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सैमसंग इनोवेशन कैंपस के ज़रिए डिंडिगुल की छात्रा ने AI में अपनी जगह बनाई

14-10-2026

प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से सुबिक्षा A को क्लासरूम में सीखी बातों को असल दुनिया की समस्याओं को सुलझाने से जोड़ने में मदद मिली

2026 के इस प्रोग्राम का मकसद पूरे भारत में 20,000 युवाओं को इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी AI स्किल्स सिखाना है

जब सुबिक्षा A ने डिंडिगुल के सेंट एंटनी कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंसेज फ़ॉर विमेन में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई शुरू की, तो वह टेक्नोलॉजी की ओर आकर्षित हुईं। उन्होंने पायथन, वेब डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और डेटाबेस की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्हें चिंता थी कि क्या वह इतनी तेज़ी से बदल रहे इस क्षेत्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगी।

वह थ्योरी से आगे बढ़कर यह समझना चाहती थीं कि नई टेक्नोलॉजी असल समस्याओं को कैसे हल कर सकती है। वह अनजान चुनौतियों का सामना करने के लिए ज़्यादा आत्मविश्वास भी हासिल करना चाहती थीं।

सैमसंग इनोवेशन कैंपस (SIC) ने उन्हें क्लासरूम की सीख को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रैक्टिकल इस्तेमाल से जोड़ने में मदद की। व्यवस्थित लेसन और असाइनमेंट ने उन्हें एक्सपेरिमेंट करने, गलतियों से सीखने और ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ टेक्निकल समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित किया।

सैमसंग इनोवेशन कैंपस, सैमसंग का एक ग्लोबल एजुकेशन प्रोग्राम है जो व्यवस्थित लर्निंग और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के ज़रिए युवाओं को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी स्किल्स सिखाता है। 2026 में, इसका मकसद पूरे भारत में 20,000 युवाओं को AI में ट्रेनिंग देना है, जिससे देश के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

सुबिक्षा कहती हैं, “सैमसंग इनोवेशन कैंपस का मेरे पर्सनल और प्रोफेशनल विकास पर बहुत असर पड़ा है। इसने मुझे सिर्फ़ टेक्निकल कॉन्सेप्ट ही नहीं सिखाए, बल्कि सीखने और समस्याओं को सुलझाने के मेरे नज़रिए को भी बदल दिया।”

कॉलेज की ज़िम्मेदारियों के साथ इस प्रोग्राम को मैनेज करने से उनमें अनुशासन, निरंतरता और टाइम-मैनेजमेंट स्किल्स विकसित हुईं—ऐसी आदतें जो उनके अनुसार नौकरी की दुनिया में कदम रखने पर काम आएंगी।

सुबिक्षा AI के बारे में सीखना जारी रखना चाहती हैं और ऐसे समाधानों में योगदान देना चाहती हैं जिनसे सकारात्मक बदलाव आए। इस अनुभव ने मुश्किलों को देखने का उनका नज़रिया बदल दिया है: अब कोई मुश्किल कॉन्सेप्ट उनके लिए खुद पर शक करने की वजह नहीं बनता, बल्कि कोशिश करने, सवाल पूछने और बेहतर बनने का मौका बन जाता है।

उनका अनुभव युवा महिलाओं के लिए प्रैक्टिकल टेक्नोलॉजी एजुकेशन की अहमियत को दिखाता है, क्योंकि अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ में AI स्किल्स तेज़ी से ज़रूरी होती जा रही हैं। खुद काम करके सीखने (hands-on learning) से स्टूडेंट्स को उन क्षेत्रों में भी अपने लिए जगह बनाने का भरोसा मिल सकता है, जो पहले उन्हें अपनी पहुँच से बाहर लगते थे।

“टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली हर लड़की से मैं यही कहूँगी: अपनी काबिलियत को कभी कम न समझें। शुरुआत करने से पहले आपके पास हर सवाल का जवाब होना ज़रूरी नहीं है।”

सुबिक्षा का आत्मविश्वास उनकी स्किल्स के साथ-साथ बढ़ा है। AI में उनका सफ़र अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन अब वह खुद को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखती हैं जो भविष्य को आकार देने वाली टेक्नोलॉजी में योगदान दे सकता है।

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