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		<title>Education &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title>गुरुग्राम के स्‍टूडेंट ने बोलने-सुनने में परेशानी झेल रहे लोगों के लिए एआई-पावर्ड स्‍पीच डिवाइस बनाई</title>
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				<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:32:01 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
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		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2025]]></category>
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									<description><![CDATA[&#160; हमारे देश में रैंक, कटऑफ और एंट्रेंस एग्जाम का ऐसा क्रेज है कि किशोरावस्था आईआईटी में दाखिले की दौड़ जैसी लगती है। लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा स्‍टूडेंट सामने]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-9208 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/11/Team-Paraspeak.jpg" alt="" width="1000" height="563" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/11/Team-Paraspeak.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/11/Team-Paraspeak-728x410.jpg 728w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/11/Team-Paraspeak-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हमारे देश में रैंक, <span>कटऑफ और एंट्रेंस एग्जाम का ऐसा क्रेज है कि किशोरावस्था आईआईटी में दाखिले की दौड़ जैसी लगती है। लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा स्&#x200d;टूडेंट सामने आता है जो इस आम सोच से हटकर कुछ अलग करने की हिम्मत दिखाता है। </span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>गुरुग्राम के शिव नादर स्कूल में 11<span>वीं कक्षा में पढ़ने वाले </span>16 <span>वर्षीय प्रणेत खेतान ने इसका एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। नंबरों की दौड़ में पड़ने के बजाय उन्होंने इंसानियत के लिए बातचीत का रास्ता चुना।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रणेत सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 <span>की चार विजेता टीमों में से एक थे। उन्&#x200d;होंने </span>&#8216;<span>पैरास्पीक</span>&#8216; <span>नाम का आसान डिवाइस बनाया। ये डिवाइस यूजर की आवाज रिकॉर्ड करता है</span>, <span>उसे क्लाउड पर एआई को भेजता है</span>, <span>और फिर हिंदी में साफ-सुथरी</span>, <span>अच्छी भाषा में अनुवाद करके प्&#x200d;ले करता है।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सैमसंग ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ कंपनी का एक प्रमुख शिक्षा कार्यक्रम है, <span>जो युवाओं को असली जीवन की समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से उसका हल खोजने के लिए प्रेरित करता है। इस साल पूरे देश में आयोजित इस प्रतियोगिता में चार थीम रखी गई थीं—एआई के ज़रिये एक सुरक्षित</span>, <span>स्मार्ट और समावेशी भारत</span>; <span>स्वास्थ्य</span>, <span>स्वच्छता और वेलनेस का भविष्य</span>; <span>तकनीक के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता</span>; <span>और खेल व तकनीक के ज़रिये सामाजिक बदलाव। प्रतियोगिता की जीतने वाली चार टीमों को आईआईटी दिल्ली में </span>1 <span>करोड़ रुपये की इंक्यूबेशन सहायता दी गई।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रणेत का अगला लक्ष्य पैरास्पीक को और बड़े पैमाने पर विकसित करना है—इसके नतीजों की सटीकता बढ़ाना, <span>सहायक-तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर इसे देशभर के अस्पतालों और घरों तक पहुँचाना। वह इसकी भाषाई पहुँच भी बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वे अन्य भारतीय भाषाओं के लिए ऐसे डेटाबेस तैयार करेंगे</span>, <span>जो आज भी ज्यादातर वैश्विक एआई सिस्टम में नज़रअंदाज़ किए जाते हैं।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रणेत बताते हैं, “<span>यह आइडिया एक बहुत ही साधारण से सवाल से शुरू हुआ—जब कोई व्यक्ति बोलने में मुश्किल झेल रहा हो तो हिंदी भाषण को समझने वाला कोई उपकरण क्यों नहीं है</span>?” <span>स्कूल की आईटी लैब में उठाया गया यह मासूम-सा सवाल ही आगे चलकर उस नवाचार की नींव बना</span>, <span>जिसने उन्हें सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो </span>2025 <span>के राष्ट्रीय विजेताओं में जगह दिलाई।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसकी शुरुआत मई 2024 <span>में हुई</span>, <span>जब प्रणेत ने नई दिल्ली के पास एक पैरालिसिस केयर सेंटर का दौरा किया। वहाँ उन्होंने ऐसे मरीज़ों से मुलाकात की</span>, <span>जो अपनी बात साफ़ तरीके से कह पाने के लिए रोज़ संघर्ष कर रहे थे — स्ट्रोक सर्वाइवर्स</span>, <span>सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे लोग और पार्किंसन रोग से प्रभावित मरीज। अगले एक साल तक प्रणेत ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (</span>ASR) <span>सिस्टम की दुनिया में पूरी तरह डूब गए। जब उन्हें पता चला कि न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण बिगड़ चुकी हिंदी बोलचाल (डिसआर्थ्रिक स्पीच) का कोई बड़ा डेटाबेस मौजूद ही नहीं है</span>, <span>तो उन्होंने खुद ही ऐसा डेटाबेस तैयार करने की ठान ली।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया, “<span>धीरे-धीरे यह मेरा खुद का तैयार किया हुआ डेटासेट बन गया। मैंने एआई मॉडल को इस तरह ट्रेन किया कि वह लड़खड़ाई हुई हिंदी बोलचाल को रीयल-टाइम में पहचान सके और उसे साफ़</span>, <span>समझ में आने वाले वाक्यों में दोबारा गढ़ सके। पहली बार जब मैंने इसे चलते हुए सुना</span>, <span>तो एहसास हुआ—यह तो जैसे किसी इंसान को उसकी खोई हुई आवाज़ वापस दिला रहा हो।”</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ऐसी उम्र में जब उसके ज़्यादातर दोस्&#x200d;त कोचिंग की किताबों और एग्ज़ाम प्रेशर में उलझे रहते हैं, <span>प्रणेत कुछ बिल्कुल अलग बना रहा है—वो पुल जो खामोश लोगों को फिर से दुनिया से जोड़ सके। उसका बनाया पैरास्पीक एक छोटी-सी</span>, <span>माचिस की डिब्बी जितनी आईओटी-इनेबल्&#x200d;ड डिवाइस है</span>, <span>लेकिन काम असाधारण करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से चलने वाली यह डिवाइस स्ट्रोक</span>, <span>लकवा</span>, <span>सेरेब्रल पाल्सी</span>, <span>पार्किंसन रोग</span>, <span>मस्तिष्क की चोट या उम्र से जुड़ी बदलाव जैसी स्थितियों से उत्पन्न होने वाली बोलने और आवाज की विकृतियों वाले मरीजों की मदद के लिए डिज़ाइन की गई है।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सिर्फ एक रिकॉर्डर लेकर प्रणेत अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में गया, <span>जहाँ उसने 28 मरीज़ों से बातचीत की और घंटों के वॉयस सैंपल जुटाए। उसके शब्दों में</span>, <span>हर रिकॉर्डिंग सिर्फ डेटा नहीं थी—वह गरिमा</span>, <span>धैर्य और इंसानी संघर्ष को समझने का एक सबक भी थी।</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title>गैलेक्सी एम्पावर्ड :कक्षाओं में बदलाव और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए सैमसंग की गेम-चेंजिंग पहल</title>
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				<pubDate>Thu, 19 Dec 2024 10:36:29 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[मोबाइल फोन]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[Empowering Educators]]></category>
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		<category><![CDATA[National Education Policy]]></category>
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									<description><![CDATA[&#160; कल्पना कीजिए एक ऐसे भविष्य की, जहां भारत के हर शिक्षक खुद को सशक्त, प्रेरित और नई तकनीकों और ज्ञान से लैस महसूस करें, ताकि वे कल की कक्षाओं को आज आकार]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-8429 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2024/12/CEP.jpg" alt="" width="1000" height="564" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2024/12/CEP.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2024/12/CEP-728x410.jpg 728w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2024/12/CEP-998x563.jpg 998w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2024/12/CEP-768x433.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कल्पना कीजिए एक ऐसे भविष्य की, जहां भारत के हर शिक्षक खुद को सशक्त, प्रेरित और नई तकनीकों और ज्ञान से लैस महसूस करें, ताकि वे कल की कक्षाओं को आज आकार दे सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सैमसंग इंडिया ने इस सपने को साकार करने के लिए ‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ लॉन्च किया है—यह एक अनोखी अपस्किलिंग पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर के शिक्षकों को एक नए स्तर पर ले जाना है। यह कोई साधारण कार्यशाला या क्रैश कोर्स नहीं है, बल्कि शिक्षकों के लिए एक क्रांति है, जो भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के साथ तालमेल बिठाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ शिक्षकों को ऐसे संसाधन और सहयोग प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो छात्रों के लिए सीखने को अधिक आकर्षक और प्रभावी बना सके। इस पूरी तरह प्रायोजित कार्यक्रम में शिक्षक न केवल नामांकन कर सकते हैं, बल्कि उन्हें शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सीखने, जुड़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल सैमसंग की व्यापक दृष्टि “टुगैदर फॉर टुमारो!” के तहत शिक्षा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>“‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ सैमसंग इंडिया की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें हम शिक्षकों को उनकी क्षमताओं और कौशल को बढ़ाने के लिए सशक्त करना चाहते हैं। NEP के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, यह कार्यक्रम कक्षाओं में उभरती चुनौतियों का समाधान करता है और शिक्षा के भविष्य को आकार देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है,” राजू पुल्लन, सैमसंग इंडिया के MX बिजनेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ने कहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>शिक्षकों को क्या मिलेगा?</h3>
<p><strong>1. एक्सपर्ट मास्टरक्लासेज़:</strong> शिक्षा और तकनीक के विशेषज्ञों से सीखने का मौका।<br />
<strong>2. हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स:</strong> असली उपकरण, असली समाधान, और असली बदलाव।<br />
<strong>3. ऑनलाइन लचीलापन:</strong> कहीं भी, कभी भी शामिल हों—व्यस्त शिक्षकों के लिए बिल्कुल उपयुक्त।<br />
<strong>4. विशेष संसाधन:</strong> तकनीकी टिप्स से लेकर रचनात्मक शिक्षण रणनीतियों तक, सबकुछ उपलब्ध।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सबसे बड़ी बात? यह कार्यक्रम शिक्षा को एक नई दिशा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे भारत के लाखों छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और कक्षाओं के भीतर और बाहर सीखने के तरीके बदलेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>“हम शिक्षक हमेशा ऐसे सार्थक शिक्षण अनुभव बनाने की कोशिश करते हैं, जो छात्रों में जिज्ञासा जगाए और उन्हें प्रेरित करे। ‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ सैमसंग की एक गेम-चेंजिंग पहल है, जो शिक्षकों को अपने कक्षाओं में नवाचार को अपनाने के लिए कौशल, उपकरण और आत्मविश्वास देती है। इस तरह के कार्यक्रम का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है, जो शिक्षकों को शिक्षा के बदलाव के केंद्र में रखता है,” सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, वसुंधरा की डायरेक्टर प्रिंसिपल, शालिनी नांबियार ने कहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>क्यों है यह खास?</h3>
<p>अन्य सामान्य कार्यक्रमों के विपरीत, ‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ वास्तव में शिक्षकों की ज़रूरतों को समझता है। यह तकनीक और वास्तविक शिक्षण रणनीतियों का ऐसा मिश्रण प्रस्तुत करता है, जिससे कक्षाएं और भी अधिक रोचक, आकर्षक और प्रभावशाली बन सकें। यह सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देकर भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली की नींव रखता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>“सक्रिय और सहयोगात्मक शिक्षण 21वीं सदी की शिक्षा का आधार है। ‘सैमसंग गैलेक्सी एम्पावर्ड’ न केवल पेशेवर विकास के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि शिक्षकों के बीच एक सामुदायिक भावना को भी बढ़ावा देता है। यह देखकर खुशी होती है कि यह पहल तकनीक और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के बीच पुल बनाती है और शिक्षकों को शिक्षा के भविष्य को आकार देने के लिए सशक्त करती है,” द श्री राम स्कूल, गुड़गांव की पूर्व प्रिंसिपल और शिक्षा सलाहकार, सरिता माथुर ने कहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सैमसंग सिर्फ शिक्षकों को उपकरण और ज्ञान ही नहीं दे रहा है, बल्कि वह बदलाव लाने वालों का एक समुदाय बना रहा है, जो मान्यताओं को चुनौती देगा, तकनीक को अपनाएगा और अपने छात्रों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>शिक्षा में सैमसंग की विरासत</h3>
<p>तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार में दशकों के अनुभव के साथ, सैमसंग इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ‘गैलेक्सी एम्पावर्ड’ कंपनी की वैश्विक प्रतिबद्धता का एक और मील का पत्थर है, जो शिक्षा में प्रगति लाने के लिए तकनीक का उपयोग करता है और भारतीय कक्षाओं की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे लागू करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h3>आगे की राह</h3>
<p>सैमसंग इस पहल की सफलता को शिक्षकों की प्रतिक्रिया, वास्तविक कक्षा की कहानियों और इन बदलावों को स्कूलों में अपनाए जाने के आधार पर मापेगा। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है—यह एक आंदोलन है, जो शिक्षा को कदम कदम पर बदलने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
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