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		<title>Innovation &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[सरकार, नवाचार जगत के दिग्गजों और संयुक्त राष्ट्र ने युवा प्रतिभाओं को निखारने के Samsung Solve for Tomorrow के प्रयासों की सराहना की]]></title>
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				<pubDate>Tue, 27 Oct 2026 12:54:44 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
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									<description><![CDATA[भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और नवाचार जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने युवा नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने, देशभर में नवाचार के अवसरों का विस्तार करने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के प्रभावी समाधान विकसित करने पर Samsung की CSR पहल के फोकस की सराहना की। Samsung Solve for Tomorrow के माध्यम से युवाओं को अपने विचारों […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/02110006/Speakers-Collage-3-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10909" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं)  स्टीफन प्रीसनर, भारत में UN रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर; सुशील पाल, संयुक्त सचिव, MeitY और डॉ. निखिल अग्रवाल, MD, FITT, IIT दिल्ली </figcaption></figure>



<p>भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र और नवाचार जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने युवा नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने, देशभर में नवाचार के अवसरों का विस्तार करने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के प्रभावी समाधान विकसित करने पर Samsung की CSR पहल के फोकस की सराहना की। Samsung Solve for Tomorrow के माध्यम से युवाओं को अपने विचारों को ऐसे समाधानों में बदलने का अवसर मिल रहा है, जिनका समाज पर सार्थक प्रभाव पड़ सकता है।</p>



<p>नई दिल्ली में आयोजित Samsung Solve for Tomorrow 2026 के ग्रैंड फिनाले में Samsung के नेतृत्व, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, कार्यक्रम के मेंटर्स और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा कि नवाचार का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह लोगों के जीवन को कितना बेहतर बनाता है। उन्होंने Samsung की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी ने ऐसा मंच तैयार किया है, जो युवाओं को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है और उन्हें अपने उत्पाद विकसित करने तथा स्टार्टअप शुरू करने का अवसर प्रदान करता है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/27124838/20261015_184150-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10893" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं) सैमसंग SWA के कॉर्पोरेट VP SP चन; MeitY के संयुक्त सचिव सुशील पाल; सैमसंग SWA के अध्यक्ष और CEO JB पार्क</figcaption></figure></div>


<p>पाल ने कहा, “यह देखकर बहुत खुशी होती है कि Samsung अपनी CSR पहलों के माध्यम से समाज के लिए इतना कुछ कर रहा है। मैं Samsung का आभार व्यक्त करता हूं कि उसने ऐसा मंच बनाया है, जो युवा प्रतिभाओं को सपने देखने का आत्मविश्वास देता है और उन्हें अपने उत्पाद तथा स्टार्टअप विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।”</p>



<p>Samsung के प्रमुख CSR कार्यक्रम Samsung Solve for Tomorrow के पांचवें संस्करण में विद्यार्थियों से 34,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 36 फाइनलिस्ट ग्रैंड फिनाले तक पहुंचे। यह कार्यक्रम युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) का उपयोग करके अपने समुदायों की समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके तहत प्रतिभागियों को ऐसे समाधानों को विकसित करने और बेहतर बनाने में सहायता दी जाती है, जो सकारात्मक और सार्थक बदलाव ला सकें।</p>



<p>पाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उदय ने नवाचार की प्रकृति को बदल दिया है। प्रौद्योगिकी अब लोगों के सीखने, काम करने, विनिर्माण और सेवाओं तक पहुंचने के तरीकों को तेजी से प्रभावित कर रही है। उन्होंने युवा नवोन्मेषकों से आग्रह किया कि वे केवल उन्नत तकनीक विकसित करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की वास्तविक और जरूरी समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें।</p>



<p>उन्होंने कहा, “नवाचार का वास्तविक पैमाना इस बात में नहीं है कि उसका एल्गोरिदम कितना जटिल है। असली पैमाना यह है कि वह एक आम व्यक्ति के जीवन में कितना बदलाव ला सकता है।”</p>



<p>उन्होंने किसानों के लिए पानी और बिजली की बचत, वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने, दूरदराज के गांवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और खेलों में वैज्ञानिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।</p>



<p>पाल ने उद्योग जगत से बदलती कार्य संस्कृति और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप लोगों को तैयार करने में सहयोग देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि AI जहां कुछ कार्यों को स्वचालित कर रहा है, वहीं कई अन्य कार्यों को अधिक प्रभावी भी बना रहा है। ऐसे में नई तकनीकों के विकास के साथ-साथ लोगों को भविष्य की बदलती भूमिकाओं के लिए तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">युवा इनोवेटर्स को वैश्विक चुनौतियों से जोड़ना</h2>



<p>भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के व्यापक प्रयासों में युवाओं के विचारों को शामिल करने में Samsung Solve for Tomorrow की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की दिशा में वैश्विक प्रगति अब भी धीमी और असमान है। ऐसे में युवाओं की भागीदारी और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।</p>



<p>प्रीस्नर ने कहा, “Samsung Solve for Tomorrow इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और निजी क्षेत्र किस तरह मिलकर युवाओं को केंद्र में रखकर काम कर सकते हैं, उनकी आवाज को प्रभावी बना सकते हैं और उनके संभावनाशील विचारों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग प्रदान कर सकते हैं।”</p>



<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निजी क्षेत्र की भूमिका कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कंपनियां अपने व्यावसायिक उद्देश्यों को पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़कर तथा नवोन्मेषी समाधानों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर भी योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि संभावनाशील विचारों को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारों, विश्वविद्यालयों, व्यवसायों और संयुक्त राष्ट्र—सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>



<p>प्रीस्नर ने फाइनलिस्ट को उन समुदायों से जुड़े रहने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिनकी समस्याओं का समाधान वे करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अपने विचारों को लगातार परखना और उनमें सुधार करना जरूरी है, ताकि वे वास्तविक जीवन में सार्थक प्रभाव पैदा कर सकें।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महानगरों से आगे नवाचार का विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा</h2>



<p>IIT दिल्ली में फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) के प्रबंध निदेशक डॉ. निखिल अग्रवाल ने अधिक से अधिक युवाओं तक नवाचार के अवसर पहुंचाने में Samsung की CSR पहलों के योगदान को रेखांकित किया।</p>



<p>अग्रवाल ने कहा, “Samsung Solve for Tomorrow की प्रतिबद्धता इस बात से दिखाई देती है कि कार्यक्रम ने टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा विभिन्न राज्यों तक पहुंच बनाकर नवाचार को गति दी है। इस वर्ष SFT को पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने आवेदन प्राप्त हुए, जो इस पहल की बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।”</p>



<p>कार्यक्रम के तहत 130 से अधिक शहरों में 180 से ज्यादा सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से विविध भौगोलिक क्षेत्रों और अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थियों को जोड़ा गया। अग्रवाल के अनुसार, प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या दर्शाती है कि प्रमुख महानगरों से आगे बढ़कर नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति मिल रही है।</p>



<p>उन्होंने विद्यार्थियों के नवाचार को उद्यमिता में बदलने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसे उद्यम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया, जो दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकें।</p>



<p>विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा, “आपको रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनना चाहिए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम से भविष्य के उद्यमी निकलेंगे, जो रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली कंपनियां स्थापित करेंगे।</p>



<p>2026 के ग्रैंड फिनाले में चार विजेता टीमों का चयन किया गया। इन टीमों को Samsung की ओर से कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन ग्रांट के साथ FITT-IIT दिल्ली में मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। SFT के माध्यम से उभरते युवा नवोन्मेषकों को अपने विचारों को आगे विकसित करने के लिए मार्गदर्शन और सहयोग मिलता है।</p>



<p>वक्ताओं के विचार इस बात को रेखांकित करते हैं कि Samsung Solve for Tomorrow जैसे मंच युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार, उद्योग जगत, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और अकादमिक जगत को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने, तकनीक आधारित समाधान विकसित करने और उद्यमिता की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित करके यह कार्यक्रम ऐसे नवाचारों को साकार करने का प्रयास करता है, जो बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकें।</p>
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																				</item>
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				<title><![CDATA[‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ में चार टीमों ने ₹2 करोड़ जीते]]></title>
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				<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 11:28:54 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
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									<description><![CDATA[सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस साल इसमें 28 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 648 शहरों से प्रविष्टियां (entries) प्राप्त हुईं। नई दिल्ली में आयोजित ग्रैंड फिनाले में, चार टीमों ने सैमसंग से कुल 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट जीती, ताकि वे अपने […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1000" height="550" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/16112208/SFT-Grand-Finale-Winners-1000x550.jpg" alt="" class="wp-image-10883" /><figcaption class="wp-element-caption">(बाएं से दाएं) सैमसंग SWA के CSR और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रमुख शुभम मुखर्जी; सैमसंग SWA के कॉर्पोरेट VP SP चन; MeitY के संयुक्त सचिव सुशील पाल; सैमसंग SWA के अध्यक्ष और CEO JB पार्क; UN रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर; और सैमसंग SWA के CFO जेसन म्युंग, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के विजेताओं के साथ</figcaption></figure>



<p>सैमसंग इंडिया ने आज ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस साल इसमें 28 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 648 शहरों से प्रविष्टियां (entries) प्राप्त हुईं। नई दिल्ली में आयोजित ग्रैंड फिनाले में, चार टीमों ने सैमसंग से कुल 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन ग्रांट जीती, ताकि वे अपने टेक्नोलॉजी-आधारित समाधानों को आगे बढ़ा सकें।</p>



<p>विजेता टीमों — उत्तर प्रदेश के रायबरेली से ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt), छत्तीसगढ़ के रायपुर से ‘मॉर्फिज्म’ (morphism), नई दिल्ली से ‘इनोबोटिक्स’ (InnoBotix) और तेलंगाना के हैदराबाद से ‘सोमाट्रेस’ (Somatrace) — को IIT दिल्ली के FITT में मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सपोर्ट मिलेगा। इससे वे अपने प्रोटोटाइप को बाजार के लिए तैयार समाधानों में बदल सकेंगी, जिनमें भविष्य के स्टार्टअप बनने की क्षमता है।</p>



<p>भारत में इस साल के फाइनलिस्ट का चयन छह महीने की एक प्रक्रिया के जरिए किया गया। इसमें 135 शहरों में 184 ‘डिजाइन थिंकिंग’ वर्कशॉप, गहन बूटकैंप, प्रोटोटाइप विकास और पिच मूल्यांकन शामिल थे। इन टीमों ने चार विषयों पर अपने समाधान पेश किए: ‘AI लिविंग फॉर इंडिया’, ‘स्वास्थ्य और शिक्षा’, ‘खेल और तकनीक’, तथा ‘पर्यावरण स्थिरता’।</p>



<p>भारत में अपने पांचवें संस्करण में पहुंचा ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’, एक वैश्विक कार्यक्रम का हिस्सा है। 2022 से अब तक लगभग 80,000 छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया है। उन्होंने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित का उपयोग करके अपने समुदायों की चुनौतियों की पहचान की और उनके समाधान विकसित किए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चार विजेता समाधान:</h2>



<p>‘AI लिविंग फॉर इंडिया’: क्वांटहंट (QuantHunt) – रायबरेली, उत्तर प्रदेश: यह एक AI-आधारित साइबर सुरक्षा समाधान है, जिसे एन्क्रिप्शन की कमजोरियों का पता लगाने और संगठनों को उनके डिजिटल सिस्टम को क्वांटम-कंप्यूटिंग से जुड़े उभरते खतरों के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>‘स्वास्थ्य और शिक्षा’: मॉर्फिज्म (morphism) – रायपुर, छत्तीसगढ़: यह एक AI सिस्टम है, जिसे ऑटिस्टिक (autistic) व्यक्तियों की मदद के लिए बनाया गया है। यह चेहरे के सूक्ष्म हाव-भाव और अन्य व्यवहार संबंधी संकेतों का विश्लेषण करके उन्हें भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।</p>



<p>‘पर्यावरण स्थिरता’: इनोबोटिक्स (InnoBotix) – नई दिल्ली: ‘सेंटिनेल’ (Sentinel) नाम का यह सोलर-पावर्ड AI डिवाइस, कैमरों, रडार और सिस्मिक डेटा का उपयोग करता है। यह इंसानी बस्तियों के पास आने वाले जंगली जानवरों का पता लगाता है और समय रहते चेतावनी देता है।</p>



<p>‘खेल और तकनीक’: सोमाट्रेस (Somatrace) – हैदराबाद, तेलंगाना: यह एक पहनने योग्य (wearable) IoT ट्रेनिंग टूल है, जो ट्रेनिंग के दौरान रीढ़ की हड्डी के कोण (spinal angles) और लोड को मापता है। इससे सटीक कौशल वाले खेलों (precision-sports) के एथलीटों और कोचों को चोट लगने के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। टॉप 20 टीमों को ग्रांट के रूप में ₹20 लाख मिले, और हर सदस्य को सैमसंग गैलेक्सी का फ्लैगशिप स्मार्टफोन दिया गया। ग्रैंड फिनाले में टीमों को दो ‘कम्युनिटी चॉइस अवार्ड’ (हर एक के लिए ₹1 लाख) और एक ‘डिजिटल इम्पैक्ट अवार्ड’ (₹50,000) से भी सम्मानित किया गया।</p>



<p>इस साल की एंट्रीज़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पहनने योग्य IoT (वेयरेबल IoT) और सस्टेनेबल डिज़ाइन का इस्तेमाल करके लोगों की ज़रूरतों पर केंद्रित समाधान पेश किए गए। 50% से ज़्यादा आइडिया टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए, जो यह दिखाते हैं कि इनोवेशन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के हर कोने से वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए बेहतरीन समाधान निकल सकते हैं।</p>



<p>फाइनलिस्ट टीमों को अपने हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने के लिए सैमसंग, स्टार्टअप फाउंडर्स और IIT दिल्ली के FITT के विशेषज्ञों से मेंटरशिप मिली।</p>



<p><strong>सैमसंग साउथ वेस्ट एशिया के प्रेसिडेंट और CEO, मिस्टर जेबी पार्क ने कहा, </strong>“भारत में इनोवेशन की अगली लहर इस बात पर निर्भर करेगी कि हम तकनीक को लोगों की ज़रूरतों से कितनी अच्छी तरह जोड़ते हैं। साथ ही, युवाओं को ऐसे मौके देते हैं जिससे वे अपने आस-पास की समस्याओं को पहचानें और उनके लिए ऐसे समाधान तैयार करें जिन्हें टेस्ट किया जा सके। इस सफर को जारी रखने से देश की इनोवेशन क्षमता मज़बूत होती है और यह राष्ट्र-निर्माण का एक अहम हिस्सा है। इस साल के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के फाइनलिस्ट्स ने अपनी कम्युनिटी की चुनौतियों को समझने के लिए जिज्ञासा, सहानुभूति और एक उद्देश्य के साथ काम किया है। उन्होंने वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है। भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, हमें उनके इस सफर का समर्थन करने पर गर्व है। चार विजेता टीमें एक ऐसे आत्मविश्वासी और रचनात्मक भारत को दर्शाती हैं, जो अपनी सूझबूझ से बड़ा बदलाव लाने के लिए तैयार है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">अगले चरण के लिए साझेदारियां</h2>



<p>सैमसंग ने भारत में संयुक्त राष्ट्र (United Nations), FITT (IIT दिल्ली), स्टार्टअप इंडिया (DPIIT), MeitY स्टार्टअप हब, अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के ‘मंथन’ (Manthan) के साथ रणनीतिक साझेदारियां की हैं।</p>



<p>ये साझेदारियां युवा इनोवेटर्स को भारत के स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम में व्यापक समर्थन से जोड़ती हैं। इन सहयोगों के ज़रिए, सैमसंग समस्या-समाधान और उद्यमिता (entrepreneurship) की संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है, जिससे युवा इनोवेटर्स अपने आइडिया को बाज़ार के लिए तैयार समाधानों में बदल सकें।</p>



<p>ग्रैंड फिनाले में टॉप 20 टीमों के लिए एक ‘इन्वेस्टर मीट’ (निवेशकों के साथ बैठक) का भी आयोजन किया गया। इस बातचीत ने युवा इनोवेटर्स को स्टार्टअप और इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने और अपने इनोवेशन को अगले स्तर तक ले जाने के रास्ते तलाशने का मौका दिया।</p>



<p>पुरस्कार समारोह में शामिल विशिष्ट अतिथियों में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीसनर और IIT दिल्ली के FITT के प्रबंध निदेशक निखिल अग्रवाल शामिल थे।</p>



<p>“जब इनोवेशन समावेशिता, सहानुभूति और लोगों की ज़रूरतों की स्पष्ट समझ से प्रेरित होता है, तो यह सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को आगे बढ़ाता है। भारत के युवा इनोवेटर 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। </p>



<p><strong>सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, स्टीफन प्रीसनर ने कहा, </strong>“यह पहल युवाओं को ऐसे समाधान तैयार करने का अवसर देती है, जो एक अधिक समावेशी और टिकाऊ भविष्य के लिए इन मूल्यों को आधार बनाते हैं। मैं विजेताओं और सभी प्रतिभागियों को बधाई देता हूँ, और युवाओं को हमारे साझा भविष्य को आकार देने वाली चुनौतियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सैमसंग की सराहना करता हूँ।”</p>



<p><strong>भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने कहा,</strong> “विज्ञान और प्रौद्योगिकी तब सबसे अधिक मूल्यवान साबित होते हैं, जब वे लोगों के जीवन की चुनौतियों का समाधान करते हैं। इस वर्ष के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के फाइनलिस्टों ने स्वास्थ्य सेवा और स्थिरता से लेकर खेल तक, कई तरह के मुद्दों पर इसी दृष्टिकोण को अपनाया है। उन्होंने अपने विचारों को आकार देने के लिए जिज्ञासा और समस्या-समाधान (problem-solving) कौशल का उपयोग किया है। ऐसे प्लेटफॉर्म जो युवाओं को किसी चुनौती की पहचान करने से लेकर समाधान तैयार करने और उसका परीक्षण करने तक का सफर तय करने में मदद करते हैं, वे पूरे देश में नवाचार (innovation) की संस्कृति को बढ़ावा देकर हमारे इकोसिस्टम को मजबूत बनाते हैं।”</p>



<p><strong>MeitY स्टार्टअप हब के CEO, डॉ. पी.एस. मदनगोपाल ने कहा, </strong>“नवाचार के लिए केवल एक अच्छा विचार होना ही काफी नहीं है; इसके लिए उपयोगकर्ता की गहरी समझ और समाधान का परीक्षण करने, उसे बेहतर बनाने और बड़े स्तर पर लागू करने के अनुशासन की आवश्यकता होती है। इस वर्ष के ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के फाइनलिस्टों ने तकनीकी कौशल और एक स्पष्ट उद्देश्य, दोनों का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अब अगला कदम यह है कि विजेता टीमों को प्रोटोटाइप से आगे बढ़कर ऐसे समाधान तैयार करने में मदद की जाए, जिनका मापने योग्य प्रभाव (measurable impact) हो। मैं उन्हें बधाई देता हूँ और यह देखने के लिए उत्सुक हूँ कि वे भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान देने के लिए ‘इनक्यूबेशन सपोर्ट’ का उपयोग कैसे करते हैं।”</p>



<p>ग्रैंड फिनाले की जूरी में सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-बेंगलुरु के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहन राव गोली; सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-नोएडा के मैनेजिंग डायरेक्टर KY रू; सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया-दिल्ली के मैनेजिंग डायरेक्टर डेमियन ह्यून; और सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली के मैनेजिंग डायरेक्टर युरान किम शामिल थे। बाहरी जूरी सदस्यों में नीति आयोग के AIM (अटल इनोवेशन मिशन) के निदेशक हिमांशु जोशी; IIT दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवासन वेंकटरमन; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय की निदेशक डॉ. सपना पोटी; और MeitY के वैज्ञानिक सौरभ रंजन शामिल थे।</p>



<p>अपने वैश्विक CSR विज़न, “टुगेदर फॉर टुमॉरो!” (Together for Tomorrow!) के माध्यम से “लोगों को सशक्त बनाने” (Enabling People) के उद्देश्य से, सैमसंग ज्ञान, कौशल और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने का काम करता है। भारत में, इसके नागरिक कार्यक्रम “भारत के लिए नवाचार को बढ़ावा देने” (Powering Innovation for India) के सिद्धांत से प्रेरित हैं, जो युवाओं को अपने समुदायों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[दिल्ली के 17 साल के दो छात्र क्लासरूम को ज़्यादा समावेशी बनाने के लिए एक AI साथी बना रहे हैं]]></title>
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				<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 10:06:40 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" width="1000" height="585" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/12100352/20260902_124535-1000x585.jpg" alt="" class="wp-image-10852" /><figcaption class="wp-element-caption">‘टीम इक्विनॉक्स’ SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</figcaption></figure>



<p>जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लासरूम को बदल रहा है, सीखना ज़्यादा इंटरैक्टिव, डिजिटल और पर्सनलाइज़्ड होता जा रहा है। लेकिन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए, इन नई संभावनाओं तक पहुँचना अलग तरह की चुनौतियाँ पेश कर सकता है। जैसे-जैसे एजुकेशनल टूल विकसित हो रहे हैं, जो छात्र स्क्रीन पर निर्भर नहीं रह सकते, वे इस बदलते माहौल में कैसे आगे बढ़ सकते हैं और अपनी पढ़ाई में ज़्यादा आज़ादी से कैसे हिस्सा ले सकते हैं?</p>



<p>दिल्ली के 17 साल के दो छात्रों, आदित्य और स्पर्श के लिए, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर काम करना ज़रूरी है।</p>



<p>उन्होंने मिलकर ‘टीम इक्विनॉक्स’ बनाई है और SARA AI विकसित कर रहे हैं। यह एक वॉइस-फर्स्ट, एजेंटिक AI साथी है जिसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका विचार एक साधारण मकसद पर आधारित है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी छात्रों के सीखने के तरीके को बदल रही है, उन अवसरों तक पहुँच इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति स्क्रीन देख सकता है या नहीं।</p>



<p>SARA AI को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि छात्र वॉइस कमांड के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया से जुड़ सकें, स्पीच को टेक्स्ट में बदल सकें, अपनी सीखने की प्रगति को ट्रैक कर सकें और टेस्ट व असेसमेंट में हिस्सा ले सकें। यह लंबे समय तक कोई गतिविधि न होने पर यूज़र्स से संपर्क भी कर सकता है, जिससे सीखने का अनुभव ज़्यादा इंटरैक्टिव बनता है।</p>



<p>इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए, चुनौती सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी बनाना नहीं है। यह इस बात को समझने के बारे में है कि AI कैसे छात्रों को ज़्यादा आज़ादी और आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के लिए नहीं, बल्कि सीखने वाले के लिए बनाना</h2>



<p>विचार अक्सर किसी समस्या से शुरू होते हैं, लेकिन उन्हें उपयोगी बनाने के लिए उन लोगों की बात सुनना ज़रूरी है जो उस समस्या का सामना करते हैं। टीम इक्विनॉक्स ने दिल्ली में 40 से ज़्यादा छात्रों के साथ SARA AI का परीक्षण किया है और दृष्टिबाधित सीखने वालों की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझने के लिए स्कूलों और ट्रस्टों के साथ बातचीत की है।</p>



<p>इन बातचीत से टीम को यह समझने में मदद मिली है कि यह समाधान वास्तविक सीखने के माहौल में कैसे काम कर सकता है, जहाँ सुलभता, इस्तेमाल में आसानी और विश्वसनीयता उतनी ही मायने रखती है जितनी कि खुद टेक्नोलॉजी।</p>



<p>इस अनुभव ने युवा इनोवेटर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी उजागर किया है: एक अच्छा प्रोटोटाइप सिर्फ़ शुरुआत है। किसी समाधान के असरदार होने के लिए, उसे रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करना होगा और उन लोगों के लिए काम करना होगा जिनके लिए उसे बनाया गया है। ‘टीम इक्विनॉक्स’ उन टॉप 20 टीमों में शामिल है जिन्हें ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (SFT) के लिए चुना गया है। यह एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म है जो युवाओं को अपने समुदाय की चुनौतियों को हल करने के लिए साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।<br>इस प्रोग्राम के ज़रिए, टीम को SARA AI को उसके शुरुआती प्रोटोटाइप से आगे ले जाने और यह पता लगाने के लिए गाइडेंस मिल रही है कि इसे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक प्रैक्टिकल और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला सॉल्यूशन कैसे बनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">काम करने वाले प्रोटोटाइप से असल दुनिया के सॉल्यूशन तक</h2>



<p>SFT बूटकैंप ने आदित्य और स्पर्श को अपने आइडिया को टेक्नोलॉजी से परे नज़रिए से देखने का मौका दिया। डिज़ाइन थिंकिंग, मार्केटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर हुए सेशन ने उन्हें न सिर्फ़ यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि SARA AI कैसे काम करता है, बल्कि यह भी कि छात्र इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इसकी विश्वसनीयता को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है और इसे एजुकेशनल सेटिंग में लाने के लिए क्या करना होगा।<br><br>मेंटरशिप ने टीम को अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने में मदद की, जबकि सैमसंग और FITT, IIT दिल्ली के साथ वन-ऑन-वन ​​सेशन और सैमसंग के R&D इकोसिस्टम में AI एक्सपर्ट्स से मिले इनपुट ने उन्हें टेक्निकल चुनौतियों से निपटने और मार्केट में उतारने की संभावित स्ट्रेटेजी पर काम करने में मदद की।<br><br>एक आइडिया से असल दुनिया के संभावित सॉल्यूशन तक का सफ़र तय करने वाले 17 साल के इन दो युवाओं के लिए, इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी बनाने के दायरे को और बड़ा कर दिया है। इसने यूज़ेबिलिटी, इम्प्लीमेंटेशन और अपनाए जाने जैसे सवालों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया है।</p>



<p>टीम अब यह पता लगा रही है कि SARA AI को स्कूलों, गैर-सरकारी संगठनों और दृष्टिबाधित छात्रों की मदद करने वाले अन्य संस्थानों द्वारा कैसे अपनाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडिया के लिए एक बड़ा क्लासरूम</h2>



<p>टीम इक्विनॉक्स को उम्मीद है कि वे दिल्ली के स्कूलों में SARA AI का विस्तार कर पाएंगे, जिससे लगभग 6,000 छात्रों तक पहुँचने की संभावना है, बशर्ते आगे और डेवलपमेंट और इसे अपनाया जाए।</p>



<p>यह महत्वाकांक्षा बड़ी है, लेकिन आइडिया की शुरुआत रोज़मर्रा की एक ज़रूरत से होती है: उन छात्रों के लिए सीखने को आसान बनाना जिन्हें तब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जब एजुकेशनल अनुभव मुख्य रूप से विज़ुअल इंटरफ़ेस के आधार पर डिज़ाइन किए जाते हैं।</p>



<p>आदित्य और स्पर्श के लिए, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ का सफ़र उस महत्वाकांक्षा को किसी प्रैक्टिकल चीज़ में बदलने के लिए ज़रूरी बातों को समझने का एक मौका है। उनका अनुभव इनोवेशन के बारे में एक बड़ी सीख देता है: काम के समाधान सिर्फ़ तकनीकी संभावनाओं से ही नहीं बनते, बल्कि सुनने, सीखने और लगातार सुधार करते रहने की इच्छा से भी बनते हैं।</p>



<p>जैसे-जैसे AI शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है, ‘टीम इक्विनॉक्स’ एक ऐसे भविष्य के लिए काम कर रही है जिसमें दृष्टिबाधित छात्र भी इन टूल्स का इस्तेमाल ज़्यादा समावेशी तरीके से कर सकें।</p>



<p>दिल्ली के ये दो छात्र, जिनकी उम्र 17 साल है, अभी भी अपने आइडिया पर काम कर रहे हैं। लेकिन SARA AI के ज़रिए वे एक ऐसा सवाल उठा रहे हैं जो उनके क्लासरूम से कहीं ज़्यादा मायने रखता है: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी सीखने-सिखाने के तरीके को आगे बढ़ा रही है, हम यह कैसे पक्का कर सकते हैं कि हर किसी को इसके साथ आगे बढ़ने का मौका मिले?</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[अगला बड़ा आइडिया भारत में कहीं से भी आ सकता है: स्टार्टअप फाउंडर्स]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%87%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82</link>
				<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 16:07:30 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Startups]]></category>
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									<description><![CDATA[अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" width="1000" height="563" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/09160349/collage-of-mentors-1000x563.jpg" alt="" class="wp-image-10846" /><figcaption class="wp-element-caption">[बाएं से दाएं] रॉबिन सिंह, संस्थापक, क्लूइक्स; समृद्धि भारद्वाज, संस्थापक, पीसी; दिशांत मिश्रा, संस्थापक, जल संसाधन और अंकित गर्ग, संस्थापक, ईमू मसाला</figcaption></figure>



<p>अगली बड़ी कामयाबी शायद किसी ऐसी समस्या से शुरू हो सकती है जिसे कोई युवा रोज़ देखता हो: जैसे पीने का असुरक्षित पानी, पराली जलाना, बातचीत में रुकावटें या स्थानीय सेवाओं में कमी।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के फाइनलिस्ट को मेंटर करने वाले 16 स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि युवा इनोवेटर्स तेज़ी से अपने अनुभव और उन लोगों की समझ का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनकी वे मदद करना चाहते हैं। इनमें अंकित गर्ग, रॉबिन सिंह, समृद्धि भारद्वाज और दिशांत मिश्रा शामिल हैं। उनका मानना ​​है कि टेक्नोलॉजी और जानकारी तक बेहतर पहुँच से भारत के छोटे शहरों और समुदायों से नए आइडिया सामने आ रहे हैं।</p>



<p>IIT दिल्ली-इन्क्यूबेटेड ‘वॉटर रिसोर्सेज़’ के फाउंडर दिशांत मिश्रा ने कहा, “वे सच में ऐसी समस्या को हल करना चाहते हैं जिससे कहीं न कहीं किसी को परेशानी हो रही हो। भले ही मार्केट छोटा दिखे, ये युवा इनोवेटर कोशिश कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं और उन समस्याओं को हल कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मार्केट बनाना दूसरा कदम होगा, और वे दूसरे कदम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शायद यही वह नया बदलाव है जो मैंने इस साल के ग्रुप में देखा है।”</p>



<p>वॉटर-क्वालिटी इंटेलिजेंस स्टार्टअप ‘Cluix’ के फाउंडर रॉबिन सिंह ने देखा है कि कैसे कोई आइडिया प्रोग्राम के बाद भी आगे बढ़ सकता है। बिहार के ग्रामीण इलाके की एक टीम, जिसे उन्होंने मेंटर किया था, ने पानी में आर्सेनिक की समस्या को दूर करने के लिए एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया, चैलेंज जीता और अपने प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ भी किया।</p>



<p>सिंह ने कहा, “वे बिहार के ग्रामीण इलाके से आए थे और असल में वे देख सकते थे कि इस क्षेत्र में कोई समाधान उपलब्ध नहीं था। बहुत कम उम्र में, जब वे सिर्फ़ स्टूडेंट थे, उन्होंने एक फिल्ट्रेशन सिस्टम बनाया। उस फिल्ट्रेशन सिस्टम ने चैलेंज जीता, और अब वे प्रोडक्ट को कमर्शियलाइज़ करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं।”</p>



<p>इस साल, सिंह ‘SignBridge AI’ को मेंटर कर रहे हैं, जो एक ऐसी टीम है जो दिव्यांग लोगों को ज़्यादा आज़ादी से बातचीत करने में मदद करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इससे समाज में समावेशिता बढ़ती है, और हमें ऐसे समाधानों की ज़रूरत है।”</p>



<p>महिलाओं की सेहत के क्षेत्र में काम करने वाली फाउंडर समृद्धि भारद्वाज ने कहा कि टेक्नोलॉजी तक पहुँच ने भूगोल और अवसर के बीच के रिश्ते को बदल दिया है। “पूरे भारत में, टियर 2 और टियर 3 शहरों के छात्रों के पास भी अब ऐसी टेक्नोलॉजी और अनुभव (एक्सपोज़र) है जो उनके कई साथियों और सीनियर के पास नहीं था। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि जगह या लोकेशन अब कोई रुकावट है। भारत के किसी भी हिस्से से कोई भी नया और अनोखा समाधान (इनोवेटिव सॉल्यूशन) आ सकता है।”</p>



<p>क्लीन-लेबल फ़ूड ब्रांड ‘ईमू मसाले’ (EemuMasale) के फ़ाउंडर अंकित गर्ग के लिए, स्थानीय समस्याओं का महत्व उन समुदायों से कहीं आगे तक हो सकता है जहाँ वे सबसे पहले सामने आती हैं। उन्होंने कहा, “पराली जलाना कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है जिसे हल करने के लिए वे काम कर रहे हैं। उन्होंने शायद एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है जो प्रोटीन के वैकल्पिक विकल्प देकर भारत में पोषण की समस्या को भी हल कर सकता है।”</p>



<p>सिंह के अनुसार, इस साल के ग्रुप में आधे आइडिया टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए थे। उन्होंने कहा, “टियर 2 शहरों में लोगों को जो आइडिया मिल रहे हैं, वे कभी-कभी टियर 1 शहरों में दिखने वाले आइडिया से भी बेहतर होते हैं। लोगों का अनुभव और जानकारी (एक्सपोज़र) बढ़ी है, और ऐसे आइडिया को लागू करने का तरीका भी बेहतर हुआ है।”</p>



<p>फ़ाउंडर मेंटरशिप को युवा इनोवेटर्स की मदद करने के एक तरीके के तौर पर देखते हैं, ताकि वे किसी समस्या की पहचान करने से लेकर समाधान विकसित करने और उसे टेस्ट करने तक का सफ़र तय कर सकें। ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) फ़ाइनलिस्ट को स्टार्टअप फ़ाउंडर, एकेडेमिया और इंडस्ट्री के लोगों के साथ लाता है, और उन्हें अपने आइडिया को विकसित करने के लिए मार्गदर्शन और अवसर देता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ युवाओं के लिए सैमसंग का ग्लोबल इनोवेशन और एजुकेशन प्रोग्राम है। 2026 का एडिशन भारत में इसके पांचवें साल का प्रतीक है।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[सोनीपत से फ़ूड के भविष्य तक: दो युवा इनोवेटर्स ने फ़सल के कचरे को सस्टेनेबल प्रोटीन में बदला]]></title>
				<link>https://news.samsung.com/bharat/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a5%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a4</link>
				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 18:32:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Intelligence]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Sports]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए? यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" width="728" height="410" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06092356/12-KINVA-BIO_Haryana.jpg" alt="" class="wp-image-10756" /><figcaption class="wp-element-caption">किनवा बायो (Kinva Bio) खेती से बचे हुए बायोमास को प्रोटीन में बदलने के लिए फर्मेंटेशन का इस्तेमाल करती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन के मुकाबले बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ती है।</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर हर फसल के बाद बचने वाला खेती का कचरा प्रोटीन का स्रोत बन जाए?</p>



<p>यही सवाल हरियाणा के सोनीपत के दो युवा छात्रों, नीतीश कुमार और गुलशन कुमार को प्रेरित कर रहा है। वे इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फसल के बचे हुए हिस्से को टिकाऊ प्रोटीन में बदला जा सकता है।</p>



<p>हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM-K) के छात्र, नीतीश और गुलशन ‘किन्वा बायो’ (Kinva Bio) के फाउंडर हैं। यह टीम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) के टॉप 20 में शामिल है। उनका आइडिया दुनिया के फूड सिस्टम के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करता है: बढ़ती आबादी के लिए ज़्यादा पौष्टिक भोजन कैसे पैदा किया जाए, बिना ज़मीन और पानी पर ज़्यादा दबाव डाले।</p>



<p>उनका समाधान खेती से निकलने वाले उन बाय-प्रोडक्ट्स (उप-उत्पादों) से शुरू होता है जिन्हें अक्सर कचरा मान लिया जाता है, जैसे गन्ने की खोई (bagasse)। किन्वा बायो फर्मेंटेशन (किण्वन) का इस्तेमाल करती है, जिसमें एक फंगल स्ट्रेन इस बायोमास को प्रोटीन में बदल देता है। इसके बाद, AI-पावर्ड डिजिटल ट्विन टीम को प्रोटीन उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करता है, जिससे वे प्रोसेस को बेहतर बना सकते हैं और बड़े पैमाने पर इसकी क्षमता को समझ सकते हैं।</p>



<p>टीम के अनुसार, इस तरीके से पारंपरिक प्रोटीन उत्पादन की तुलना में 98–99% कम पानी का इस्तेमाल हो सकता है, कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो सकता है और बहुत कम ज़मीन की ज़रूरत पड़ सकती है।</p>



<p>हालांकि, इन दो युवा इनोवेटर्स के लिए यह सफ़र सिर्फ़ एक वैज्ञानिक समाधान विकसित करने से कहीं ज़्यादा था। यह इस बारे में था कि कैसे लैब के किसी आइडिया को ऐसी चीज़ में बदला जाए जो असल दुनिया में बदलाव ला सके।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ एक ग्लोबल प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने के लिए STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ) का इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग अपने समुदायों में समस्याओं की पहचान करते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से रचनात्मक समाधान विकसित करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इसका एंड-यूज़र कौन है?</h2>



<p><br>जब नीतीश और गुलशन ने किन्वा बायो पर काम करना शुरू किया, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से अपने इनोवेशन के पीछे के विज्ञान पर था।</p>



<p>टीम ने कहा, “हम अपने आइडिया को वैज्ञानिक नज़रिए से पेश कर रहे थे, बिना किसी कहानी या संदर्भ के।”</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो’ बूटकैंप में उनके अनुभव ने इस नज़रिए को बदल दिया। मेंटर्स, एक्सपर्ट्स और दूसरे इनोवेटर्स के साथ बातचीत ने उन्हें लैब से परे के सवालों से रूबरू कराया: इसका एंड-यूज़र कौन है? हम किस समस्या का समाधान कर रहे हैं? हम इसके असर के बारे में कैसे बताएँगे? और इस आइडिया को एक कामयाब स्टार्टअप में बदलने के लिए क्या करना होगा?</p>



<p>उन्होंने कहा, “बूटकैंप से सबसे बड़ी सीख यह मिली कि हम किन लोगों से जुड़े और हमें बिज़नेस के माहौल को समझने का मौका मिला।”</p>



<p>टीम ने अपनी पिच (आइडिया पेश करने का तरीका) को अलग तरह से तैयार करना शुरू किया। सिर्फ़ यह बताने के बजाय कि उनकी टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, उन्होंने यह बताना सीखा कि यह क्यों ज़रूरी है — ग्राहकों, निवेशकों और समाज के लिए।</p>



<p>नीतीश और गुलशन के लिए, कहानी सुनाना (स्टोरीटेलिंग) सिर्फ़ एक प्रेजेंटेशन स्किल से कहीं ज़्यादा बन गया। इसने ‘किनवा बायो’ (Kinva Bio) को देखने के उनके नज़रिए को ही बदल दिया — एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट से बदलकर एक ऐसे संभावित बिज़नेस में, जो असल दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता रखता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सोनीपत से ग्लोबल फ़ूड इनोवेशन के मंच तक</h2>



<p><br>टीम के काम ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचना शुरू कर दिया था।</p>



<p>इस पहचान ने युवा इनोवेटर्स को यह दिखाया कि उनका आइडिया क्लासरूम और लैब से बाहर कितनी दूर तक जा सकता है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के सफ़र ने उन्हें आगे के सवालों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया: इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल कौन करेगा? इसे बड़े पैमाने पर कैसे फैलाया जा सकता है? यूज़र बेस बनाने के लिए क्या करना होगा? और बायोटेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन कैसे कमर्शियली कामयाब सॉल्यूशन बन सकता है?</p>



<p>जैसे-जैसे ‘किनवा बायो’, ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ के ग्रैंड फ़िनाले की ओर बढ़ रही है, नीतीश और गुलशन अपने साथ एक ऐसा आइडिया लेकर चल रहे हैं जिसकी शुरुआत एक आसान लेकिन अहम सवाल से हुई थी: क्या हम धरती पर कम बोझ डालकर ज़्यादा खाना पैदा कर सकते हैं?</p>



<p>सोनीपत के इन युवा इनोवेटर्स के लिए, इसका जवाब AI, बायोटेक्नोलॉजी और खेती से निकलने वाले कचरे को एक साथ लाने में हो सकता है — और जो चीज़ कभी बेकार कचरा मानी जाती थी, उसे भविष्य के खाने के लिए एक ज़रूरी चीज़ (बिल्डिंग ब्लॉक) में बदलने में।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: सोमाट्रेस की कहानी – सुरक्षित और स्मार्ट ट्रेनिंग के आइडिया से टॉप 20 तक का सफ़र]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:20 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है। 21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल […]]]></description>
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<p>मिलिए सोमाट्रेस (Somatrace) से, जो ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है और टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स और हेल्थ के क्षेत्र में काम कर रही है।</p>



<p>21 साल की होमानशिका रेड्डी पुल्लागुर्ला की अगुवाई में, यह टीम एक ऐसा पहनने योग्य सिस्टम (वियरेबल सिस्टम) बना रही है जो सेंसर का इस्तेमाल करके रीढ़ की हड्डी की हलचल को रियल-टाइम में ट्रैक करता है। शुरुआत में इसे राइफल शूटरों के लिए विकसित किया जा रहा है, लेकिन इस सॉल्यूशन का मकसद एथलीटों और कोचों को मूवमेंट पैटर्न समझने और ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने के संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद करना है।</p>



<p>होमानशिका से सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वह इस आइडिया को आगे कैसे ले जाना चाहती हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170905/SFT-top-20-Team-Somatrace-LR.mp4"></video></figure>
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				<title><![CDATA[Watch: ‘Samsung Solve for Tomorrow’ की टॉप 20 टीमों में शामिल होने पर Kinva Bio का क्या कहना है]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:18 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
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									<description><![CDATA[हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>हरियाणा के सोनीपत की Kinva Bio से मिलिए, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>उनका AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म यह पता लगाता है कि कैसे बायो-रिएक्टर का इस्तेमाल करके गन्ने की खोई (bagasse) को प्रोटीन से भरपूर माइकोप्रोटीन में बदला जा सकता है—इसमें इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और न्यूट्रिशन का मेल है।</p>



<p>गुलशन कुमार और नीतीश कुमार के लिए, टॉप 20 में जगह बनाना सीखने और नई चीज़ें खोजने का सफ़र रहा है। मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग में मिली मदद से, टीम ने अपने आइडिया को और मज़बूत किया है और यह समझा है कि खेती से जुड़ी किसी स्थानीय समस्या को कैसे एक प्रैक्टिकल इनोवेशन में बदला जा सकता है।</p>



<p>देखें कि Kinva Bio टॉप 20 में शामिल होने को लेकर क्या सोचती है—और वे आगे क्या बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170851/SFT-top-20-Team-Kinva-Bio-LR.mp4"></video></figure>
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				<title><![CDATA[Watch: क्वांटम युग के लिए साइबर सुरक्षा को नए सिरे से सोचने वाली टीम ‘क्वांटहंट’]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:17:15 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है। 21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन […]]]></description>
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<p>मिलिए उत्तर प्रदेश के रायबरेली की ‘क्वांटहंट’ (QuantHunt) टीम से, जो सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस की अगुवाई में यह टीम AI-बेस्ड साइबर सुरक्षा समाधान बना रही है। इसे एन्क्रिप्शन की कमियों का पता लगाने और संगठनों को क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े नए खतरों के लिए अपने डिजिटल सिस्टम को तैयार करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</p>



<p>अकुल और सक्षम को सुनें कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है—और वे अपने इनोवेशन के ज़रिए डिजिटल सुरक्षा को कैसे मज़बूत करने की उम्मीद करते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170900/SFT-Top-20-Team-QuantHunt-LR.mp4"></video></figure>
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				<title><![CDATA[Watch: ‘4 Percentage’ – हेल्थकेयर और सरकारी जानकारी को ज़्यादा सुलभ बनाने की पहल]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 09:33:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
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									<description><![CDATA[मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है। साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए तमिलनाडु के कोयंबटूर की ‘4 Percentage’ टीम से, जो ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>साजित जे, केविन और मित्रन बी के नेतृत्व में, यह टीम ‘MicroLearning AI’ बना रही है। यह एक वॉइस-फ़र्स्ट, कई भाषाओं वाला प्लेटफ़ॉर्म है जो हेल्थकेयर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी मुश्किल जानकारी को भारतीय भाषाओं में आसान बोलचाल वाले छोटे-छोटे लेसन (माइक्रो-लेसन) में बदल देता है।</p>



<p>देखें कि टीम टॉप 20 में जगह बनाने को लेकर क्या सोचती है और वे कैसे ज़रूरी जानकारी को समझने और उस तक पहुँचने में आसान बनाना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170811/4-Percentage-.mp4"></video></figure>
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							</item>
					<item>
				<title><![CDATA[Watch: रोज़मर्रा की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करने वाली टीम JARVISS]]></title>
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				<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 08:17:00 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Bootcamp]]></category>
		<category><![CDATA[IIT Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Innovation]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top 20]]></category>
                <guid isPermaLink="false">https://bit.ly/4yF9Uvi</guid>
									<description><![CDATA[मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है। संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<p>मिलिए चेन्नई, तमिलनाडु की टीम JARVISS से, जो Samsung Solve for Tomorrow 2026 की टॉप 20 टीमों में से एक है।</p>



<p>संजय कुमार, GB अश्विन भगत और वरुण प्रसथ K मिलकर SafePath AI बना रहे हैं। यह एक स्मार्टफोन और IoT-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है जो AI और सेंसर डेटा का इस्तेमाल करके सड़क पर मौजूद खतरों का पता लगाता है, उनकी गंभीरता को समझता है और सुरक्षित रास्ते का सुझाव देता है।</p>



<p>इस टीम को सुनिए कि टॉप 20 में जगह बनाना उनके लिए क्या मायने रखता है और वे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यात्रा को सुरक्षित बनाने की क्या उम्मीद रखते हैं।</p>



<figure class="wp-block-video"><video playsinline controls src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/29170825/JARVISS.mp4"></video></figure>
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