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		<title>IIT Roorkie &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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				<title>“यदि सैमसंग स्टार स्कॉलर प्रोग्राम नहीं होता, तो मैं कब का इंजीनियरिंग छोड़ चुका होता,” IIT रुड़की इंजीनियर आशीष कुमार</title>
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				<pubDate>Wed, 08 Dec 2021 16:20:04 +0000</pubDate>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Roorkie]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Institute of Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung Star Scholar Program]]></category>
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									<description><![CDATA[&#160; एक किसान की जिंदगी में जमीन से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता। इसलिए जब आशीष कुमार के पिता को अपने बेटे के IIT की फीस भरने के लिए जमीन गिरवी रख कर कर्ज]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div id="attachment_7072" style="width: 1010px" class="wp-caption aligncenter"><img class="wp-image-7072 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2021/12/cover-Ashish-1.jpg" alt="" width="1000" height="564" srcset="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2021/12/cover-Ashish-1.jpg 1000w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2021/12/cover-Ashish-1-723x408.jpg 723w, https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2021/12/cover-Ashish-1-768x433.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /><p class="wp-caption-text">आशीष कुमार: आशीष कुमार: सैमसंग स्टार स्कॉलर ने मेरा आत्मविश्वास लौटाया और मेरे परिवार की मदद की</p></div>
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<p>एक किसान की जिंदगी में जमीन से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता। इसलिए जब आशीष कुमार के पिता को अपने बेटे के IIT की फीस भरने के लिए जमीन गिरवी रख कर कर्ज लेना पड़ा, तो उनका दिल टूट गया।</p>
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<p>आशीष ने अपनी पूरी जिंदगी कड़ी मेहनत की थी ताकि वह अपने माता-पिता को वह सब कुछ दे सके, जो उसके वश में हो। उत्तर बिहार की कृषि राजधानी गोपालगंज, जहां लगभग 90% से ज्यादा लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं, से आने वाले आशीष कुमार की पढ़ने और नई चीजें सीखने में शुरू से ही गहरी दिलचस्पी थी। अपने स्कूल के दिनों में एक बार तो उन्हें पूरे साल भर पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी क्योंकि उनके पिता को खेती में मदद के लिए किसी की जरूरत थी। लेकिन पढ़ाई के प्रति उनके रुझान के कारण आखिरकार वह जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में दाखिला पाने में कामयाब रहे, जहां उनका परिचय सैमसंग स्मार्ट स्कूल से हुआ।</p>
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<p>स्मार्ट क्लास सेटअप ने उन्हें मल्टीमीडिया टैबलेट और वहां लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से सैद्धांतिक अवधारणाओं को आभासी तौर पर देखते हुए समझने में मदद की। यही वह जगह थी जहां उन्हें गणित और विज्ञान के प्रति अपने लगाव का अहसास हुआ और उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के बारे में पढ़ा। लक्ष्य पर नजरें टिकाए हुए आशीष ने JNV के छात्रों के लिए आयोजित मुफ्त IIT कोचिंग क्लास में दाखिला लिया और IIT रुड़की के कम्प्यूटर साइंस विभाग में प्रवेश पाने में सफल रहे।</p>
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<p>आशीष ने बताया, “मैं जहां पहुंचना चाहता था, वहां पहुंचने के लिए मैंने कड़ी मेहनत की, लेकिन मेरी फीस भरने के लिए अपनी जमीन गिरवी रख कर पिता जी को जब मैंने कर्ज लेते देखा तो मेरा दिल टूट गया। और यह जानकर कि इससे सिर्फ मेरे एक सेमेस्टर की फीस पूरी हो पा रही थी, मेरा आत्मविश्वास हिल गया। यह मेरे परिवार के लिए बहुत मुश्किल वक्त था। यदि सैमसंग स्टार स्कॉलर प्रोग्राम न होता, तो मैंने इंजीनियरिंग छोड़ दिया होता।”</p>
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<p>IIT रुड़की में आशीष के हाथ सैमसंग स्टार स्कॉलर प्रोग्राम का एक पैम्फलेट लगा, जो खास तौर पर ऐसे JNV छात्रों को वित्तीय सहायता देने के लिहाज से बनाया गया था जिन्हें IITs या NITs में प्रवेश मिला हो।</p>
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<p>सैमसंग स्टार स्कॉलर प्रोग्राम के तहत 150 छात्रों को हर साल ट्यूशन, परीक्षा, हॉस्टल और मेस पर होने वाले खर्च के लिए 2 लाख रुपये तक का स्कॉलरशिप दिया जाता है, जिसे 5 साल तक रिन्यू कराया जा सकता है।</p>
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<p>पहले साल के आवेदकों का चुनाव JEE मेन में अखिल भारतीय रैंक (AIR) के आधार पर होता है, लेकिन उसके बाद दूसरे – चौथे/पांचवें साल में छात्रवृत्ति का रिन्युअल कराने के लिए छात्रों को 5 या उससे ज्यादा की सेमेस्टर ग्रेड प्वाइंड एवरेज (SGPA) या क्युमुलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज (CPGA) रेटिंग बरकरार रखनी होती है।</p>
<p>इस प्रोग्राम में युवा भारत की अगली पीढ़ी के सशक्तीकरण के माध्यम से डिजिटल इंडिया को सशक्त करने (पावरिंग डिजिटल इंडिया) के सैमसंग के सपने को पूरा करने के लिए JNV स्कूलों के ऐसे कम सक्षम छात्रों को आर्थिक सहायता करने की पेशकश की जाती है जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के लिए उत्तीर्ण हो जाते हैं।</p>
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<p>“सैमसंग स्टार स्कॉलर ने मुझे मेरा आत्मविश्वास लौटाया और मेरे परिवार को तुरंत इससे मदद मिल गई। मैं एक लैपटॉप खरीद सका और मेरे पिता ने जो कर्ज लिया था उसे वापस कर दिया। प्रोग्राम के तहत सेमेस्टर फीस को रिइम्बर्स कर दिया जाता है, जिससे मुझे अपने परिवार के भविष्य की चिंता से मुक्त रह कर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगाने की सहूलियत मिल गई।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इंजीनियरिंग के बाद आशीष ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की ओर से मिले 21 लाख रुपये के जॉब ऑफर को ठुकरा कर सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी करने का फैसला किया है।</p>
<p><span> </span></p>
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