हें इस बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया कि असल में इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा, वे किनकी ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं और यह आइडिया प्रोटोटाइप से आगे कैसे काम कर सकता है।</p>



<p>प्रबिंदर सिंह ने कहा, “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यह समझने में मदद की कि हमारा असली यूज़र कौन है और हमें किनसे बात करनी चाहिए। जब ​​हमने यूज़र के नज़रिए से सोचना शुरू किया, तो हमारा आइडिया और भी बेहतर हो गया।”</p>



<p>टीम को मेडिकल डेटा के महत्व और उसे संभालने की ज़िम्मेदारी का भी एहसास हुआ। जब वे NeuroTrace को एक लंबे समय तक चलने वाले समाधान के तौर पर विकसित करने के बारे में सोच रहे हैं, तो डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी उनके नज़रिए का अहम हिस्सा बन गए हैं।</p>



<p>अनीश ग्रोवर ने कहा, “शुरुआत में हमने टेक्नोलॉजी और समाधान बनाने के तरीके पर बहुत ध्यान दिया। बूटकैंप में, हमने बड़ी तस्वीर के बारे में सोचना शुरू किया—हमारा एंड-यूज़र, वह समस्या जिसे हम हल कर रहे थे और इसे लंबे समय तक चलने वाला समाधान कैसे बनाया जा सकता है।”</p>



<p>समस्या की निजी प्रकृति ने टीम को उनके मिशन से गहराई से जोड़े रखा है। दीपेश कक्कड़ ने कहा, “हम तीनों के परिवार में ऐसे लोग हैं जिन्होंने इसका अनुभव किया है। इसलिए यह हमारे लिए एक आम समस्या थी, और हम कुछ ऐसा करना चाहते थे जो वास्तव में मदद कर सके।”</p>



<p>उनकी महत्वाकांक्षाएं सिर्फ़ NeuroTrace तक ही सीमित नहीं हैं। तीनों का कहना है कि वे एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे, लेकिन उनके लिए एंटरप्रेन्योरशिप का मतलब किसी ऐसी समस्या को हल करना है जो मायने रखती है।</p>



<p>प्रबिंदर ने कहा, “हम सभी एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे, लेकिन हम एक वास्तविक समस्या को भी हल करना चाहते थे। अब हमारे पास आइडिया है, और हम देखेंगे कि इसे आगे बढ़ाने के लिए हमें क्या मदद मिल सकती है।”</p>



<p>Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक के तौर पर, NeuroTrace अब अपनी टेक्नोलॉजी और समस्या की समझ को अगले चरण तक ले जाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन तीन दोस्तों के लिए, जिन्होंने अपने ही परिवारों में देखी गई समस्या से शुरुआत की थी, यह सफ़र मरीज़ों और उनकी देखभाल करने वालों के लिए—अस्पताल से छुट्टी मिलने के काफी समय बाद भी—एक सरल और सुलभ सुरक्षा घेरा बनाने की कोशिश है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[AI सीखने से लेकर AI के साथ कुछ बनाने तक: सैमसंग इनोवेशन कैंपस के साथ सुनिधिश्री का सफ़र]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/ai-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-ai-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%ac</link>
				<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 13:29:02 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Samsung Innovation Campus]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
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									<description><![CDATA[सुनिधिश्री प्रभाकरन के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ़ पढ़ाई का एक विषय नहीं था—यह संभावनाओं से भरा एक क्षेत्र था। महाराष्ट्र के मुंबई में डी. वाई. पाटिल के रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की फ़ाइनल ईयर की छात्रा, सुनिधिश्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी के साथ सैमसंग […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="562" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06132551/image-2.png" alt="" class="wp-image-10814" /><figcaption class="wp-element-caption">सुनिधिश्री: “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे AI का प्रैक्टिकल अनुभव दिया और थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स को असल दुनिया के कामों में लागू करने में मदद की।”</figcaption></figure>



<p>सुनिधिश्री प्रभाकरन के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ़ पढ़ाई का एक विषय नहीं था—यह संभावनाओं से भरा एक क्षेत्र था।</p>



<p>महाराष्ट्र के मुंबई में डी. वाई. पाटिल के रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की फ़ाइनल ईयर की छात्रा, सुनिधिश्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी के साथ सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) में कदम रखा। उन्होंने पहले ही एकेडमिक प्रोजेक्ट्स और रिसर्च के ज़रिए टेक्नोलॉजी को समझना शुरू कर दिया था और अक्सर अपनी टीमों में लीडर की भूमिका निभाती थीं।</p>



<p>लेकिन वह सिर्फ़ यह जानना नहीं चाहती थीं कि टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है। वह यह सीखना चाहती थीं कि ज़रूरी समस्याओं को हल करने के लिए इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए।</p>



<p>यहीं से सैमसंग इनोवेशन कैंपस के साथ उनका सफ़र शुरू हुआ।</p>



<h2 class="wp-block-heading">जिज्ञासा को काबिलियत में बदलना</h2>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स के ज़रिए, सुनिधिश्री को AI कॉन्सेप्ट्स, डेटा एनालिसिस और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का व्यवस्थित अनुभव मिला। एक्सपर्ट गाइडेंस, असाइनमेंट्स और प्रैक्टिकल लर्निंग के मेल ने उन्हें क्लासरूम में सीखी गई बातों को असल दुनिया के कामों से जोड़ने में मदद की।</p>



<p>उनके लिए, सबसे बड़ी सीख सिर्फ़ टेक्निकल जानकारी नहीं थी, बल्कि एक्सपेरिमेंट करने, आइडियाज़ पेश करने और समस्याओं को अलग नज़रिए से देखने का आत्मविश्वास भी था।</p>



<p>सुनिधिश्री ने कहा, “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे AI का प्रैक्टिकल अनुभव दिया और थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स को असल दुनिया के कामों में लागू करने में मदद की। इस प्रोग्राम ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया और मुझे सीखते रहने और नई चीज़ें बनाने के लिए प्रेरित किया।”</p>



<p>यह आत्मविश्वास जल्द ही उनके एकेडमिक और रिसर्च के कामों में भी दिखने लगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडियाज़ से इनोवेशन तक</h2>



<p>2026 में SIC पूरा करने के बाद, सुनिधिश्री ने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और क्लिनिकल रिसर्च की चुनौतियों से निपटने वाले कई प्रोजेक्ट्स में अपनी AI जानकारी का इस्तेमाल करना शुरू किया।</p>



<p>उन्होंने ‘AI-ड्रिवन ह्यूमन-सेंट्रिक सॉल्यूशंस एंड सस्टेनेबल ट्रांसफॉर्मेशन’ (AI-HCSST 2026) पर दूसरी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में “AI-पावर्ड मेडिकल रिपोर्टिंग एंड क्लिनिकल डैशबोर्ड” पेश किया।</p>



<p>टेक्नोलॉजी को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए AI के इस्तेमाल में उनकी दिलचस्पी के कारण “लीफलेन्स: AI-इंटीग्रेटेड प्लांट डिज़ीज़ डिटेक्शन एंड पर्सनलाइज़्ड केयर थ्रू ए मल्टीलिंगुअल चैटबॉट” प्रोजेक्ट भी सामने आया, जिसे उन्होंने ‘एडवांसिंग टेक्नोलॉजी इन इंजीनियरिंग एंड साइंस’ (ICATES-2025) पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेश किया। यह प्रोजेक्ट अब कॉपीराइट एप्लीकेशन के स्टेज तक पहुँच चुका है। एक और प्रोजेक्ट, “स्मार्ट रिक्रूट: क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए डिजिटल ट्विन्स,” को कम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग और डेटा सिक्योरिटी पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (ICCCDS-2026) में पेश किया गया।</p>



<p>हर प्रोजेक्ट AI के अलग-अलग इस्तेमाल को दिखाता था। साथ मिलकर, उन्होंने कुछ और भी अहम बात दिखाई—एक ऐसा स्टूडेंट जो टेक्नोलॉजी को कागज़ पर मौजूद आइडिया से असल दुनिया में काम आने वाले सॉल्यूशन में बदलने में ज़्यादा कॉन्फिडेंट हो गया है।</p>



<p>सुनिधिश्री ने कई हैकाथॉन में भी हिस्सा लिया और कॉम्पिटिटिव माहौल में अपनी प्रॉब्लम-सॉल्विंग और टेक्निकल स्किल्स को परखा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कॉलेज के बाद की दुनिया के लिए कॉन्फिडेंस बनाना</h2>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस का असर सिर्फ़ प्रोजेक्ट्स और प्रेजेंटेशन तक ही सीमित नहीं था।</p>



<p>जब सुनिधिश्री कॉलेज से वर्कप्लेस में जाने की तैयारी कर रही थीं, तो SIC के ज़रिए बनी टेक्निकल नींव और कॉन्फिडेंस ने प्लेसमेंट प्रोसेस के दौरान उनकी मदद की। उन्हें प्लेसमेंट का मौका मिला, जो उनके प्रोफेशनल सफ़र में एक अहम पड़ाव था।</p>



<p>इस अनुभव ने उन्हें सीखते रहने के लिए भी प्रेरित किया। इंडस्ट्री के लिए खुद को तैयार करने की इच्छा के साथ, उन्होंने अपनी AI स्किल्स के साथ-साथ SAP टेक्नोलॉजीज़ के बारे में भी जानना शुरू किया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “SIC सिर्फ़ एक कोर्स नहीं था जिसे मैंने पूरा किया। यह एक सीढ़ी बन गया—AI में दिलचस्पी रखने से लेकर कॉन्फिडेंस के साथ उससे कुछ बनाने, अपने आइडिया पेश करने और आगे आने वाले मौकों के लिए खुद को तैयार करने तक।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">सफ़र जारी है</h2>



<p>आज, सुनिधिश्री AI को सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि असरदार सॉल्यूशन बनाने के एक टूल के तौर पर देखती हैं।</p>



<p>उनका सफ़र—नई टेक्नोलॉजीज़ के बारे में जानने की उत्सुकता रखने वाले स्टूडेंट से लेकर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में AI-बेस्ड सॉल्यूशन पेश करने और प्रोफेशनल दुनिया में कदम रखने वाले युवा इनोवेटर तक—सही समय पर युवाओं को सही स्किल्स, एक्सपोज़र और कॉन्फिडेंस देने की ताकत को दिखाता है।</p>



<p>और सुनिधिश्री के लिए, यह तो बस शुरुआत है।</p>



<p>उन्होंने AI को समझने की उत्सुकता के साथ शुरुआत की थी। सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने उस उत्सुकता को कुछ नया बनाने के कॉन्फिडेंस में बदलने में उनकी मदद की।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[पार्किंसंस से लेकर गड्ढों तक: तमिलनाडु के 9 छात्रों ने रोज़मर्रा की समस्याओं को हल करने के लिए AI का सहारा लिया]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%a2%e0%a5%8b</link>
				<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 13:13:19 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06131312/uuUntitled-728x410.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Parkinson's]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Tamil Nadu]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4z8RcvM</guid>
									<description><![CDATA[क्या तीन मिनट का WhatsApp वीडियो काम करने वालों को उनके काम में रुकावट डाले बिना सीखने में मदद कर सकता है? क्या कोई स्मार्टफ़ोन आने-जाने वालों को गड्ढों और पानी से भरी सड़कों के बारे में पहले ही चेतावनी दे सकता है? क्या AI-पावर्ड पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल) पार्किंसंस से पीड़ित लोगों को सक्रिय […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="566" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06130848/image-1.png" alt="" class="wp-image-10810" /></figure>



<p>क्या तीन मिनट का WhatsApp वीडियो काम करने वालों को उनके काम में रुकावट डाले बिना सीखने में मदद कर सकता है? क्या कोई स्मार्टफ़ोन आने-जाने वालों को गड्ढों और पानी से भरी सड़कों के बारे में पहले ही चेतावनी दे सकता है? क्या AI-पावर्ड पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल) पार्किंसंस से पीड़ित लोगों को सक्रिय और स्वतंत्र रहने में मदद कर सकता है?</p>



<p>तमिलनाडु की तीन टीमें—4 Percentage, JARVISS और Rogue—इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने की कोशिश कर रही हैं। उनके आइडिया उन्हें Samsung Solve for Tomorrow 2026 के टॉप 20 में ले आए हैं।</p>



<p>MicroLearning AI, SafePath AI और NeuroStride के ज़रिए, चेन्नई और कोयंबटूर के नौ युवा इनोवेटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर और पहनने योग्य तकनीक का इस्तेमाल करके वर्कप्लेस पर सीखने, सड़क सुरक्षा और हेल्थकेयर से जुड़ी रोज़मर्रा की समस्याओं को हल कर रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शॉपफ़्लोर पर सीखना—सिर्फ़ तीन मिनट में</h2>



<p>कोयंबटूर की टीम ‘4 Percentage’ के साजिथ जे, मिथरन बी और कविन ननधा एम के के लिए चुनौती साफ़ थी: पारंपरिक ट्रेनिंग प्रोग्राम को फ़ैक्टरी और फ्रंटलाइन वर्करों के शेड्यूल में फिट करना मुश्किल हो सकता है।</p>



<p>उनका समाधान, MicroLearning AI, जटिल जानकारी को छोटे, दो-से-तीन मिनट के लर्निंग वीडियो में बदल देता है, जिन्हें WhatsApp के ज़रिए वर्करों की अपनी भाषा में भेजा जा सकता है। इस प्लेटफ़ॉर्म को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वर्कप्लेस पर सीखना आसान हो जाए, इसे समझा और पूरा किया जा सके, और कर्मचारियों को लंबे समय तक अपने काम से दूर न जाना पड़े।</p>



<p>AI को WhatsApp की जानी-पहचानी सुविधा और क्षेत्रीय भाषा के कंटेंट के साथ मिलाकर, टीम को उम्मीद है कि वे अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ के वर्करों के लिए ट्रेनिंग को ज़्यादा प्रैक्टिकल बना पाएँगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आने-जाने वालों को सड़क के खतरों के बारे में पहले ही पता लगाने में मदद करना</h2>



<p>चेन्नई की टीम JARVISS, जिसमें संजय कुमार, जीबी अश्विन भगत और वरुण प्रसथ के शामिल हैं, SafePath AI विकसित कर रही है ताकि आने-जाने वालों को गड्ढों, पानी से भरी सड़कों और अन्य खतरों से सुरक्षित रूप से निपटने में मदद मिल सके।</p>



<p>यह प्लेटफ़ॉर्म सड़क के खतरों का पता लगाने, उनकी गंभीरता का आकलन करने और सुरक्षित रास्तों का सुझाव देने के लिए स्मार्टफ़ोन और IoT सेंसर डेटा का इस्तेमाल करता है। इसे संबंधित अधिकारियों को अलर्ट करने के लिए भी डिज़ाइन किया जा रहा है, जिससे असुरक्षित सड़क स्थितियों की तेज़ी से पहचान और समाधान की संभावना बनती है।</p>



<p>आने-जाने वालों से गड्ढे या पानी से भरे रास्ते का सामना करने के बाद प्रतिक्रिया करने के लिए कहने के बजाय, JARVISS उन्हें वहाँ पहुँचने से पहले ही उपयोगी जानकारी देना चाहता है—इस तरह रोज़मर्रा के स्मार्टफ़ोन को सुरक्षित आवाजाही के टूल में बदल रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"> पार्किंसंस से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए AI का इस्तेमाल</h2>



<p>चेन्नई की टीम ‘Rogue’ के लिए चुनौती बहुत मानवीय है: पार्किंसंस से जूझ रहे लोगों को अनचाहे कंपन (tremors) को संभालने में मदद करना, ताकि वे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ज़्यादा आज़ादी से काम कर सकें।<br><br>टीम के सदस्य मनोज कुमार कासिनाथन, जेना आर और क्रिसविन विलियम डी ‘NeuroStride’ बना रहे हैं। यह AI-पावर्ड पहनने योग्य डिवाइस (wearable) है जिसे पार्किंसंस के कारण होने वाले अनचाहे कंपन और जान-बूझकर की जाने वाली मांसपेशियों की हरकत के बीच फ़र्क करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह डिवाइस ज़्यादा नियंत्रित हरकत में मदद करने के लिए टारगेटेड इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन देने की कोशिश करता है।</p>



<p>टीम का बड़ा मकसद एक ऐसा आसान और नॉन-इनवेसिव (बिना सर्जरी वाला) समाधान बनाना है जो पार्किंसंस से जूझ रहे लोगों को ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ रोज़मर्रा के काम करने में मदद कर सके।</p>



<p>तमिलनाडु की ये तीन टीमें ‘Samsung Solve for Tomorrow’ के पांचवें एडिशन के तहत पूरे भारत से चुने गए 20 फ़ाइनलिस्ट में शामिल हैं। इस साल के टॉप 20 प्रतिभागियों में से आधे से ज़्यादा टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं, जो दिखाता है कि युवाओं के नेतृत्व वाला इनोवेशन भारत के पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>फ़ाइनलिस्ट को सैमसंग के एक्सपर्ट्स और IIT दिल्ली के ‘फ़ाउंडेशन फ़ॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र’ (FITT) से लगातार मेंटरशिप मिलेगी। यह मदद उन्हें अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने, अपने समाधानों को वेरिफ़ाई करने और प्रोडक्ट डेवलपमेंट, स्केलेबिलिटी, बिज़नेस स्ट्रैटेजी और मार्केट की तैयारी के बारे में अपनी समझ को मज़बूत करने में मदद करेगी।</p>



<p>टॉप 20 में शामिल हर टीम को प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए 1 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि हर प्रतिभागी को सैमसंग गैलेक्सी Z फ़्लिप स्मार्टफ़ोन मिलेगा। चार विजेता टीमों—हर प्रोग्राम थीम से एक—को FITT-IIT दिल्ली के ज़रिए सैमसंग से कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा।</p>



<p>‘4 Percentage’, ‘JARVISS’ और ‘Rogue’ के लिए, नेशनल स्टेज तक पहुँचना उन समाधानों को बड़े स्तर पर ले जाने का मौका है जो घर-परिवार से जुड़ी समस्याओं से निकले हैं और जिनका असर बहुत बड़ा हो सकता है। उनका सफ़र दिखाता है कि क्रांतिकारी इनोवेशन WhatsApp वीडियो, मुश्किल सफ़र या किसी साधारण हरकत को पूरा करने के रोज़मर्रा के संघर्ष जैसी जानी-पहचानी चीज़ों से भी शुरू हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग ने प्रीमियम आर्किटेक्चरल स्पेस के लिए AI कूलिंग और मूड लाइटिंग वाली नई कैसेट AC लाइनअप लॉन्च की]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%bf</link>
				<pubDate>Mon, 05 Oct 2026 12:50:38 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/05124613/Infinite-One-Way-Casette-AC_Lifestyle.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[B2B]]></category>
		<category><![CDATA[घरेलु उपकरण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[Air Conditioner]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Infinite One-Way Cassette AC]]></category>
		<category><![CDATA[SmartThings]]></category>
		<category><![CDATA[WindFree]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4j4XCaq</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग ने आज अपने नेक्स्ट-जेनरेशन ‘इनफिनिट वन-वे कैसेट AC’ को लॉन्च करने की घोषणा की। इसे प्रीमियम घरों और कमर्शियल जगहों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ आराम, खूबसूरती और स्मार्ट कूलिंग का संगम होता है। मॉडर्न जगहों के लिए डिज़ाइन किए गए इस AC में नौ लाइट मोड वाली ‘एम्बिएंट एज लाइटिंग’, 17,200 […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/05124611/Inccfinite-One-Way-Casette-AC_Lifestyle-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10733" /></figure>



<p>सैमसंग ने आज अपने नेक्स्ट-जेनरेशन ‘इनफिनिट वन-वे कैसेट AC’ को लॉन्च करने की घोषणा की। इसे प्रीमियम घरों और कमर्शियल जगहों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ आराम, खूबसूरती और स्मार्ट कूलिंग का संगम होता है।</p>



<p>मॉडर्न जगहों के लिए डिज़ाइन किए गए इस AC में नौ लाइट मोड वाली ‘एम्बिएंट एज लाइटिंग’, 17,200 माइक्रो-होल्स के ज़रिए ‘विंड-फ्री<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2122.png" alt="™" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> कूलिंग’ (बिना तेज़ हवा के ठंडी हवा) और 13.8 cm की गहराई वाला अल्ट्रा-स्लिम डिज़ाइन है। यह लंबे समय तक चलने वाले ASA (एक्रिलोनिट्राइल स्टाइरीन एक्रिलेट) मटीरियल से बना है। इसमें SmartThings कंट्रोल, AI कम्फर्ट मोड और Intertek सर्टिफाइड एंटी-बैक्टीरियल कॉपर फ़िल्टर जैसी सुविधाएँ हैं, जो लगातार कूलिंग परफॉर्मेंस और साफ़ हवा सुनिश्चित करती हैं।</p>



<p>सैमसंग इंडिया में SAC बिज़नेस के हेड, विपिन अग्रवाल ने कहा, “जैसे-जैसे ग्राहकों की उम्मीदें बदल रही हैं, मॉडर्न स्पेस पारंपरिक कूलिंग से आगे की चीज़ें चाह रहे हैं। वे ऐसे क्लाइमेट सॉल्यूशन चाहते हैं जिनमें थर्मल कम्फर्ट, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन का मेल हो। ‘इनफिनिट वन-वे कैसेट AC’ इसी बदलाव को दिखाता है। यह भारतीय बाज़ार में एक नया इनडोर क्लाइमेट सॉल्यूशन पेश करता है जो एयर कंडीशनिंग को ग्राहकों के अनुभव का एक अहम हिस्सा बनाता है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">मॉडर्न लाइफ़स्टाइल के हिसाब से डिज़ाइन</h2>



<p>‘इनफिनिट वन-वे कैसेट AC’ को प्रीमियम जगहों की तीन मुख्य ज़रूरतों — आराम, खूबसूरती और हवा की क्वालिटी — को ध्यान में रखकर बनाया गया है।</p>



<p>इसकी सबसे खास बात ‘एम्बिएंट एज लाइटिंग’ है, जो AC को सिर्फ़ एक कूलिंग मशीन के बजाय एक डिज़ाइन एलिमेंट में बदल देती है। यह सिस्टम नौ लाइटिंग मोड देता है जो इंसानी सर्केडियन रिदम (शरीर के प्राकृतिक दिन-रात के चक्र) से प्रेरित हैं, जिससे यूज़र्स दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से माहौल को बदल सकते हैं।</p>



<p>वार्म (गर्म), नेचुरल (प्राकृतिक) और कूल (ठंडी) लाइटिंग के विकल्प हाई और लो इंटेंसिटी सेटिंग में उपलब्ध हैं, जो आराम करने, काम करने या मनोरंजन के लिए सही माहौल बनाते हैं। ‘स्मार्ट लाइटिंग इंटेंसिटी मोड’ आस-पास की जगह के साथ नैचुरली घुलने-मिलने के लिए ब्राइटनेस को अपने-आप एडजस्ट करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बिना तेज़ हवा के आराम के लिए WindFree<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2122.png" alt="™" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> कूलिंग</h2>



<p>‘इनफिनिट वन-वे कैसेट AC’ में सैमसंग की अपग्रेडेड ‘वाइड विंड-फ्री<img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2122.png" alt="™" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> टेक्नोलॉजी’ है। इसमें पिछली पीढ़ी के मुकाबले दोगुना चौड़ा पैनल और 17,000 माइक्रो-होल्स वाला बेहतर वाइड आउटलेट दिया गया है। हवा को धीरे-धीरे और समान रूप से फैलाया जाता है, जिससे आरामदायक “स्थिर हवा” वाला माहौल बनता है। इससे तेज़ ठंडी हवा से होने वाली परेशानी खत्म होती है, साथ ही चलने की आवाज़ कम होती है और एनर्जी की बचत होती है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">साफ़ और सेहतमंद हवा</h2>



<p>Infinite One-Way Cassette AC में कॉपर एंटी-बैक्टीरियल फ़िल्टर लगा है जो हवा में मौजूद कणों को पकड़ता है और कुछ हानिकारक बैक्टीरिया को 99% तक कम करने में मदद करता है। यह फ़िल्टर हीट एक्सचेंजर को भी साफ़ रखने में मदद करता है, जिससे लगातार अच्छी कूलिंग और सेहतमंद हवा मिलती है।</p>



<p>प्रीमियम ASA एक्सटीरियर के साथ बना यह AC बेहतरीन UV रेजिस्टेंस और लंबे समय तक चलने की क्षमता देता है, जिससे सालों तक इसकी प्रीमियम फ़िनिश बनी रहती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">SmartThings कंट्रोल</h2>



<p>यूज़र्स अपने Infinite One-Way Cassette AC को बिल्ट-इन Wi-Fi के ज़रिए Samsung SmartThings ऐप से आसानी से कनेक्ट कर सकते हैं, जिससे किसी अतिरिक्त मॉड्यूल की ज़रूरत नहीं पड़ती। वे घर पर हों, ऑफ़िस में हों या कहीं बाहर हों, सीधे अपने स्मार्टफ़ोन से अपने कूलिंग अनुभव को मॉनिटर, मैनेज और पर्सनलाइज़ कर सकते हैं। SmartThings की मुख्य सुविधाओं में वॉइस कंट्रोल, एज लाइटिंग कंट्रोल, वेलकम कूलिंग, एनर्जी मॉनिटरिंग, यूसेज पैटर्न, AI कम्फर्ट मोड के साथ पर्सनलाइज़्ड कूलिंग और पेट केयर शामिल हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कीमत और उपलब्धता</h2>



<p>Infinite One-Way Cassette AC सीरीज़ पूरे भारत में अलग-अलग आर्किटेक्चरल और कूलिंग ज़रूरतों को पूरा करने के लिए VRF और कमर्शियल स्प्लिट (CAC) दोनों कॉन्फ़िगरेशन में उपलब्ध है।</p>



<p>VRF कॉन्फ़िगरेशन बाज़ार में 2.8 kW, 3.6 kW, 5.6 kW और 7.1 kW कूलिंग क्षमता में उपलब्ध है, जबकि कमर्शियल स्प्लिट (CAC) कॉन्फ़िगरेशन 3.5 kW, 5.2 kW और 7.1 kW कूलिंग क्षमता में उपलब्ध है, जिसकी शुरुआती कीमत ₹1,60,000 (GST सहित) है और यह देश भर में कमर्शियल AC चैनल पार्टनर्स के ज़रिए उपलब्ध है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[AI के प्रति जुनून से टेक्नोलॉजी में करियर तक: सैमसंग इनोवेशन कैंपस के साथ दिल्ली की मुस्कान अरोड़ा का सफ़र]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/ai-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b2</link>
				<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 16:49:19 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/01164907/Untitled.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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									<description><![CDATA[मुस्कान अरोड़ा के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमेशा से ही उत्सुकता और संभावनाओं का विषय रहा है। कंप्यूटर एप्लीकेशन की छात्रा होने के नाते, उनका झुकाव टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और प्रॉब्लम-सॉल्विंग की ओर था, और उनका स्पष्ट लक्ष्य टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में करियर बनाना था। लेकिन जब वह क्लासरूम से वर्कप्लेस (काम की दुनिया) में जाने की […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="1000" height="562" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/01164456/image.png" alt="" class="wp-image-10725" /><figcaption class="wp-element-caption">मुस्कान: “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे टेक्नोलॉजी के प्रति अपने जुनून को करियर में बदलने का आत्मविश्वास दिया।”</figcaption></figure></div>


<p>मुस्कान अरोड़ा के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमेशा से ही उत्सुकता और संभावनाओं का विषय रहा है। कंप्यूटर एप्लीकेशन की छात्रा होने के नाते, उनका झुकाव टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और प्रॉब्लम-सॉल्विंग की ओर था, और उनका स्पष्ट लक्ष्य टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में करियर बनाना था।</p>



<p>लेकिन जब वह क्लासरूम से वर्कप्लेस (काम की दुनिया) में जाने की तैयारी कर रही थीं, तो मुस्कान के मन में एक आम सवाल आया: क्या उनकी एकेडमिक जानकारी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की उम्मीदों पर खरी उतरने के लिए काफी थी?</p>



<p>गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन एंड टेक्नोलॉजी (USICT) से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) करते हुए, मुस्कान ने अपनी एकेडमिक पढ़ाई के ज़रिए एक मज़बूत आधार तैयार कर लिया था। फिर भी, उन्हें यह चिंता थी कि क्या उनके पास उस जानकारी को आत्मविश्वास के साथ इस्तेमाल करने के लिए ज़रूरी प्रैक्टिकल स्किल्स और असल दुनिया का अनुभव है।</p>



<p>तभी सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) के साथ उनका सफ़र शुरू हुआ।</p>



<h2 class="wp-block-heading">AI में दिलचस्पी को प्रैक्टिकल लर्निंग में बदलना</h2>



<p>मुस्कान एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ सैमसंग इनोवेशन कैंपस से जुड़ीं — इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना, इसके असल दुनिया में इस्तेमाल को समझना और इंडस्ट्री के लिए तैयार होने के लिए ज़रूरी स्किल्स को मज़बूत करना।</p>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस के तहत, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स किया, जहाँ प्रैक्टिकल असाइनमेंट, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और मेंटर्स के साथ इंटरैक्टिव सेशन ने उन्हें थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स से आगे बढ़कर AI की प्रैक्टिकल समझ विकसित करने में मदद की।</p>



<p>मुस्कान के लिए, यह अनुभव टेक्निकल स्किल्स बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी था।</p>



<p>प्रैक्टिकल AI प्रोजेक्ट्स पर काम करने से उन्हें यह समझने का मौका मिला कि असल दुनिया की चुनौतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। उन्हें मिली मेंटरशिप ने समस्याओं को क्रिएटिव तरीके से हल करने के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि प्रैक्टिकल लर्निंग ने उनकी एनालिटिकल और प्रॉब्लम-सॉल्विंग क्षमताओं को मज़बूत करने में मदद की।</p>



<p>जो शुरुआत थोड़ी हिचकिचाहट के साथ हुई थी, वह धीरे-धीरे उनकी अपनी क्षमताओं पर आत्मविश्वास में बदल गई।</p>



<p>मुस्कान ने कहा, “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे टेक्नोलॉजी के प्रति अपने जुनून को करियर में बदलने का आत्मविश्वास दिया, और इसने मुझे याद दिलाया कि लगातार सीखते रहना ही हर सफलता की नींव है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">AI सीखने से लेकर इंडस्ट्री के लिए तैयार होने तक</h2>



<p>SIC के सफ़र के दौरान मुस्कान ने जो स्किल्स विकसित कीं, वे जल्द ही प्रोफेशनल दुनिया में उनके कदम रखने का एक अहम हिस्सा बन गईं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स से मिले प्रैक्टिकल अनुभव और प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग ने उन्हें मुख्य कॉन्सेप्ट्स की समझ बेहतर करने और समस्याओं को सुलझाने का एक व्यवस्थित तरीका विकसित करने में मदद की। इन सीखों ने उन्हें रिक्रूटमेंट प्रोसेस के दौरान ज़्यादा आत्मविश्वास भी दिया।</p>



<p>जब वह टेक्निकल इंटरव्यू के लिए गईं, तो मुस्कान SIC के ज़रिए विकसित किए गए प्रैक्टिकल ज्ञान और समस्या-समाधान के तरीके का इस्तेमाल कर पाईं। इस अनुभव ने उन्हें अपनी सीख को प्रोफेशनल माहौल में लागू करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार महसूस करने में मदद की।</p>



<p>उनकी कोशिशों का नतीजा एक बड़ी कामयाबी के तौर पर सामने आया — मुस्कान को इंफोसिस में सिस्टम इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिली, जिससे टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनके प्रोफेशनल सफ़र की शुरुआत हुई।</p>



<p>उनके लिए, यह मौका सिर्फ़ नौकरी की दुनिया में पहला कदम रखने से कहीं ज़्यादा है। यह उस सफ़र को दिखाता है जो इंडस्ट्री के लिए तैयार होने पर सवाल उठाने से लेकर उस चुनौती को स्वीकार करने का आत्मविश्वास पाने तक का है।</p>



<p>ऐसा आत्मविश्वास जो क्लासरूम से आगे तक जाता है<br>मुस्कान के इस बदलाव ने उनके आस-पास के लोगों के उनके सपनों को देखने का नज़रिया भी बदल दिया।</p>



<p>इंफोसिस में उनकी नौकरी उनके परिवार के लिए गर्व का पल बन गई, जिससे उनकी काबिलियत पर परिवार का भरोसा और मज़बूत हुआ और साथ ही लगन, लगातार सीखने और सही मौकों की अहमियत भी साबित हुई।</p>



<p>अपने करियर की शुरुआत करते हुए, मुस्कान टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में लगातार सीखने और आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हैं। उनके अनुभव ने उन्हें उन दूसरी युवा महिलाओं के लिए सलाह देने में भी मदद की है जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।</p>



<p>वह कहती हैं, “खुद पर भरोसा रखें, नई चीज़ें जानने की उत्सुकता बनाए रखें, चुनौतियों का सामना करें और कभी भी सीखना बंद न करें।” वह युवा लड़कियों को टेक्नोलॉजी को मौकों से भरे क्षेत्र के तौर पर देखने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।</p>



<p>मुस्कान का सफ़र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति जुनून और इस अनिश्चितता के साथ शुरू हुआ था कि क्या वह अपनी इस दिलचस्पी को करियर में बदल पाएंगी। सैमसंग इनोवेशन कैंपस के ज़रिए, उन्हें अगला कदम उठाने के लिए ज़रूरी प्रैक्टिकल अनुभव और आत्मविश्वास मिला — यानी टेक्नोलॉजी में अपनी दिलचस्पी को अपने प्रोफेशनल सफ़र की नींव बनाना।</p>
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