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		<title>Varanasi &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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            <title>Varanasi &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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		<description>What's New on Samsung Newsroom</description>
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				<title><![CDATA[छोटे शहर के एक आइडिया से एक संभावित स्टार्टअप तक: वाराणसी के छात्र ने भारत की डॉक्यूमेंट लिटरेसी की चुनौती को अपनाया]]></title>
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				<pubDate>Mon, 21 Sep 2026 12:11:55 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Abhinav Jaiswal]]></category>
		<category><![CDATA[Ballia]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Startup]]></category>
		<category><![CDATA[Varanasi]]></category>
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									<description><![CDATA[क्या हो अगर कोई व्यक्ति, जिसे कानूनी, वित्तीय या सरकारी दस्तावेज़ पढ़ने में मुश्किल होती है, उस पर हस्ताक्षर करने से पहले ही समझ सके कि उसमें क्या लिखा है? इसी सवाल ने युवा इनोवेटर अभिनव जायसवाल को एक ऐसी टेक्नोलॉजी-आधारित तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसका मकसद कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img width="1000" height="604" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/09/21120953/20260902_163218-copy-1000x604.jpg" alt="" class="wp-image-10653" /><figcaption class="wp-element-caption">अभिनव: “सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो में मैंने सीखा कि आपको प्रोटोटाइप को किसी कहानी से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।”</figcaption></figure></div>


<p>क्या हो अगर कोई व्यक्ति, जिसे कानूनी, वित्तीय या सरकारी दस्तावेज़ पढ़ने में मुश्किल होती है, उस पर हस्ताक्षर करने से पहले ही समझ सके कि उसमें क्या लिखा है?</p>



<p>इसी सवाल ने युवा इनोवेटर अभिनव जायसवाल को एक ऐसी टेक्नोलॉजी-आधारित तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसका मकसद कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना आसान बनाना था।</p>



<p>अभिनव, जो बलिया के छोटे से शहर में पले-बढ़े और अब वाराणसी में रहते हैं, के लिए एक रोज़मर्रा की समस्या से प्रेरित होकर शुरू हुआ यह विचार धीरे-धीरे कुछ बड़ा रूप ले रहा है।</p>



<p>उनके इस विचार ने उन्हें युवाओं के लिए सैमसंग के प्रमुख इनोवेशन प्रोग्राम, ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ की टॉप 20 टीमों में जगह दिलाई है। यहाँ उन्हें मेंटरशिप और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे वे सोच पा रहे हैं कि शुरुआती स्तर के विचार को असल दुनिया के समाधान — और समय के साथ, एक बड़े पैमाने पर चलने वाले वेंचर — में कैसे बदला जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत की एक रोज़मर्रा की समस्या का समाधान</h2>



<p><br>अभिनव बचपन से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और STEM में रुचि रखते थे। लेकिन जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी के बारे में उनकी समझ बढ़ी, वैसे-वैसे अपने आस-पास की समस्याओं को हल करने के लिए इसके इस्तेमाल में उनकी दिलचस्पी भी बढ़ती गई।</p>



<p>ऐसी ही एक समस्या थी दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता (डॉक्यूमेंट लिटरेसी)।</p>



<p>कानूनी समझौते, वित्तीय दस्तावेज़ और सरकारी कागज़ात को समझना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे हैं। जटिल भाषा के कारण लोगों को किसी चीज़ पर हस्ताक्षर करने या सहमति देने से पहले जानकारी समझने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।</p>



<p>अभिनव ने सोचना शुरू किया कि क्या टेक्नोलॉजी ज़रूरी जानकारी को समझने में आसान बनाकर इस अंतर को कम करने में मदद कर सकती है।</p>



<p>यही सवाल ‘टीम ItzFOD’ की शुरुआत का कारण बना।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विचार को टेक्नोलॉजी से आगे ले जाना</h2>



<p><br>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ की टॉप 20 टीमों में चुने जाने से अभिनव को अपने विचार को शुरुआती टेक्नोलॉजी कॉन्सेप्ट से आगे ले जाने का मौका मिला।</p>



<p>SFT बूटकैंप में मेंटर्स और विशेषज्ञों के साथ बातचीत ने उन्हें कुछ अलग तरह के सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया: आखिर वे किसके लिए समस्या का समाधान कर रहे थे? लोग इस समाधान का इस्तेमाल कैसे करेंगे? असल दुनिया में यह कैसे काम का साबित होगा? और एक प्रोटोटाइप समस्या और उसके संभावित असर के बीच के संबंध को कैसे स्पष्ट रूप से दिखा सकता है?</p>



<p>अभिनव ने कहा, “मेरे विचार को प्रोटोटाइप पर मार्गदर्शन और मेंटरशिप की ज़रूरत थी।”</p>



<p>उनकी सबसे बड़ी सीखों में से एक यह थी कि प्रोटोटाइप को सिर्फ़ यह नहीं दिखाना चाहिए कि टेक्नोलॉजी क्या कर सकती है। उसे उस समस्या की कहानी भी बतानी चाहिए जिसे वह हल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने सीखा कि आपको कहानी को प्रोटोटाइप से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।”</p>



<p>जिनकी शुरुआती दिलचस्पी AI और मशीन लर्निंग में थी, उनके लिए यह एक बड़ा बदलाव था — सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के बारे में सोचने से हटकर उन लोगों के बारे में सोचना जो आखिरकार इसका इस्तेमाल करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">प्रोटोटाइप से संभावित वेंचर तक</h2>



<p><br>मेंटॉरिंग ने अभिनव को इस मौके के दायरे पर फिर से सोचने के लिए भी प्रेरित किया।</p>



<p>उन्होंने कहा, “मेरा आइडिया बहुत बड़ा है। मुझे एहसास हुआ कि मैं कई समस्याओं को हल कर रहा हूँगा।”</p>



<p>उन्हें समझ आने लगा कि डॉक्यूमेंट लिटरेसी का मतलब सिर्फ़ मुश्किल शब्दों का अनुवाद करना या उन्हें आसान बनाना नहीं है। इसका मतलब जानकारी तक पहुँच और लोगों को यह बेहतर ढंग से समझने में मदद करना भी है कि उनसे किस बात के लिए सहमति मांगी जा रही है।</p>



<p>उनका प्रोटोटाइप लगातार बेहतर हो रहा है, लेकिन अभिनव का कहना है कि जिस तरह से वह इस आइडिया के बारे में सोचते हैं और इसे दूसरों तक पहुँचाते हैं, उसमें काफ़ी बदलाव आया है।</p>



<p>उन्होंने कहा, “हो सकता है कि प्रोटोटाइप में ज़्यादा बदलाव न आया हो, लेकिन मेरी पिचिंग बेहतर हुई है। मैंने मेंटॉर के सुझावों से बहुत कुछ सीखा है।”</p>



<p>यह बदलाव उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप की एक बुनियादी बात समझने में भी मदद कर रहा है: कोई आइडिया शायद ही कभी शुरू में ही एक तैयार प्रोडक्ट के तौर पर सामने आता है।</p>



<p>बड़े पैमाने पर काम करने लायक समाधान बनने से पहले, उस पर सवाल उठाए जाते हैं, उसे टेस्ट किया जाता है, समझाया जाता है, बेहतर बनाया जाता है और कभी-कभी नए सिरे से सोचा जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">छोटे शहर, बड़े आइडिया</h2>



<p><br>अभिनव का सफ़र ‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो 2026’ से उभर रही एक बड़ी कहानी को भी दिखाता है।</p>



<p>इस साल टॉप 20 टीमों में से आधी से ज़्यादा टीमें भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं, और फ़ाइनलिस्ट 12 राज्यों के 18 शहरों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके कई आइडिया उन समस्याओं पर आधारित हैं जिनका सामना उन्होंने अपने समुदायों में किया है।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फ़ॉर टुमॉरो’ के ज़रिए, ये युवा इनोवेटर अपने आइडिया को और बेहतर बनाने के लिए मेंटॉरशिप, टेक्नोलॉजी की जानकारी और एक राष्ट्रीय मंच का लाभ उठा रहे हैं।</p>



<p>टॉप 20 फ़ाइनलिस्ट को सैमसंग और IIT दिल्ली के ‘फ़ाउंडेशन फ़ॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र’ (FITT) के एक्सपर्ट मेंटॉरिंग दे रहे हैं, ताकि वे अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बना सकें और प्रोग्राम के अगले चरण के लिए तैयारी कर सकें।</p>



<p>छोटे शहरों और कस्बों के युवा इनोवेटर्स के लिए, यह अनुभव एक अहम दूरी को पाटने में मदद कर सकता है — समस्या की पहचान करने और यह समझने के बीच की दूरी कि कैसे कोई आइडिया आखिरकार एक काम का समाधान या वेंचर बन सकता है।</p>



<p>अभिनव के लिए, इस अनुभव ने इनोवेशन को देखने के उनके नज़रिए को पहले ही बदल दिया है। उन्होंने कहा, “मुझे एक बात समझ आई — कोशिश करना ही सबसे ज़रूरी है। कोई भी आइडिया छोटा नहीं होता।”</p>



<p>बलिया में बड़े होने से लेकर वाराणसी में अपने आइडिया को विकसित करने और उसे एक राष्ट्रीय इनोवेशन प्लेटफ़ॉर्म तक ले जाने तक, अभिनव का सफ़र अभी शुरुआती दौर में ही है।</p>



<p>लेकिन असल बात भी यही है।</p>



<p>संभावित स्टार्टअप हमेशा स्थापित ये इनोवेशन हब या पूरी तरह तैयार बिज़नेस प्लान के साथ शुरू हो सकते हैं। कभी-कभी इनकी शुरुआत किसी छोटे शहर के युवा से होती है, जो ऐसी समस्या को देखता है जिसके साथ बाकी लोग जीने के आदी हो चुके हैं — और वह उसे हल करने की कोशिश करने का फ़ैसला करता है।</p>



<p>अभिनव और टीम ItzFOD के लिए, ‘Samsung Solve for Tomorrow’ उस शुरुआती कोशिश को और बेहतर बनाने में मदद कर रहा है: समस्या को और साफ़ तौर पर समझना, एक बेहतर होता प्रोटोटाइप और एक ऐसा आइडिया जिसमें आगे और बढ़ने की क्षमता हो।</p>
]]></content:encoded>
																				</item>
					<item>
				<title><![CDATA[वाराणसी, प्रयागराज और रायबरेली के युवा इनोवेटर्स ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के टॉप 40 में शामिल हुए]]></title>
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				<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 12:22:36 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[सोशल इम्पैक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[Prayagraj]]></category>
		<category><![CDATA[Raebareli]]></category>
		<category><![CDATA[Solve for Tomorrow 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Varanasi]]></category>
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									<description><![CDATA[वाराणसी और प्रयागराज से लेकर रायबरेली तक, उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स यह दिखा रहे हैं कि भारत के कुछ सबसे बेहतरीन आइडिया कहीं से भी आ सकते हैं। राज्य के चार युवा इनोवेटर्स ने ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के पांचवें एडिशन में नेशनल टॉप 40 में जगह बनाई है। उनके […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img width="1024" height="576" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2026/08/24121919/UPM-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-10485" /><figcaption class="wp-element-caption">[बाएं से दाएं] वाराणसी से अभिनव जयसवाल, रायबरेली से अकुल अत्रे और प्रयागराज से मोहम्मद सरफराज और राय बरेली से सक्षम श्रेयांस</figcaption></figure>



<p>वाराणसी और प्रयागराज से लेकर रायबरेली तक, उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स यह दिखा रहे हैं कि भारत के कुछ सबसे बेहतरीन आइडिया कहीं से भी आ सकते हैं।</p>



<p>राज्य के चार युवा इनोवेटर्स ने ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ (Samsung Solve for Tomorrow) के पांचवें एडिशन में नेशनल टॉप 40 में जगह बनाई है। उनके आइडिया डॉक्यूमेंट लिटरेसी (दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता) और हाउसिंग डिज़ाइन से लेकर साइबर सिक्योरिटी के नए खतरों और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी जैसी चुनौतियों से जुड़े हैं।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ 14 से 22 साल के युवाओं के लिए सैमसंग का खास CSR इनोवेशन प्रोग्राम है। FITT-IIT दिल्ली के साथ मिलकर चलाया जा रहा यह प्रोग्राम पूरे भारत के युवा इनोवेटर्स को असल दुनिया की चुनौतियों की पहचान करने और ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन, मेंटरशिप, टेक्नोलॉजी और हैंड्स-ऑन प्रोटोटाइपिंग के ज़रिए संभावित समाधान विकसित करने में मदद करता है।</p>



<p>स्थानीय समस्याओं से संभावित समाधान तक<br>वाराणसी में, 18 साल के अभिनव जायसवाल एक ऐसे समाधान पर काम कर रहे हैं जिससे उन लोगों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना आसान हो जाए, जिन्हें मुश्किल लिखित जानकारी समझने में परेशानी होती है।</p>



<p>प्रयागराज में, 19 साल के मोहम्मद सरफराज AI-आधारित हाउसिंग डिज़ाइन समाधान विकसित कर रहे हैं। यह समाधान घनी आबादी वाले भारतीय इलाकों में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, जैसे स्ट्रक्चरल प्लानिंग और वेंटिलेशन पर केंद्रित है।</p>



<p>और रायबरेली में, 21 साल के अकुल अत्रे और 20 साल के सक्षम श्रेयांस एन्क्रिप्टेड डेटा से जुड़े साइबर सिक्योरिटी के नए खतरों और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी को मज़बूत करने के तरीकों पर काम कर रहे हैं।</p>



<p>अलग-अलग शहर। अलग-अलग चुनौतियां। लेकिन सभी आइडिया की शुरुआत एक ही जगह से होती है: अपने आस-पास देखी गई समस्याएं।</p>



<p>उनकी कामयाबी इस साल के प्रोग्राम में दिख रहे बड़े बदलाव को दिखाती है। नेशनल टॉप 40 टीमों में से आधी से ज़्यादा टीमें टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं। यह दिखाता है कि कैसे पूरे भारत के युवा अपने समुदायों में आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के लिए, वाराणसी, प्रयागराज और रायबरेली के युवा इनोवेटर्स का नेशनल टॉप 40 में शामिल होना क्षेत्रीय गर्व की बात है — और यह इस बात का संकेत भी है कि भारत का इनोवेशन मैप अपने पारंपरिक टेक्नोलॉजी हब से आगे बढ़ रहा है।</p>



<p>वाराणसी के अभिनव जायसवाल के लिए, चुनौती डॉक्यूमेंट लिटरेसी (दस्तावेज़ों को समझने की क्षमता) है। अनपढ़ और कम पढ़े-लिखे भारतीयों के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों को समझना अक्सर मुश्किल हो सकता है, खासकर उन पर साइन करने से पहले। उनका समाधान यह बताता है कि कैसे टेक्नोलॉजी ऐसी जानकारी को समझने में आसान बना सकती है और लोगों को बेहतर जानकारी के साथ फ़ैसले लेने में मदद कर सकती है।</p>



<p>मोहम्मद सरफ़राज़ का फ़ोकस हाउसिंग डिज़ाइन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को हल करने के लिए AI का इस्तेमाल करने पर है।</p>



<p>इस बीच, अकुल अत्रे और सक्षम श्रेयांस साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल पब्लिक सेफ्टी से जुड़े अपने सॉल्यूशन पर काम कर रहे हैं।</p>



<p>‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ के ज़रिए, इन युवा इनोवेटर्स को चुनौतियों को गहराई से समझने, अपने आइडिया को टेस्ट करने और उन्हें संभावित सॉल्यूशन में बदलने के लिए प्लेटफ़ॉर्म, मेंटरशिप और टेक्नोलॉजी सपोर्ट मिल रहा है।</p>



<p>टॉप 40 टीमें अब 10 दिन के इनोवेशन बूटकैंप में हिस्सा लेंगी, जहाँ उन्हें FITT-IIT दिल्ली में स्टार्टअप फ़ाउंडर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से गहन मेंटरशिप मिलेगी। बूटकैंप के हिस्से के तौर पर, टीमों को सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – दिल्ली, सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – नोएडा, सैमसंग R&D इंस्टीट्यूट इंडिया – बैंगलोर, सैमसंग डिज़ाइन दिल्ली और गुरुग्राम में सैमसंग के रीजनल हेडक्वार्टर जाने का मौका भी मिलेगा।</p>



<p>इसके बाद टीमें टॉप 20 में जगह बनाने के लिए मुकाबला करेंगी, जिन्हें ग्रैंड फ़िनाले से पहले अपने सॉल्यूशन को मज़बूत और बेहतर बनाने के लिए और सपोर्ट मिलेगा।</p>



<p>प्रोग्राम के आखिर में, चार विजेता टीमों को कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये का इनक्यूबेशन ग्रांट और FITT-IIT दिल्ली से इनक्यूबेशन सपोर्ट मिलेगा, जिससे उन्हें अपने सॉल्यूशन को और विकसित करने और बाज़ार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।</p>



<p>भारत में सैमसंग के 30 साल पूरे होने के मौके पर, ‘सॉल्व फॉर टुमॉरो’ देश भर में इनोवेटर्स की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। युवाओं को जहाँ भी वे हैं, वहाँ मेंटरशिप, डिज़ाइन थिंकिंग, टेक्नोलॉजी और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट देकर, यह प्रोग्राम होनहार आइडिया को समुदायों से निकालकर बड़े पैमाने पर असर डालने वाले सॉल्यूशन की ओर ले जाने में मदद कर रहा है।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के युवा इनोवेटर्स के लिए, नेशनल टॉप 40 तक का सफ़र एक ज़बरदस्त संदेश देता है: राष्ट्रीय चुनौती को हल करने की क्षमता वाला कोई आइडिया वाराणसी, प्रयागराज या रायबरेली से भी शुरू हो सकता है।</p>



<p></p>
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