पुरानी जीन्स से नई आजीविका: मिलिए महाराष्ट्र के 21 साल की इनोवेटर से, जो डेनिम के कचरे को एक अवसर में बदल रही है
28-09-2026
योगिता किशोर की पहल, 'इंडीजीनस' (Indiejeanous), बेकार डेनिम और कपड़ों के टुकड़ों को लाइफ़स्टाइल प्रोडक्ट्स में बदलती है और साथ ही महिला कारीगरों के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा करती है।
सैमसंग 'सॉल्व फ़ॉर टुमारो 2026' की टॉप 20 टीमों में चुनी गईं योगिता अब एक प्रोटोटाइप बना रही हैं और अपने आइडिया को अपनी कम्युनिटी से आगे ले जाने की तैयारी कर रही हैं।
मेंटरशिप, साथियों से सीखने और एक्सपर्ट्स की राय से महाराष्ट्र की इस युवा इनोवेटर को अपने पर्सनल मिशन को एक ऐसे वेंचर में बदलने में मदद मिल रही है जिसे बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है।

क्या हो अगर पुरानी जींस को कचरे के ढेर (लैंडफिल) में जाने से बचाया जा सके—और उससे किसी महिला को रोज़गार मिल सके?
महाराष्ट्र की 21 साल की इनोवेटर योगिता किशोर इसी सोच के साथ काम कर रही हैं। पिछले डेढ़ साल से वह डेनिम के कचरे को एक मौके में बदलने की कोशिश में जुटी हैं।
उनकी पहल, ‘Indiejeanous’ (इंडीजीनस), बेकार डेनिम और कपड़ों के टुकड़ों को लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स में बदलती है और साथ ही महिला कारीगरों के लिए रोज़गार के मौके भी बनाती है। अब ‘Samsung Solve for Tomorrow 2026’ की टॉप 20 टीमों में चुनी गईं योगिता एक प्रोटोटाइप बनाने और यह पता लगाने पर काम कर रही हैं कि कैसे उनके समुदाय-आधारित आइडिया को एक बड़े और सफल बिज़नेस में बदला जा सकता है।
योगिता के लिए, यह चुनाव एक अहम मोड़ साबित हुआ है।
उन्होंने कहा, “मैं ‘Samsung Solve for Tomorrow’ का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूँ। रिव्यू और फीडबैक मिलना बहुत अच्छा रहा, और यह युवा बदलाव लाने वालों (changemakers) के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।”
कचरे को अपसाइकिल करने से लेकर एक काम का समाधान बनाने तक
इस प्रोग्राम के बूटकैंप में शामिल होने से पहले, योगिता का ध्यान मुख्य रूप से बेकार कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने (अपसाइकिलिंग) पर था। मेंटर्स, एक्सपर्ट्स और दूसरे इनोवेटर्स के साथ बातचीत ने उन्हें कपड़ों के कचरे के पूरे सफ़र को समझने और उन लोगों के बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया जो आखिरकार उनके समाधान का इस्तेमाल करेंगे या उससे फ़ायदा उठाएंगे।
योगिता ने कहा, “मेरे आइडिया में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पहले हम सिर्फ़ अपसाइकिलिंग पर ध्यान दे रहे थे, लेकिन अब हम इस बात पर गहराई से सोच रहे हैं कि उस कचरे का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। हमने प्रोटोटाइपिंग भी शुरू कर दी है।”
इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि एक सार्थक आइडिया को न सिर्फ़ पर्यावरण के लिहाज़ से, बल्कि ग्राहकों और उस समुदाय के लिए भी काम करना चाहिए जिसकी वह मदद करना चाहता है।
उन्होंने आगे कहा, “आपको ग्राहक को समझना होगा और यह पक्का करना होगा कि समाधान सच में समुदाय की ज़रूरतों को पूरा करे।”
जूरी के सामने ‘Indiejeanous’ को पेश करने और पूरे भारत के युवा इनोवेटर्स के साथ इस पर चर्चा करने से योगिता की सोच का दायरा भी बढ़ा कि यह पहल आगे चलकर क्या रूप ले सकती है।
उन्होंने कहा, “जब मैंने अपना आइडिया पेश किया और अपने साथियों के साथ इसे साझा किया, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ़ अपने समुदाय की किसी समस्या का समाधान नहीं कर रही थी।”
बड़ा सोचने का आत्मविश्वास पाना
हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव व्यक्तिगत स्तर पर आया है। योगिता कहती हैं कि जब वह अकेले ही कोई आइडिया बनाती थीं, तो अक्सर सोचती थीं कि क्या इससे सच में कोई असर पड़ेगा। ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो’ में उन्हें ऐसे युवाओं का एक ग्रुप मिला जो वैसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “जब मैं अपने साथियों से बात करती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं कुछ असल काम कर रही हूँ। मुझे प्रेरणा और आत्मविश्वास मिलता है। पहले मुझमें इतना आत्मविश्वास नहीं था।”
जुड़ाव की यह भावना योगिता के लिए बहुत मायने रखती है, क्योंकि उनका कहना है कि अपनी यात्रा की शुरुआत में उन्हें हमेशा ज़रूरी मदद नहीं मिल पाती थी।
उन्होंने कहा, “मेरे आस-पास ऐसे लोगों का होना जो मेरे आइडिया को समझते हैं, मुझे मज़बूती देता है।”
मेंटरशिप, सही सलाह और संभावित ग्रांट सपोर्ट मिलने से योगिता अब ‘Indiejeanous’ मॉडल को बेहतर बना रही हैं, उसका प्रोटोटाइप तैयार कर रही हैं और यह देख रही हैं कि इससे पर्यावरण और समाज पर कैसे मापा जा सकने वाला असर डाला जा सकता है।
एक समुदाय में बेकार डेनिम से शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे कुछ बड़ी चीज़ बनती जा रही है: एक सर्कुलर-इकोनॉमी आइडिया जो टेक्सटाइल वेस्ट को कम करने, महिला कारीगरों की मदद करने और यह दिखाने में सक्षम है कि युवा इनोवेटर कैसे नज़रअंदाज़ की गई समस्याओं को नई संभावनाओं में बदल सकते हैं।
21 साल की उम्र में, योगिता शायद अभी उस यात्रा की शुरुआत में ही हैं। लेकिन अब उन्हें यह नहीं लगता कि उन्हें अकेले ही सब कुछ करना है।