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		<title>Machine Learning &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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				<title><![CDATA[AI सीखने से लेकर AI के साथ कुछ बनाने तक: सैमसंग इनोवेशन कैंपस के साथ सुनिधिश्री का सफ़र]]></title>
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				<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 13:29:02 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
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									<description><![CDATA[सुनिधिश्री प्रभाकरन के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ़ पढ़ाई का एक विषय नहीं था—यह संभावनाओं से भरा एक क्षेत्र था। महाराष्ट्र के मुंबई में डी. वाई. पाटिल के रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की फ़ाइनल ईयर की छात्रा, सुनिधिश्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी के साथ सैमसंग […]]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img width="1000" height="562" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/10/06132551/image-2.png" alt="" class="wp-image-10814" /><figcaption class="wp-element-caption">सुनिधिश्री: “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे AI का प्रैक्टिकल अनुभव दिया और थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स को असल दुनिया के कामों में लागू करने में मदद की।”</figcaption></figure>



<p>सुनिधिश्री प्रभाकरन के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ़ पढ़ाई का एक विषय नहीं था—यह संभावनाओं से भरा एक क्षेत्र था।</p>



<p>महाराष्ट्र के मुंबई में डी. वाई. पाटिल के रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की फ़ाइनल ईयर की छात्रा, सुनिधिश्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई टेक्नोलॉजी में गहरी दिलचस्पी के साथ सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) में कदम रखा। उन्होंने पहले ही एकेडमिक प्रोजेक्ट्स और रिसर्च के ज़रिए टेक्नोलॉजी को समझना शुरू कर दिया था और अक्सर अपनी टीमों में लीडर की भूमिका निभाती थीं।</p>



<p>लेकिन वह सिर्फ़ यह जानना नहीं चाहती थीं कि टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है। वह यह सीखना चाहती थीं कि ज़रूरी समस्याओं को हल करने के लिए इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए।</p>



<p>यहीं से सैमसंग इनोवेशन कैंपस के साथ उनका सफ़र शुरू हुआ।</p>



<h2 class="wp-block-heading">जिज्ञासा को काबिलियत में बदलना</h2>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स के ज़रिए, सुनिधिश्री को AI कॉन्सेप्ट्स, डेटा एनालिसिस और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का व्यवस्थित अनुभव मिला। एक्सपर्ट गाइडेंस, असाइनमेंट्स और प्रैक्टिकल लर्निंग के मेल ने उन्हें क्लासरूम में सीखी गई बातों को असल दुनिया के कामों से जोड़ने में मदद की।</p>



<p>उनके लिए, सबसे बड़ी सीख सिर्फ़ टेक्निकल जानकारी नहीं थी, बल्कि एक्सपेरिमेंट करने, आइडियाज़ पेश करने और समस्याओं को अलग नज़रिए से देखने का आत्मविश्वास भी था।</p>



<p>सुनिधिश्री ने कहा, “सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने मुझे AI का प्रैक्टिकल अनुभव दिया और थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स को असल दुनिया के कामों में लागू करने में मदद की। इस प्रोग्राम ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया और मुझे सीखते रहने और नई चीज़ें बनाने के लिए प्रेरित किया।”</p>



<p>यह आत्मविश्वास जल्द ही उनके एकेडमिक और रिसर्च के कामों में भी दिखने लगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आइडियाज़ से इनोवेशन तक</h2>



<p>2026 में SIC पूरा करने के बाद, सुनिधिश्री ने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और क्लिनिकल रिसर्च की चुनौतियों से निपटने वाले कई प्रोजेक्ट्स में अपनी AI जानकारी का इस्तेमाल करना शुरू किया।</p>



<p>उन्होंने ‘AI-ड्रिवन ह्यूमन-सेंट्रिक सॉल्यूशंस एंड सस्टेनेबल ट्रांसफॉर्मेशन’ (AI-HCSST 2026) पर दूसरी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में “AI-पावर्ड मेडिकल रिपोर्टिंग एंड क्लिनिकल डैशबोर्ड” पेश किया।</p>



<p>टेक्नोलॉजी को ज़्यादा सुलभ बनाने के लिए AI के इस्तेमाल में उनकी दिलचस्पी के कारण “लीफलेन्स: AI-इंटीग्रेटेड प्लांट डिज़ीज़ डिटेक्शन एंड पर्सनलाइज़्ड केयर थ्रू ए मल्टीलिंगुअल चैटबॉट” प्रोजेक्ट भी सामने आया, जिसे उन्होंने ‘एडवांसिंग टेक्नोलॉजी इन इंजीनियरिंग एंड साइंस’ (ICATES-2025) पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेश किया। यह प्रोजेक्ट अब कॉपीराइट एप्लीकेशन के स्टेज तक पहुँच चुका है। एक और प्रोजेक्ट, “स्मार्ट रिक्रूट: क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए डिजिटल ट्विन्स,” को कम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग और डेटा सिक्योरिटी पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (ICCCDS-2026) में पेश किया गया।</p>



<p>हर प्रोजेक्ट AI के अलग-अलग इस्तेमाल को दिखाता था। साथ मिलकर, उन्होंने कुछ और भी अहम बात दिखाई—एक ऐसा स्टूडेंट जो टेक्नोलॉजी को कागज़ पर मौजूद आइडिया से असल दुनिया में काम आने वाले सॉल्यूशन में बदलने में ज़्यादा कॉन्फिडेंट हो गया है।</p>



<p>सुनिधिश्री ने कई हैकाथॉन में भी हिस्सा लिया और कॉम्पिटिटिव माहौल में अपनी प्रॉब्लम-सॉल्विंग और टेक्निकल स्किल्स को परखा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कॉलेज के बाद की दुनिया के लिए कॉन्फिडेंस बनाना</h2>



<p>सैमसंग इनोवेशन कैंपस का असर सिर्फ़ प्रोजेक्ट्स और प्रेजेंटेशन तक ही सीमित नहीं था।</p>



<p>जब सुनिधिश्री कॉलेज से वर्कप्लेस में जाने की तैयारी कर रही थीं, तो SIC के ज़रिए बनी टेक्निकल नींव और कॉन्फिडेंस ने प्लेसमेंट प्रोसेस के दौरान उनकी मदद की। उन्हें प्लेसमेंट का मौका मिला, जो उनके प्रोफेशनल सफ़र में एक अहम पड़ाव था।</p>



<p>इस अनुभव ने उन्हें सीखते रहने के लिए भी प्रेरित किया। इंडस्ट्री के लिए खुद को तैयार करने की इच्छा के साथ, उन्होंने अपनी AI स्किल्स के साथ-साथ SAP टेक्नोलॉजीज़ के बारे में भी जानना शुरू किया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “SIC सिर्फ़ एक कोर्स नहीं था जिसे मैंने पूरा किया। यह एक सीढ़ी बन गया—AI में दिलचस्पी रखने से लेकर कॉन्फिडेंस के साथ उससे कुछ बनाने, अपने आइडिया पेश करने और आगे आने वाले मौकों के लिए खुद को तैयार करने तक।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">सफ़र जारी है</h2>



<p>आज, सुनिधिश्री AI को सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि असरदार सॉल्यूशन बनाने के एक टूल के तौर पर देखती हैं।</p>



<p>उनका सफ़र—नई टेक्नोलॉजीज़ के बारे में जानने की उत्सुकता रखने वाले स्टूडेंट से लेकर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में AI-बेस्ड सॉल्यूशन पेश करने और प्रोफेशनल दुनिया में कदम रखने वाले युवा इनोवेटर तक—सही समय पर युवाओं को सही स्किल्स, एक्सपोज़र और कॉन्फिडेंस देने की ताकत को दिखाता है।</p>



<p>और सुनिधिश्री के लिए, यह तो बस शुरुआत है।</p>



<p>उन्होंने AI को समझने की उत्सुकता के साथ शुरुआत की थी। सैमसंग इनोवेशन कैंपस ने उस उत्सुकता को कुछ नया बनाने के कॉन्फिडेंस में बदलने में उनकी मदद की।</p>
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