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		<title>ISOCELL &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>ISOCELL &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[सैमसंग ने और ज्यादा मोबाइल एप्लिकेशन के लिए पेश किए 0.7 μm पिक्सेल वाले उन्नत आइसोसेल इमेज सेंसर]]></title>
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				<pubDate>Wed, 16 Sep 2020 17:22:51 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[सेमीकंडक्टर्स]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL 2.0]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL GM5]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL GW3]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL HM2]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL JD1]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL Plus]]></category>
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									<description><![CDATA[उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक के मामले में दुनिया भर में अग्रणी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने आज अपने 0.7 माइक्रोमीटर (μm) -पिक्सेल उत्पादों के लिए चार नए सैमसंग आइसोसेल इमेज सेंसर – 108-मेगापिक्सेल (Mp) आइसोसेल HM2, 64Mp आइसोसेल GW3, 48Mp आइसोसेल GM5 और 32Mp आइसोसेल JD1 पेश किए। नई 0.7μm आइसोसेल तकनीक के साथ अल्ट्रा-हाई-रिजॉल्यूशन तकनीक को मुख्यधारा […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p><img class="aligncenter wp-image-5749 size-large" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2020/09/Samsung-07micrometer-pixel-ISOCELL-Image-Sensor-1024x768.jpg" alt="" width="1024" height="768" /></p>
<p>उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक के मामले में दुनिया भर में अग्रणी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने आज अपने 0.7 माइक्रोमीटर (μm) -पिक्सेल उत्पादों के लिए चार नए सैमसंग आइसोसेल इमेज सेंसर – 108-मेगापिक्सेल (Mp) आइसोसेल HM2, 64Mp आइसोसेल GW3, 48Mp आइसोसेल GM5 और 32Mp आइसोसेल JD1 पेश किए। नई 0.7μm आइसोसेल तकनीक के साथ अल्ट्रा-हाई-रिजॉल्यूशन तकनीक को मुख्यधारा के स्मार्टफोन में लाने की सैमसंग की योजना है।</p>
<p>सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में सेंसर कारोबार के कार्यकारी वाइस प्रेसिडेंट योनजिन पार्क ने कहा, “छोटे से छोटे आकार में अधिक पिक्सेल देने के लिए आइसोसेल प्लस और स्मार्ट आईएसओ जैसी ईजाद करने में सैमसंग हमेशा से सबसे आगे रही है। पिछले साल सैमसंग ने उद्योग का पहला 0.7μm-पिक्सेल इमेज सेंसर और पहला 108Mp सेंसर पेश किया था। अब हम मोबाइल कैमरों में विभिन्न विकल्पों के साथ और उन्नत पिक्सेल तकनीकें ला रहे हैं, जिनसे आगे आने वाले मोबाइल डिवाइस में हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें मिलेंगी और डिजाइन पहले से ज्यादा स्लीक होगा।”</p>
<p>अल्ट्रा-हाई-रिजॉल्यूशन इमेज सेंसर में एक पिक्सेल में केवल 0.1μm का अंतर होने से भी सेंसर के पूरे आकार तथा कैमरा मॉड्यूल की कुल ऊंचाई पर अच्छा खास फर्क पड़ जाता है। 0.7μm पिक्सेल होने से सैमसंग के नए-नवेले इमेज सेंसर उसी रिजॉल्यूशन वाले 0.8μm सेंसर से 15 प्रतिशत तक छोटे होंगे और कैमरा मॉड्यूल की ऊंचाई 10 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। इनका आकार छोटा होने से स्मार्टफोन विनिर्माताओं को अधिक आजादी मिल जाएगी। मसलन भविष्य के डिवाइस विकसित करतेत समय वे और भी फीचर जोड़ पाएंगे या डिजाइन को अधिक सुगम बना सकेंगे।</p>
<p>पर्याप्त मात्रा में रोशनी इकट्ठी करने और नन्हे पिक्सेल आकार होने के बाद भी क्षमता को और बढ़ाने के मकसद से सैमसंग ने 0.7μm के लिए खास तौर पर तैयार अपनी उन्नत आइसोसेल प्लस और स्मार्ट-आईएसओ तकनीकों का प्रयोग किया है। आइसोसेल प्लस इकट्ठी की गई रोशनी को पिक्सेल के चारों ओर दीवार जैसे ढांचे की मदद से रोके रखती है और स्मार्ट-आईएसओ चतुराई के साथ आईएसओ को मनचाहे एक्सपोजर के हिसाब से ढाल लेता है।</p>
<p>सैमसंग इसी साल पेश किए जाने वाले नए-नवेले 0.7μm उत्पादों में और भी बेहतर पिक्सेल तकनीक आइसोसेल 2.0 देने लगेगी, जिससे पिक्सेल आकार कम होने की चुनौतियों के बाद भी शानदार प्रदर्शन मिलेगा। नई तकनीक सेल्स के बीच दीवार जैसे ढांचे को और भी बेहतर बनाएगी, जिससे रोशनी के प्रति संवेदनशीलता मौजूदा आइसोसेल प्लस तकनीक के मुकाबले 12 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।</p>
<p><strong>नया </strong><strong>0.7 </strong><strong>μm</strong><strong> लाइनअप</strong><strong>;</strong></p>
<ul>
<li>आइसोसेल HM2 सैमसंग के जखीरे में HMX और HM1 के बाद तीसरा 108Mp इमेज सेंसर है। नया 108Mp सेंसर 0.8μm पर आधारित पिछले सेंसर के मुकाबले लगभग 15 प्रतिशत छोटा है और इससे कैमरा मॉड्यूल की ऊंचाई 10 प्रतिशत तक घट गई है। HM2 में सुपर PD, अधिक तेज और चेहरा ढूंढने में ज्यादा प्रभावी ऑटो फोकस सॉल्यूशन है, जो HM12 की ही तरह नौ-पिक्सेल बिनिंग तकनीक तथा 3 गुना लॉसलेस जूम के साथ आता है।</li>
</ul>
<ul>
<li>आइसोसेल GW3 मुख्यधारा के डिवाइस के लिए विकसित किया गया 64Mp सेंसर है। पिक्सेल आकार छोटा होने के कारण GW3 का ऑप्टिकल साइज सैमसंग के 0.8μm 48Mp इमेज सेंसर के लगभग बराबर है। सेंसर को अधिक से अधिक वास्तविक रंगों के साथ चमकीली तस्वीरें लेने में मदद करने वाली टेट्रोसेल और स्मार्ट-आईएसओ तकनीकों के साथ-साथ GW3 भागदौड़ भरी जीवनशैली के लिए आदर्श है क्योंकि इसमें अधिक शार्प स्टिल तस्वीरों एवं सधे हुए वीडियो के लिए गायरो आधारित इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबिलाइजेशन (EIS) की सुविधा है। इमेज सेंसर 60 फ्रेम्स प्रति सेकंड (fps) पर 4K रिजॉल्यूशन तक की वीडियो रिकॉर्डिंग में मदद करता है।</li>
</ul>
<ul>
<li>आइसोसेल GM5 विविधता भरा 48Mp इमेज सेंसर है, जो टेलिस्कोप या अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। फोल्डेड-जूम के लिए 5 गुना ऑप्टिकल टेलिस्कोपिंग सेंसर के रूप में इस्तेमाल होने पर जीएम5 नन्हे 0.7μm पिक्सेल साइज का पूरा फायदा उठाता है और कैमरे का उभार कम से कम हो जाता है। अल्ट्रा-वाइड-शॉट्स में GM5 480 fps पर हाई-स्पीड फुल-एचडी रिकॉर्डिंग देता है। सेंसर में स्टैगर्ड-एचडीआर फीचर भी है, जो अधिक तेज और पावर का बेहतर इस्तेमाल करने वाली एचडीआर तकनीक है। यह तकनीक पिक्सेल की प्रत्येक कतार के लॉन्ग, मीडियम और शॉर्ट एक्सपोजर का ब्योरा मोबाइल प्रोसेसर को भेजकर तस्वीर की प्रोसेसिंग में तेजी लाती है। चूंकि यह ब्योरा अलग-अलग 0.7μm पिक्सेल स्तर के बजाय टेट्रोसल के 1.4μm टू-बाई-टू पिक्सेल के जरिये पढ़ा जाता है, इसलिए स्टैगर्ड-एचडीआर से अधिक चमकीली और स्पष्ट तस्वीरें मिलती हैं, जिनमें धुंधलापन आदि नहीं होता।</li>
</ul>
<ul>
<li>आइसोसेल JD1 1/3.14-इंच वाला उद्योग का सबसे छोटा 32Mp इमेज सेंसर है और इसका आकार इसे बेजल रहित डिस्प्ले वाले उन स्मार्टफोन के एकदम माफिक बना देता है, जिनमें फ्रंट-फेसिंग कैमरा के लिए होल-इन-एक्टिव-एरिया अथवा मोटराइज्ड पॉप-अप प्रणाली होती है। बारीक ब्योरे वाली तस्वीर खींचने के लिए 32 मिलियन पिक्सेल होने के बाद भी कैमरा डिस्प्ले के भीतर आसानी से फिट हो जाता है क्योंकि सेंसर के कैमरा मॉड्यूल की ऊंचाई 0.9μm 20Mp या 1.0μm 16Mp सेंसरों के बराबर है। जीएम5 की ही तरह JD1 भी स्टैगर्ड-एचडीआर की सुविधा देने वाले पहले आइसोसेल इमेज सेंसरों में शुमार है।</li>
</ul>
<p><em>सैमसंग आइसोसेल </em><em>HM2, GW3</em><em> और </em><em>JD1</em><em> का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है और कंपनी </em><em>GM5</em><em> की सैंपलिंग कर रही है।</em></p>
<p><em>*</em><em>सैमसंग ने फिजिकल बैरियर लगाकर पिक्सेल के बीच कलर क्रॉसटॉक कम करने</em><em>, </em><em>छोटे आकार वाले पिक्सेल को अधिक से अधिक वास्तविक रंग देने वाली आईसोसेल तकनीक की घोषणा सबसे पहले </em><em>2013 </em><em>में की थी। सैमसंग ने </em><em>2015 </em><em>में इस तकनीक पर आधारित उद्योग का पहला </em><em>1.0</em> <em>μm</em><em> पिक्सेल इमेज सेंसर और </em><em>2017 </em><em>में </em><em>0.9 </em><em>पिक्सेल सेंसर पेश किया था। जून </em><em>2018 </em><em>में सैमसंग ने पिक्सेल को अलग रखने की उन्नत तकनीक आइसोसेल प्लस पेश की।</em></p>
<p><img class="aligncenter wp-image-5751 size-large" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2020/09/Samsung-ISOCELL-2_02-1024x325.jpg" alt="" width="1024" height="325" /></p>
<p><img class="aligncenter wp-image-5752 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2020/09/Samsung-ISOCELL-2_03_F.jpg" alt="" width="800" height="902" /></p>
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																				</item>
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				<title><![CDATA[[एडिटोरियल] इंसानी आंखों को चुनौतीः सैमसंग की सेंसर तकनीक खोल रही संभावनाओं के नए द्वार]]></title>
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				<pubDate>Wed, 22 Apr 2020 10:07:44 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[ISOCELL]]></category>
		<category><![CDATA[Nonacell]]></category>
		<category><![CDATA[Samsung ISOCELL Bright HM1]]></category>
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									<description><![CDATA[दिन भर तस्वीरें खींचते रहना और वीडियो बनाना हमारी आज की जिंदगी में आम बात हो गई है। अब शायद ही कोई इनके लिए खास मौकों का इंतजार करता है। चाहे दिल खुश कर देने वाले किसी व्यंजन को हमेशा के लिए आंखों में समेट लेना हो या फिर आपके लेटेस्ट डांस मूव्स की यादों […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div id="attachment_4843" style="width: 1010px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-4843" class="wp-image-4843 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2020/04/Yongin-Park_image-sensor-editorial_main.jpg" alt="" width="1000" height="563" /><p id="caption-attachment-4843" class="wp-caption-text">योंगिन पार्क, ईवीपी, सेंसर बिजनेस सिस्टम के प्रमुख, सिस्टम एलएसआई बिजनेस</p></div>
<p>दिन भर तस्वीरें खींचते रहना और वीडियो बनाना हमारी आज की जिंदगी में आम बात हो गई है। अब शायद ही कोई इनके लिए खास मौकों का इंतजार करता है। चाहे दिल खुश कर देने वाले किसी व्यंजन को हमेशा के लिए आंखों में समेट लेना हो या फिर आपके लेटेस्ट डांस मूव्स की यादों को सहेजना या फिर किसी दिन बालों के बढ़िया स्टाइल को फिक्स करना हो, बस अपना मोबाइल कैमरा निकालिए और चंद क्लिक में आप तैयार हैं इन लमहों को अपने दोस्तों के साथ साझा करने के लिए। ये बेहतरीन अनुभव संभव हो पाए हैं मोबाइल फोटोग्राफी के क्षेत्र में हुई हाल की उल्लेखनीय प्रगति से और इस क्रांति के केंद्र में वह मोबाइल चिप है, जो प्रकाश को डिजिटल डेटा में बदल देता है। इसी चिप को इमेज सेंसर कहते हैं।</p>
<p>हम जिस इमेज सेंसर से पूरी दुनिया को देखते हैं, यानी हमारी आंखें, वे करीब 500 मेगापिक्सेल (एमपी) के रिजॉल्यूशन के बराबर होती हैं। आज के दौर में ज्यादातर डीएसएलआर कैमरे जो 40 एमपी का और अग्रणी स्मार्टफोन मॉडल जो 12 एमपी का रिजॉल्यूशन देते हैं, उनसे तुलना करने पर स्पष्ट है कि मानव दृष्टि की क्षमताओं के समान स्तर पर पहुंचने के लिए एक उद्योग के तौर पर हमें अभी लंबी दूरी तय करनी है।</p>
<p>आसान भाषा में कहा जाए तो एक सेंसर में जितने संभव हों, उतने पिक्सेल एक साथ रख देना एक आसान हल समझ में आता है, लेकिन ऐसा करने पर उस इमेज सेंसर का आकार पूरे कैमरे या स्मार्टफोन के आकार से भी बड़ा हो जाएगा। आज के स्मार्टफोन, जिनमें स्क्रीन-बॉडी के उच्च अनुपात और पतले डिजाइन जैसी अत्याधुनिक विशेषताएं होती हैं, में करोड़ों पिक्सेल फिट करने के लिए जरूरी है कि वे पिक्सेल एक साथ सिमट कर एक सेंसर को जितना संभव हो, उतना कॉम्पैक्ट बना सकें।</p>
<p>दूसरी तरफ, छोटे पिक्सेल से भद्दी और बदरंग किस्म की तस्वीरें आ सकती हैं क्योंकि इनमें हर पिक्सेल द्वारा प्राप्त की गई प्रकाश की प्रॉपर्टी हासिल करने वाला क्षेत्र बहुत कम होता है। एक सेंसर में जितने पिक्सेल होते हैं और उन पिक्सेल का जो आकार होता है, इनके बीच अधिकतम संतुलन तैयार करना एक ऐसी आवश्यकता है जिसके लिए सुदृढ़ तकनीकी क्षमता की जरूरत होती है।</p>
<h3></h3>
<h3><strong>अत्याधुनिक पिक्सेल तकनीक</strong></h3>
<p>तकनीक के क्षेत्र में अपनी अगुवाई और कारोबार के लंबे इतिहास से पैदा होने वाले अनुभवों का लाभ उठाते हुए सैमसंग ने अपने इमेज सेंसर में यह संतुलन कायम करने में सफलता हासिल की है। मई 2019 में हमने मोबाइल उद्योग में पहली बार 64 एमपी सेंसर के इस्तेमाल की घोषणा की थी और महज 6 महीनों के बाद हमने 108 एमपी का सेंसर बाजार में उतारा।</p>
<p>हमारे आधुनिकतम 108 एमपी के इमेज सेंसर आइसोसेल ब्राइट एचएम1 के लिए हमने अपनी खास ‘नोनासेल तकनीक’ का प्रयोग किया। यह तकनीक पिक्सेल की प्रकाश को अवशोषित करने की क्षमता को नाटकीय ढंग से बढ़ा देती है। पिछली टेट्रासेल तकनीक के मुकाबले, जो 2×2 की कतार में चलती थी, नोनासेल तकनीक में 3×3 पिक्सेल का ढांचा होता है जो, उदाहरण के लिए 0.8 माइक्रोमीटर के 9 पिक्सेल को 2.4 माइक्रोमीटर के 1 पिक्सेल के बराबर काम करने लायक बना देती है। इसके कारण कम प्रकाश की स्थिति में लो-लाइट सेटिंग से पैदा होने वाली समस्याएं भी कम हो जाती हैं।</p>
<p>2019 में सैमसंग पहली कंपनी थी जिसने 0.7 माइक्रोमीटर पिक्सेल पर आधारित इमेज सेंसर का इस्तेमाल शुरू किया था। इससे पहले तक मोबाइल उद्योग का मानना था कि पिक्सेल को 0.8 माइक्रोमीटर से छोटा करना संभव नहीं है। लेकिन हमारे इंजीनियरों के लिए ‘तकनीकी चुनौती’ महज एक और चुनौती भर है जो उन्हें इन्नोवेशन के लिए प्रेरित करती है।</p>
<h3></h3>
<h3><strong>हमारी अनुभूतियों से परे पहुंचने वाले सेंसर</strong></h3>
<p>आज के दौर में ज्यादातर कैमरे 450 और 750 नैनोमीटर (एनएम) के बीच की लंबाई वाले तरंगदैर्घ्य पर सिर्फ वही तस्वीरें ले सकते हैं जिन्हें इंसानी आंखों से देखा जा सकता है। इस दायरे से बाहर की प्रकाश तरंगों को पकड़ सकने वाले सेंसर तैयार कर पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन उनका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए, पराबैंगनी (अल्ट्रावॉयलेट) किरणों को पकड़ने में सक्षम सेंसर स्वस्थ और कैंसरयुक्त कोशिकाओं को अलग-अलग रंगों में दर्शाने वाली तस्वीरें खींच कर स्किन कैंसर का पता लगाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसी तरह कृषि और अन्य उद्योगों में सक्षम गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अवरक्त (इंफ्रारेड) इमेज सेंसर तैयार किये जा सकते हैं। भविष्य में कभी हम ऐसे सेंसर तैयार करने में भी सफल हो सकते हैं जिनसे वे माइक्रोब देखे जा सकें, जिन्हें खुली आंखों से देख पाना संभव नहीं।</p>
<p>हम न केवल इमेज सेंसर विकसित कर रहे हैं, बल्कि ऐसे अन्य प्रकार के सेंसर तैयार करने पर भी काम कर रहे हैं, जो गंध और स्वाद का पता कर सकें। ऐसे सेंसर जो मानव अनुभूतियों के परे जा सकें, जल्द ही हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जाएंगे और अज्ञात को ज्ञात बनाने वाले और हमारी अपनी इंद्रियों की क्षमताओं से परे जाकर लोगों की मदद करने वाले ऐसे सेंसरों के होने से संभावनाओं का जो द्वार खुलेगा, उसे लेकर हम बहुत रोमांचित हैं।</p>
<h3></h3>
<h3><strong>सबके लिए 600 एमपी पाने का लक्ष्य </strong></h3>
<p>आज की तारीख तक इमेज सेंसर के सभी प्रमुख उपयोग स्मार्टफोन के क्षेत्र में ही रहे हैं, लेकिन जल्दी ही इसके ऑटोनोमस वाहनों, आईओटी और ड्रोन जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में भी फैलने की संभावना है। सैमसंग को गर्व है कि वह छोटे-पिक्सेल और उच्च-रिजॉल्यूशन वाले सेंसरों की धारा का नेतृत्व कर रहा है और 2020 तथा उसके बाद भी यह रुझान बरकरार रहेगा। इतना ही नहीं, सैमसंग डिवाइस बनाने वालों की अलग-अलग जरूरतों के लिहाज से एक विस्तृत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए तकनीकी आविष्कारों के अगले दौर की अगुवाई करने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। लगातार इन्नोवेशन के जरिए हम पिक्सेल तकनीक में अंतहीन संभावनाओं को खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसका नतीजा ऐसे इमेज सेंसर भी हो सकते हैं जो सामने वाली वस्तु में इंसानी आंखों से भी बारीक ब्योरे पकड़ सकें।</p>
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