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		<title>Young Innovators &#8211; Samsung Newsroom भारत</title>
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				<title><![CDATA[[यंग इनोवेटर्स इंडिया] एक जश्न भारत की चमकती युवा प्रतिभाओं के नाम]]></title>
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				<pubDate>Fri, 17 Apr 2020 16:17:20 +0000</pubDate>
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				<dc:creator><![CDATA[Malay anil]]></dc:creator>
						<category><![CDATA[कॉरपोरेट]]></category>
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									<description><![CDATA[भारत खोजकर्ताओं और आविष्कारकों का देश रहा है। हमारी तीक्ष्ण गणितीय बुद्धि का लोहा पूरी दुनिया मानती है- भारतीय न केवल सिलिकॉन वैली, बल्कि दुनिया भर के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स में संख्या के लिहाज से एक बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। सैमसंग में भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों के सर्वाधिक चमकते सितारे […]]]></description>
																<content:encoded><![CDATA[<p>भारत खोजकर्ताओं और आविष्कारकों का देश रहा है। हमारी तीक्ष्ण गणितीय बुद्धि का लोहा पूरी दुनिया मानती है- भारतीय न केवल सिलिकॉन वैली, बल्कि दुनिया भर के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स में संख्या के लिहाज से एक बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। सैमसंग में भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों के सर्वाधिक चमकते सितारे हमारे साथ काम करते हैं और लोगों की जिंदगियों को बदलने के लिए सार्थक तकनीकें विकसित करने का उद्देश्य सामने रखते हुए हमारी नित नवीन खोजों की संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं।</p>
<p>सैमसंग न्यूजरूम इंडिया ने दुनिया के विभिन्न कोनों में अपना काम बखूबी कर रही हमारी युवा प्रतिभाओं में से ऐसे तीन इन्नोवेटर्स की कहानियां आप सबके सामने लाने का विचार किया है जिन्होंने लोगों की वास्तविक समस्याओं को पहचाना और उनके लिए नया और अनूठा समाधान पेश किया है।</p>
<p>कुछ वर्षों पहले, अरमान गुप्ता का सामना एक ऐसी मुश्किल से हुआ, जिससे अक्सर घरों में बच्चे दो-चार होते रहते हैं- फर्श पर खाना या जूस गिर जाना और फिर मम्मी की फटकार।</p>
<p>तब महज 10 वर्ष की उम्र में इस मुंबईकर बच्चे ने एक ऐसी मशीन तैयार कर दी, जिसे उसने ‘मॉपिंग मशीन’ का नाम दिया है।</p>
<p>सौभाग्य से साइंस और रोबोटिक्स में रुचि रखने वाले अरमान को बहुत कम उम्र से ही उसके माता-पिता ने इस क्षेत्र में काफी बढ़ावा दिया था, और इसी ने इस मशीन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।</p>
<p>अरमान ने बताया, “मैं 9 साल की उम्र से ही रोबोटिक्स पर काम कर रहा था। इसलिए मैं अपने आइडिया को हकीकत में बदल सका।”</p>
<div id="attachment_4821" style="width: 970px" class="wp-caption aligncenter"><img aria-describedby="caption-attachment-4821" class="wp-image-4821 size-full" src="https://img.global.news.samsung.com/bharat/wp-content/uploads/2020/04/IMG-20200416-WA0007.jpg" alt="" width="960" height="1280" /><p id="caption-attachment-4821" class="wp-caption-text">अरमान गुप्ता</p></div>
<p>सैमसंग इंडिया में प्रोडक्ट इन्नोवेशन टीम के हेड और सीनियर डायरेक्टर अमितोज सिंह ने कहा, “युवा आविष्कारकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। वे निर्माण करने वाले हैं और बिखरे बिंदुओं को जोड़कर नई रचना करने की उनकी क्षमता अद्भुत है। इस प्रतिभा को विद्यालयों, अभिभावकों और समाज द्वारा सराहा जाना चाहिए।”</p>
<p>समय गोडिका ने बिलकुल यही कियाः बिंदुओं को आपस में जोड़ना। कुछ नया करने की उनकी प्रेरणा बनी एक ‘नजदीकी पारिवारिक सदस्य’ की गंभीर न्यूरोलोजिकल बीमारी। इसलिए उन्होंने सिर्केडियन रिदम और मेडिकल चिकित्सा की प्रभावोत्पादकता में बीच एक निश्चित संबंध स्थापित करने पर काम किया। यह संबंध कैंसर और यहां तक कि अल्जाइमर जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।</p>
<p>पिछले वर्ष अपना 17वां जन्मदिन मना चुके बेंगलुरू के इस किशोर ने बताया, “मैं हमेशा ऐसे लोगों से प्रेरित रहा हूं जो दुनिया को कुछ नया देने और बड़े पैमाने पर मौजूद समस्याओं को हल की कोशिश करते हैं।” समय आजकल “एक सिर्केडियन रिदम वियरेबल और एक ऐसा लैंप जो हमारी उत्पादकता में बढ़ोतरी कर सके“, को विकसित करने पर काम कर रहे हैं।</p>
<p>अब वह विज्ञान को पढ़ाए जाने के तरीके को बदलना चाहते हैं। बेंगलुरु के कोरामंगला स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल के छात्र समय के अनुसार, “हमारी पीढ़ी रोचक अवधारणाओं पर बने अच्छे वीडियो देखना पसंद करती है। इसलिए मैं विज्ञान को कहानियों के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। थिएटर और साइंस एक-दूसरे के पूरक हैं। मैं विज्ञान के माध्यम से, विज्ञान के साथ नई कहानियां कहना चाहता हूं। इसी को इन्नोवेशन कहते हैं।”</p>
<p>अमितोज बताते हैं कि युवा खोजकर्ताओं में कारोबार, ग्राहक और प्रौद्योगिकी के मिलन बिंदु पर सोचने की एक खास क्षमता है। “मैं इन युवा इन्नोवेटर्स के काम को देख कर आश्चर्यचकित हूं। इनका भविष्य बहुत उज्जवल है।”</p>
<p>एक अन्य इन्नोवेटर अभिक साहा उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में ओडलाबारी के डॉन बॉस्को अंग्रेजी माध्यम स्कूल के पूर्व छात्र हैं। कम्प्यूटर से उनकी पहली मुठभेड़ 2011 में हुई, जब अपनी कक्षा में इस विषय में फेल होने वाले वह एकमात्र छात्र रहे। लेकिन वही उनके जीवन का वह बिंदु था, जहां से कहानी की शुरुआत हुई। अगली परीक्षा में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p>
<p>जल्दी ही अभिक वेबसाइट डिजाइन के लिए अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट के साथ काम कर रहे थे और उन्होंने कुछ गेमिंग, एजुकेशनल और ट्युटोरियल ऐप भी तैयार किए। यहां तक कि उन्होंने कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए एक पूरी लैंग्वेज ही तैयार कर दी, जिसका नाम है- लिनो।</p>
<p>अभिक ने बताया, “मैं और रिसर्च करना चाहता था- कोडिंग पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (आईए) पर और कई दूसरी चीजों पर। लेकिन कुछ कारणों से मुझे ऐसी सामग्री नहीं मिल पा रही थी, जो मेरी जरूरतों को पूरा कर सके।” इसलिए उन्होंने एक सर्च इंजिन विकसित किया जिसका प्रयोग कर कोई भी अपनी जरूरत के मुताबिक अच्छी सामग्री तलाश सके।</p>
<p>प्रोडक्ट डिजाइन में विशेष रुचि रखने वाला यह 17-वर्षीय किशोर अब एक कदम और आगे बढ़कर अपने एक मित्र के साथ एक ऐसे नये उत्पाद पर काम कर रहा है जो ओटीटी से लेकर म्यूजिक प्रोवाइडर तक के कंटेंट एकत्रित कर एक साझा प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा कर सकेगा।</p>
<p>सिंह की राय में जो बात रचनात्मक युवा प्रतिभाओं और युवा खोजकर्ताओं को अलग करती है, वह है एक्सपीरियंस प्रोटोटाइप तैयार करने की इनकी क्षमता।</p>
<p>उनके मुताबिक, “आविष्कारकों के लिए जरूरी है कि उन्हें अपने आइडिया पर भरोसा हो और वे उन्हें जीवंत उदाहरणों (नमूनों) में बदल सकें। ये जल्दबाजी में तैयार किए गये निम्नस्तरीय नमूने भी हो सकते हैं जो वास्तविक उत्पादों का अनुभव भर हासिल करा सकें या फिर व्यावहारिक परीक्षण के लिहाज से उच्च गुणवत्ता वाले क्रियाशील नमूने भी हो सकते हैं। नमूने तैयार करने से उन्हें अपने विचारों के सत्यापन में और आगे अवधारणाओं को विकसित करने में मदद मिलती है।”</p>
<p>सैमसंग में हमने बिलकुल प्रारंभिक स्तरों से भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए मिलकर काम किया है। हमारे सैमसंग स्मार्ट क्लास प्रोग्राम के जरिए हमने देश भर के जवाहर नवोदय विद्यालय स्कूलों में से हर एक में स्मार्ट क्लास की स्थापना की है। इस दौरान, जब-जब इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने अनेक रोचक आविष्कार किए हैं, तब-तब हमने गौरव महसूस किया है।</p>
<p>बेंगलुरु और नोएडा स्थित सैमसंग के तीनों शोध संस्थान भी समय-समय पर युवा खोजकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं।</p>
<p>(सैमसंग इस देश के ऐसे युवा आविष्कारकों के अदम्य जोश को सैल्यूट करता है- ये ही एक विज्ञानशील भारत का उज्जवल भविष्य हैं।)</p>
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