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		<title>Bootcamp &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>Bootcamp &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[दिल्ली के 17 साल के दो छात्र क्लासरूम को ज़्यादा समावेशी बनाने के लिए एक AI साथी बना रहे हैं]]></title>
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				<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 10:06:40 +0000</pubDate>
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									<description><![CDATA[जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="585" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/12100352/20260902_124535-1000x585.jpg" alt="" class="wp-image-10852" /><figcaption class="wp-element-caption">‘टीम इक्विनॉक्स’ SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</figcaption></figure>



<p>जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल में कैसे आगे बढ़ सकते हैं और अपनी पढ़ाई में ज़्यादा आज़ादी से कैसे हिस्सा ले सकते हैं?</p>



<p>दिल्ली के 17 साल के दो छात्रों, आदित्य और स्पर्श के लिए, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर काम करना ज़रूरी है।</p>



<p>उन्होंने मिलकर ‘टीम इक्विनॉक्स’ बनाई है और SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका विचार एक साधारण मकसद पर आधारित है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी छात्रों के सीखने के तरीके को बदल रही है, उन अवसरों तक पहुँच इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति स्क्रीन देख सकता है या नहीं।</p>



<p>SARA AI को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि छात्र वॉइस कमांड के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया से जुड़ सकें, स्पीच को टेक्स्ट में बदल सकें, अपनी सीखने की प्रगति को ट्रैक कर सकें और टेस्ट व असेसमेंट में हिस्सा ले सकें। यह लंबे समय तक कोई गतिविधि न होने पर यूज़र्स से संपर्क भी कर सकता है, जिससे सीखने का अनुभव ज़्यादा इंटरैक्टिव बनता है।</p>



<p>इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए, चुनौती सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी बनाना नहीं है। यह इस बात को समझने के बारे में है कि AI कैसे छात्रों को ज़्यादा आज़ादी और आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के लिए नहीं, बल्कि सीखने वाले के लिए बनाना</h2>



<p>विचार अक्सर किसी समस्या से शुरू होते हैं, लेकिन उन्हें उपयोगी बनाने के लिए उन लोगों की बात सुनना ज़रूरी है जो उस समस्या का सामना करते हैं। टीम इक्विनॉक्स ने दिल्ली में 40 से ज़्यादा छात्रों के साथ SARA AI का परीक्षण किया है और दृष्टिबाधित सीखने वालों की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझने के लिए स्कूलों और ट्रस्टों के साथ बातचीत की है।</p>



<p>इन बातचीत से टीम को यह समझने में मदद मिली है कि यह समाधान वास्तविक सीखने के माहौल में कैसे काम कर सकता है, जहाँ सुलभता, इस्तेमाल में आसानी और विश्वसनीयता उतनी ही मायने रखती है जितनी कि खुद टेक्नोलॉजी।</p>



<p>इस अनुभव ने युवा इनोवेटर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी उजागर किया है: एक अच्छा प्रोटोटाइप सिर्फ़ शुरुआत है। किसी समाधान के असरदार होने के लिए, उसे रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करना होगा और उन लोगों के लिए काम करना होगा जिनके लिए उसे बनाया गया है। ‘टीम इक्विनॉक्स’ उन टॉप 20 टीमों में शामिल है जिन्हें ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (SFT) के लिए चुना गया है। यह एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म है जो युवाओं को अपने समुदाय की चुनौतियों को हल करने के लिए साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।<br>इस प्रोग्राम के ज़रिए, टीम को SARA AI को उसके शुरुआती प्रोटोटाइप से आगे ले जाने और यह पता लगाने के लिए गाइडेंस मिल रही है कि इसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक प्रैक्टिकल और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला सॉल्यूशन कैसे बनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">काम करने वाले प्रोटोटाइप से असल दुनिया के सॉल्यूशन तक</h2>



<p>SFT बूटकैंप ने आदित्य और स्पर्श को अपने आइडिया को टेक्नोलॉजी से परे नज़रिए से देखने का मौका दिया। डिज़ाइन थिंकिंग, मार्केटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर हुए सेशन ने उन्हें न सिर्फ़ यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि SARA AI कैसे काम करता है, बल्कि यह भी कि छात्र इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इसकी विश्वसनीयता को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है और इसे एजुकेशनल सेटिंग में लाने के लिए क्या करना होगा।<br><br>मेंटरशिप ने टीम को अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने में मदद की, जबकि सैमसंग और FITT, IIT दिल्ली के साथ वन-ऑन-वन ​​सेशन और सैमसंग के R&D इकोसिस्टम में AI एक्सपर्ट्स से मिले इनपुट ने उन्हें टेक्निकल चुनौतियों से निपटने और मार्केट में उतारने की संभावित स्ट्रेटेजी पर काम करने में मदद की।<br><br>एक आइडिया से असल दुनिया के संभावित सॉल्यूशन तक का सफ़र तय करने वाले 17 साल के इन दो युवाओं के लिए, इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी बनाने के दायरे को और बड़ा कर दिया है। इसने यूज़ेबिलिटी, इम्प्लीमेंटेशन और अपनाए जाने जैसे सवालों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया है।</p>



<p>टीम अब यह पता लगा रही है कि SARA AI को स्कूलों, गैर-सरकारी संगठनों और दृष्टिबाधित छात्रों की मदद करने वाले अन्य संस्थानों द्वारा कैसे अपनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडिया के लिए एक बड़ा क्लासरूम</h2>



<p>टीम इक्विनॉक्स को उम्मीद है कि वे दिल्ली के स्कूलों में SARA AI का विस्तार कर पाएंगे, जिससे लगभग 6,000 छात्रों तक पहुँचने की संभावना है, बशर्ते आगे और डेवलपमेंट और इसे अपनाया जाए।</p>



<p>यह महत्वाकांक्षा बड़ी है, लेकिन आइडिया की शुरुआत रोज़मर्रा की एक ज़रूरत से होती है: उन छात्रों के लिए सीखने को आसान बनाना जिन्हें तब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जब एजुकेशनल अनुभव मुख्य रूप से विज़ुअल इंटरफ़ेस के आधार पर डिज़ाइन किए जाते हैं।</p>



<p>आदित्य और स्पर्श के लिए, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ का सफ़र उस महत्वाकांक्षा को किसी प्रैक्टिकल चीज़ में बदलने के लिए ज़रूरी बातों को समझने का एक मौका है। उनका अनुभव इनोवेशन के बारे में एक बड़ी सीख देता है: काम के समाधान सिर्फ़ तकनीकी संभावनाओं से ही नहीं बनते, बल्कि सुनने, सीखने और लगातार सुधार करते रहने की इच्छा से भी बनते हैं।</p>



<p>जैसे-जैसे AI शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है, ‘टीम इक्विनॉक्स’ एक ऐसे भविष्य के लिए काम कर रही है जिसमें दृष्टिबाधित छात्र भी इन टूल्स का इस्तेमाल ज़्यादा समावेशी तरीके से कर सकें।</p>



<p>दिल्ली के ये दो छात्र, जिनकी उम्र 17 साल है, अभी भी अपने आइडिया पर काम कर रहे हैं। लेकिन SARA AI के ज़रिए वे एक ऐसा सवाल उठा रहे हैं जो उनके क्लासरूम से कहीं ज़्यादा मायने रखता है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी सीखने-सिखाने के तरीके को आगे बढ़ा रही है, हम यह कैसे पक्का कर सकते हैं कि हर किसी को इसके साथ आगे बढ़ने का मौका मिले?</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सोनीपत से फ़ूड के भविष्य तक: दो युवा इनोवेटर्स ने फ़सल के कचरे को सस्टेनेबल प्रोटीन में बदला]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a5%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a4</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 18:32:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए? यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092356/12-KINVA-BIO_Haryana.jpg" alt="" class="wp-image-10756" /><figcaption class="wp-element-caption">किनवा बायो (Kinva Bio) खेती से बचे हुए बायोमास को प्रोटीन में बदलने के लिए फर्मेंटेशन का इस्तेमाल करती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन के मुकाबले बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ती है।</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए?</p>



<p>यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के बचे हुए हिस्से को टिकाऊ प्रोटीन में बदला जा सकता है।</p>



<p>हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM-K) के छात्र, नीतीश और गुलशन ‘किन्वा बायो’ (Kinva Bio) के फाउंडर हैं। यह टीम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) के टॉप 20 में शामिल है। उनका आइडिया दुनिया के फूड सिस्टम के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करता है: बढ़ती आबादी के लिए ज़्यादा पौष्टिक भोजन कैसे पैदा किया जाए, बिना ज़मीन और पानी पर ज़्यादा दबाव डाले।</p>



<p>उनका समाधान खेती से निकलने वाले उन बाय-प्रोडक्ट्स (उप-उत्पादों) से शुरू होता है जिन्हें अक्सर कचरा मान लिया जाता है, जैसे गन्ने की खोई (bagasse)। किन्वा बायो फर्मेंटेशन (किण्वन) का इस्तेमाल करती है, जिसमें एक फंगल स्ट्रेन इस बायोमास को प्रोटीन में बदल देता है। इसके बाद, AI-पावर्ड डिजिटल ट्विन टीम को प्रोटीन उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करता है, जिससे वे प्रोसेस को बेहतर बना सकते हैं और बड़े पैमाने पर इसकी क्षमता को समझ सकते हैं।</p>



<p>टीम के अनुसार, इस तरीके से पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन की तुलना में 98–99% कम पानी का इस्तेमाल हो सकता है, कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो सकता है और बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ सकती है।</p>



<p>हालांकि, इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए यह सफ़र सिर्फ़ एक वैज्ञानिक समाधान विकसित करने से कहीं ज़्यादा था। यह इस बारे में था कि कैसे लैब के किसी आइडिया को ऐसी चीज़ में बदला जाए जो असल दुनिया में बदलाव ला सके।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से रचनात्मक समाधान विकसित करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इसका एंड-यूज़र कौन है?</h2>



<p><br>जब नीतीश और गुलशन ने किन्वा बायो पर काम करना शुरू किया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से अपने इनोवेशन के पीछे के विज्ञान पर था।</p>



<p>टीम ने कहा, “हम अपने आइडिया को वैज्ञानिक नज़रिए से पेश कर रहे थे, बिना किसी कहानी या संदर्भ के।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ बूटकैंप में उनके अनुभव ने इस नज़रिए को बदल दिया। मेंटर्स, एक्सपर्ट्स और दूसरे इनोवेटर्स के साथ बातचीत ने उन्हें लैब से परे के सवालों से रूबरू कराया: इसका एंड-यूज़र कौन है? हम किस समस्या का समाधान कर रहे हैं? हम इसके असर के बारे में कैसे बताएँगे? और इस आइडिया को एक कामयाब स्टार्टअप में बदलने के लिए क्या करना होगा?</p>



<p>उन्होंने कहा, “बूटकैंप से सबसे बड़ी सीख यह मिली कि हम किन लोगों से जुड़े और हमें बिज़नेस के माहौल को समझने का मौका मिला।”</p>



<p>टीम ने अपनी पिच (आइडिया पेश करने का तरीका) को अलग तरह से तैयार करना शुरू किया। सिर्फ़ यह बताने के बजाय कि उनकी टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, उन्होंने यह बताना सीखा कि यह क्यों ज़रूरी है — ग्राहकों, निवेशकों और समाज के लिए।</p>



<p>नीतीश और गुलशन के लिए, कहानी सुनाना (स्टोरीटेलिंग) सिर्फ़ एक प्रेजेंटेशन स्किल से कहीं ज़्यादा बन गया। इसने ‘किनवा बायो’ (Kinva Bio) को देखने के उनके नज़रिए को ही बदल दिया — एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट से बदलकर एक ऐसे संभावित बिज़नेस में, जो असल दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता रखता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सोनीपत से ग्लोबल फ़ूड इनोवेशन के मंच तक</h2>



<p><br>टीम के काम ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचना शुरू कर दिया था।</p>



<p>इस पहचान ने युवा इनोवेटर्स को यह दिखाया कि उनका आइडिया क्लासरूम और लैब से बाहर कितनी दूर तक जा सकता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के सफ़र ने उन्हें आगे के सवालों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया: इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा? इसे बड़े पैमाने पर कैसे फैलाया जा सकता है? यूज़र बेस बनाने के लिए क्या करना होगा? और बायोटेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन कैसे कमर्शियली कामयाब सॉल्यूशन बन सकता है?</p>



<p>जैसे-जैसे ‘किनवा बायो’, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के ग्रैंड फ़िनाले की ओर बढ़ रही है, नीतीश और गुलशन अपने साथ एक ऐसा आइडिया लेकर चल रहे हैं जिसकी शुरुआत एक आसान लेकिन अहम सवाल से हुई थी: क्या हम धरती पर कम बोझ डालकर ज़्यादा खाना पैदा कर सकते हैं?</p>



<p>सोनीपत के इन युवा इनोवेटर्स के लिए, इसका जवाब AI, बायोटेक्नोलॉजी और खेती से निकलने वाले कचरे को एक साथ लाने में हो सकता है — और जो चीज़ कभी बेकार कचरा मानी जाती थी, उसे भविष्य के खाने के लिए एक ज़रूरी चीज़ (बिल्डिंग ब्लॉक) में बदलने में।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: सोमाट्रेस की कहानी – सुरक्षित और स्मार्ट ट्रेनिंग के आइडिया से टॉप 20 तक का सफ़र]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:20 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है। 21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल […]]]></description>
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<p>मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है।</p>



<p>21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल करके रीढ़ की हड्डी की हलचल को रियल-टाइम में ट्रैक करता है। शुरुआत में इसे राइफल शूटरों के लिए विकसित किया जा रहा है, लेकिन इस सॉल्यूशन का मकसद एथलीटों और कोचों को मूवमेंट पैटर्न समझने और ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने के संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद करना है।</p>



<p>होमानशिका से सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वह इस आइडिया को आगे कैसे ले जाना चाहती हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170905/SFT-top-20-Team-Somatrace-LR.mp4"></video></figure>
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							</item>
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				<title><![CDATA[Watch: ‘Samsung Solve for Tomorrow’ की टॉप 20 टीमों में शामिल होने पर Kinva Bio का क्या कहना है]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:18 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल है।</p>



<p>गुलशन कुमार और नीतीश कुमार के लिए, टॉप 20 में जगह बनाना सीखने और नई चीज़ें खोजने का सफ़र रहा है। मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग में मिली मदद से, टीम ने अपने आइडिया को और मज़बूत किया है और यह समझा है कि खेती से जुड़ी किसी स्थानीय समस्या को कैसे एक प्रैक्टिकल इनोवेशन में बदला जा सकता है।</p>



<p>देखें कि Kinva Bio टॉप 20 में शामिल होने को लेकर क्या सोचती है—और वे आगे क्या बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170851/SFT-top-20-Team-Kinva-Bio-LR.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: क्वांटम युग के लिए साइबर सुरक्षा को नए सिरे से सोचने वाली टीम ‘क्वांटहंट’]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:15 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है। 21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन की कमियों का पता लगाने और संगठनों को क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े नए खतरों के लिए अपने डिजिटल सिस्टम को तैयार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>अकुल और सक्षम को सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है—और वे अपने इनोवेशन के ज़रिए डिजिटल सुरक्षा को कैसे मज़बूत करने की उम्मीद करते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170900/SFT-Top-20-Team-QuantHunt-LR.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: ‘4 Percentage’ – हेल्थकेयर और सरकारी जानकारी को ज़्यादा सुलभ बनाने की पहल]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-4-percentage-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 09:33:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल जानकारी को भारतीय भाषाओं में आसान बोलचाल वाले छोटे-छोटे लेसन (माइक्रो-लेसन) में बदल देता है।</p>



<p>देखें कि टीम टॉप 20 में जगह बनाने को लेकर क्या सोचती है और वे कैसे ज़रूरी जानकारी को समझने और उस तक पहुँचने में आसान बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170811/4-Percentage-.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: रोज़मर्रा की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करने वाली टीम JARVISS]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 08:17:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4yF9Uvi</guid>
									<description><![CDATA[मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है। संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों का पता लगाता है, उनकी गंभीरता को समझता है और सुरक्षित रास्ते का सुझाव देता है।</p>



<p>इस टीम को सुनिए कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यात्रा को सुरक्षित बनाने की क्या उम्मीद रखते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170825/JARVISS.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: इक्विनॉक्स, वॉइस-फ़र्स्ट AI के ज़रिए सीखने को ज़्यादा आसान बनाने पर]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/watch-%e0%a4%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 08:16:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
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		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4jpLukH</guid>
									<description><![CDATA[नई दिल्ली की इक्विनॉक्स टीम से मिलिए, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है। आदित्य राय और स्पर्श रुहेला SARA AI बना रहे हैं। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट स्टडी साथी है, जिसे दृष्टिबाधित छात्रों की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी मदद से वे बिना स्क्रीन या […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>नई दिल्ली की इक्विनॉक्स टीम से मिलिए, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>आदित्य राय और स्पर्श रुहेला SARA AI बना रहे हैं। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट स्टडी साथी है, जिसे दृष्टिबाधित छात्रों की मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी मदद से वे बिना स्क्रीन या कीबोर्ड का इस्तेमाल किए टेक्स्टबुक, स्पष्टीकरण, क्विज़ और पर्सनलाइज़्ड लर्निंग सपोर्ट का फ़ायदा उठा सकते हैं।</p>



<p>देखें कि टीम टॉप 20 में शामिल होने के बारे में क्या सोचती है और वे टेक्नोलॉजी के ज़रिए सीखने को ज़्यादा आसान बनाने की उम्मीद कैसे करते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170844/SFT-Top-20-Team-Equinox-LR.mp4"></video></figure>
]]></content:encoded>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[ओडिशा के सुंदरगढ़ से नेशनल स्टेज तक: कैसे दो छात्र AI का इस्तेमाल करके भारत के होनहार पैरा-एथलीटों को खोज रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%93%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8</link>
				<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 17:04:31 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092420/20-Code-Blooded_Odisha.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4hJPYQj</guid>
									<description><![CDATA[‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते। ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092420/20-Code-Blooded_Odisha.jpg" alt="" class="wp-image-10764" /><figcaption class="wp-element-caption">ParaSync के AI-पावर्ड प्लेटफ़ॉर्म का मकसद अपलोड किए गए वीडियो के ज़रिए खिलाड़ियों की तकनीक और शारीरिक गतिविधियों का विश्लेषण करके, होनहार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</figcaption></figure></div>


<p>‘टीम कोड ब्लडेड’ की 21 साल की वटाला हरिका और 20 साल के रितेश राउतराय के लिए, यह आइडिया एक साधारण सी बात से शुरू हुआ: टैलेंट कहीं भी हो सकता है, लेकिन मौके हमेशा हर जगह नहीं पहुँचते।</p>



<p>ओडिशा के सुंदरगढ़ के एक ही कॉलेज के छात्र और को-फ़ाउंडर बनने से पहले से ही दोस्त रहे हरिका और रितेश ने एक ट्रिप के दौरान पैरा-एथलीटों की चुनौतियों पर चर्चा शुरू की। उन्हें जो बात सबसे ज़्यादा खटकी, वह थी टैलेंटेड एथलीटों के लिए टैलेंट खोजने वाले आसान इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में।</p>



<p>उनका आइडिया, ‘पैरासिंक’ (ParaSync), अब ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ में टॉप 20 इनोवेशन में शामिल है। AI-पावर्ड यह प्लेटफ़ॉर्म पैरा-एथलीटों को खोजने और उन्हें सपोर्ट करने के लिए बनाया गया है। इसके ज़रिए वे अपने स्पोर्ट्स परफ़ॉर्मेंस का 10-20 मिनट का वीडियो स्मार्टफोन से रिकॉर्ड या अपलोड कर सकते हैं। इसका कंप्यूटर विज़न सिस्टम स्पोर्ट्स टेक्निक और फ़िज़िकल मैकेनिक्स का एनालिसिस करता है, जबकि प्लेटफ़ॉर्म का मकसद होनहार एथलीटों को नेशनल लेवल के टैलेंट स्काउट्स से जोड़ना है।</p>



<p>एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले युवा अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से क्रिएटिव समाधान विकसित करते हैं।</p>



<p>इस समाधान में खास तौर पर तैयार किए गए वार्म-अप रूटीन, ऑटोमेटेड प्रोग्रेस ट्रैकिंग और सुरक्षित रिकॉर्ड भी शामिल हैं, जो मेडिकल स्क्रीनिंग और एथलीट डेवलपमेंट में मदद कर सकते हैं।</p>



<p>हरिका और रितेश के लिए, चुनौती सिर्फ़ स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने से कहीं ज़्यादा है। वे बताते हैं कि पैरा-एथलीट कोई एक जैसा ग्रुप नहीं है; अलग-अलग एथलीटों को उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग तरह के बदलाव, कोचिंग और सपोर्ट की ज़रूरत होती है।</p>



<p>वटाला हरिका ने कहा, “हम उस समस्या को हल करना चाहते थे जो हम देख रहे थे, और हमें पता था कि हम इसके लिए AI का इस्तेमाल करना चाहते हैं।” “पैरा-एथलीटों और उनकी भर्ती के लिए कुछ भी नहीं है। पैरा-एथलीट एक खास (नीश) मार्केट हैं, लेकिन वे कोई एक ग्रुप नहीं हैं। लोगों को आने वाली चुनौतियों के आधार पर उनके लिए अलग-अलग मॉडल बनाने की ज़रूरत है।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के अनुभव ने टीम को टेक्नोलॉजी से आगे बढ़कर सोचने में मदद की। जब उन्होंने प्रोग्राम में हिस्सा लिया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से समस्या को हल करने पर था। बूटकैंप ने उन्हें इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया कि क्या समाधान बड़े पैमाने पर काम कर सकता है, इसे कौन इस्तेमाल करेगा, और यह कैसे एक टिकाऊ मॉडल बन सकता है।</p>



<p>रितेश राउत्रे ने कहा, “हम सिर्फ़ समस्या को हल करने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन बूटकैंप ने हमें एहसास दिलाया कि इसे बहुत बड़े पैमाने पर समस्या का समाधान करना चाहिए।” “हमने रेवेन्यू मॉडल को समझा और मार्केट के आकार के बारे में बेहतर समझ हासिल की। ​​हम टेक्नीकल बैकग्राउंड वाले लोग हैं, इसलिए मार्केट के नज़रिए से आइडिया को देखना सीखने से हमें यह समझने में मदद मिली कि हम ParaSync को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।”</p>



<p>स्टूडेंट्स के लिए, मेंटरशिप भी इस सफ़र का एक अहम हिस्सा बन गई। हारिका का कहना है कि मेंटर्स ने उन्हें अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने के लिए प्रेरित किया और सबसे ज़रूरी बात, उन्हें अपने आइडिया पर काम जारी रखने का आत्मविश्वास दिया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “मेंटर्स ने मुझे मेरे आइडिया पर भरोसा दिलाया। उन्होंने मुझे अलग-अलग नज़रिए से समस्या को देखने में मदद की। मेंटरशिप से हमें समस्या को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।” “समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि आप समस्या को कितनी अच्छी तरह समझते हैं।”</p>



<p>एक टीम के तौर पर उनका सफ़र भी स्वाभाविक रूप से शुरू हुआ। एक ही कॉलेज में पढ़ने और दोस्त होने के नाते, वे एक ट्रिप के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे, तभी ParaSync का आइडिया आकार लेने लगा।</p>



<p>ओडिशा के दो युवा इंजीनियरों के बीच बातचीत के तौर पर शुरू हुई यह पहल अब तक अनजान पैरा-एथलीटों और आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी मौकों के बीच टेक्नोलॉजी-आधारित रास्ता बनाने की कोशिश में बदल गई है।</p>



<p>हारिका के लिए, यह सफ़र उनके व्यक्तिगत विकास को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा सोशल सेक्टर में काम करना चाहती थी। लेकिन फिर मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, और अब मैं समस्याओं को हल करने के लिए इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रही हूँ।”</p>



<p>जैसे-जैसे Code Blooded, Samsung Solve for Tomorrow की टॉप 20 टीमों में से एक के तौर पर आगे बढ़ रही है, हारिका और रितेश को उम्मीद है कि ParaSync यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि एथलीट कहाँ से आता है, इससे यह तय न हो कि उसके टैलेंट पर ध्यान दिया जाएगा या नहीं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[जब स्ट्रोक के मरीज़ घर लौटते हैं, तो चेतावनी वाले संकेतों पर कौन नज़र रखता है? पंजाब के ये तीन छात्र इसका AI-आधारित समाधान तैयार कर रहे हैं]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 16:44:39 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4ATUuob</guid>
									<description><![CDATA[प्रबिंदर सिंह, अनीश ग्रोवर और दीपेश कक्कड़ के लिए, जिस समस्या को वे हल करना चाहते थे, वह कोई काल्पनिक या अमूर्त समस्या नहीं थी। पंजाब के SAS नगर के रहने वाले इन तीनों युवा छात्रों ने अपने परिवारों में स्ट्रोक का असर देखा था। इसी निजी अनुभव ने उन्हें एक सवाल सोचने पर मजबूर […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092337/5-NeuroTrace_Punjab.jpg" alt="" class="wp-image-10749" /><figcaption class="wp-element-caption">टीम न्यूरोट्रेस एक AI-पावर्ड स्मार्टफ़ोन सॉल्यूशन बना रही है, जिसे परिवारों को घर पर स्ट्रोक से बचे लोगों की निगरानी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</figcaption></figure></div>


<p>प्रबिंदर सिंह, अनीश ग्रोवर और दीपेश कक्कड़ के लिए, जिस समस्या को वे हल करना चाहते थे, वह कोई काल्पनिक या अमूर्त समस्या नहीं थी। पंजाब के SAS नगर के रहने वाले इन तीनों युवा छात्रों ने अपने परिवारों में स्ट्रोक का असर देखा था। इसी निजी अनुभव ने उन्हें एक सवाल सोचने पर मजबूर किया: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्ट्रोक के मरीज़ों का क्या होता है?</p>



<p>ये तीनों दोस्त एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और अभी इंजीनियरिंग के तीसरे और चौथे साल में हैं। वे ‘NeuroTrace’ नाम का एक AI-पावर्ड स्मार्टफोन सॉल्यूशन बना रहे हैं, जो परिवारों को घर पर ही स्ट्रोक से ठीक हुए मरीज़ों की निगरानी (मॉनिटरिंग) करने में मदद करेगा। उनका यह इनोवेशन ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल है।</p>



<p>वे जिस समस्या पर काम कर रहे हैं, वह अस्पताल की देखभाल और रोज़ाना की निगरानी के बीच का अंतर है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, परिवार ही अक्सर मुख्य देखभाल करने वाले बन जाते हैं, लेकिन न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका-तंत्र से जुड़े) बदलावों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब तक जब तक कि वे किसी गंभीर इमरजेंसी का रूप न ले लें।</p>



<p>NeuroTrace एक ऐसा तरीका पेश करता है जो आसानी से इस्तेमाल हो सकता है और जिसके लिए किसी पहनने योग्य डिवाइस (वियरेबल) की ज़रूरत नहीं होती। यह प्लेटफ़ॉर्म स्मार्टफोन के कैमरे और माइक्रोफ़ोन के ज़रिए रोज़ाना 45 सेकंड का चेक-इन करता है और तीन सिग्नल कैप्चर करता है: आवाज़ का पैटर्न, चेहरे की हरकत और प्रतिक्रिया का समय (रिएक्शन टाइम)। शुरुआती 35 दिनों में, सिस्टम हर मरीज़ के न्यूरोलॉजिकल बेसलाइन (सामान्य स्थिति) को समझता है। इसके बाद, यह उस बेसलाइन से लगातार होने वाले बदलावों पर नज़र रखता है।</p>



<p>गलत अलर्ट (फॉल्स अलार्म) को कम करने के लिए, NeuroTrace मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल करता है। इसमें अलर्ट तभी मिलता है जब दो सिग्नल एक साथ बेसलाइन से अलग व्यवहार दिखाते हैं। परिवार के देखभाल करने वाले WhatsApp के ज़रिए आसान हिंदी भाषा में अलर्ट पा सकते हैं। इस तरह, बिना किसी खास उपकरण या पहनने योग्य डिवाइस के, निगरानी का एक आसान तरीका तैयार हो जाता है।</p>



<p>इन तीनों दोस्तों के लिए, टेक्नोलॉजी चुनौती का सिर्फ़ एक हिस्सा थी। ‘Samsung Solve for Tomorrow’ बूटकैंप में मिले अनुभव ने उन्हें इस बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया कि असल में इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा, वे किनकी ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं और यह आइडिया प्रोटोटाइप से आगे कैसे काम कर सकता है।</p>



<p>प्रबिंदर सिंह ने कहा, “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यह समझने में मदद की कि हमारा असली यूज़र कौन है और हमें किनसे बात करनी चाहिए। जब ​​हमने यूज़र के नज़रिए से सोचना शुरू किया, तो हमारा आइडिया और भी बेहतर हो गया।”</p>



<p>टीम को मेडिकल डेटा के महत्व और उसे संभालने की ज़िम्मेदारी का भी एहसास हुआ। जब वे NeuroTrace को एक लंबे समय तक चलने वाले समाधान के तौर पर विकसित करने के बारे में सोच रहे हैं, तो डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी उनके नज़रिए का अहम हिस्सा बन गए हैं।</p>



<p>अनीश ग्रोवर ने कहा, “शुरुआत में हमने टेक्नोलॉजी और समाधान बनाने के तरीके पर बहुत ध्यान दिया। बूटकैंप में, हमने बड़ी तस्वीर के बारे में सोचना शुरू किया—हमारा एंड-यूज़र, वह समस्या जिसे हम हल कर रहे थे और इसे लंबे समय तक चलने वाला समाधान कैसे बनाया जा सकता है।”</p>



<p>समस्या की निजी प्रकृति ने टीम को उनके मिशन से गहराई से जोड़े रखा है। दीपेश कक्कड़ ने कहा, “हम तीनों के परिवार में ऐसे लोग हैं जिन्होंने इसका अनुभव किया है। इसलिए यह हमारे लिए एक आम समस्या थी, और हम कुछ ऐसा करना चाहते थे जो वास्तव में मदद कर सके।”</p>



<p>उनकी महत्वाकांक्षाएं सिर्फ़ NeuroTrace तक ही सीमित नहीं हैं। तीनों का कहना है कि वे एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे, लेकिन उनके लिए एंटरप्रेन्योरशिप का मतलब किसी ऐसी समस्या को हल करना है जो मायने रखती है।</p>



<p>प्रबिंदर ने कहा, “हम सभी एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे, लेकिन हम एक वास्तविक समस्या को भी हल करना चाहते थे। अब हमारे पास आइडिया है, और हम देखेंगे कि इसे आगे बढ़ाने के लिए हमें क्या मदद मिल सकती है।”</p>



<p>Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक के तौर पर, NeuroTrace अब अपनी टेक्नोलॉजी और समस्या की समझ को अगले चरण तक ले जाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन तीन दोस्तों के लिए, जिन्होंने अपने ही परिवारों में देखी गई समस्या से शुरुआत की थी, यह सफ़र मरीज़ों और उनकी देखभाल करने वालों के लिए—अस्पताल से छुट्टी मिलने के काफी समय बाद भी—एक सरल और सुलभ सुरक्षा घेरा बनाने की कोशिश है।</p>
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