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		<title>Design Thinking &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>Design Thinking &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[Samsung ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ ने भारत के 135 शहरों में ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ पहुँचाकर अपने पाँचवें साल का जश्न मनाया।]]></title>
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				<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:14:30 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Samantha Gupta]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung CSR initiative]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[अपने मुख्य CSR प्रोग्राम ‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के पांचवें एडिशन के तहत, Samsung इंडिया ने देश भर के 135 शहरों में अपनी ‘डिजाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की हैं, जिससे युवाओं के लिए भारत का सबसे बड़ा ग्रासरूट इनोवेशन प्लेटफॉर्म तैयार हुआ है। ‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) एक देशव्यापी इनोवेशन और […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img width="1000" height="593" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/07/21160334/Students-at-the-Samsung-Solve-For-Tomorrow-2026-Design-Thinking-Workshop-at-Furkating-Senior-Secondary-SchoolAssam_Newsrrom-2.jpg" alt="" class="wp-image-10189" /><figcaption class="wp-element-caption">असम के फुरकाटिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सैमसंग ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप में शामिल छात्र।</figcaption></figure>



<p>अपने मुख्य CSR प्रोग्राम ‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के पांचवें एडिशन के तहत, Samsung इंडिया ने देश भर के 135 शहरों में अपनी ‘डिजाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की हैं, जिससे युवाओं के लिए भारत का सबसे बड़ा ग्रासरूट इनोवेशन प्लेटफॉर्म तैयार हुआ है।</p>



<p>‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) एक देशव्यापी इनोवेशन और एजुकेशन कॉम्पिटिशन है। यह 14 से 22 साल के युवाओं को अपने समुदायों की अहम चुनौतियों की पहचान करने और डिज़ाइन थिंकिंग, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन के ज़रिए टैकनोलजी-बेस्ड समाधान विकसित करने के लिए सशक्त बनाता है। समय के साथ, यह प्रोग्राम भारत की अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स, एंटरप्रेन्योर्स और सोशल चेंजमेकर्स के लिए एक लॉन्चपैड बन गया है।<br><br>इस साल, Samsung ने 184 ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित कीं, जिनमें जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और गुजरात से लेकर त्रिपुरा तक के स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के हज़ारों छात्र शामिल हुए। इन वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को ‘ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन थिंकिंग’ (लोगों की ज़रूरतों पर आधारित डिज़ाइन सोच) से परिचित कराया गया, ताकि वे टेक्नोलॉजी पर आधारित ऐसे समाधान बनाने से पहले असल दुनिया की समस्याओं को समझ सकें, जिनका समाज पर सार्थक प्रभाव पड़े।</p>



<p>डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स के पूरे होने के बाद, ‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। इस चरण में, प्रतिभागियों द्वारा जमा किए गए आइडियाज़ के आधार पर टॉप 100 टीमों को चुना जाएगा, जो आगे चलकर मेंटरशिप, एक्सपर्ट गाइडेंस और और ज़्यादा मूल्यांकन की प्रक्रिया से गुज़रेंगी।</p>



<p><em>“हर बड़ी कामयाबी की शुरुआत सुनने, देखने और सही सवाल पूछने से होती है। ‘</em>Samsung<em>‘</em><em>सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के ज़रिए, हम पूरे भारत के युवाओं में ऐसी सोच विकसित करने में मदद कर रहे हैं, जिसमें वे टैकनोलजी के साथ ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ का इस्तेमाल करके अपने समुदायों की अहम चुनौतियों का समाधान कर सकें। इस प्रोग्राम के पांचवें साल में, देश के हर कोने से नए और अनोखे आइडिया सामने आते देखना बहुत प्रेरणादायक है। हमारा मानना है कि अगली पीढ़ी के उद्यमी और प्रौद्योगिकी के नेता देश के किसी भी कोने से उभर सकते हैं। </em>Samsung <em>को इस बात पर गर्व है कि वह उनके आइडिया को असल दुनिया में बदलाव लाने वाले समाधानों में बदलने में उनकी मदद कर रहा है,” </em>Samsung <em>साउथवेस्ट एशिया के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट, एसपी चुन ने कहा।</em><em></em></p>



<p>छात्रों के विचारों में जो विविधता दिखी, वह खुद भारत की विविधता को दर्शाती थी। डिज़ाइन थिंकिंग की व्यवस्थित एक्सरसाइज़ के ज़रिए, छात्रों ने प्रोग्राम की चार थीम — भारत के लिए AI लिविंग, स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण की स्थिरता, और खेल और टेक्नोलॉजी — के अनुसार चीज़ों को देखना, दूसरों की भावनाओं को समझना, चुनौतियों को परिभाषित करना, नए विचार सोचना और समाधानों के प्रोटोटाइप बनाना सीखा।</p>



<p>छात्रों ने AI-आधारित सिविक  गवर्नेस प्लेटफ़ॉर्म, स्मार्ट फ़ूड क्वालिटी स्कैनर, दिव्यांग लोगों के लिए सहायक तकनीकें, ग्रामीण समुदायों के लिए पोर्टेबल सोलर-पावर्ड रेफ्रिजरेशन, नदियों के पानी की क्वालिटी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करने वाले सिस्टम और ऐसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का प्रस्ताव दिया, जिनसे स्पोर्ट्स कोचिंग और उपकरण ज़्यादा आसानी से मिल सकें।<br><br>हैदराबाद में, इंजीनियरिंग की छात्रा ए. शरण्या राव ने बहुत छोटे प्रदूषकों से होने वाले छिपे हुए खतरों को देखने के बाद, नदी के पानी की क्वालिटी पर नज़र रखने वाले एक रियल-टाइम सिस्टम का कॉन्सेप्ट तैयार किया। उन्होंने कहा, “हमारी नदियों में असली खतरा वह प्लास्टिक नहीं है जो हमें दिखाई देता है; बल्कि वे बहुत छोटे प्रदूषक हैं जो तब तक छिपे रहते हैं जब तक कि नुकसान हो नहीं जाता।”</p>



<p>अहमदाबाद में, नौवीं कक्षा की छात्रा सान्वी नायर ने ग्रामीण इलाकों में खाना और पानी स्टोर करने की चुनौतियों से निपटने के लिए सोलर-पावर्ड पोर्टेबल रेफ्रिजरेटर डिज़ाइन किया। उन्होंने कहा, “गाँवों में मज़दूरों और किसानों को अक्सर अनाज, पानी और खाना स्टोर करने में मुश्किल होती है।”</p>



<p>गुरुग्राम में स्पोर्ट्स और टेक वर्कशॉप में हिस्सा लेने वाले छात्रों ने स्पोर्ट्स के सामान और डिजिटल कोचिंग तक पहुँच बेहतर बनाने के सस्ते तरीकों पर भी चर्चा की और दिखाया कि कैसे टेक्नोलॉजी स्पोर्ट्स को ज़्यादा समावेशी बना सकती है।</p>



<p>भारत में Samsung के 30 साल पूरे होने के मौके पर, ‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो’ का लगातार विस्तार भारत के युवाओं में इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता को बढ़ावा देने के प्रति कंपनी की लंबे समय की प्रतिबद्धता को दिखाता है।</p>



<p>‘Samsung सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप चार टीमों को 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा। साथ ही, उन्हें FITT-IIT दिल्ली से मेंटरशिप, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और इनक्यूबेशन सपोर्ट भी मिलेगा, जिससे वे अपने बेहतरीन आइडियाज़ को असल दुनिया में असरदार इनोवेशन में बदल सकेंगी।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स ने असम से हैदराबाद तक स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु नवाचार को बढ़ावा दिया]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%a1</link>
				<pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:42:33 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Samantha Gupta]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Assam]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Hyderabad]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[भारत के युवा नवप्रवर्तक अपने आसपास की रोजमर्रा की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तकनीक को एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। असम के गोलाघाट में कक्षा 12 के एक छात्र द्वारा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर नए सिरे से सोचने से लेकर हैदराबाद […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img width="1000" height="597" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/07/02154143/2-2.jpg" alt="" class="wp-image-10150" /></figure></div>


<p>भारत के युवा नवप्रवर्तक अपने आसपास की रोजमर्रा की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तकनीक को एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। असम के गोलाघाट में कक्षा 12 के एक छात्र द्वारा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर नए सिरे से सोचने से लेकर हैदराबाद के गांडीपेट में स्कूली छात्रों द्वारा श्रवण क्षमता में कमी और सड़कों की सुगम पहुंच से जुड़ी समस्याओं के समाधान तलाशने तक—चुनौतियां भले ही स्थानीय हों, लेकिन सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के माध्यम से उनका प्रभाव पूरे देश में विस्तार पा रहा है।</p>



<p>अपने देशव्यापी 100-शहर अभियान के तहत, सैमसंग इंडिया ने अपने प्रमुख सॉल्व फॉर टुमॉरो डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स का आयोजन गोलाघाट के फुरकाटिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा हैदराबाद के चैतन्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CBIT) में किया। इन वर्कशॉप्स ने असम में 74 छात्रों और हैदराबाद में 173 छात्रों को प्रेरित किया, जिससे इन दोनों विविध भौगोलिक क्षेत्रों के कुल 247 युवा नवप्रवर्तक एक साथ जुड़े।</p>



<p>वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को ह्यूमन-सेंटर्ड इनोवेशन फ्रेमवर्क से परिचित कराया गया, जिससे उन्हें जमीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने, उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को समझने और सार्थक सामाजिक प्रभाव वाले तकनीक-आधारित समाधान विकसित करने के व्यावहारिक उपकरण मिले। यह पहल युवाओं को चार प्रमुख क्षेत्रों—बेहतर भविष्य के लिए एआई, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और स्पोर्ट्स-टेक—में बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले नवाचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।</p>



<p>फुरकाटिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 16 वर्षीय जाफरीन रहमान ने डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क का उपयोग अपने समुदाय में कचरा प्रबंधन की समस्या के समाधान के लिए किया। उन्होंने कहा, “जब अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक कचरे को फेंकते समय एक साथ मिला दिया जाता है, तो उसका पुनर्चक्रण करना कठिन हो जाता है।” इस समस्या के समाधान के लिए जाफरीन ने सेंसर और QR कोड आधारित गाइडेंस सिस्टम से युक्त स्मार्ट डस्टबिन की परिकल्पना की, जो स्रोत पर ही कचरे का सही पृथक्करण सुनिश्चित करेगा और अंततः लैंडफिल तथा स्थानीय जल स्रोतों तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करेगा।</p>



<p>CBIT, हैदराबाद में आयोजित वर्कशॉप ने 14 वर्षीय ए.के. आश्रिता को श्रवण स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। इसी समूह में 13 वर्षीय छात्राओं टी. नित्या और टी. श्रीलास्या ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों और सीमित गतिशीलता वाले लोगों को सड़क पार करने में आने वाली दैनिक चुनौतियों का अध्ययन किया तथा सड़क पार करने को अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए सहज, तकनीक-आधारित समाधान तलाशे।</p>



<p>इन छात्रों के लिए ये वर्कशॉप्स नवाचार की एक संरचित राह साबित हुईं, जिन्होंने उनके दैनिक अनुभवों और अवलोकनों को ऐसे बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने में मदद की, जो स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ व्यापक सामाजिक प्रभाव भी उत्पन्न करते हैं।</p>



<p>भारत में अपने 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, सैमसंग द्वारा इस वर्ष सॉल्व फॉर टुमॉरो का विस्तार 100 शहरों तक करना—और इसके डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स के माध्यम से अब तक 2,500 से अधिक छात्रों को जोड़ना—युवा-नेतृत्व वाले नवाचार में उसके निरंतर निवेश और आत्मनिर्भर भारत, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा स्टार्टअप इंडिया को आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>



<p>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं। शीर्ष 4 विजेता टीमों को ₹2 करोड़ तक के इनक्यूबेशन ग्रांट्स के साथ-साथ FITT, IIT दिल्ली के माध्यम से मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा।</p>



<p>अपने आइडिया को रजिस्टर करने के लिए <a href="https://www.samsung.com/in/solvefortomorrow/">www.samsung.com/in/solvefortomorrow</a> पर जाएं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग का ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप हैदराबाद के युवाओं को असल दुनिया की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित कर रहा है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0-4</link>
				<pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:39:48 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Hyderabad]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Telangana]]></category>
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									<description><![CDATA[जैसे-जैसे हैदराबाद एक प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के तौर पर विकसित हो रहा है, शहर तेज़ी से हो रहे शहरीकरण की चुनौतियों का भी सामना कर रहा है, जिनमें नदी का प्रदूषण और शहरी कचरे की बढ़ती मात्रा शामिल है। इन मुद्दों से निपटने के लिए नई सोच, स्थानीय समझ और ऐसे युवा बदलाव लाने वालों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-10113 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Telangana-COver.jpg" alt="" width="1000" height="564" /></p>
<p>जैसे-जैसे हैदराबाद एक प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के तौर पर विकसित हो रहा है, शहर तेज़ी से हो रहे शहरीकरण की चुनौतियों का भी सामना कर रहा है, जिनमें नदी का प्रदूषण और शहरी कचरे की बढ़ती मात्रा शामिल है। इन मुद्दों से निपटने के लिए नई सोच, स्थानीय समझ और ऐसे युवा बदलाव लाने वालों (changemakers) की ज़रूरत है जो लंबे समय तक सामाजिक प्रभाव डालने वाले समाधान तैयार कर सकें।</p>
<p>इस सोच को बढ़ावा देने के लिए, सैमसंग इंडिया ने अपने प्रमुख ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) प्रोग्राम के पांचवें एडिशन के तहत हैदराबाद के श्रीनिधि इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में 236 छात्रों के लिए एक खास ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इस सेशन में प्रतिभागियों को लोगों पर केंद्रित डिज़ाइन थिंकिंग के सिद्धांतों से परिचित कराया गया, जिससे वे समुदाय की ज़रूरतों को गहराई से समझ सकें, स्थानीय चुनौतियों की पहचान कर सकें और मकसद-आधारित, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान तैयार कर सकें।</p>
<p>यह वर्कशॉप ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के उस देशव्यापी अभियान का हिस्सा है जो 2026 तक 100 शहरों में चलाया जाएगा। यह प्रोग्राम 14-22 साल के युवा इनोवेटर्स को ज़मीनी स्तर के ऑब्ज़र्वेशन को बड़े पैमाने पर लागू होने वाले आइडिया में बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके लिए AI, हेल्थकेयर, शिक्षा, सस्टेनेबिलिटी और स्पोर्ट-टेक जैसे विषय चुने गए हैं।</p>
<p>अपने आस-पास मौजूद चुनौतियों से प्रेरणा लेते हुए, हैदराबाद के छात्रों ने शहर की नदियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। श्रीनिधि इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की थर्ड-ईयर की छात्रा ए. शरण्या राव ने कहा, “हमारी नदियों में असली ख़तरा वह प्लास्टिक नहीं है जो हमें दिखाई देता है; बल्कि वे सूक्ष्म प्रदूषक हैं जो तब तक छिपे रहते हैं जब तक कि नुकसान हो नहीं जाता।” उनका समाधान पानी की क्वालिटी को रियल-टाइम में मॉनिटर करता है और प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर जाते ही अधिकारियों को अपने-आप अलर्ट भेज देता है।</p>
<p>वहीं, म्युनिसिपल कचरा प्रबंधन की समस्या को हल करने के लिए, फोर्थ-ईयर की छात्रा वी. ज्योश्ना ने एक इंटेलिजेंट डस्टबिन बनाया जो कचरा फेंकते ही उसे अपने-आप अलग-अलग कर देता है। उन्होंने बताया कि जब खाना, प्लास्टिक और कागज़ एक ही बिन में डाल दिए जाते हैं तो रीसाइक्लिंग अक्सर नाकाम हो जाती है। कचरा फेंकते ही उसे अलग-अलग करने की प्रक्रिया को ऑटोमेट करके, उनकी टीम शहरी रीसाइक्लिंग की दर में ज़बरदस्त सुधार करना चाहती है।</p>
<p>भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ का बड़े पैमाने पर विस्तार युवाओं के विकास में कंपनी की एक प्रमुख लीडर के तौर पर भूमिका को उजागर करता है। एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े टैलेंट को बढ़ावा देकर, यह मकसद-आधारित पहल भारत की विकास यात्रा में सीधे तौर पर भागीदार बनती है और ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्किल इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देती है। Samsung Solve for Tomorrow 2026 के लिए 14-22 साल के व्यक्ति और टीमें 3 जुलाई, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। अपने आइडिया को रजिस्टर करने के लिए <a href="https://www.samsung.com/in/solvefortomorrow/">www.samsung.com/in/solvefortomorrow</a> पर जाएं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Samsung ‘Solve for Tomorrow’ डिज़ाइन थिंकिंग का इस्तेमाल करके गाज़ियाबाद के छात्रों को भारत के डिजिटल डिलीवरी इकोसिस्टम के लिए AI समाधान खोजने में मदद करता है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/samsung-solve-for-tomorrow-%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8</link>
				<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 09:00:47 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Ghaziabad]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4uLccG5</guid>
									<description><![CDATA[जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भारतीयों के रोज़मर्रा की सेवाओं तक पहुँचने के तरीके को बदल रहे हैं, युवा इनोवेटर तेज़ी से यह पता लगा रहे हैं कि नई तकनीकें कैसे ज़्यादा आसान, कुशल और यूज़र-केंद्रित अनुभव बना सकती हैं। गाज़ियाबाद के न्यू एरा स्कूल में आयोजित सैमसंग ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ की डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप में, छात्रों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-9979 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/cov.jpg" alt="" width="1000" height="563" /></p>
<p>जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भारतीयों के रोज़मर्रा की सेवाओं तक पहुँचने के तरीके को बदल रहे हैं, युवा इनोवेटर तेज़ी से यह पता लगा रहे हैं कि नई तकनीकें कैसे ज़्यादा आसान, कुशल और यूज़र-केंद्रित अनुभव बना सकती हैं। गाज़ियाबाद के न्यू एरा स्कूल में आयोजित सैमसंग ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ की डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप में, छात्रों ने देखा कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के तेज़ी से बढ़ते डिजिटल डिलीवरी इकोसिस्टम के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकता है।</p>
<p>सैमसंग ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ सैमसंग इंडिया का मुख्य शिक्षा और इनोवेशन प्रोग्राम है, जिसे देश की अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को असल दुनिया की चुनौतियों के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान बनाने के लिए सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 14-22 साल के युवाओं के लिए खुला यह प्रोग्राम प्रतिभागियों को चार विषयों – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण स्थिरता और स्पोर्ट-टेक – में विचारों को असरदार इनोवेशन में बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>वर्कशॉप में 300 से ज़्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें सैमसंग की डिज़ाइन थिंकिंग कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया – यह एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण है जो प्रतिभागियों को समाधान विकसित करने से पहले यूज़र की ज़रूरतों को गहराई से समझने के लिए प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>प्रतिभागियों में साइंस की छात्राएँ दिशा गर्ग और राशि शर्मा भी शामिल थीं, जिन्होंने तेज़ी से बदलते डिजिटल डिलीवरी इकोसिस्टम में अवसरों को तलाशने का फ़ैसला किया। पहले से तय समाधान से शुरुआत करने के बजाय, दोनों ने ग्राहकों, डिलीवरी पार्टनर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के अनुभवों को समझने पर ध्यान केंद्रित किया ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहाँ टेक्नोलॉजी सुविधा, पारदर्शिता और यूज़र अनुभव को और बेहतर बना सकती है।</p>
<p>एम्पैथी मैपिंग, स्टेकहोल्डर एनालिसिस और समस्या-परिभाषा अभ्यास के ज़रिए मिली जानकारी का उपयोग करते हुए, उन्होंने एक AI-सक्षम एप्लिकेशन की कल्पना की, जिसे डिलीवरी यात्रा के विभिन्न चरणों में बेहतर जानकारी के प्रवाह और निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।</p>
<p>गाज़ियाबाद के न्यू एरा स्कूल की छात्रा दिशा गर्ग ने कहा, “सैमसंग ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के ज़रिए हमने टेक्नोलॉजी को देखने से पहले लोगों को देखना सीखा। डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप ने हमें यह समझने में मदद की कि इनोवेशन असल ज़रूरतों की पहचान करने और अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से कैसे शुरू होता है।”</p>
<p>राशि शर्मा ने कहा, “वर्कशॉप ने हमें यूज़र की जानकारी के ज़रिए हर विचार को परखने की चुनौती दी। इसने हमें दिखाया कि रोज़मर्रा के अनुभवों को बेहतर बनाने और सार्थक प्रभाव पैदा करने के लिए AI का सोच-समझकर कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।”</p>
<p>जैसे-जैसे सैमसंग भारत में 30 साल पूरे कर रहा है, कंपनी ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के दायरे को काफ़ी बढ़ा रही है। पूरे भारत के 100 शहरों में आयोजित की जा रही डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप के ज़रिए, सैमसंग हज़ारों युवाओं को ज़मीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने, मानव-केंद्रित समाधान विकसित करने और विचारों को बड़े पैमाने पर लागू होने वाले इनोवेशन में बदलने के कौशल से लैस कर रहा है। यह पहल सैमसंग के इस विश्वास को दिखाती है कि इनोवेशन की अगली लहर देश के हर कोने से आ सकती है।</p>
<p>इस प्रोग्राम के आखिर में, टॉप चार जीतने वाली टीमों को 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा, जिससे उन्हें अपने आइडिया को और बेहतर बनाने और बड़े स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी। हिस्सा लेने वालों को मेंटरशिप, ट्रेनिंग, प्रोटोटाइपिंग में मदद और भारत के बड़े स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम से जुड़ने का मौका भी मिलेगा।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ डिज़ाइन थिंकिंग को सीधे क्लासरूम और कैंपस तक लाकर युवा भारतीयों को अपनी सोच को मौकों में और आइडिया को असरदार समाधानों में बदलने के लिए प्रेरित करता रहता है।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के लिए 14-22 साल के युवा 3 जुलाई, 2026 तक अप्लाई कर सकते हैं। ये युवा इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के ज़रिए असल दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>ज़्यादा जानकारी और अप्लाई करने के लिए, इस वेबसाइट पर जाएं: <a href="http://www.samsung.com/in/solvefortomorrow">www.samsung.com/in/solvefortomorrow</a></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
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				<title><![CDATA[सैमसंग ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ हरियाणा के छात्रों को इनोवेशन के ज़रिए खेलों तक पहुँच के बारे में नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित करता है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%b9</link>
				<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:22:31 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-feature.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Haryana]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/3Qur1Pt</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया के खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ ने गुरुग्राम के ODM इंटरनेशनल में अपनी ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इसमें 193 छात्रों ने हिस्सा लिया और उन्हें ज़मीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने और समाज पर असल असर डालने वाले टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-9975 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover.jpg" alt="" width="1000" height="564" /></p>
<p>सैमसंग इंडिया के खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ ने गुरुग्राम के ODM इंटरनेशनल में अपनी ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इसमें 193 छात्रों ने हिस्सा लिया और उन्हें ज़मीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने और समाज पर असल असर डालने वाले टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p>यह वर्कशॉप ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जो 100 शहरों में चलाया जा रहा है। इसका मकसद 14-22 साल के युवाओं में इनोवेशन की संस्कृति को बढ़ावा देना और उन्हें AI, हेल्थ, एजुकेशन, सस्टेनेबिलिटी और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का समाधान करने के लिए सशक्त बनाना है।</p>
<p>इस सेशन के दौरान सामने आए आइडिया में से एक प्रोजेक्ट युवाओं के लिए स्पोर्ट्स तक पहुंच बेहतर बनाने पर केंद्रित था। छात्रों ने बताया कि अच्छी क्वालिटी के इक्विपमेंट और कोचिंग की ज़्यादा कीमत अक्सर प्रतिभाशाली लोगों को गंभीरता से स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने से रोकती है, जबकि हरियाणा भारत के प्रमुख स्पोर्ट्स राज्यों में से एक है।</p>
<p>ODM इंटरनेशनल के 12वीं कक्षा के छात्र हर्ष गुप्ता ने कहा, “वर्कशॉप में आने पर मुझे बस इतना एहसास था कि कौन खेल पाता है और कौन पीछे रह जाता है, इसमें कुछ गड़बड़ है।” “डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क ने हमें लोगों के सामने आने वाली असली रुकावटों को समझने और उन ऑब्ज़र्वेशन को एक स्पष्ट समस्या के बयान में बदलने में मदद की।”</p>
<p>11वीं कक्षा के छात्र मोक्ष यादव ने कहा, “वर्कशॉप ने हमें बड़े आइडिया को प्रैक्टिकल समाधान में बदलने में मदद की। हम एक किफायती मॉडल पर काम कर रहे हैं जो स्पोर्ट्स इक्विपमेंट तक पहुंच और डिजिटल ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को जोड़ता है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा युवा इसमें हिस्सा ले सकें, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।”</p>
<p>डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप छात्रों को इंसानों पर केंद्रित इनोवेशन के तरीकों से परिचित कराती है, जिससे उन्हें समस्याओं की पहचान करने से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने में मदद मिलती है। प्रैक्टिकल एक्सरसाइज़ और मिलकर सीखने के ज़रिए, प्रतिभागी यूज़र्स की ज़रूरतों को समझना, चुनौतियों को परिभाषित करना और ऐसे समाधान बनाना सीखते हैं जिन पर अमल किया जा सके।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ को ज़मीनी स्तर पर इनोवेशन की एक पाइपलाइन बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि युवा अपने समुदायों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकें। पिछले कुछ वर्षों में, इस प्रोग्राम ने पूरे भारत में हज़ारों छात्रों को अपने आइडिया को असरदार इनोवेशन में बदलने में मदद की है।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के लिए एप्लीकेशन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं। यह प्रोग्राम प्रतिभागियों को ट्रेनिंग, मेंटरशिप, प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट और इनोवेशन वर्कशॉप की सुविधा देता है। टॉप चार विजेता टीमों को FITT, IIT दिल्ली में 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा, साथ ही उनके समाधानों को और विकसित करने के लिए एक्सपर्ट मेंटरशिप और सपोर्ट भी मिलेगा। जैसे-जैसे सैमसंग पूरे भारत में इस प्रोग्राम का विस्तार कर रहा है, गुरुग्राम जैसी वर्कशॉप यह दिखाती रहती हैं कि इनोवेशन अक्सर किसी स्थानीय समस्या के बारे में एक साधारण सी बात पर गौर करने—और उसे हल करने के पक्के इरादे—से शुरू होता है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग उत्तर प्रदेश के कैंपस में ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ लेकर आया है, जो युवा इनोवेटर्स को प्रोडक्ट बनाने से पहले समस्याओं को हल करने की चुनौती देता है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%88</link>
				<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:30:09 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/feature-sft-gn.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4uGhbrV</guid>
									<description><![CDATA[ज़्यादातर स्टूडेंट इनोवेशन किसी समाधान (solution) से शुरू होते हैं। बहुत कम ही किसी समस्या से शुरू होते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में, छात्र अक्सर महीनों तक बेहतरीन प्रोटोटाइप बनाने में बिता देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि जिस समस्या को वे हल करने निकले थे, वह या तो है ही नहीं, या […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-9956 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA.jpg" alt="" width="1000" height="564" /></p>
<p>ज़्यादातर स्टूडेंट इनोवेशन किसी समाधान (solution) से शुरू होते हैं। बहुत कम ही किसी समस्या से शुरू होते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में, छात्र अक्सर महीनों तक बेहतरीन प्रोटोटाइप बनाने में बिता देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि जिस समस्या को वे हल करने निकले थे, वह या तो है ही नहीं, या बहुत कम लोगों को प्रभावित करती है, या असल दुनिया में उसकी कोई अहमियत नहीं है। यह एक ऐसी कमी है जिसने चुपचाप अनगिनत अच्छे आइडिया की क्षमता को सीमित कर दिया है। Samsung Solve for Tomorrow इसे बदलने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>अपने खास देशव्यापी इनोवेशन प्रोग्राम के तहत, Samsung India ने IIT Delhi के साथ मिलकर हाल ही में ग्रेटर नोएडा के GNIOT ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस में ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इसमें पूरे उत्तर प्रदेश से उभरते हुए इनोवेटर्स को एक साथ लाया गया ताकि वे एंटरप्रेन्योरशिप का एक बहुत ज़रूरी सबक सीख सकें: समाधान बनाने से पहले समस्या को समझना ज़रूरी है।</p>
<p>यह वर्कशॉप ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ का हिस्सा थी। यह एक राष्ट्रीय प्रोग्राम है जो 14 से 22 साल के युवा भारतीयों को टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। ये समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण की स्थिरता, और खेल और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने के लिए होते हैं। कोडिंग, इंजीनियरिंग या प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, इस सेशन में प्रतिभागियों को अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने, यूज़र्स से जुड़ने, आइडिया को परखने और यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि जिन समस्याओं को वे हल करना चाहते थे, वे असल में क्लासरूम के बाहर मौजूद हैं या नहीं।</p>
<p>कई छात्रों के लिए, यह अनुभव उनके नज़रिए में बदलाव लाने वाला था। GNIOT के तीसरे साल के छात्र कबीर सिंह ने कहा, “हम अक्सर मान लेते हैं कि कोई आइडिया इसलिए अच्छा है क्योंकि वह सुनने में नया और अनोखा लगता है।” “इस वर्कशॉप ने हमें यह समझने में मदद की कि आइडिया जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी उसका लागू होना (implementation), उसकी व्यावहारिकता (feasibility) और यूज़र की ज़रूरतें भी हैं।”</p>
<p>दूसरे साल के छात्र रवि कुशवाहा ने इस वर्कशॉप को इनोवेशन के बारे में बिल्कुल नए सिरे से सोचने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, “इससे मुझे यह समझने में मदद मिली कि असल दुनिया की चुनौतियों की पहचान कैसे करें और किसी समस्या को हल करने की कोशिश करने से पहले यह कैसे परखें कि वह समस्या सच में मौजूद है या नहीं।” यह वर्कशॉप भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाती है। जैसे-जैसे देश पारंपरिक स्टार्टअप हब से आगे बढ़कर एंटरप्रेन्योर्स और समस्या-समाधान करने वालों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश कर रहा है, प्रोग्राम्स में अब टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन, क्रिटिकल थिंकिंग और ज़मीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान करने पर भी ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p>Samsung Solve for Tomorrow एक ऐसे ही प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर उभरा है, जो युवा इनोवेटर्स को सिर्फ़ कॉन्सेप्ट से आगे बढ़कर ऐसे समाधान विकसित करने में मदद कर रहा है जिनका समाज पर मापने योग्य असर हो। 2026 का एडिशन इस प्रोग्राम का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार है, जिसमें देश भर के 100 शहरों में ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की जाएंगी। इसमें हिस्सा लेने वालों को ट्रेनिंग, मेंटरशिप, प्रोटोटाइपिंग में मदद और इंडस्ट्री से जुड़ी सलाह मिलेगी, ताकि वे शुरुआती स्टेज के आइडिया को काम के इनोवेशन में बदल सकें।</p>
<p>प्रोग्राम के आखिर में, टॉप चार जीतने वाली टीमों को IIT दिल्ली में 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा, जिससे वे अपने सॉल्यूशन को और बेहतर बना सकेंगी और बड़े पैमाने पर लागू कर पाएँगीं।</p>
<p>जैसे-जैसे भारत की इनोवेशन से जुड़ी महत्वाकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ जैसी पहल यह पक्का करने में मदद कर रही हैं कि आने वाली पीढ़ी के इनोवेटर सिर्फ़ टेक्नोलॉजी बनाने पर ही नहीं, बल्कि उन समस्याओं को हल करने पर भी ध्यान दें जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के लिए एप्लीकेशन 3 जुलाई, 2026 तक खुले रहेंगे।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[डिज़ाइन थिंकिंग: एआई युग में टेक्नॉलॉजी का दिल तक पहुंचने का रास्ता]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae</link>
				<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 17:36:14 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/09/feature-sft-boot.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Innovators]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow Season 3]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/48fwhNi</guid>
									<description><![CDATA[वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30056 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_125619.jpg" alt="" width="2964" height="2164" /></p>
<p>वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे हैं। हालाँकि, वे जो खोज रहे हैं, वह स्वयं नवाचारों की तरह ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो सकता है: कि डिज़ाइन थिंकिंग केवल एक टूलकिट नहीं है, बल्कि एक मानसिकता है जो सहानुभूति, धैर्य और असफलता के प्रति खुलेपन की माँग करती है।</p>
<p>पिछले सप्ताह, प्रतिभागी मार्गदर्शकों, कार्यशालाओं और FITT प्रयोगशालाओं के अपने पहले अनुभव के माध्यम से विचारों में पूर्णता की तीव्र खोज में लगे रहे।</p>
<p>एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित दुनिया में जहाँ गति और स्वचालन सार्वजनिक चर्चा में हावी हैं, इन छात्रों को याद दिलाया जा रहा है कि तकनीक की असली परीक्षा यह है कि क्या यह मानव हृदय और मानव व्यवहार से जुड़ सकती है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30055 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250909_151634.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>समस्या के साथ बैठना</h3>
<p>इस संदर्भ में, पिंक ब्रिगेडियर्स की कहानी पर बात करना उचित होगा। इस टीम में महाराष्ट्र के विवेक सावंत और ओडिशा की श्रेया आदित्य दलाई शामिल हैं, दोनों एनआईटी राउरकेला के इंजीनियरिंग छात्र हैं। इस साल वे क्या कर रहे हैं? वे भारत के पहले एआई-संचालित ब्रेस्ट केयर ऐप पर काम कर रहे हैं। पहली नज़र में, यह एक तकनीकी चमत्कार है: एज डिप्लॉयमेंट के साथ कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क जो विसंगतियों का पता लगा सकता है और महिलाओं को डॉक्टरों से जोड़ सकता है। लेकिन वे मानते हैं कि यह सफलता कोड में नहीं है।</p>
<p>“हमारे उत्पाद के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। डिज़ाइन थिंकिंग प्रशिक्षण ने हमें समस्या पर अधिक समय तक विचार करने, उपयोगकर्ताओं को अधिक गहराई से समझने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार ढलने के लिए प्रोत्साहित किया। यूएक्स/यूआई और विश्वास उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि एआई।”</p>
<p>उनके लिए, डिज़ाइन थिंकिंग एक अनुस्मारक है कि कोई ऐप किसी को कैसा महसूस कराता है, यह उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है जितना कि वह क्या करता है। एक गहरी निजी स्वास्थ्य चिंता के लिए तकनीक बनाने का मतलब है कि स्वर, रंग पैलेट, भाषा और इंटरफ़ेस, सभी सहानुभूति के प्रश्न बन जाते हैं। यह अंतर्दृष्टि हाल ही में स्टैनफोर्ड के शोध से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि निष्पक्ष और भरोसेमंद एआई सिस्टम बनाने के लिए न केवल एल्गोरिदम पर ध्यान देने की आवश्यकता है, बल्कि पारदर्शिता, एज-केस व्यवहार और उपयोगकर्ता की सुविधा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30054 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250908_113245.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>एआई का मानवीकरण</h3>
<p>दूसरी ओर, FITT लैब के अंदर एक जोड़ी अपने उत्पाद से एआई के बारे में सीख समझने की कोशिश कर रही है – एआई कैसे बुद्धिमत्ता प्रदान कर सकता है, और डिज़ाइन थिंकिंग इसे कैसे बोधगम्य बना सकती है।</p>
<p>माइंडस्नैप को ही लीजिए, जो कोलकाता की देवयानी गुप्ता और सायन अधिकारी द्वारा बनाया गया एक व्यक्तिगत शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, दोनों इंजीनियरिंग के छात्र हैं। बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) द्वारा संचालित, यह प्लेटफ़ॉर्म न्यूरोडाइवर्सिटी सीखने वालों के अनुकूल है, चाहे वे डिस्लेक्सिक हों, स्पेक्ट्रम पर हों, या बस खेलों के माध्यम से बेहतर सीखते हों।</p>
<p>वे बताते हैं, “हमने महसूस किया कि अगर इंटरफ़ेस सीखने वाले से बात नहीं करता है तो कोई भी एल्गोरिदम काम नहीं करता है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यूएक्स/यूआई, पहुँच और छात्रों के जीवंत अनुभव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।”</p>
<p>चेन्नई के आदित्य वर्मा मामा सहेली एआई के साथ एक ऐसी ही खोज कर रहे हैं, जो एक समग्र गर्भावस्था ऐप है जो उनकी माँ के उन दूरदराज के इलाकों के अनुभव से प्रेरित है जहाँ चिकित्सा की पहुँच सीमित थी।</p>
<p>“मेरा ऐप एक दोस्त की तरह महसूस होना चाहिए था, न कि सिर्फ़ एक टूल की तरह। डिज़ाइन की सोच ने मुझे इसे उपयोगकर्ता की भावनाओं, व्यवहार और यहाँ तक कि सांस्कृतिक संदर्भ के माध्यम से देखने के लिए प्रेरित किया। यही इसे मापनीय और विश्वसनीय बनाता है,” वे कहते हैं।</p>
<p>उनका ऐप सूचनाओं को संश्लेषित करता है, गलत सूचनाओं को फ़िल्टर करता है, और पहनने योग्य उपकरणों के साथ एकीकृत होकर अति-व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करता है, लेकिन इसकी आत्मा साहचर्य के विचार में निहित है। उनका दृष्टिकोण PADTHAI-MM ढाँचे के अनुरूप है, जो दर्शाता है कि पारदर्शी, मानव-केंद्रित डिज़ाइन, उपयोगकर्ता संदर्भ के साथ व्याख्यात्मकता को मिलाकर, अपारदर्शी “ब्लैक बॉक्स” AI की तुलना में कहीं अधिक विश्वास पैदा करता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30057 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_1333390.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>पैमाने के लिए एक रणनीति के रूप में डिज़ाइन</h3>
<p>लुधियाना की पृथ्वीरक्षक टीम: 12वीं कक्षा के अभिषेक ढांडा, प्रभकीरत सिंह और रचिता चंडोक, देश के पहले मॉड्यूलर स्वचालित वर्मीकंपोस्टिंग केंद्र के ज़रिए भारत की विशाल अपशिष्ट प्रबंधन समस्या से जूझ रहे हैं।</p>
<p>यह विचार एक कक्षा प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, और अब यह प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और 90-दिवसीय कंपोस्टिंग प्रक्रिया को केवल 30 दिनों में समेटने की तीन साल की यात्रा बन गया है।</p>
<p>वे बताते हैं, “परंपरागत रूप से, वर्मीकंपोस्टिंग श्रम-गहन और पैमाने पर लागू करना कठिन रहा है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें ऐसे मॉड्यूलर मॉडल की कल्पना करने में मदद की जो किसी बगीचे, हाउसिंग सोसाइटी या यहाँ तक कि शहरी स्तर पर भी काम कर सकें।”</p>
<p>उनके लिए, स्केलेबिलिटी का मतलब आकार नहीं, बल्कि अनुकूलनशीलता है, यानी किसानों, शहरी परिवारों या नगर पालिकाओं की सेवा के लिए एक ही मूल विचार को आकार देने की क्षमता।</p>
<h3></h3>
<h3>सफ़र, मंज़िल नहीं</h3>
<p>इनमें से किसी भी टीम को नहीं पता कि वे अंततः सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो चुनौती जीत पाएँगे या नहीं। उनके प्रोटोटाइप अभी भी अपूर्ण हैं; उनके पिच डेक अभी भी पुनर्लेखन के दौर से गुज़र रहे हैं। फिर भी, जो चीज़ उन्हें एक साथ बांधती है, वह यह मान्यता है कि डिज़ाइन थिंकिंग ने उनके दृष्टिकोण में पहले ही बदलाव कर लिया है।</p>
<p>जबकि एआई को लेकर वैश्विक चर्चाएँ अक्सर नैतिकता, पूर्वाग्रह और गति के सवालों में उलझ जाती हैं, ये युवा समस्या-समाधानकर्ता अपने नवाचारों को किसी पुरानी और स्थिर चीज़ पर आधारित कर रहे हैं: मानव-केंद्रित डिज़ाइन।</p>
<p>वे खोज रहे हैं कि एआई, मस्तिष्क हो सकता है। लेकिन डिज़ाइन थिंकिंग, अपनी विनम्रता और अनुशासन के साथ, हृदय है। और जैसे-जैसे ये छात्र शीर्ष 20 में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे, यह सबसे महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकता है।</p>
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				<title><![CDATA[सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के साथ युवा भारत बना बदलाव का अग्रदूत]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%95</link>
				<pubDate>Mon, 19 May 2025 11:08:47 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/feature-SFT.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2025]]></category>
		<category><![CDATA[Young India]]></category>
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									<description><![CDATA[भारत के युवाओं के बीच एक सशक्त परिवर्तन आकार ले रहा है। सैमसंग का “सॉल्व फॉर टुमॉरो” सीज़न 4 जैसे ही पूरे जोश में शुरू हुआ, देशभर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में नवाचार की लहर दौड़ गई है। यह अब केवल एक प्रतियोगिता नहीं रही — यह एक आंदोलन बन चुका है, जो युवाओं को […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><div id="attachment_8748" style="width: 1010px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-8748" class="wp-image-8748 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT.jpg" alt="" width="1000" height="564" /><p id="caption-attachment-8748" class="wp-caption-text">कल के लिए समाधान 2025: युवा मस्तिष्कों को समस्याओं को अवसर के रूप में तथा नवाचार को जीवन जीने का तरीका समझने के लिए प्रेरित करना</p></div></p>
<p>भारत के युवाओं के बीच एक सशक्त परिवर्तन आकार ले रहा है। सैमसंग का “सॉल्व फॉर टुमॉरो” सीज़न 4 जैसे ही पूरे जोश में शुरू हुआ, देशभर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में नवाचार की लहर दौड़ गई है। यह अब केवल एक प्रतियोगिता नहीं रही — यह एक आंदोलन बन चुका है, जो युवाओं को न केवल सपने देखने की, बल्कि उन्हें साकार करने का मंच भी दे रहा है।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत के बाद, सैमसंग ने देशभर में डिज़ाइन थिंकिंग कार्यशालाएँ और ओपन हाउस सत्र आरंभ किए हैं। दिल्ली, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला, लुधियाना, पानीपत और अन्य शहरों में अब तक २० से अधिक सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें विद्यालयों के ३७०० और महाविद्यालयों के ४८०० से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया है।</p>
<p>सैमसंग का लक्ष्य है कि यह पहल देश के हर कोने तक पहुँचे — चाहे वह पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियाँ हों या कश्मीर की वादियाँ। पिछले वर्ष यह कार्यक्रम नगालैंड और कश्मीर तक पहुँचा था, और इस वर्ष यह और भी व्यापक रूप ले रहा है।</p>
<h3>समस्याओं को अवसर में बदलने की सोच</h3>
<p>हर कार्यशाला में युवा छात्र-छात्राएँ अपनी जिज्ञासाओं, सपनों और समस्याओं के साथ सामने आ रहे हैं। ओ. पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में आयोजित एक डिज़ाइन थिंकिंग ओपन हाउस में विद्यार्थियों ने समाज की वास्तविक समस्याओं को गहराई से समझा और उनके समाधान की दिशा में विचार प्रस्तुत किए।</p>
<p>विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी ने कहा, “‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ छात्रों को वह सोच और दृष्टिकोण देता है जो पारंपरिक कक्षाओं में अक्सर नहीं मिलते — यथार्थ समस्याओं को पहचानना और उनके व्यावहारिक, नवाचारी समाधान खोजना।”</p>
<p>छात्रों ने साझा किया कि इन सत्रों ने उन्हें सहानुभूति, सहयोग और समाधान-निर्माण की नई दृष्टि दी।</p>
<p>“इस कार्यशाला ने मेरी एक धुंधली सी सोच को स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य समाधान में बदला,” आदित्य नरेश ने कहा।</p>
<p>“मैंने सीखा कि किसी समस्या को सुलझाते समय टीम में काम करना और अलग-अलग दृष्टिकोणों को सुनना कितना ज़रूरी है,” रिद्धिमा शर्मा ने कहा।</p>
<p>“अब मैं अपने विचारों को पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर सकती हूँ,” सिद्धार्थ पांडेय ने कहा।</p>
<p><div style="width: 1510px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/05/ITL-Dwarka2-e1747389133628.jpeg" alt="" width="1500" height="1000" /><p class="wp-caption-text">एक स्कूल में डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप के दौरान काम करते युवा दिमाग</p></div></p>
<h3>विद्यालयों में भी जोश से भरे नवप्रवर्तक</h3>
<p>दिल्ली के आईटीएल पब्लिक स्कूल की शिक्षिका सुरभि ने कहा, “सैमसंग और आईआईटी-दिल्ली द्वारा आयोजित डिज़ाइन थिंकिंग कार्यशाला बेहद प्रेरणादायक रही। पहले बैच के कई विद्यार्थियों ने मुझसे आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन माँगा है।”</p>
<p>मदर्स मैरी विद्यालय में कक्षा 9वीं और 10वीं की छात्राएँ अद्भुत विचार लेकर सामने आईं।</p>
<p>आन्या एक ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐप बनाना चाहती है, जो पर्यावरण के अनुकूल घरों की डिज़ाइन में मदद करे।</p>
<p>कृतिका एक सस्ता किंडल जैसी डिवाइस बनाना चाहती है जिसमें सभी पाठ्यपुस्तकें डिजिटल रूप से समाहित हों ताकि काग़ज़ की खपत कम हो।</p>
<p>कृति ऐसे स्वास्थ्यवर्धक मासिक धर्म उत्पाद विकसित करना चाहती हैं, जो प्लास्टिक के बिना हों और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसे गंभीर रोगों से सुरक्षा दें।</p>
<p>महाविद्यालयों में नवाचार और सामाजिक चेतना का संगम कॉलेजों में भी नवाचार की भावना प्रबल है।</p>
<p>हैदराबाद विश्वविद्यालय की आर. दीपिका ने कहा, “जब प्रशिक्षक ने कहा कि ‘दुनिया में समस्याएँ बहुत हैं पर समाधानकर्ता कम,’ तो मुझे भी लगा कि मैं उन गिने-चुने समाधानकर्ताओं में होना चाहती हूँ।”</p>
<p>बी.ए. के छात्र सावन केसरी ने कहा,  “यह कार्यशाला मेरे लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध हुई — मैंने सीखा कि एक स्टार्टअप का विचार कैसे आकार लेता है। मैं ग्रामीण भारत में दूरचिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाना चाहता हूँ।”</p>
<p>मुक्ता, जो स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन की छात्रा हैं, ने कहा, “एक छोटी सी सोच भी दुनिया को बदल सकती है। इस कार्यशाला ने मुझे युवा उद्यमिता की भावना से भर दिया।”</p>
<p>शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिज़नेस स्टडीज़ की प्राचार्या पूनम वर्मा ने बताया: “हमारे छात्रों के पास करीब 4० स्टार्टअप विचार हैं, जिनमें से 3० को बाहरी स्रोतों से वित्तीय सहायता मिल चुकी है। ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ जैसे कार्यक्रम उन्हें अपने विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।”</p>
<p><div style="width: 1510px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/05/Rohini1-e1747389155930.jpeg" alt="" width="1500" height="1000" /><p class="wp-caption-text">नौ शहरों में पहले से ही रोड शो चल रहे हैं, और छात्रों में उत्साह साफ़ देखा जा सकता है क्योंकि वे सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के लिए आवेदन करने के लिए कतार में खड़े हैं</p></div></p>
<h3>यही है भारत का नवाचार आंदोलन</h3>
<p>छात्रों के विचार न केवल स्पष्ट और सशक्त हैं, बल्कि समाज की वास्तविक ज़रूरतों से भी जुड़े हुए हैं —</p>
<p>आदित्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चाहते हैं।</p>
<p>रिद्धिमा अपने कस्बे में प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए टिकाऊ विकल्प तैयार कर रही हैं।</p>
<p>प्रेरणा सरकारी विद्यालयों के दृष्टिहीन छात्रों के लिए किफ़ायती सहायक उपकरण बनाना चाहती हैं।</p>
<p>सिद्धार्थ एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता जानने में मदद करे और उनकी उपज बढ़ाए।</p>
<p>इन जैसे विचारों और ऊर्जा से भरे युवाओं के साथ, ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ वास्तव में भारत के उज्जवल भविष्य की नींव रख रहा है। आवेदन प्रक्रिया जारी है और देश के कोने-कोने से युवा इसमें भाग ले रहे हैं।</p>
<p>यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं — यह युवा भारत का नवाचार अभियान है।</p>
<p>अब बारी है समाधान की।</p>
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