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		<title>FITT &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>FITT &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[सरकार, नवाचार जगत के दिग्गजों और संयुक्त राष्ट्र ने युवा प्रतिभाओं को निखारने के Samsung Solve for Tomorrow के प्रयासों की सराहना की]]></title>
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				<pubDate>Tue, 27 Oct 2026 12:54:44 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और नवाचार जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने युवा नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने, देशभर में नवाचार के अवसरों का विस्तार करने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के प्रभावी समाधान विकसित करने पर Samsung की CSR पहल के फोकस की सराहना की। Samsung Solve for Tomorrow के माध्यम से युवाओं को अपने विचारों […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/02110006/Speakers-Collage-3-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10909" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं)  स्टीफन प्रीसनर, भारत में UN रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर; सुशील पाल, संयुक्त सचिव, MeitY और डॉ. निखिल अग्रवाल, MD, FITT, IIT दिल्ली </figcaption></figure>



<p>भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और नवाचार जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने युवा नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने, देशभर में नवाचार के अवसरों का विस्तार करने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के प्रभावी समाधान विकसित करने पर Samsung की CSR पहल के फोकस की सराहना की। Samsung Solve for Tomorrow के माध्यम से युवाओं को अपने विचारों को ऐसे समाधानों में बदलने का अवसर मिल रहा है, जिनका समाज पर सार्थक प्रभाव पड़ सकता है।</p>



<p>नई दिल्ली में आयोजित Samsung Solve for Tomorrow 2026 के ग्रैंड फिनाले में Samsung के नेतृत्व, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, कार्यक्रम के मेंटर्स और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा कि नवाचार का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह लोगों के जीवन को कितना बेहतर बनाता है। उन्होंने Samsung की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी ने ऐसा मंच तैयार किया है, जो युवाओं को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है और उन्हें अपने उत्पाद विकसित करने तथा स्टार्टअप शुरू करने का अवसर प्रदान करता है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/27124838/20261015_184150-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10893" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं) सैमसंग SWA के कॉर्पोरेट VP SP चन; MeitY के संयुक्त सचिव सुशील पाल; सैमसंग SWA के अध्यक्ष और CEO JB पार्क</figcaption></figure></div>


<p>पाल ने कहा, “यह देखकर बहुत खुशी होती है कि Samsung अपनी CSR पहलों के माध्यम से समाज के लिए इतना कुछ कर रहा है। मैं Samsung का आभार व्यक्त करता हूं कि उसने ऐसा मंच बनाया है, जो युवा प्रतिभाओं को सपने देखने का आत्मविश्वास देता है और उन्हें अपने उत्पाद तथा स्टार्टअप विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।”</p>



<p>Samsung के प्रमुख CSR कार्यक्रम Samsung Solve for Tomorrow के पांचवें संस्करण में विद्यार्थियों से 34,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 36 फाइनलिस्ट ग्रैंड फिनाले तक पहुंचे। यह कार्यक्रम युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) का उपयोग करके अपने समुदायों की समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके तहत प्रतिभागियों को ऐसे समाधानों को विकसित करने और बेहतर बनाने में सहायता दी जाती है, जो सकारात्मक और सार्थक बदलाव ला सकें।</p>



<p>पाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उदय ने नवाचार की प्रकृति को बदल दिया है। प्रौद्योगिकी अब लोगों के सीखने, काम करने, विनिर्माण और सेवाओं तक पहुंचने के तरीकों को तेजी से प्रभावित कर रही है। उन्होंने युवा नवोन्मेषकों से आग्रह किया कि वे केवल उन्नत तकनीक विकसित करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की वास्तविक और जरूरी समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें।</p>



<p>उन्होंने कहा, “नवाचार का वास्तविक पैमाना इस बात में नहीं है कि उसका एल्गोरिदम कितना जटिल है। असली पैमाना यह है कि वह एक आम व्यक्ति के जीवन में कितना बदलाव ला सकता है।”</p>



<p>उन्होंने किसानों के लिए पानी और बिजली की बचत, वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने, दूरदराज के गांवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और खेलों में वैज्ञानिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।</p>



<p>पाल ने उद्योग जगत से बदलती कार्य संस्कृति और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप लोगों को तैयार करने में सहयोग देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि AI जहां कुछ कार्यों को स्वचालित कर रहा है, वहीं कई अन्य कार्यों को अधिक प्रभावी भी बना रहा है। ऐसे में नई तकनीकों के विकास के साथ-साथ लोगों को भविष्य की बदलती भूमिकाओं के लिए तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">युवा इनोवेटर्स को वैश्विक चुनौतियों से जोड़ना</h2>



<p>भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के व्यापक प्रयासों में युवाओं के विचारों को शामिल करने में Samsung Solve for Tomorrow की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की दिशा में वैश्विक प्रगति अब भी धीमी और असमान है। ऐसे में युवाओं की भागीदारी और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।</p>



<p>प्रीस्नर ने कहा, “Samsung Solve for Tomorrow इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और निजी क्षेत्र किस तरह मिलकर युवाओं को केंद्र में रखकर काम कर सकते हैं, उनकी आवाज को प्रभावी बना सकते हैं और उनके संभावनाशील विचारों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग प्रदान कर सकते हैं।”</p>



<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निजी क्षेत्र की भूमिका कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कंपनियां अपने व्यावसायिक उद्देश्यों को पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़कर तथा नवोन्मेषी समाधानों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर भी योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि संभावनाशील विचारों को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारों, विश्वविद्यालयों, व्यवसायों और संयुक्त राष्ट्र—सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>



<p>प्रीस्नर ने फाइनलिस्ट को उन समुदायों से जुड़े रहने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिनकी समस्याओं का समाधान वे करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अपने विचारों को लगातार परखना और उनमें सुधार करना जरूरी है, ताकि वे वास्तविक जीवन में सार्थक प्रभाव पैदा कर सकें।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महानगरों से आगे नवाचार का विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा</h2>



<p>IIT दिल्ली में फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) के प्रबंध निदेशक डॉ. निखिल अग्रवाल ने अधिक से अधिक युवाओं तक नवाचार के अवसर पहुंचाने में Samsung की CSR पहलों के योगदान को रेखांकित किया।</p>



<p>अग्रवाल ने कहा, “Samsung Solve for Tomorrow की प्रतिबद्धता इस बात से दिखाई देती है कि कार्यक्रम ने टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा विभिन्न राज्यों तक पहुंच बनाकर नवाचार को गति दी है। इस वर्ष SFT को पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने आवेदन प्राप्त हुए, जो इस पहल की बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।”</p>



<p>कार्यक्रम के तहत 130 से अधिक शहरों में 180 से ज्यादा सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से विविध भौगोलिक क्षेत्रों और अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थियों को जोड़ा गया। अग्रवाल के अनुसार, प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या दर्शाती है कि प्रमुख महानगरों से आगे बढ़कर नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति मिल रही है।</p>



<p>उन्होंने विद्यार्थियों के नवाचार को उद्यमिता में बदलने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसे उद्यम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया, जो दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकें।</p>



<p>विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा, “आपको रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनना चाहिए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम से भविष्य के उद्यमी निकलेंगे, जो रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली कंपनियां स्थापित करेंगे।</p>



<p>2026 के ग्रैंड फिनाले में चार विजेता टीमों का चयन किया गया। इन टीमों को Samsung की ओर से कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन ग्रांट के साथ FITT-IIT दिल्ली में मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। SFT के माध्यम से उभरते युवा नवोन्मेषकों को अपने विचारों को आगे विकसित करने के लिए मार्गदर्शन और सहयोग मिलता है।</p>



<p>वक्ताओं के विचार इस बात को रेखांकित करते हैं कि Samsung Solve for Tomorrow जैसे मंच युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार, उद्योग जगत, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और अकादमिक जगत को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने, तकनीक आधारित समाधान विकसित करने और उद्यमिता की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित करके यह कार्यक्रम ऐसे नवाचारों को साकार करने का प्रयास करता है, जो बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकें।</p>
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																				</item>
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				<title><![CDATA[‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ में चार टीमों ने ₹2 करोड़ जीते]]></title>
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				<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 11:28:54 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
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									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस साल इसमें 28 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 648 शहरों से प्रविष्टियां (entries) प्राप्त हुईं। नई दिल्ली में आयोजित ग्रैंड फिनाले में, चार टीमों ने सैमसंग से कुल 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट जीती, ताकि वे अपने […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="550" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/16112208/SFT-Grand-Finale-Winners-1000x550.jpg" alt="" class="wp-image-10883" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं) सैमसंग SWA के CSR और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रमुख शुभम मुखर्जी; सैमसंग SWA के कॉर्पोरेट VP SP चन; MeitY के संयुक्त सचिव सुशील पाल; सैमसंग SWA के अध्यक्ष और CEO JB पार्क; UN रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर; और सैमसंग SWA के CFO जेसन म्युंग, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के विजेताओं के साथ</figcaption></figure>



<p>सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस साल इसमें 28 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 648 शहरों से प्रविष्टियां (entries) प्राप्त हुईं। नई दिल्ली में आयोजित ग्रैंड फिनाले में, चार टीमों ने सैमसंग से कुल 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट जीती, ताकि वे अपने टेक्नोलॉजी-आधारित समाधानों को आगे बढ़ा सकें।</p>



<p>विजेता टीमों — उत्तर प्रदेश के रायबरेली से ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt), छत्तीसगढ़ के रायपुर से ‘मॉर्फिज्म’ (morphism), नई दिल्ली से ‘इनोबोटिक्स’ (InnoBotix) और तेलंगाना के हैदराबाद से ‘सोमाट्रेस’ (Somatrace) — को IIT दिल्ली के FITT में मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सपोर्ट मिलेगा। इससे वे अपने प्रोटोटाइप को बाजार के लिए तैयार समाधानों में बदल सकेंगी, जिनमें भविष्य के स्टार्टअप बनने की क्षमता है।</p>



<p>भारत में इस साल के फाइनलिस्ट का चयन छह महीने की एक प्रक्रिया के जरिए किया गया। इसमें 135 शहरों में 184 ‘डिजाइन थिंकिंग’ वर्कशॉप, गहन बूटकैंप, प्रोटोटाइप विकास और पिच मूल्यांकन शामिल थे। इन टीमों ने चार विषयों पर अपने समाधान पेश किए: ‘AI लिविंग फॉर इंडिया’, ‘स्वास्थ्य और शिक्षा’, ‘खेल और तकनीक’, तथा ‘पर्यावरण स्थिरता’।</p>



<p>भारत में अपने पांचवें संस्करण में पहुंचा ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’, एक वैश्विक कार्यक्रम का हिस्सा है। 2022 से अब तक लगभग 80,000 छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया है। उन्होंने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित का उपयोग करके अपने समुदायों की चुनौतियों की पहचान की और उनके समाधान विकसित किए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चार विजेता समाधान:</h2>



<p>‘AI लिविंग फॉर इंडिया’: क्वांटहंट (QuantHunt) – रायबरेली, उत्तर प्रदेश: यह एक AI-आधारित साइबर सुरक्षा समाधान है, जिसे एन्क्रिप्शन की कमजोरियों का पता लगाने और संगठनों को उनके डिजिटल सिस्टम को क्वांटम-कंप्यूटिंग से जुड़े उभरते खतरों के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>‘स्वास्थ्य और शिक्षा’: मॉर्फिज्म (morphism) – रायपुर, छत्तीसगढ़: यह एक AI सिस्टम है, जिसे ऑटिस्टिक (autistic) व्यक्तियों की मदद के लिए बनाया गया है। यह चेहरे के सूक्ष्म हाव-भाव और अन्य व्यवहार संबंधी संकेतों का विश्लेषण करके उन्हें भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।</p>



<p>‘पर्यावरण स्थिरता’: इनोबोटिक्स (InnoBotix) – नई दिल्ली: ‘सेंटिनेल’ (Sentinel) नाम का यह सोलर-पावर्ड AI डिवाइस, कैमरों, रडार और सिस्मिक डेटा का उपयोग करता है। यह इंसानी बस्तियों के पास आने वाले जंगली जानवरों का पता लगाता है और समय रहते चेतावनी देता है।</p>



<p>‘खेल और तकनीक’: सोमाट्रेस (Somatrace) – हैदराबाद, तेलंगाना: यह एक पहनने योग्य (wearable) IoT ट्रेनिंग टूल है, जो ट्रेनिंग के दौरान रीढ़ की हड्डी के कोण (spinal angles) और लोड को मापता है। इससे सटीक कौशल वाले खेलों (precision-sports) के एथलीटों और कोचों को चोट लगने के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। टॉप 20 टीमों को ग्रांट के रूप में ₹20 लाख मिले, और हर सदस्य को सैमसंग गैलेक्सी का फ्लैगशिप स्मार्टफोन दिया गया। ग्रैंड फिनाले में टीमों को दो ‘कम्युनिटी चॉइस अवार्ड’ (हर एक के लिए ₹1 लाख) और एक ‘डिजिटल इम्पैक्ट अवार्ड’ (₹50,000) से भी सम्मानित किया गया।</p>



<p>इस साल की एंट्रीज़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पहनने योग्य IoT (वेयरेबल IoT) और सस्टेनेबल डिज़ाइन का इस्तेमाल करके लोगों की ज़रूरतों पर केंद्रित समाधान पेश किए गए। 50% से ज़्यादा आइडिया टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए, जो यह दिखाते हैं कि इनोवेशन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के हर कोने से वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए बेहतरीन समाधान निकल सकते हैं।</p>



<p>फाइनलिस्ट टीमों को अपने हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने के लिए सैमसंग, स्टार्टअप फाउंडर्स और IIT दिल्ली के FITT के विशेषज्ञों से मेंटरशिप मिली।</p>



<p><strong>सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के प्रेसिडेंट और CEO, मिस्टर जेबी पार्क ने कहा, </strong>“भारत में इनोवेशन की अगली लहर इस बात पर निर्भर करेगी कि हम तकनीक को लोगों की ज़रूरतों से कितनी अच्छी तरह जोड़ते हैं। साथ ही, युवाओं को ऐसे मौके देते हैं जिससे वे अपने आस-पास की समस्याओं को पहचानें और उनके लिए ऐसे समाधान तैयार करें जिन्हें टेस्ट किया जा सके। इस सफर को जारी रखने से देश की इनोवेशन क्षमता मज़बूत होती है और यह राष्ट्र-निर्माण का एक अहम हिस्सा है। इस साल के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के फाइनलिस्ट्स ने अपनी कम्युनिटी की चुनौतियों को समझने के लिए जिज्ञासा, सहानुभूति और एक उद्देश्य के साथ काम किया है। उन्होंने वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, हमें उनके इस सफर का समर्थन करने पर गर्व है। चार विजेता टीमें एक ऐसे आत्मविश्वासी और रचनात्मक भारत को दर्शाती हैं, जो अपनी सूझबूझ से बड़ा बदलाव लाने के लिए तैयार है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">अगले चरण के लिए साझेदारियां</h2>



<p>सैमसंग ने भारत में संयुक्त राष्ट्र (United Nations), FITT (IIT दिल्ली), स्टार्टअप इंडिया (DPIIT), MeitY स्टार्टअप हब, अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के ‘मंथन’ (Manthan) के साथ रणनीतिक साझेदारियां की हैं।</p>



<p>ये साझेदारियां युवा इनोवेटर्स को भारत के स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम में व्यापक समर्थन से जोड़ती हैं। इन सहयोगों के ज़रिए, सैमसंग समस्या-समाधान और उद्यमिता (entrepreneurship) की संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है, जिससे युवा इनोवेटर्स अपने आइडिया को बाज़ार के लिए तैयार समाधानों में बदल सकें।</p>



<p>ग्रैंड फिनाले में टॉप 20 टीमों के लिए एक ‘इन्वेस्टर मीट’ (निवेशकों के साथ बैठक) का भी आयोजन किया गया। इस बातचीत ने युवा इनोवेटर्स को स्टार्टअप और इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने और अपने इनोवेशन को अगले स्तर तक ले जाने के रास्ते तलाशने का मौका दिया।</p>



<p>पुरस्कार समारोह में शामिल विशिष्ट अतिथियों में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर और IIT दिल्ली के FITT के प्रबंध निदेशक निखिल अग्रवाल शामिल थे।</p>



<p>“जब इनोवेशन समावेशिता, सहानुभूति और लोगों की ज़रूरतों की स्पष्ट समझ से प्रेरित होता है, तो यह सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को आगे बढ़ाता है। भारत के युवा इनोवेटर 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। </p>



<p><strong>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, स्टीफन प्रीसनर ने कहा, </strong>“यह पहल युवाओं को ऐसे समाधान तैयार करने का अवसर देती है, जो एक अधिक समावेशी और टिकाऊ भविष्य के लिए इन मूल्यों को आधार बनाते हैं। मैं विजेताओं और सभी प्रतिभागियों को बधाई देता हूँ, और युवाओं को हमारे साझा भविष्य को आकार देने वाली चुनौतियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सैमसंग की सराहना करता हूँ।”</p>



<p><strong>भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने कहा,</strong> “विज्ञान और प्रौद्योगिकी तब सबसे अधिक मूल्यवान साबित होते हैं, जब वे लोगों के जीवन की चुनौतियों का समाधान करते हैं। इस वर्ष के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के फाइनलिस्टों ने स्वास्थ्य सेवा और स्थिरता से लेकर खेल तक, कई तरह के मुद्दों पर इसी दृष्टिकोण को अपनाया है। उन्होंने अपने विचारों को आकार देने के लिए जिज्ञासा और समस्या-समाधान (problem-solving) कौशल का उपयोग किया है। ऐसे प्लेटफॉर्म जो युवाओं को किसी चुनौती की पहचान करने से लेकर समाधान तैयार करने और उसका परीक्षण करने तक का सफर तय करने में मदद करते हैं, वे पूरे देश में नवाचार (innovation) की संस्कृति को बढ़ावा देकर हमारे इकोसिस्टम को मजबूत बनाते हैं।”</p>



<p><strong>MeitY स्टार्टअप हब के CEO, डॉ. पी.एस. मदनगोपाल ने कहा, </strong>“नवाचार के लिए केवल एक अच्छा विचार होना ही काफी नहीं है; इसके लिए उपयोगकर्ता की गहरी समझ और समाधान का परीक्षण करने, उसे बेहतर बनाने और बड़े स्तर पर लागू करने के अनुशासन की आवश्यकता होती है। इस वर्ष के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के फाइनलिस्टों ने तकनीकी कौशल और एक स्पष्ट उद्देश्य, दोनों का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अब अगला कदम यह है कि विजेता टीमों को प्रोटोटाइप से आगे बढ़कर ऐसे समाधान तैयार करने में मदद की जाए, जिनका मापने योग्य प्रभाव (measurable impact) हो। मैं उन्हें बधाई देता हूँ और यह देखने के लिए उत्सुक हूँ कि वे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान देने के लिए ‘इनक्यूबेशन सपोर्ट’ का उपयोग कैसे करते हैं।”</p>



<p>ग्रैंड फिनाले की जूरी में सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-बेंगलुरु के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहन राव गोली; सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-नोएडा के मैनेजिंग डायरेक्टर KY रू; सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-दिल्ली के मैनेजिंग डायरेक्टर डेमियन ह्यून; और सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली के मैनेजिंग डायरेक्टर युरान किम शामिल थे। बाहरी जूरी सदस्यों में नीति आयोग के AIM (अटल इनोवेशन मिशन) के निदेशक हिमांशु जोशी; IIT दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवासन वेंकटरमन; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय की निदेशक डॉ. सपना पोटी; और MeitY के वैज्ञानिक सौरभ रंजन शामिल थे।</p>



<p>अपने वैश्विक CSR विज़न, “टुगेदर फॉर टुमॉरो!” (Together for Tomorrow!) के माध्यम से “लोगों को सशक्त बनाने” (Enabling People) के उद्देश्य से, सैमसंग ज्ञान, कौशल और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने का काम करता है। भारत में, इसके नागरिक कार्यक्रम “भारत के लिए नवाचार को बढ़ावा देने” (Powering Innovation for India) के सिद्धांत से प्रेरित हैं, जो युवाओं को अपने समुदायों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग का ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ डिज़ाइन थिंकिंग कार्यक्रम अहमदाबाद के छात्रों को स्थिरता, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक स्वचालन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सशक्त बनाता है।]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0-2</link>
				<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:14:24 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Adani Vidya Mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Ahmedabad]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[पीढ़ियों से, गुजरात की उद्यमिता की भावना ने व्यवसायों, उद्योगों और समुदाय-आधारित प्रगति को आगे बढ़ाया है, जिससे यह भारत में इनोवेशन और अवसरों के सबसे गतिशील केंद्रों में से एक बन गया है। समस्या-समाधान की इस भावना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए, सैमसंग इंडिया ने अहमदाबाद के अडानी विद्या मंदिर में अपने […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-10046 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/IMG_9239.jpg" alt="" width="999" height="564" /></p>
<p>पीढ़ियों से, गुजरात की उद्यमिता की भावना ने व्यवसायों, उद्योगों और समुदाय-आधारित प्रगति को आगे बढ़ाया है, जिससे यह भारत में इनोवेशन और अवसरों के सबसे गतिशील केंद्रों में से एक बन गया है। समस्या-समाधान की इस भावना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए, सैमसंग इंडिया ने अहमदाबाद के अडानी विद्या मंदिर में अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘सॉल्व फॉर टुमारो’ (SFT) 2026 के तहत एक ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इसमें 108 से अधिक छात्रों ने जाना कि असल दुनिया की चुनौतियों को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी और इंसानों पर केंद्रित डिज़ाइन का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।</p>
<p>देश भर के 100 शहरों में चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर आयोजित इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को सैमसंग के ‘डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क’ से परिचित कराया गया। इससे उन्हें स्थानीय चुनौतियों की पहचान करने, यूज़र की ज़रूरतों को समझने और अपनी समझ को बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधानों में बदलने में मदद मिली।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ 14-22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग इंडिया का प्रमुख इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम है। इसका पाँचवाँ संस्करण प्रतिभागियों को चार विषयों — बेहतर भविष्य के लिए AI, स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण की स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), और स्पोर्ट-टेक — पर समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>अहमदाबाद वर्कशॉप के दौरान, छात्रों ने समुदाय की कई चुनौतियों को हल करने के लिए आइडिया विकसित किए। अडानी विद्या मंदिर की 9वीं कक्षा की छात्रा सान्वी नायर ने स्टोरेज (भंडारण) की भारी कमी की पहचान करने के बाद ग्रामीण लॉजिस्टिक्स में सस्टेनेबल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों को लागू किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “गाँवों में मज़दूरों और किसानों को अक्सर अनाज, पानी और भोजन को स्टोर करने में मुश्किल होती है।” इसी बात ने उन्हें पर्यावरण के अनुकूल, पोर्टेबल और सोलर-पावर्ड रेफ्रिजरेटर का आइडिया सोचने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>टेक्नोलॉजी-आधारित प्रिवेंटिव वेलनेस (बीमारी से बचाव) और कंज्यूमर सेफ्टी पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एक अन्य छात्रा वैष्णवी कश्ती ने कहा, “कई डॉक्टर कहते हैं कि हम ऐसा खाना खाने से बीमार पड़ रहे हैं जिसमें हानिकारक तत्व या सामग्री होती है।” इसी वजह से उन्होंने खाने की क्वालिटी की जाँच करने के लिए एक इंटेलिजेंट, रियल-टाइम स्कैनिंग डिवाइस का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>इसी तरह, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और जोखिम कम करने पर ध्यान देते हुए, कृति राणा ने बताया कि “मशीनरी में कुछ तकनीकी खराबी के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों में अक्सर आसानी से आग लग जाती है।” इससे प्रेरित होकर उन्होंने मैकेनिकल खराबी का पहले ही पता लगाने के लिए एक ऑटोमेटेड IoT-अलर्ट सिस्टम का आइडिया सोचा।</p>
<p>वर्कशॉप से ​​निकले समाधानों में गुजरात में इनोवेशन के अवसरों की विविधता दिखाई दी। सस्टेनेबिलिटी और फूड सेफ्टी से लेकर इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन तक, छात्रों ने दिखाया कि कैसे स्थानीय चुनौतियाँ असरदार इनोवेशन की शुरुआत बन सकती हैं। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, कंपनी पूरे देश में ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Solve for Tomorrow) का दायरा काफी बढ़ा रही है। इससे अलग-अलग बैकग्राउंड वाले युवा इनोवेटर्स को भविष्य के लिए तैयार रहने, समस्याओं को सुलझाने, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े हुनर ​​सीखने के मौके मिलेंगे।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले रहेंगे। जीतने वाली टॉप चार टीमों को FITT, IIT दिल्ली के ज़रिए 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, ट्रेनिंग, प्रोटोटाइपिंग में मदद और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम तक पहुँच भी मिलेगी।</p>
<p>ज़्यादा जानकारी और आवेदन के लिए यहाँ जाएँ: <a href="http://www.samsung.com/in/solvefortomorrow">www.samsung.com/in/solvefortomorrow</a></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग का ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ जम्मू-कश्मीर में ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ लाया है और युवाओं को स्थानीय चुनौतियों के लिए AI-आधारित समाधान बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0</link>
				<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:58:14 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Army Public School]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Jammu]]></category>
		<category><![CDATA[Kashmir]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnuchak]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने अपना खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’, जम्मू-कश्मीर में शुरू किया। इसमें ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए 452 स्टूडेंट्स को शामिल किया गया। इन वर्कशॉप में यह पता लगाया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का इस्तेमाल करके उनके समुदायों की असल चुनौतियों का […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p>सैमसंग इंडिया ने अपना खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’, जम्मू-कश्मीर में शुरू किया। इसमें ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए 452 स्टूडेंट्स को शामिल किया गया। इन वर्कशॉप में यह पता लगाया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का इस्तेमाल करके उनके समुदायों की असल चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।</p>
<p>इन डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप में हिस्सा लेने वालों को सैमसंग के ‘ह्यूमन-सेंटर्ड इनोवेशन फ्रेमवर्क’ (लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का तरीका) से परिचित कराया गया। उन्हें रोज़मर्रा की चुनौतियों की पहचान करने, यूज़र की ज़रूरतों को समझने और सार्थक सामाजिक असर वाले टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रैक्टिकल टूल्स दिए गए।</p>
<p>जम्मू के आर्मी पब्लिक स्कूल, रत्नूचक और बारामूला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में आयोजित इन वर्कशॉप ने स्टूडेंट्स को डिजिटल एक्सेसिबिलिटी, कम्युनिटी डेवलपमेंट, एजुकेशन और बेहतर सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन के मौकों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>ये वर्कशॉप सैमसंग की उस देशव्यापी कोशिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद बड़े शहरों से आगे बढ़कर इनोवेशन के मौकों का विस्तार करना है। ‘सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के तहत, सैमसंग पूरे भारत के 100 शहरों में डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप आयोजित कर रहा है। इससे अलग-अलग बैकग्राउंड वाले युवा इनोवेटर्स को भविष्य के लिए तैयार रहने वाले प्रॉब्लम-सॉल्विंग और एंटरप्रेन्योरियल स्किल्स विकसित करने में मदद मिल रही है।</p>
<p>इनमें बारामूला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज सोपोर के ज़मीन अनायत लोन भी शामिल थे। उन्होंने एक मोबाइल एप्लीकेशन का कॉन्सेप्ट तैयार किया, जिसे SOS अलर्ट और लाइव-लोकेशन शेयरिंग फीचर्स के ज़रिए एक्सेसिबिलिटी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>
<p>ज़मीन ने कहा, “वर्कशॉप ने मुझे सिखाया कि इनोवेशन की शुरुआत लोगों और उनके अनुभवों को समझने से होती है। इसने मुझे यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसे सार्थक समाधान कैसे बनाए जा सकते हैं, जिनका समुदायों पर सकारात्मक असर पड़े।”</p>
<p>वर्कशॉप ने हिस्सा लेने वालों को यह देखने के लिए भी प्रेरित किया कि टेक्नोलॉजी कैसे पब्लिक सर्विसेज़ को मज़बूत कर सकती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। आर्मी पब्लिक स्कूल, रत्नूचक के गगनदीप सिंह ने ज़्यादा कुशल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (कचरा प्रबंधन प्रणाली) को सपोर्ट करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित तरीकों पर विचार किया। वहीं, नौवीं कक्षा की स्टूडेंट गरिमा यादव ने इस बात पर गौर किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म कैसे स्टूडेंट्स को करियर अवेयरनेस और स्किल-डेवलपमेंट के मौकों तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>वर्कशॉप से ​​निकले आइडियाज़ ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं की बढ़ती इनोवेशन क्षमता को दिखाया। हिस्सा लेने वालों ने दिखाया कि कैसे डिज़ाइन थिंकिंग रोज़मर्रा के ऑब्ज़र्वेशन को ऐसे स्केलेबल समाधानों में बदल सकती है, जो स्थानीय ज़रूरतों को पूरा करते हुए व्यापक सामाजिक प्रभाव डालते हैं।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ 14-22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग इंडिया का खास इनोवेशन कॉम्पिटिशन है। यह प्रोग्राम हिस्सा लेने वालों को चार थीम के तहत समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है — बेहतर कल के लिए AI, हेल्थ और एजुकेशन, एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी और स्पोर्ट-टेक। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, कंपनी देश की अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को आगे बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। इसके तहत पूरे भारत के छात्रों तक इनोवेशन, मेंटरशिप और एंटरप्रेन्योरशिप के मौके पहुंचाए जा रहे हैं।</p>
<p>इस प्रोग्राम के आखिर में, टॉप चार जीतने वाली टीमों को FITT, IIT दिल्ली के ज़रिए 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, ट्रेनिंग, प्रोटोटाइपिंग में मदद और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम तक पहुंच भी मिलेगी।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं।</p>
<p>आवेदन करने के लिए, samsung.com/in/solvefortomorrow पर जाएं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो टीम पैरास्पीक ने AI समिट 2026 में टॉप ऑनर जीता]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 15:50:09 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Samantha Gupta]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[AI Summit 2026]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow]]></category>
		<category><![CDATA[Team Paraspeak]]></category>
		<category><![CDATA[YUVAi Global Youth Challenge]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4tLxAfn</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया के फ्लैगशिप इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के विजेताओं में से एक, प्रणेत खेतान ने चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पहला पुरस्कार जीता है। 16 साल के प्रणेत, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के चार नेशनल विजेताओं में से एक थे। यह एक पैन-इंडिया इनोवेशन कॉम्पिटिशन है जो […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p>सैमसंग इंडिया के फ्लैगशिप इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के विजेताओं में से एक, प्रणेत खेतान ने चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पहला पुरस्कार जीता है।</p>
<p>16 साल के प्रणेत, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के चार नेशनल विजेताओं में से एक थे। यह एक पैन-इंडिया इनोवेशन कॉम्पिटिशन है जो युवाओं को असल दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए टेक-बेस्ड सॉल्यूशन बनाने में मदद करता है।</p>
<p>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के दौरान, प्रणेत ने पैरास्पीक दिखाया, जो एक रियल-टाइम, स्पीकर-इंडिपेंडेंट स्पीच एन्हांसमेंट डिवाइस है जो डीप-लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके धीमी स्पीच (डिसार्थ्रिया) को साफ कम्युनिकेशन में बदलता है, जिससे लोगों को कॉन्फिडेंस के साथ कम्युनिकेट करने में मदद मिलती है।</p>
<p>पैरास्पीक को प्रोग्राम के दौरान 2025 में सैमसंग एक्सपर्ट्स से मेंटरशिप और FITT, IIT दिल्ली की इनक्यूबेशन लैब में इनक्यूबेशन मिला।</p>
<p>चल रहे AI इम्पैक्ट समिट में, पैरास्पीक ने YUVAi ग्लोबल यूथ चैलेंज जीता, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया की पहल है, और उसे ₹15 लाख का इनाम मिला। इस कॉम्पिटिशन में 38 देशों से 2,500 से ज़्यादा एंट्री आईं, जिसमें सोशल और डेवलपमेंटल प्रायोरिटीज़ के हिसाब से सॉल्यूशन डेवलप करने वाले युवा इनोवेटर्स की मज़बूत ग्लोबल हिस्सेदारी दिखाई गई।</p>
<p>यह अचीवमेंट सैमसंग के इनोवेशन इकोसिस्टम से सपोर्टेड उभरते टैलेंट के बढ़ते असर को दिखाता है। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो पार्टिसिपेंट्स को मेंटरशिप, स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और इंडस्ट्री एक्सपोज़र देता है, जिससे वे आइडियाज़ को प्रैक्टिकल, स्केलेबल सॉल्यूशन में बदल पाते हैं जो रियल-वर्ल्ड में काम के हों।</p>
<p>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के दौरान, टॉप चार विनिंग टीमों — पर्सेविया (बेंगलुरु), नेक्स्टप्ले.AI (औरंगाबाद), पृथ्वी रक्षक (पलामू) और पैरास्पीक (गुरुग्राम) — को इनक्यूबेशन ग्रांट में INR 1 करोड़ मिले और वे IIT दिल्ली के FITT लैब्स में मेंटरशिप सपोर्ट के साथ अपने प्रोटोटाइप को स्केलेबल रियल-वर्ल्ड सॉल्यूशन में डेवलप करना जारी रखेंगी।</p>
<p>नई दिल्ली में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल पॉलिसीमेकर्स, इंडस्ट्री लीडर्स, रिसर्चर्स और इनोवेटर्स को बुलाया गया ताकि ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए बदलाव लाने वाले AI सॉल्यूशन दिखाए जा सकें।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[डिज़ाइन थिंकिंग: एआई युग में टेक्नॉलॉजी का दिल तक पहुंचने का रास्ता]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae</link>
				<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 17:36:14 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Innovators]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow Season 3]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/48fwhNi</guid>
									<description><![CDATA[वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30056 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_125619.jpg" alt="" width="2964" height="2164" /></p>
<p>वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे हैं। हालाँकि, वे जो खोज रहे हैं, वह स्वयं नवाचारों की तरह ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो सकता है: कि डिज़ाइन थिंकिंग केवल एक टूलकिट नहीं है, बल्कि एक मानसिकता है जो सहानुभूति, धैर्य और असफलता के प्रति खुलेपन की माँग करती है।</p>
<p>पिछले सप्ताह, प्रतिभागी मार्गदर्शकों, कार्यशालाओं और FITT प्रयोगशालाओं के अपने पहले अनुभव के माध्यम से विचारों में पूर्णता की तीव्र खोज में लगे रहे।</p>
<p>एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित दुनिया में जहाँ गति और स्वचालन सार्वजनिक चर्चा में हावी हैं, इन छात्रों को याद दिलाया जा रहा है कि तकनीक की असली परीक्षा यह है कि क्या यह मानव हृदय और मानव व्यवहार से जुड़ सकती है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30055 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250909_151634.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>समस्या के साथ बैठना</h3>
<p>इस संदर्भ में, पिंक ब्रिगेडियर्स की कहानी पर बात करना उचित होगा। इस टीम में महाराष्ट्र के विवेक सावंत और ओडिशा की श्रेया आदित्य दलाई शामिल हैं, दोनों एनआईटी राउरकेला के इंजीनियरिंग छात्र हैं। इस साल वे क्या कर रहे हैं? वे भारत के पहले एआई-संचालित ब्रेस्ट केयर ऐप पर काम कर रहे हैं। पहली नज़र में, यह एक तकनीकी चमत्कार है: एज डिप्लॉयमेंट के साथ कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क जो विसंगतियों का पता लगा सकता है और महिलाओं को डॉक्टरों से जोड़ सकता है। लेकिन वे मानते हैं कि यह सफलता कोड में नहीं है।</p>
<p>“हमारे उत्पाद के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। डिज़ाइन थिंकिंग प्रशिक्षण ने हमें समस्या पर अधिक समय तक विचार करने, उपयोगकर्ताओं को अधिक गहराई से समझने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार ढलने के लिए प्रोत्साहित किया। यूएक्स/यूआई और विश्वास उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि एआई।”</p>
<p>उनके लिए, डिज़ाइन थिंकिंग एक अनुस्मारक है कि कोई ऐप किसी को कैसा महसूस कराता है, यह उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है जितना कि वह क्या करता है। एक गहरी निजी स्वास्थ्य चिंता के लिए तकनीक बनाने का मतलब है कि स्वर, रंग पैलेट, भाषा और इंटरफ़ेस, सभी सहानुभूति के प्रश्न बन जाते हैं। यह अंतर्दृष्टि हाल ही में स्टैनफोर्ड के शोध से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि निष्पक्ष और भरोसेमंद एआई सिस्टम बनाने के लिए न केवल एल्गोरिदम पर ध्यान देने की आवश्यकता है, बल्कि पारदर्शिता, एज-केस व्यवहार और उपयोगकर्ता की सुविधा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30054 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250908_113245.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>एआई का मानवीकरण</h3>
<p>दूसरी ओर, FITT लैब के अंदर एक जोड़ी अपने उत्पाद से एआई के बारे में सीख समझने की कोशिश कर रही है – एआई कैसे बुद्धिमत्ता प्रदान कर सकता है, और डिज़ाइन थिंकिंग इसे कैसे बोधगम्य बना सकती है।</p>
<p>माइंडस्नैप को ही लीजिए, जो कोलकाता की देवयानी गुप्ता और सायन अधिकारी द्वारा बनाया गया एक व्यक्तिगत शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, दोनों इंजीनियरिंग के छात्र हैं। बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) द्वारा संचालित, यह प्लेटफ़ॉर्म न्यूरोडाइवर्सिटी सीखने वालों के अनुकूल है, चाहे वे डिस्लेक्सिक हों, स्पेक्ट्रम पर हों, या बस खेलों के माध्यम से बेहतर सीखते हों।</p>
<p>वे बताते हैं, “हमने महसूस किया कि अगर इंटरफ़ेस सीखने वाले से बात नहीं करता है तो कोई भी एल्गोरिदम काम नहीं करता है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यूएक्स/यूआई, पहुँच और छात्रों के जीवंत अनुभव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।”</p>
<p>चेन्नई के आदित्य वर्मा मामा सहेली एआई के साथ एक ऐसी ही खोज कर रहे हैं, जो एक समग्र गर्भावस्था ऐप है जो उनकी माँ के उन दूरदराज के इलाकों के अनुभव से प्रेरित है जहाँ चिकित्सा की पहुँच सीमित थी।</p>
<p>“मेरा ऐप एक दोस्त की तरह महसूस होना चाहिए था, न कि सिर्फ़ एक टूल की तरह। डिज़ाइन की सोच ने मुझे इसे उपयोगकर्ता की भावनाओं, व्यवहार और यहाँ तक कि सांस्कृतिक संदर्भ के माध्यम से देखने के लिए प्रेरित किया। यही इसे मापनीय और विश्वसनीय बनाता है,” वे कहते हैं।</p>
<p>उनका ऐप सूचनाओं को संश्लेषित करता है, गलत सूचनाओं को फ़िल्टर करता है, और पहनने योग्य उपकरणों के साथ एकीकृत होकर अति-व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करता है, लेकिन इसकी आत्मा साहचर्य के विचार में निहित है। उनका दृष्टिकोण PADTHAI-MM ढाँचे के अनुरूप है, जो दर्शाता है कि पारदर्शी, मानव-केंद्रित डिज़ाइन, उपयोगकर्ता संदर्भ के साथ व्याख्यात्मकता को मिलाकर, अपारदर्शी “ब्लैक बॉक्स” AI की तुलना में कहीं अधिक विश्वास पैदा करता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30057 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_1333390.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>पैमाने के लिए एक रणनीति के रूप में डिज़ाइन</h3>
<p>लुधियाना की पृथ्वीरक्षक टीम: 12वीं कक्षा के अभिषेक ढांडा, प्रभकीरत सिंह और रचिता चंडोक, देश के पहले मॉड्यूलर स्वचालित वर्मीकंपोस्टिंग केंद्र के ज़रिए भारत की विशाल अपशिष्ट प्रबंधन समस्या से जूझ रहे हैं।</p>
<p>यह विचार एक कक्षा प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, और अब यह प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और 90-दिवसीय कंपोस्टिंग प्रक्रिया को केवल 30 दिनों में समेटने की तीन साल की यात्रा बन गया है।</p>
<p>वे बताते हैं, “परंपरागत रूप से, वर्मीकंपोस्टिंग श्रम-गहन और पैमाने पर लागू करना कठिन रहा है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें ऐसे मॉड्यूलर मॉडल की कल्पना करने में मदद की जो किसी बगीचे, हाउसिंग सोसाइटी या यहाँ तक कि शहरी स्तर पर भी काम कर सकें।”</p>
<p>उनके लिए, स्केलेबिलिटी का मतलब आकार नहीं, बल्कि अनुकूलनशीलता है, यानी किसानों, शहरी परिवारों या नगर पालिकाओं की सेवा के लिए एक ही मूल विचार को आकार देने की क्षमता।</p>
<h3></h3>
<h3>सफ़र, मंज़िल नहीं</h3>
<p>इनमें से किसी भी टीम को नहीं पता कि वे अंततः सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो चुनौती जीत पाएँगे या नहीं। उनके प्रोटोटाइप अभी भी अपूर्ण हैं; उनके पिच डेक अभी भी पुनर्लेखन के दौर से गुज़र रहे हैं। फिर भी, जो चीज़ उन्हें एक साथ बांधती है, वह यह मान्यता है कि डिज़ाइन थिंकिंग ने उनके दृष्टिकोण में पहले ही बदलाव कर लिया है।</p>
<p>जबकि एआई को लेकर वैश्विक चर्चाएँ अक्सर नैतिकता, पूर्वाग्रह और गति के सवालों में उलझ जाती हैं, ये युवा समस्या-समाधानकर्ता अपने नवाचारों को किसी पुरानी और स्थिर चीज़ पर आधारित कर रहे हैं: मानव-केंद्रित डिज़ाइन।</p>
<p>वे खोज रहे हैं कि एआई, मस्तिष्क हो सकता है। लेकिन डिज़ाइन थिंकिंग, अपनी विनम्रता और अनुशासन के साथ, हृदय है। और जैसे-जैसे ये छात्र शीर्ष 20 में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे, यह सबसे महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकता है।</p>
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