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आंध्र प्रदेश के छात्र ने बनाए स्मार्ट गॉगल्स जो दृष्टिबाधित तैराकों को पूल की दीवार से टकराने से बचाते हैं

01-10-2026

चित्तूर के 20 साल के पसुपुलेटी रुत्विक ने अपने एक दोस्त के साथ हुए हादसे से प्रेरित होकर, अल्ट्रासोनिक सेंसर और हैप्टिक अलर्ट का इस्तेमाल करके तैराकी को ज़्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र बनाने का काम किया है

उनके इनोवेशन, 'अनटेथर्ड' (Untethered) ने 'सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026' के टॉप 20 में जगह बनाई है

रुत्विक: “मैं नहीं चाहता कि यह सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट या प्रोटोटाइप बनकर रह जाए जो सिर्फ़ लैब में काम करे। मैं चाहता हूँ कि कोई दृष्टिबाधित तैराक पूल में उतरे और हमारी बनाई चीज़ की वजह से ज़्यादा आत्मविश्वास और आज़ादी महसूस करे।”

देखने में अक्षम तैराक को कैसे पता चलता है कि पूल की दीवार पास आ रही है?

चित्तूर के बीस साल के इंजीनियरिंग स्टूडेंट पसुपुलेटी रुत्विक का मानना ​​है कि इसका जवाब स्मार्ट गॉगल्स की एक जोड़ी में हो सकता है।

उनके इनोवेशन, ‘अनटेदर्ड’ (Untethered) में अल्ट्रासोनिक सेंसिंग का इस्तेमाल करके तैराक की पूल की दीवार से दूरी मापी जाती है और हैप्टिक फीडबैक के ज़रिए उन्हें दीवार के पास आने पर फिजिकल अलर्ट दिया जाता है। यह टेक्नोलॉजी देखने में अक्षम तैराकों को ज़्यादा सुरक्षा, आत्मविश्वास और आज़ादी के साथ पूल में तैरने में मदद कर सकती है।

‘अनटेदर्ड’ अब ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ की टॉप 20 टीमों में शामिल है। यह एक नेशनल एजुकेशन और इनोवेशन कॉम्पिटिशन है जो युवाओं को डिज़ाइन थिंकिंग, मेंटरशिप और प्रैक्टिकल लर्निंग के ज़रिए असल दुनिया की समस्याओं के लिए टेक्नोलॉजी-बेस्ड समाधान विकसित करने के लिए सशक्त बनाता है।

यह आइडिया रुत्विक के एक दोस्त के साथ हुए एक एक्सीडेंट के बाद आया।

रुत्विक ने कहा, “मेरे एक दोस्त को एक्सीडेंट में सिर पर चोट (concussion) लगी थी, और वह बात मेरे मन में बैठ गई। इसने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि कैसे टेक्नोलॉजी चोटों को रोक सकती है और लोगों को किसी और पर लगातार निर्भर रहे बिना एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने में मदद कर सकती है।”

रुत्विक के लिए, यह इनोवेशन उनके बचपन के तैराकी के शौक और एंटरप्रेन्योर बनने की बढ़ती महत्वाकांक्षा को भी एक साथ लाता है।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा स्पोर्ट्स में कुछ करना चाहता था। इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल होने के बाद, मैंने एंटरप्रेन्योरशिप के बारे में सोचना शुरू किया—सिर्फ़ कंपनी शुरू करने के तौर पर नहीं, बल्कि एक असली समस्या की पहचान करने, कुछ सार्थक बनाने और असर पैदा करने के तौर पर।”

इंजीनियरिंग आइडिया से यूज़र-बेस्ड इनोवेशन तक

रुत्विक ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमारो बूटकैंप’ में मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान देते हुए शामिल हुए कि क्या यह टेक्नोलॉजी बनाई जा सकती है। इस अनुभव ने उन्हें एक ज़्यादा बुनियादी सवाल का सामना करने के लिए प्रेरित किया: क्या देखने में अक्षम तैराकों को यह उपयोगी और आरामदायक लगेगा?

उन्होंने कहा, “पहले, मैं पूछ रहा था, ‘क्या मैं इस टेक्नोलॉजी को काम में ला सकता हूँ?’ बूटकैंप ने मुझे यह पूछने पर मजबूर किया, ‘इसे कौन इस्तेमाल करेगा? वे असल में किस समस्या का सामना कर रहे हैं? क्या इससे उनकी ज़िंदगी बेहतर होगी, और क्या वे इसे इस्तेमाल करना चाहेंगे?’ इसने मेरे आइडिया को देखने के मेरे नज़रिए को पूरी तरह से बदल दिया।”

गहन सेशन और एक्सपर्ट मेंटरशिप के ज़रिए, रुत्विक ने प्रोडक्ट की व्यावहारिकता, यूज़र एक्सपीरियंस और असल दुनिया में अपनाए जाने की संभावना की जांच करना शुरू किया। उन्होंने कहा, “मेरे मेंटर्स ने मुझे यह समझने में मदद की कि तकनीकी रूप से क्या संभव है और मैं समस्या को अलग नज़रिए से कैसे देख सकता हूँ। उनके मार्गदर्शन से मुझे सिर्फ़ एक आइडिया होने से आगे बढ़कर, एक असली प्रोडक्ट बनाने वाले की तरह सोचने में मदद मिली।”

चित्तूर का एक आइडिया जिसमें ग्लोबल स्तर पर सफल होने की क्षमता है

हालांकि ‘अनटेदर्ड’ (Untethered) की शुरुआत रुत्विक के तैराकी से जुड़े निजी अनुभव से हुई थी, लेकिन इसकी क्षमता आंध्र प्रदेश से कहीं ज़्यादा है। वह इन गॉगल्स को एक किफायती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले मददगार प्रोडक्ट के तौर पर विकसित करना चाहते हैं, जिससे भारत और दुनिया भर में दृष्टिबाधित तैराकों को मदद मिल सके।

रुत्विक ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि यह सिर्फ़ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट या ऐसा प्रोटोटाइप बनकर रह जाए जो सिर्फ़ लैब में काम करे। अगर हमारे बनाए प्रोडक्ट की वजह से कोई दृष्टिबाधित तैराक पूल में उतरकर ज़्यादा आत्मविश्वास और आज़ादी महसूस कर सके, तो मेरे लिए यह सिर्फ़ नई टेक्नोलॉजी विकसित करने से कहीं ज़्यादा मायने रखेगा।”

जैसे-जैसे ‘अनटेदर्ड’ सैमसंग के ‘सॉल्व फॉर टुमारो 2026’ (Samsung Solve for Tomorrow 2026) प्रोग्राम में आगे बढ़ रहा है, रुत्विक यह दिखा रहे हैं कि कैसे चित्तूर में जन्मा एक आइडिया दुनिया भर में तैराकी को सुरक्षित और ज़्यादा समावेशी बनाने में मदद कर सकता है—हर स्ट्रोक के साथ।

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