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सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स ने असम से हैदराबाद तक स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु नवाचार को बढ़ावा दिया

01-07-2026

सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 14–22 वर्ष के नवप्रवर्तकों के लिए खुला है। शीर्ष 4 विजेता टीमों को ₹2 करोड़ तक के इनक्यूबेशन ग्रांट्स प्रदान किए जाएंगे

शीर्ष 4 टीमों को FITT, IIT दिल्ली के माध्यम से एंड-टू-एंड इनक्यूबेशन, प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा

सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं

भारत के युवा नवप्रवर्तक अपने आसपास की रोजमर्रा की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तकनीक को एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। असम के गोलाघाट में कक्षा 12 के एक छात्र द्वारा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर नए सिरे से सोचने से लेकर हैदराबाद के गांडीपेट में स्कूली छात्रों द्वारा श्रवण क्षमता में कमी और सड़कों की सुगम पहुंच से जुड़ी समस्याओं के समाधान तलाशने तक—चुनौतियां भले ही स्थानीय हों, लेकिन सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो के माध्यम से उनका प्रभाव पूरे देश में विस्तार पा रहा है।

अपने देशव्यापी 100-शहर अभियान के तहत, सैमसंग इंडिया ने अपने प्रमुख सॉल्व फॉर टुमॉरो डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स का आयोजन गोलाघाट के फुरकाटिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा हैदराबाद के चैतन्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CBIT) में किया। इन वर्कशॉप्स ने असम में 74 छात्रों और हैदराबाद में 173 छात्रों को प्रेरित किया, जिससे इन दोनों विविध भौगोलिक क्षेत्रों के कुल 247 युवा नवप्रवर्तक एक साथ जुड़े।

वर्कशॉप्स में प्रतिभागियों को ह्यूमन-सेंटर्ड इनोवेशन फ्रेमवर्क से परिचित कराया गया, जिससे उन्हें जमीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करने, उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को समझने और सार्थक सामाजिक प्रभाव वाले तकनीक-आधारित समाधान विकसित करने के व्यावहारिक उपकरण मिले। यह पहल युवाओं को चार प्रमुख क्षेत्रों—बेहतर भविष्य के लिए एआई, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और स्पोर्ट्स-टेक—में बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले नवाचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

फुरकाटिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 16 वर्षीय जाफरीन रहमान ने डिज़ाइन थिंकिंग फ्रेमवर्क का उपयोग अपने समुदाय में कचरा प्रबंधन की समस्या के समाधान के लिए किया। उन्होंने कहा, “जब अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक कचरे को फेंकते समय एक साथ मिला दिया जाता है, तो उसका पुनर्चक्रण करना कठिन हो जाता है।” इस समस्या के समाधान के लिए जाफरीन ने सेंसर और QR कोड आधारित गाइडेंस सिस्टम से युक्त स्मार्ट डस्टबिन की परिकल्पना की, जो स्रोत पर ही कचरे का सही पृथक्करण सुनिश्चित करेगा और अंततः लैंडफिल तथा स्थानीय जल स्रोतों तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करेगा।

CBIT, हैदराबाद में आयोजित वर्कशॉप ने 14 वर्षीय ए.के. आश्रिता को श्रवण स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। इसी समूह में 13 वर्षीय छात्राओं टी. नित्या और टी. श्रीलास्या ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों और सीमित गतिशीलता वाले लोगों को सड़क पार करने में आने वाली दैनिक चुनौतियों का अध्ययन किया तथा सड़क पार करने को अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए सहज, तकनीक-आधारित समाधान तलाशे।

इन छात्रों के लिए ये वर्कशॉप्स नवाचार की एक संरचित राह साबित हुईं, जिन्होंने उनके दैनिक अनुभवों और अवलोकनों को ऐसे बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने में मदद की, जो स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ व्यापक सामाजिक प्रभाव भी उत्पन्न करते हैं।

भारत में अपने 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, सैमसंग द्वारा इस वर्ष सॉल्व फॉर टुमॉरो का विस्तार 100 शहरों तक करना—और इसके डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप्स के माध्यम से अब तक 2,500 से अधिक छात्रों को जोड़ना—युवा-नेतृत्व वाले नवाचार में उसके निरंतर निवेश और आत्मनिर्भर भारत, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा स्टार्टअप इंडिया को आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 के लिए आवेदन 3 जुलाई, 2026 तक खुले हैं। शीर्ष 4 विजेता टीमों को ₹2 करोड़ तक के इनक्यूबेशन ग्रांट्स के साथ-साथ FITT, IIT दिल्ली के माध्यम से मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा।

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