<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><?xml-stylesheet title="XSL_formatting" type="text/xsl" href="https://news.samsung.com/bharat/wp-content/plugins/btr_rss/btr_rss.xsl"?><rss version="2.0"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	 xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"
	>
	<channel>
		<title>FITT &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
		<atom:link href="https://news.samsung.com/bharat/tag/fitt/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
		<link>https://news.samsung.com/bharat</link>
        <image>
            <url>https://img.global.news.samsung.com/image/newlogo/logo_samsung-newsroom.png</url>
            <title>FITT &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
            <link>https://news.samsung.com/bharat</link>
        </image>
        <currentYear>2026</currentYear>
        <cssFile>https://news.samsung.com/bharat/wp-content/plugins/btr_rss/btr_rss_xsl.css</cssFile>
		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
		<lastBuildDate>Tue, 21 Jul 2026 16:15:47 +0000</lastBuildDate>
		<language>en-US</language>
		<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
		<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग का ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ डिज़ाइन थिंकिंग कार्यक्रम अहमदाबाद के छात्रों को स्थिरता, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक स्वचालन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सशक्त बनाता है।]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0-2</link>
				<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:14:24 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/FIMG_9239-728x410.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Adani Vidya Mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Ahmedabad]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/3Sm6SM5</guid>
									<description><![CDATA[पीढ़ियों से, गुजरात की उद्यमिता की भावना ने व्यवसायों, उद्योगों और समुदाय-आधारित प्रगति को आगे बढ़ाया है, जिससे यह भारत में इनोवेशन और अवसरों के सबसे गतिशील केंद्रों में से एक बन गया है। समस्या-समाधान की इस भावना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए, सैमसंग इंडिया ने अहमदाबाद के अडानी विद्या मंदिर में अपने […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-10046 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/IMG_9239.jpg" alt="" width="999" height="564" /></p>
<p>पीढ़ियों से, गुजरात की उद्यमिता की भावना ने व्यवसायों, उद्योगों और समुदाय-आधारित प्रगति को आगे बढ़ाया है, जिससे यह भारत में इनोवेशन और अवसरों के सबसे गतिशील केंद्रों में से एक बन गया है। समस्या-समाधान की इस भावना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए, सैमसंग इंडिया ने अहमदाबाद के अडानी विद्या मंदिर में अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘सॉल्व फॉर टुमारो’ (SFT) 2026 के तहत एक ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ आयोजित की। इसमें 108 से अधिक छात्रों ने जाना कि असल दुनिया की चुनौतियों को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी और इंसानों पर केंद्रित डिज़ाइन का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।</p>
<p>देश भर के 100 शहरों में चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर आयोजित इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को सैमसंग के ‘डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क’ से परिचित कराया गया। इससे उन्हें स्थानीय चुनौतियों की पहचान करने, यूज़र की ज़रूरतों को समझने और अपनी समझ को बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधानों में बदलने में मदद मिली।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ 14-22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग इंडिया का प्रमुख इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम है। इसका पाँचवाँ संस्करण प्रतिभागियों को चार विषयों — बेहतर भविष्य के लिए AI, स्वास्थ्य और शिक्षा, पर्यावरण की स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), और स्पोर्ट-टेक — पर समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>अहमदाबाद वर्कशॉप के दौरान, छात्रों ने समुदाय की कई चुनौतियों को हल करने के लिए आइडिया विकसित किए। अडानी विद्या मंदिर की 9वीं कक्षा की छात्रा सान्वी नायर ने स्टोरेज (भंडारण) की भारी कमी की पहचान करने के बाद ग्रामीण लॉजिस्टिक्स में सस्टेनेबल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों को लागू किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “गाँवों में मज़दूरों और किसानों को अक्सर अनाज, पानी और भोजन को स्टोर करने में मुश्किल होती है।” इसी बात ने उन्हें पर्यावरण के अनुकूल, पोर्टेबल और सोलर-पावर्ड रेफ्रिजरेटर का आइडिया सोचने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>टेक्नोलॉजी-आधारित प्रिवेंटिव वेलनेस (बीमारी से बचाव) और कंज्यूमर सेफ्टी पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एक अन्य छात्रा वैष्णवी कश्ती ने कहा, “कई डॉक्टर कहते हैं कि हम ऐसा खाना खाने से बीमार पड़ रहे हैं जिसमें हानिकारक तत्व या सामग्री होती है।” इसी वजह से उन्होंने खाने की क्वालिटी की जाँच करने के लिए एक इंटेलिजेंट, रियल-टाइम स्कैनिंग डिवाइस का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>इसी तरह, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और जोखिम कम करने पर ध्यान देते हुए, कृति राणा ने बताया कि “मशीनरी में कुछ तकनीकी खराबी के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों में अक्सर आसानी से आग लग जाती है।” इससे प्रेरित होकर उन्होंने मैकेनिकल खराबी का पहले ही पता लगाने के लिए एक ऑटोमेटेड IoT-अलर्ट सिस्टम का आइडिया सोचा।</p>
<p>वर्कशॉप से ​​निकले समाधानों में गुजरात में इनोवेशन के अवसरों की विविधता दिखाई दी। सस्टेनेबिलिटी और फूड सेफ्टी से लेकर इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन तक, छात्रों ने दिखाया कि कैसे स्थानीय चुनौतियाँ असरदार इनोवेशन की शुरुआत बन सकती हैं। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, कंपनी पूरे देश में ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए ‘सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Solve for Tomorrow) का दायरा काफी बढ़ा रही है। इससे अलग-अलग बैकग्राउंड वाले युवा इनोवेटर्स को भविष्य के लिए तैयार रहने, समस्याओं को सुलझाने, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े हुनर ​​सीखने के मौके मिलेंगे।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले रहेंगे। जीतने वाली टॉप चार टीमों को FITT, IIT दिल्ली के ज़रिए 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, ट्रेनिंग, प्रोटोटाइपिंग में मदद और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम तक पहुँच भी मिलेगी।</p>
<p>ज़्यादा जानकारी और आवेदन के लिए यहाँ जाएँ: <a href="http://www.samsung.com/in/solvefortomorrow">www.samsung.com/in/solvefortomorrow</a></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग का ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ जम्मू-कश्मीर में ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ लाया है और युवाओं को स्थानीय चुनौतियों के लिए AI-आधारित समाधान बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0</link>
				<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:58:14 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/06/APS-F-728x410.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Army Public School]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Jammu]]></category>
		<category><![CDATA[Kashmir]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnuchak]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4uPOzMO</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने अपना खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’, जम्मू-कश्मीर में शुरू किया। इसमें ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए 452 स्टूडेंट्स को शामिल किया गया। इन वर्कशॉप में यह पता लगाया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का इस्तेमाल करके उनके समुदायों की असल चुनौतियों का […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p>सैमसंग इंडिया ने अपना खास इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’, जम्मू-कश्मीर में शुरू किया। इसमें ‘डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप’ के ज़रिए 452 स्टूडेंट्स को शामिल किया गया। इन वर्कशॉप में यह पता लगाया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का इस्तेमाल करके उनके समुदायों की असल चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।</p>
<p>इन डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप में हिस्सा लेने वालों को सैमसंग के ‘ह्यूमन-सेंटर्ड इनोवेशन फ्रेमवर्क’ (लोगों पर केंद्रित इनोवेशन का तरीका) से परिचित कराया गया। उन्हें रोज़मर्रा की चुनौतियों की पहचान करने, यूज़र की ज़रूरतों को समझने और सार्थक सामाजिक असर वाले टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रैक्टिकल टूल्स दिए गए।</p>
<p>जम्मू के आर्मी पब्लिक स्कूल, रत्नूचक और बारामूला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में आयोजित इन वर्कशॉप ने स्टूडेंट्स को डिजिटल एक्सेसिबिलिटी, कम्युनिटी डेवलपमेंट, एजुकेशन और बेहतर सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन के मौकों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>ये वर्कशॉप सैमसंग की उस देशव्यापी कोशिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद बड़े शहरों से आगे बढ़कर इनोवेशन के मौकों का विस्तार करना है। ‘सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के तहत, सैमसंग पूरे भारत के 100 शहरों में डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप आयोजित कर रहा है। इससे अलग-अलग बैकग्राउंड वाले युवा इनोवेटर्स को भविष्य के लिए तैयार रहने वाले प्रॉब्लम-सॉल्विंग और एंटरप्रेन्योरियल स्किल्स विकसित करने में मदद मिल रही है।</p>
<p>इनमें बारामूला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज सोपोर के ज़मीन अनायत लोन भी शामिल थे। उन्होंने एक मोबाइल एप्लीकेशन का कॉन्सेप्ट तैयार किया, जिसे SOS अलर्ट और लाइव-लोकेशन शेयरिंग फीचर्स के ज़रिए एक्सेसिबिलिटी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>
<p>ज़मीन ने कहा, “वर्कशॉप ने मुझे सिखाया कि इनोवेशन की शुरुआत लोगों और उनके अनुभवों को समझने से होती है। इसने मुझे यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसे सार्थक समाधान कैसे बनाए जा सकते हैं, जिनका समुदायों पर सकारात्मक असर पड़े।”</p>
<p>वर्कशॉप ने हिस्सा लेने वालों को यह देखने के लिए भी प्रेरित किया कि टेक्नोलॉजी कैसे पब्लिक सर्विसेज़ को मज़बूत कर सकती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। आर्मी पब्लिक स्कूल, रत्नूचक के गगनदीप सिंह ने ज़्यादा कुशल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (कचरा प्रबंधन प्रणाली) को सपोर्ट करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित तरीकों पर विचार किया। वहीं, नौवीं कक्षा की स्टूडेंट गरिमा यादव ने इस बात पर गौर किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म कैसे स्टूडेंट्स को करियर अवेयरनेस और स्किल-डेवलपमेंट के मौकों तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>वर्कशॉप से ​​निकले आइडियाज़ ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं की बढ़ती इनोवेशन क्षमता को दिखाया। हिस्सा लेने वालों ने दिखाया कि कैसे डिज़ाइन थिंकिंग रोज़मर्रा के ऑब्ज़र्वेशन को ऐसे स्केलेबल समाधानों में बदल सकती है, जो स्थानीय ज़रूरतों को पूरा करते हुए व्यापक सामाजिक प्रभाव डालते हैं।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ 14-22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग इंडिया का खास इनोवेशन कॉम्पिटिशन है। यह प्रोग्राम हिस्सा लेने वालों को चार थीम के तहत समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है — बेहतर कल के लिए AI, हेल्थ और एजुकेशन, एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी और स्पोर्ट-टेक। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, कंपनी देश की अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को आगे बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। इसके तहत पूरे भारत के छात्रों तक इनोवेशन, मेंटरशिप और एंटरप्रेन्योरशिप के मौके पहुंचाए जा रहे हैं।</p>
<p>इस प्रोग्राम के आखिर में, टॉप चार जीतने वाली टीमों को FITT, IIT दिल्ली के ज़रिए 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट मिलेगा। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, ट्रेनिंग, प्रोटोटाइपिंग में मदद और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम तक पहुंच भी मिलेगी।</p>
<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं।</p>
<p>आवेदन करने के लिए, samsung.com/in/solvefortomorrow पर जाएं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो टीम पैरास्पीक ने AI समिट 2026 में टॉप ऑनर जीता]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%9f%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%9f</link>
				<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 15:50:09 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/02/feature-ai-728x409-728x409.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Priyanka Singh]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[AI Summit 2026]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow]]></category>
		<category><![CDATA[Team Paraspeak]]></category>
		<category><![CDATA[YUVAi Global Youth Challenge]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4tLxAfn</guid>
									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया के फ्लैगशिप इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के विजेताओं में से एक, प्रणेत खेतान ने चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पहला पुरस्कार जीता है। 16 साल के प्रणेत, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के चार नेशनल विजेताओं में से एक थे। यह एक पैन-इंडिया इनोवेशन कॉम्पिटिशन है जो […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p>सैमसंग इंडिया के फ्लैगशिप इनोवेशन प्रोग्राम, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के विजेताओं में से एक, प्रणेत खेतान ने चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पहला पुरस्कार जीता है।</p>
<p>16 साल के प्रणेत, सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के चार नेशनल विजेताओं में से एक थे। यह एक पैन-इंडिया इनोवेशन कॉम्पिटिशन है जो युवाओं को असल दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए टेक-बेस्ड सॉल्यूशन बनाने में मदद करता है।</p>
<p>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के दौरान, प्रणेत ने पैरास्पीक दिखाया, जो एक रियल-टाइम, स्पीकर-इंडिपेंडेंट स्पीच एन्हांसमेंट डिवाइस है जो डीप-लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके धीमी स्पीच (डिसार्थ्रिया) को साफ कम्युनिकेशन में बदलता है, जिससे लोगों को कॉन्फिडेंस के साथ कम्युनिकेट करने में मदद मिलती है।</p>
<p>पैरास्पीक को प्रोग्राम के दौरान 2025 में सैमसंग एक्सपर्ट्स से मेंटरशिप और FITT, IIT दिल्ली की इनक्यूबेशन लैब में इनक्यूबेशन मिला।</p>
<p>चल रहे AI इम्पैक्ट समिट में, पैरास्पीक ने YUVAi ग्लोबल यूथ चैलेंज जीता, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया की पहल है, और उसे ₹15 लाख का इनाम मिला। इस कॉम्पिटिशन में 38 देशों से 2,500 से ज़्यादा एंट्री आईं, जिसमें सोशल और डेवलपमेंटल प्रायोरिटीज़ के हिसाब से सॉल्यूशन डेवलप करने वाले युवा इनोवेटर्स की मज़बूत ग्लोबल हिस्सेदारी दिखाई गई।</p>
<p>यह अचीवमेंट सैमसंग के इनोवेशन इकोसिस्टम से सपोर्टेड उभरते टैलेंट के बढ़ते असर को दिखाता है। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो पार्टिसिपेंट्स को मेंटरशिप, स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और इंडस्ट्री एक्सपोज़र देता है, जिससे वे आइडियाज़ को प्रैक्टिकल, स्केलेबल सॉल्यूशन में बदल पाते हैं जो रियल-वर्ल्ड में काम के हों।</p>
<p>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2025 के दौरान, टॉप चार विनिंग टीमों — पर्सेविया (बेंगलुरु), नेक्स्टप्ले.AI (औरंगाबाद), पृथ्वी रक्षक (पलामू) और पैरास्पीक (गुरुग्राम) — को इनक्यूबेशन ग्रांट में INR 1 करोड़ मिले और वे IIT दिल्ली के FITT लैब्स में मेंटरशिप सपोर्ट के साथ अपने प्रोटोटाइप को स्केलेबल रियल-वर्ल्ड सॉल्यूशन में डेवलप करना जारी रखेंगी।</p>
<p>नई दिल्ली में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल पॉलिसीमेकर्स, इंडस्ट्री लीडर्स, रिसर्चर्स और इनोवेटर्स को बुलाया गया ताकि ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए बदलाव लाने वाले AI सॉल्यूशन दिखाए जा सकें।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[डिज़ाइन थिंकिंग: एआई युग में टेक्नॉलॉजी का दिल तक पहुंचने का रास्ता]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae</link>
				<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 17:36:14 +0000</pubDate>
								<media:content url="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2025/09/feature-sft-boot.jpg" medium="image" />
				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Design Thinking]]></category>
		<category><![CDATA[FITT]]></category>
		<category><![CDATA[Innovators]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Solve for Tomorrow Season 3]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/48fwhNi</guid>
									<description><![CDATA[वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-30056 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_125619.jpg" alt="" width="2964" height="2164" /></p>
<p>वे अभी तक तैयार उत्पाद नहीं हैं, न ही उनके प्रोटोटाइप और न ही उनकी यात्राएँ। सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के हिस्से के रूप में, शीर्ष 40 नवप्रवर्तकों के लिए चुनौतियाँ समाप्त नहीं हुई हैं। ये युवा परिवर्तनकर्ता अभी भी विचारों का निर्माण, संशोधन, विस्तार, परीक्षण और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से त्यागने में लगे हैं। हालाँकि, वे जो खोज रहे हैं, वह स्वयं नवाचारों की तरह ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो सकता है: कि डिज़ाइन थिंकिंग केवल एक टूलकिट नहीं है, बल्कि एक मानसिकता है जो सहानुभूति, धैर्य और असफलता के प्रति खुलेपन की माँग करती है।</p>
<p>पिछले सप्ताह, प्रतिभागी मार्गदर्शकों, कार्यशालाओं और FITT प्रयोगशालाओं के अपने पहले अनुभव के माध्यम से विचारों में पूर्णता की तीव्र खोज में लगे रहे।</p>
<p>एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित दुनिया में जहाँ गति और स्वचालन सार्वजनिक चर्चा में हावी हैं, इन छात्रों को याद दिलाया जा रहा है कि तकनीक की असली परीक्षा यह है कि क्या यह मानव हृदय और मानव व्यवहार से जुड़ सकती है।</p>
<p><img class="aligncenter wp-image-30055 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250909_151634.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>समस्या के साथ बैठना</h3>
<p>इस संदर्भ में, पिंक ब्रिगेडियर्स की कहानी पर बात करना उचित होगा। इस टीम में महाराष्ट्र के विवेक सावंत और ओडिशा की श्रेया आदित्य दलाई शामिल हैं, दोनों एनआईटी राउरकेला के इंजीनियरिंग छात्र हैं। इस साल वे क्या कर रहे हैं? वे भारत के पहले एआई-संचालित ब्रेस्ट केयर ऐप पर काम कर रहे हैं। पहली नज़र में, यह एक तकनीकी चमत्कार है: एज डिप्लॉयमेंट के साथ कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क जो विसंगतियों का पता लगा सकता है और महिलाओं को डॉक्टरों से जोड़ सकता है। लेकिन वे मानते हैं कि यह सफलता कोड में नहीं है।</p>
<p>“हमारे उत्पाद के लिए अत्यधिक संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। डिज़ाइन थिंकिंग प्रशिक्षण ने हमें समस्या पर अधिक समय तक विचार करने, उपयोगकर्ताओं को अधिक गहराई से समझने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार ढलने के लिए प्रोत्साहित किया। यूएक्स/यूआई और विश्वास उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि एआई।”</p>
<p>उनके लिए, डिज़ाइन थिंकिंग एक अनुस्मारक है कि कोई ऐप किसी को कैसा महसूस कराता है, यह उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है जितना कि वह क्या करता है। एक गहरी निजी स्वास्थ्य चिंता के लिए तकनीक बनाने का मतलब है कि स्वर, रंग पैलेट, भाषा और इंटरफ़ेस, सभी सहानुभूति के प्रश्न बन जाते हैं। यह अंतर्दृष्टि हाल ही में स्टैनफोर्ड के शोध से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि निष्पक्ष और भरोसेमंद एआई सिस्टम बनाने के लिए न केवल एल्गोरिदम पर ध्यान देने की आवश्यकता है, बल्कि पारदर्शिता, एज-केस व्यवहार और उपयोगकर्ता की सुविधा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30054 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250908_113245.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>एआई का मानवीकरण</h3>
<p>दूसरी ओर, FITT लैब के अंदर एक जोड़ी अपने उत्पाद से एआई के बारे में सीख समझने की कोशिश कर रही है – एआई कैसे बुद्धिमत्ता प्रदान कर सकता है, और डिज़ाइन थिंकिंग इसे कैसे बोधगम्य बना सकती है।</p>
<p>माइंडस्नैप को ही लीजिए, जो कोलकाता की देवयानी गुप्ता और सायन अधिकारी द्वारा बनाया गया एक व्यक्तिगत शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, दोनों इंजीनियरिंग के छात्र हैं। बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) द्वारा संचालित, यह प्लेटफ़ॉर्म न्यूरोडाइवर्सिटी सीखने वालों के अनुकूल है, चाहे वे डिस्लेक्सिक हों, स्पेक्ट्रम पर हों, या बस खेलों के माध्यम से बेहतर सीखते हों।</p>
<p>वे बताते हैं, “हमने महसूस किया कि अगर इंटरफ़ेस सीखने वाले से बात नहीं करता है तो कोई भी एल्गोरिदम काम नहीं करता है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें यूएक्स/यूआई, पहुँच और छात्रों के जीवंत अनुभव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।”</p>
<p>चेन्नई के आदित्य वर्मा मामा सहेली एआई के साथ एक ऐसी ही खोज कर रहे हैं, जो एक समग्र गर्भावस्था ऐप है जो उनकी माँ के उन दूरदराज के इलाकों के अनुभव से प्रेरित है जहाँ चिकित्सा की पहुँच सीमित थी।</p>
<p>“मेरा ऐप एक दोस्त की तरह महसूस होना चाहिए था, न कि सिर्फ़ एक टूल की तरह। डिज़ाइन की सोच ने मुझे इसे उपयोगकर्ता की भावनाओं, व्यवहार और यहाँ तक कि सांस्कृतिक संदर्भ के माध्यम से देखने के लिए प्रेरित किया। यही इसे मापनीय और विश्वसनीय बनाता है,” वे कहते हैं।</p>
<p>उनका ऐप सूचनाओं को संश्लेषित करता है, गलत सूचनाओं को फ़िल्टर करता है, और पहनने योग्य उपकरणों के साथ एकीकृत होकर अति-व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करता है, लेकिन इसकी आत्मा साहचर्य के विचार में निहित है। उनका दृष्टिकोण PADTHAI-MM ढाँचे के अनुरूप है, जो दर्शाता है कि पारदर्शी, मानव-केंद्रित डिज़ाइन, उपयोगकर्ता संदर्भ के साथ व्याख्यात्मकता को मिलाकर, अपारदर्शी “ब्लैक बॉक्स” AI की तुलना में कहीं अधिक विश्वास पैदा करता है।</p>
<p><img loading="lazy" class="aligncenter wp-image-30057 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/in/wp-content/uploads/2025/09/20250911_1333390.jpg" alt="" width="4000" height="2252" /></p>
<h3>पैमाने के लिए एक रणनीति के रूप में डिज़ाइन</h3>
<p>लुधियाना की पृथ्वीरक्षक टीम: 12वीं कक्षा के अभिषेक ढांडा, प्रभकीरत सिंह और रचिता चंडोक, देश के पहले मॉड्यूलर स्वचालित वर्मीकंपोस्टिंग केंद्र के ज़रिए भारत की विशाल अपशिष्ट प्रबंधन समस्या से जूझ रहे हैं।</p>
<p>यह विचार एक कक्षा प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, और अब यह प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और 90-दिवसीय कंपोस्टिंग प्रक्रिया को केवल 30 दिनों में समेटने की तीन साल की यात्रा बन गया है।</p>
<p>वे बताते हैं, “परंपरागत रूप से, वर्मीकंपोस्टिंग श्रम-गहन और पैमाने पर लागू करना कठिन रहा है।” “डिज़ाइन थिंकिंग ने हमें ऐसे मॉड्यूलर मॉडल की कल्पना करने में मदद की जो किसी बगीचे, हाउसिंग सोसाइटी या यहाँ तक कि शहरी स्तर पर भी काम कर सकें।”</p>
<p>उनके लिए, स्केलेबिलिटी का मतलब आकार नहीं, बल्कि अनुकूलनशीलता है, यानी किसानों, शहरी परिवारों या नगर पालिकाओं की सेवा के लिए एक ही मूल विचार को आकार देने की क्षमता।</p>
<h3></h3>
<h3>सफ़र, मंज़िल नहीं</h3>
<p>इनमें से किसी भी टीम को नहीं पता कि वे अंततः सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो चुनौती जीत पाएँगे या नहीं। उनके प्रोटोटाइप अभी भी अपूर्ण हैं; उनके पिच डेक अभी भी पुनर्लेखन के दौर से गुज़र रहे हैं। फिर भी, जो चीज़ उन्हें एक साथ बांधती है, वह यह मान्यता है कि डिज़ाइन थिंकिंग ने उनके दृष्टिकोण में पहले ही बदलाव कर लिया है।</p>
<p>जबकि एआई को लेकर वैश्विक चर्चाएँ अक्सर नैतिकता, पूर्वाग्रह और गति के सवालों में उलझ जाती हैं, ये युवा समस्या-समाधानकर्ता अपने नवाचारों को किसी पुरानी और स्थिर चीज़ पर आधारित कर रहे हैं: मानव-केंद्रित डिज़ाइन।</p>
<p>वे खोज रहे हैं कि एआई, मस्तिष्क हो सकता है। लेकिन डिज़ाइन थिंकिंग, अपनी विनम्रता और अनुशासन के साथ, हृदय है। और जैसे-जैसे ये छात्र शीर्ष 20 में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे, यह सबसे महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
			</channel>
</rss>