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सैमसंग के संग बच्चों ने छेड़ी प्लास्टिक के खिलाफ जंग

29-05-2019

सैमसंग में यह एक निरंतर प्रयास रहा है कि समुदाय के बीच पर्यावरण के बारे में जागरुकता पैदा की जाए। इसके लिए महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें कम उम्र से ही पढ़ाएं और सही सिखाएं। और ऐसा ही कुछ सैमसंग अपने लेटेस्ट इनीशियेटिव के साथ हासिल करने का लक्ष्य रखता है।

प्लास्टिक वेस्ट पर लोगों को जागरूक करने के लिए, नोएडा के सैमसंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (SRI-N)  के कर्मचारी वॉलंटियर्स ने एक सरकारी विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय हज़रतपुर वाजिदपुर, नोएडा का दौरा किया।

बच्चे भविष्य हैं और उन्हें शिक्षित करना बेहद ही महत्वपूर्ण है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, इस इनीशियेटिव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण के बारे में शिक्षित करना और जागरुकता पैदा करना था। एक इंटरैक्टिव सत्र में, बच्चों पर्यावरण प्रदूषण के कारणों और समाधान पर चर्चा करने के लिए आगे आए। उत्साह से भरे बच्चों के इस झुंड ने अपने माता-पिता को रीसाइक्लिंग, प्रदूषण और विशेष रूप से प्लास्टिक वेस्ट पर शिक्षित करने के लिए विचार भी सामने रखे। 

प्लास्टिक और इसके अपरिवर्तनीय नुकसान के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए, छात्रों को एक छोटा सा वीडियो दिखाया गया, जिसमें प्राकृतिक परिस्थितिकी तंत्र पर प्लास्टिक के नुकसान और उसके प्रभाव पर रोशनी डाली गई।

वॉलंटियर्स ने पर्यावरण के संबंध में मानव जाति के अतीत, वर्तमान और भविष्य को दिखाने के लिए एक स्किट भी तैयार किया। इसके ज़रिए विलुप्त हो जाने की गंभीर वास्तविकता को दर्शाया गया, अगर प्लास्टिक के इस्तेमाल से पड़ने वाले प्रभाव को रोकने के लिए जल्द कदम नहीं उठाए जाते। इसके अलावा पर्यावरण को थीम रखते हुए- ‘पर्यावरण बचाओ’ के साथ एक पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

प्रतियोगिता के विजेताओं को बेहद ही खूबसूरत पौधों देकर सम्मानित किया गया। टीम ने ईको-फ्रेंडली बैग और फूड पैकेट भी बांटे, जिन्हें खरीदारी के लिए फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है और इस तरह, इस ग्रह पर प्लास्टिक को खत्म करने के लिए पहला कदम उठाया गया। 

सैमसंग का मानना ​​है कि कम उम्र से जनरेशन ज़ी (Gen Z) को संवेदनशील बनाने से हमारे पर्यावरण को बचाने में मदद मिल सकती है। आखिरकार, जागरुकता किसी समस्या को हल करने का पहला कदम है। तो इस पर्यावरण दिवस पर, दुनिया को एक साथ मिलकर बदलते हैं, ताकि आपके आस-पास मौजूद लोग भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हो सकें। 

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