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		<title>Design Thinking &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title>सैमसंग &#8216;सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; हरियाणा के छात्रों को इनोवेशन के ज़रिए खेलों तक पहुँच के बारे में नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित करता है</title>
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				<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:22:31 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Haryana]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[&#160; सैमसंग इंडिया के खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, &#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; ने गुरुग्राम के ODM इंटरनेशनल में अपनी &#8216;डिज़ाइन थिंकिंग]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-9975 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover.jpg" alt="" width="1000" height="564" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover-728x410.jpg 728w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover-998x563.jpg 998w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/haryana-cover-768x433.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सैमसंग इंडिया के खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, &#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; ने गुरुग्राम के ODM इंटरनेशनल में अपनी &#8216;डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप&#8217; आयोजित की। इसमें 193 छात्रों ने हिस्सा लिया और उन्हें ज़मीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने और समाज पर असल असर डालने वाले टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह वर्कशॉप &#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; के देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जो 100 शहरों में चलाया जा रहा है। इसका मकसद 14-22 साल के युवाओं में इनोवेशन की संस्कृति को बढ़ावा देना और उन्हें AI, हेल्थ, एजुकेशन, सस्टेनेबिलिटी और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का समाधान करने के लिए सशक्त बनाना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस सेशन के दौरान सामने आए आइडिया में से एक प्रोजेक्ट युवाओं के लिए स्पोर्ट्स तक पहुंच बेहतर बनाने पर केंद्रित था। छात्रों ने बताया कि अच्छी क्वालिटी के इक्विपमेंट और कोचिंग की ज़्यादा कीमत अक्सर प्रतिभाशाली लोगों को गंभीरता से स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने से रोकती है, जबकि हरियाणा भारत के प्रमुख स्पोर्ट्स राज्यों में से एक है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ODM इंटरनेशनल के 12वीं कक्षा के छात्र हर्ष गुप्ता ने कहा, &#8220;वर्कशॉप में आने पर मुझे बस इतना एहसास था कि कौन खेल पाता है और कौन पीछे रह जाता है, इसमें कुछ गड़बड़ है।&#8221; &#8220;डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क ने हमें लोगों के सामने आने वाली असली रुकावटों को समझने और उन ऑब्ज़र्वेशन को एक स्पष्ट समस्या के बयान में बदलने में मदद की।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>11वीं कक्षा के छात्र मोक्ष यादव ने कहा, &#8220;वर्कशॉप ने हमें बड़े आइडिया को प्रैक्टिकल समाधान में बदलने में मदद की। हम एक किफायती मॉडल पर काम कर रहे हैं जो स्पोर्ट्स इक्विपमेंट तक पहुंच और डिजिटल ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को जोड़ता है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा युवा इसमें हिस्सा ले सकें, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप छात्रों को इंसानों पर केंद्रित इनोवेशन के तरीकों से परिचित कराती है, जिससे उन्हें समस्याओं की पहचान करने से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने में मदद मिलती है। प्रैक्टिकल एक्सरसाइज़ और मिलकर सीखने के ज़रिए, प्रतिभागी यूज़र्स की ज़रूरतों को समझना, चुनौतियों को परिभाषित करना और ऐसे समाधान बनाना सीखते हैं जिन पर अमल किया जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; को ज़मीनी स्तर पर इनोवेशन की एक पाइपलाइन बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि युवा अपने समुदायों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकें। पिछले कुछ वर्षों में, इस प्रोग्राम ने पूरे भारत में हज़ारों छात्रों को अपने आइडिया को असरदार इनोवेशन में बदलने में मदद की है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026&#8217; के लिए एप्लीकेशन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं। यह प्रोग्राम प्रतिभागियों को ट्रेनिंग, मेंटरशिप, प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट और इनोवेशन वर्कशॉप की सुविधा देता है। टॉप चार विजेता टीमों को FITT, IIT दिल्ली में 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा, साथ ही उनके समाधानों को और विकसित करने के लिए एक्सपर्ट मेंटरशिप और सपोर्ट भी मिलेगा। जैसे-जैसे सैमसंग पूरे भारत में इस प्रोग्राम का विस्तार कर रहा है, गुरुग्राम जैसी वर्कशॉप यह दिखाती रहती हैं कि इनोवेशन अक्सर किसी स्थानीय समस्या के बारे में एक साधारण सी बात पर गौर करने—और उसे हल करने के पक्के इरादे—से शुरू होता है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title>सैमसंग उत्तर प्रदेश के कैंपस में &#8216;डिज़ाइन थिंकिंग&#8217; लेकर आया है, जो युवा इनोवेटर्स को प्रोडक्ट बनाने से पहले समस्याओं को हल करने की चुनौती देता है</title>
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				<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:30:09 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4uGhbrV</guid>
									<description><![CDATA[&#160; ज़्यादातर स्टूडेंट इनोवेशन किसी समाधान (solution) से शुरू होते हैं। बहुत कम ही किसी समस्या से शुरू होते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में, छात्र अक्सर महीनों]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-9956 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA.jpg" alt="" width="1000" height="564" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA-728x410.jpg 728w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA-998x563.jpg 998w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/Cover-SFT-GREATER-NOIDA-768x433.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ज़्यादातर स्टूडेंट इनोवेशन किसी समाधान (solution) से शुरू होते हैं। बहुत कम ही किसी समस्या से शुरू होते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में, छात्र अक्सर महीनों तक बेहतरीन प्रोटोटाइप बनाने में बिता देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि जिस समस्या को वे हल करने निकले थे, वह या तो है ही नहीं, या बहुत कम लोगों को प्रभावित करती है, या असल दुनिया में उसकी कोई अहमियत नहीं है। यह एक ऐसी कमी है जिसने चुपचाप अनगिनत अच्छे आइडिया की क्षमता को सीमित कर दिया है। Samsung Solve for Tomorrow इसे बदलने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अपने खास देशव्यापी इनोवेशन प्रोग्राम के तहत, Samsung India ने IIT Delhi के साथ मिलकर हाल ही में ग्रेटर नोएडा के GNIOT ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस में &#8216;डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप&#8217; आयोजित की। इसमें पूरे उत्तर प्रदेश से उभरते हुए इनोवेटर्स को एक साथ लाया गया ताकि वे एंटरप्रेन्योरशिप का एक बहुत ज़रूरी सबक सीख सकें: समाधान बनाने से पहले समस्या को समझना ज़रूरी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह वर्कशॉप &#8216;Samsung Solve for Tomorrow 2026&#8217; का हिस्सा थी। यह एक राष्ट्रीय प्रोग्राम है जो 14 से 22 साल के युवा भारतीयों को टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। ये समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण की स्थिरता, और खेल और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने के लिए होते हैं। कोडिंग, इंजीनियरिंग या प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, इस सेशन में प्रतिभागियों को अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने, यूज़र्स से जुड़ने, आइडिया को परखने और यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि जिन समस्याओं को वे हल करना चाहते थे, वे असल में क्लासरूम के बाहर मौजूद हैं या नहीं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कई छात्रों के लिए, यह अनुभव उनके नज़रिए में बदलाव लाने वाला था। GNIOT के तीसरे साल के छात्र कबीर सिंह ने कहा, &#8220;हम अक्सर मान लेते हैं कि कोई आइडिया इसलिए अच्छा है क्योंकि वह सुनने में नया और अनोखा लगता है।&#8221; &#8220;इस वर्कशॉप ने हमें यह समझने में मदद की कि आइडिया जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी उसका लागू होना (implementation), उसकी व्यावहारिकता (feasibility) और यूज़र की ज़रूरतें भी हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>दूसरे साल के छात्र रवि कुशवाहा ने इस वर्कशॉप को इनोवेशन के बारे में बिल्कुल नए सिरे से सोचने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, &#8220;इससे मुझे यह समझने में मदद मिली कि असल दुनिया की चुनौतियों की पहचान कैसे करें और किसी समस्या को हल करने की कोशिश करने से पहले यह कैसे परखें कि वह समस्या सच में मौजूद है या नहीं।&#8221; यह वर्कशॉप भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाती है। जैसे-जैसे देश पारंपरिक स्टार्टअप हब से आगे बढ़कर एंटरप्रेन्योर्स और समस्या-समाधान करने वालों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश कर रहा है, प्रोग्राम्स में अब टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन, क्रिटिकल थिंकिंग और ज़मीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान करने पर भी ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>Samsung Solve for Tomorrow एक ऐसे ही प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर उभरा है, जो युवा इनोवेटर्स को सिर्फ़ कॉन्सेप्ट से आगे बढ़कर ऐसे समाधान विकसित करने में मदद कर रहा है जिनका समाज पर मापने योग्य असर हो। 2026 का एडिशन इस प्रोग्राम का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार है, जिसमें देश भर के 100 शहरों में &#8216;डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप&#8217; आयोजित की जाएंगी। इसमें हिस्सा लेने वालों को ट्रेनिंग, मेंटरशिप, प्रोटोटाइपिंग में मदद और इंडस्ट्री से जुड़ी सलाह मिलेगी, ताकि वे शुरुआती स्टेज के आइडिया को काम के इनोवेशन में बदल सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रोग्राम के आखिर में, टॉप चार जीतने वाली टीमों को IIT दिल्ली में 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा, जिससे वे अपने सॉल्यूशन को और बेहतर बना सकेंगी और बड़े पैमाने पर लागू कर पाएँगीं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जैसे-जैसे भारत की इनोवेशन से जुड़ी महत्वाकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, &#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8217; जैसी पहल यह पक्का करने में मदद कर रही हैं कि आने वाली पीढ़ी के इनोवेटर सिर्फ़ टेक्नोलॉजी बनाने पर ही नहीं, बल्कि उन समस्याओं को हल करने पर भी ध्यान दें जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8216;सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026&#8217; के लिए एप्लीकेशन 3 जुलाई, 2026 तक खुले रहेंगे।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title>डिज़ाइन थिंकिंग: एआई युग में टेक्नॉलॉजी का दिल तक पहुंचने का रास्ता</title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae?utm_source=rss&amp;utm_medium=direct</link>
				<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 17:36:14 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Innovators]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow Season 3]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/48fwhNi</guid>
									<description><![CDATA[&#160; वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-30056 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_125619.jpg" alt="" width="2964" height="2164" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे हैं। हालाँकि, वे जो खोज रहे हैं, वह स्वयं नवाचारों की तरह ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो सकता है: कि डिज़ाइन थिंकिंग केवल एक टूलकिट नहीं है, बल्कि एक मानसिकता है जो सहानुभूति, धैर्य और असफलता के प्रति खुलेपन की माँग करती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पिछले सप्ताह, प्रतिभागी मार्गदर्शकों, कार्यशालाओं और FITT प्रयोगशालाओं के अपने पहले अनुभव के माध्यम से विचारों में पूर्णता की तीव्र खोज में लगे रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित दुनिया में जहाँ गति और स्वचालन सार्वजनिक चर्चा में हावी हैं, इन छात्रों को याद दिलाया जा रहा है कि तकनीक की असली परीक्षा यह है कि क्या यह मानव हृदय और मानव व्यवहार से जुड़ सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img class="aligncenter wp-image-30055 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250909_151634.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>समस्या के साथ बैठना</h3>
<p>इस संदर्भ में, पिंक ब्रिगेडियर्स की कहानी पर बात करना उचित होगा। इस टीम में महाराष्ट्र के विवेक सावंत और ओडिशा की श्रेया आदित्य दलाई शामिल हैं, दोनों एनआईटी राउरकेला के इंजीनियरिंग छात्र हैं। इस साल वे क्या कर रहे हैं? वे भारत के पहले एआई-संचालित ब्रेस्ट केयर ऐप पर काम कर रहे हैं। पहली नज़र में, यह एक तकनीकी चमत्कार है: एज डिप्लॉयमेंट के साथ कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क जो विसंगतियों का पता लगा सकता है और महिलाओं को डॉक्टरों से जोड़ सकता है। लेकिन वे मानते हैं कि यह सफलता कोड में नहीं है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8220;हमारे उत्पाद के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। डिज़ाइन थिंकिंग प्रशिक्षण ने हमें समस्या पर अधिक समय तक विचार करने, उपयोगकर्ताओं को अधिक गहराई से समझने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार ढलने के लिए प्रोत्साहित किया। यूएक्स/यूआई और विश्वास उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि एआई।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उनके लिए, डिज़ाइन थिंकिंग एक अनुस्मारक है कि कोई ऐप किसी को कैसा महसूस कराता है, यह उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है जितना कि वह क्या करता है। एक गहरी निजी स्वास्थ्य चिंता के लिए तकनीक बनाने का मतलब है कि स्वर, रंग पैलेट, भाषा और इंटरफ़ेस, सभी सहानुभूति के प्रश्न बन जाते हैं। यह अंतर्दृष्टि हाल ही में स्टैनफोर्ड के शोध से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि निष्पक्ष और भरोसेमंद एआई सिस्टम बनाने के लिए न केवल एल्गोरिदम पर ध्यान देने की आवश्यकता है, बल्कि पारदर्शिता, एज-केस व्यवहार और उपयोगकर्ता की सुविधा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img class="aligncenter wp-image-30054 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250908_113245.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>एआई का मानवीकरण</h3>
<p>दूसरी ओर, FITT लैब के अंदर एक जोड़ी अपने उत्पाद से एआई के बारे में सीख समझने की कोशिश कर रही है &#8211; एआई कैसे बुद्धिमत्ता प्रदान कर सकता है, और डिज़ाइन थिंकिंग इसे कैसे बोधगम्य बना सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>माइंडस्नैप को ही लीजिए, जो कोलकाता की देवयानी गुप्ता और सायन अधिकारी द्वारा बनाया गया एक व्यक्तिगत शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, दोनों इंजीनियरिंग के छात्र हैं। बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) द्वारा संचालित, यह प्लेटफ़ॉर्म न्यूरोडाइवर्सिटी सीखने वालों के अनुकूल है, चाहे वे डिस्लेक्सिक हों, स्पेक्ट्रम पर हों, या बस खेलों के माध्यम से बेहतर सीखते हों।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वे बताते हैं, &#8220;हमने महसूस किया कि अगर इंटरफ़ेस सीखने वाले से बात नहीं करता है तो कोई भी एल्गोरिदम काम नहीं करता है।&#8221; &#8220;डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यूएक्स/यूआई, पहुँच और छात्रों के जीवंत अनुभव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>चेन्नई के आदित्य वर्मा मामा सहेली एआई के साथ एक ऐसी ही खोज कर रहे हैं, जो एक समग्र गर्भावस्था ऐप है जो उनकी माँ के उन दूरदराज के इलाकों के अनुभव से प्रेरित है जहाँ चिकित्सा की पहुँच सीमित थी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8220;मेरा ऐप एक दोस्त की तरह महसूस होना चाहिए था, न कि सिर्फ़ एक टूल की तरह। डिज़ाइन की सोच ने मुझे इसे उपयोगकर्ता की भावनाओं, व्यवहार और यहाँ तक कि सांस्कृतिक संदर्भ के माध्यम से देखने के लिए प्रेरित किया। यही इसे मापनीय और विश्वसनीय बनाता है,&#8221; वे कहते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उनका ऐप सूचनाओं को संश्लेषित करता है, गलत सूचनाओं को फ़िल्टर करता है, और पहनने योग्य उपकरणों के साथ एकीकृत होकर अति-व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करता है, लेकिन इसकी आत्मा साहचर्य के विचार में निहित है। उनका दृष्टिकोण PADTHAI-MM ढाँचे के अनुरूप है, जो दर्शाता है कि पारदर्शी, मानव-केंद्रित डिज़ाइन, उपयोगकर्ता संदर्भ के साथ व्याख्यात्मकता को मिलाकर, अपारदर्शी &#8220;ब्लैक बॉक्स&#8221; AI की तुलना में कहीं अधिक विश्वास पैदा करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img class="aligncenter wp-image-30057 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_1333390.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>पैमाने के लिए एक रणनीति के रूप में डिज़ाइन</h3>
<p>लुधियाना की पृथ्वीरक्षक टीम: 12वीं कक्षा के अभिषेक ढांडा, प्रभकीरत सिंह और रचिता चंडोक, देश के पहले मॉड्यूलर स्वचालित वर्मीकंपोस्टिंग केंद्र के ज़रिए भारत की विशाल अपशिष्ट प्रबंधन समस्या से जूझ रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह विचार एक कक्षा प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, और अब यह प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और 90-दिवसीय कंपोस्टिंग प्रक्रिया को केवल 30 दिनों में समेटने की तीन साल की यात्रा बन गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वे बताते हैं, &#8220;परंपरागत रूप से, वर्मीकंपोस्टिंग श्रम-गहन और पैमाने पर लागू करना कठिन रहा है।&#8221; &#8220;डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें ऐसे मॉड्यूलर मॉडल की कल्पना करने में मदद की जो किसी बगीचे, हाउसिंग सोसाइटी या यहाँ तक कि शहरी स्तर पर भी काम कर सकें।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उनके लिए, स्केलेबिलिटी का मतलब आकार नहीं, बल्कि अनुकूलनशीलता है, यानी किसानों, शहरी परिवारों या नगर पालिकाओं की सेवा के लिए एक ही मूल विचार को आकार देने की क्षमता।</p>
<h3></h3>
<h3>सफ़र, मंज़िल नहीं</h3>
<p>इनमें से किसी भी टीम को नहीं पता कि वे अंततः सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो चुनौती जीत पाएँगे या नहीं। उनके प्रोटोटाइप अभी भी अपूर्ण हैं; उनके पिच डेक अभी भी पुनर्लेखन के दौर से गुज़र रहे हैं। फिर भी, जो चीज़ उन्हें एक साथ बांधती है, वह यह मान्यता है कि डिज़ाइन थिंकिंग ने उनके दृष्टिकोण में पहले ही बदलाव कर लिया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जबकि एआई को लेकर वैश्विक चर्चाएँ अक्सर नैतिकता, पूर्वाग्रह और गति के सवालों में उलझ जाती हैं, ये युवा समस्या-समाधानकर्ता अपने नवाचारों को किसी पुरानी और स्थिर चीज़ पर आधारित कर रहे हैं: मानव-केंद्रित डिज़ाइन।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वे खोज रहे हैं कि एआई, मस्तिष्क हो सकता है। लेकिन डिज़ाइन थिंकिंग, अपनी विनम्रता और अनुशासन के साथ, हृदय है। और जैसे-जैसे ये छात्र शीर्ष 20 में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे, यह सबसे महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकता है।</p>
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																				</item>
					<item>
				<title>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के साथ युवा भारत बना बदलाव का अग्रदूत</title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%95?utm_source=rss&amp;utm_medium=direct</link>
				<pubDate>Mon, 19 May 2025 11:08:47 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2025]]></category>
		<category><![CDATA[Young India]]></category>
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									<description><![CDATA[&#160; भारत के युवाओं के बीच एक सशक्त परिवर्तन आकार ले रहा है। सैमसंग का &#8220;सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8221; सीज़न 4 जैसे ही पूरे जोश में शुरू हुआ, देशभर के]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div id="attachment_8748" style="width: 1010px" class="wp-caption aligncenter"><img class="wp-image-8748 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT.jpg" alt="" width="1000" height="564" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT-728x410.jpg 728w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT-998x563.jpg 998w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/05/Cover-SFT-768x433.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p class="wp-caption-text">कल के लिए समाधान 2025: युवा मस्तिष्कों को समस्याओं को अवसर के रूप में तथा नवाचार को जीवन जीने का तरीका समझने के लिए प्रेरित करना</p></div>
<p>&nbsp;</p>
<p>भारत के युवाओं के बीच एक सशक्त परिवर्तन आकार ले रहा है। सैमसंग का &#8220;सॉल्व फॉर टुमॉरो&#8221; सीज़न 4 जैसे ही पूरे जोश में शुरू हुआ, देशभर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में नवाचार की लहर दौड़ गई है। यह अब केवल एक प्रतियोगिता नहीं रही — यह एक आंदोलन बन चुका है, जो युवाओं को न केवल सपने देखने की, बल्कि उन्हें साकार करने का मंच भी दे रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत के बाद, सैमसंग ने देशभर में डिज़ाइन थिंकिंग कार्यशालाएँ और ओपन हाउस सत्र आरंभ किए हैं। दिल्ली, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला, लुधियाना, पानीपत और अन्य शहरों में अब तक २० से अधिक सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें विद्यालयों के ३७०० और महाविद्यालयों के ४८०० से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सैमसंग का लक्ष्य है कि यह पहल देश के हर कोने तक पहुँचे — चाहे वह पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियाँ हों या कश्मीर की वादियाँ। पिछले वर्ष यह कार्यक्रम नगालैंड और कश्मीर तक पहुँचा था, और इस वर्ष यह और भी व्यापक रूप ले रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>समस्याओं को अवसर में बदलने की सोच</h3>
<p>हर कार्यशाला में युवा छात्र-छात्राएँ अपनी जिज्ञासाओं, सपनों और समस्याओं के साथ सामने आ रहे हैं। ओ. पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में आयोजित एक डिज़ाइन थिंकिंग ओपन हाउस में विद्यार्थियों ने समाज की वास्तविक समस्याओं को गहराई से समझा और उनके समाधान की दिशा में विचार प्रस्तुत किए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी ने कहा, &#8220;‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ छात्रों को वह सोच और दृष्टिकोण देता है जो पारंपरिक कक्षाओं में अक्सर नहीं मिलते — यथार्थ समस्याओं को पहचानना और उनके व्यावहारिक, नवाचारी समाधान खोजना।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>छात्रों ने साझा किया कि इन सत्रों ने उन्हें सहानुभूति, सहयोग और समाधान-निर्माण की नई दृष्टि दी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8220;इस कार्यशाला ने मेरी एक धुंधली सी सोच को स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य समाधान में बदला,&#8221; आदित्य नरेश ने कहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8220;मैंने सीखा कि किसी समस्या को सुलझाते समय टीम में काम करना और अलग-अलग दृष्टिकोणों को सुनना कितना ज़रूरी है,&#8221; रिद्धिमा शर्मा ने कहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8220;अब मैं अपने विचारों को पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर सकती हूँ,&#8221; सिद्धार्थ पांडेय ने कहा।</p>
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<div style="width: 1510px" class="wp-caption alignnone"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/05/ITL-Dwarka2-e1747389133628.jpeg" alt="" width="1500" height="1000" /><p class="wp-caption-text">एक स्कूल में डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप के दौरान काम करते युवा दिमाग</p></div>
<p>&nbsp;</p>
<h3>विद्यालयों में भी जोश से भरे नवप्रवर्तक</h3>
<p>दिल्ली के आईटीएल पब्लिक स्कूल की शिक्षिका सुरभि ने कहा, &#8220;सैमसंग और आईआईटी-दिल्ली द्वारा आयोजित डिज़ाइन थिंकिंग कार्यशाला बेहद प्रेरणादायक रही। पहले बैच के कई विद्यार्थियों ने मुझसे आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन माँगा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मदर्स मैरी विद्यालय में कक्षा 9वीं और 10वीं की छात्राएँ अद्भुत विचार लेकर सामने आईं।</p>
<p>आन्या एक ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐप बनाना चाहती है, जो पर्यावरण के अनुकूल घरों की डिज़ाइन में मदद करे।</p>
<p>कृतिका एक सस्ता किंडल जैसी डिवाइस बनाना चाहती है जिसमें सभी पाठ्यपुस्तकें डिजिटल रूप से समाहित हों ताकि काग़ज़ की खपत कम हो।</p>
<p>कृति ऐसे स्वास्थ्यवर्धक मासिक धर्म उत्पाद विकसित करना चाहती हैं, जो प्लास्टिक के बिना हों और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसे गंभीर रोगों से सुरक्षा दें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महाविद्यालयों में नवाचार और सामाजिक चेतना का संगम कॉलेजों में भी नवाचार की भावना प्रबल है।</p>
<p>हैदराबाद विश्वविद्यालय की आर. दीपिका ने कहा, &#8220;जब प्रशिक्षक ने कहा कि ‘दुनिया में समस्याएँ बहुत हैं पर समाधानकर्ता कम,’ तो मुझे भी लगा कि मैं उन गिने-चुने समाधानकर्ताओं में होना चाहती हूँ।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बी.ए. के छात्र सावन केसरी ने कहा,  &#8220;यह कार्यशाला मेरे लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध हुई — मैंने सीखा कि एक स्टार्टअप का विचार कैसे आकार लेता है। मैं ग्रामीण भारत में दूरचिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाना चाहता हूँ।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुक्ता, जो स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन की छात्रा हैं, ने कहा, &#8220;एक छोटी सी सोच भी दुनिया को बदल सकती है। इस कार्यशाला ने मुझे युवा उद्यमिता की भावना से भर दिया।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिज़नेस स्टडीज़ की प्राचार्या पूनम वर्मा ने बताया: &#8220;हमारे छात्रों के पास करीब 4० स्टार्टअप विचार हैं, जिनमें से 3० को बाहरी स्रोतों से वित्तीय सहायता मिल चुकी है। ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ जैसे कार्यक्रम उन्हें अपने विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<div style="width: 1510px" class="wp-caption alignnone"><img src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/05/Rohini1-e1747389155930.jpeg" alt="" width="1500" height="1000" /><p class="wp-caption-text">नौ शहरों में पहले से ही रोड शो चल रहे हैं, और छात्रों में उत्साह साफ़ देखा जा सकता है क्योंकि वे सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के लिए आवेदन करने के लिए कतार में खड़े हैं</p></div>
<p>&nbsp;</p>
<h3>यही है भारत का नवाचार आंदोलन</h3>
<p>छात्रों के विचार न केवल स्पष्ट और सशक्त हैं, बल्कि समाज की वास्तविक ज़रूरतों से भी जुड़े हुए हैं —</p>
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<p>आदित्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चाहते हैं।</p>
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<p>रिद्धिमा अपने कस्बे में प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए टिकाऊ विकल्प तैयार कर रही हैं।</p>
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<p>प्रेरणा सरकारी विद्यालयों के दृष्टिहीन छात्रों के लिए किफ़ायती सहायक उपकरण बनाना चाहती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सिद्धार्थ एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता जानने में मदद करे और उनकी उपज बढ़ाए।</p>
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<p>इन जैसे विचारों और ऊर्जा से भरे युवाओं के साथ, ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ वास्तव में भारत के उज्जवल भविष्य की नींव रख रहा है। आवेदन प्रक्रिया जारी है और देश के कोने-कोने से युवा इसमें भाग ले रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं — यह युवा भारत का नवाचार अभियान है।</p>
<p>अब बारी है समाधान की।</p>
<p>&nbsp;</p>
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